UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

बंगाल की खाड़ी: भारत के ‘शांति’ दृष्टिकोण की आधारशिला

बंगाल की खाड़ी: भारत के ‘शांति’ दृष्टिकोण की आधारशिला 31 Jul 2026

संदर्भ:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 2028-29 के कार्यकाल हेतु अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करते हुए भारत ने एक समुद्री सुरक्षा ढाँचे के रूप में मानदंड, विश्वास और सत्यनिष्ठा के माध्यम से समग्र उन्नति सुनिश्चित करना” (शांति) का शुभारंभ किया है। इस ढाँचे को क्रियान्वित करने हेतु बंगाल की खाड़ी को आदर्श क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

पृष्ठभूमि — भारत का महसागरिय दृष्टिकोण 

  • सागर (2015): क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास पर बल देते हुए सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा को रेखांकित किया।
  • महासागर (2025): हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक दक्षिण में भारत की महसागरिय नीति का विस्तार करते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा की परस्पर-संबद्ध प्रकृति को स्वीकार किया।
  • शांति (2026): नियम-आधारित, सहयोगात्मक और सक्षम समुद्री शासन को सुदृढ़ करने हेतु मानदंड, विश्वास और सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देते हुए पूर्ववर्ती पहलों पर आधारित है।

बंगाल की खाड़ी सामरिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है

  • हिंद-प्रशांत का प्रवेश द्वार: भारत की एक्ट ईस्ट नीति को आसियान से जोड़ती है और मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुँच प्रदान करती है।
  • आर्थिक दृष्टि से महत्त्व : वैश्विक व्यापार, ऊर्जा प्रवाह और नीली अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी) गतिविधियों हेतु एक प्रमुख गलियारे के रूप में कार्य करती है।
  • भू-सामरिक महत्त्व : बढ़ती क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा, विशेष रूप से चीन की विस्तृत होती समुद्री उपस्थिति, ने खाड़ी की सामरिक प्रासंगिकता को बढ़ा दिया है।

बंगाल की खाड़ी में शांति की आवश्यकता क्यों?

  • साझा गैर-पारंपरिक खतरे: देशों को जलवायु-जनित आपदाओं, अवैध मत्स्यन, समुद्री प्रदूषण, साइबर भेद्यताओं और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान जैसी सामान्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • संस्थागत विखंडन: कई क्षेत्रीय तंत्र विद्यमान हैं, परंतु समन्वय और साझा समुद्री मानदंड अब भी अपर्याप्त बने हुए हैं।
  • सहयोगात्मक शासन की आवश्यकता: समुद्री सुरक्षा हेतु एकपक्षीय प्रतिक्रियाओं की बजाय सामूहिक सक्षमता (कलेक्टिव रेजिलिएंस), विश्वास-आधारित सहयोग और साझा नियमों की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है।

शांति की प्रमुख विशेषताएँ

  • मानदंड-आधारित समुद्री व्यवस्था: अंतरराष्ट्रीय नियमों, पारदर्शिता और उत्तरदायी समुद्री आचरण के पालन को प्रोत्साहित करती है।
  • विश्वास-आधारित सहयोग: मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर), समुद्री क्षेत्र जागरूकता तथा क्षमता निर्माण में सहयोग को बढ़ावा देती है।
  • समावेशी क्षेत्रीय दृष्टिकोण: वर्चस्व की बजाय भागीदारी पर केंद्रित है, तथा सभी तटवर्ती राज्यों के हितों का सम्मान करती है।
  • साझा नौवहन क्षेत्रों (कॉमन्स) का शासन: सैन्य सुरक्षा से आगे बढ़कर साझा समुद्री संसाधनों के सतत प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करती है।

शांति के समर्थन में हाल के घटनाक्रम

  • बिम्सटेक समुद्री सहयोग: सदस्य देश समुद्री कानून प्रवर्तन और मानवीय सहायता व आपदा राहत (एचएडीआर) हेतु साझा सिद्धांतों पर सहमत हुए।
  • संयुक्त समुद्री अभ्यास: बिम्सटेक नवंबर 2026 में बंगाल की खाड़ी में अपना पहला संयुक्त समुद्री सुरक्षा अभ्यास आयोजित करेगा।
  • सूचना साझाकरण: समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने हेतु एक श्वेत नौवहन सूचना साझाकरण समझौते (व्हाइट शिपिंग इन्फॉर्मेशन शेयरिंग एग्रीमेंट) पर चर्चा जारी है।

भारत के लिए महत्त्व

  • क्षेत्रीय नेतृत्व को सुदृढ़ करना: हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की पसंदीदा सुरक्षा भागीदार और प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) की भूमिका को मजबूत करता है।
  • समुद्री सुरक्षा को बढ़ाना: पारंपरिक और गैर-पारंपरिक, दोनों प्रकार के समुद्री खतरों के विरुद्ध तैयारी में सुधार करता है।
  • हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण का समर्थन: एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत को आगे बढ़ाता है।
  •  ब्लू इकोनॉमी  को बढ़ावा: क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करते हुए समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित करता है।

चुनौतियाँ

  • विविध राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ: तटवर्ती राज्यों के मध्य भिन्न रणनीतिक हित नीतिगत समन्वय को प्रभावित कर सकते हैं।
  • बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा: प्रमुख शक्तियों के बीच तीव्र होती प्रतिद्वंद्विता क्षेत्रीय सहयोग को जटिल बना सकती है।
  • क्षमता संबंधी बाधाएँ: अनेक तटीय देशों को अधिक संस्थागत, वित्तीय और तकनीकी सहायता की आवश्यकता है।

आगे की राह

  • क्षेत्रीय संस्थाओं को सुदृढ़ करना: बिम्सटेक, हिंद महासागर रिम संगठन (आईओआरए) और अन्य समुद्री मंचों के बीच समन्वय में सुधार करना।
  • समुद्री सूचना साझाकरण का विस्तार: एकीकृत निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ विकसित करना।
  • क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना: प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, प्रशिक्षण और आपदा तैयारी के माध्यम से भागीदार देशों का समर्थन करना।
  • शांति सिद्धांतों को संस्थागत रूप देना: विश्वास, पारदर्शिता और सक्षमता के मानदंडों को क्षेत्रीय समुद्री शासन ढाँचों में एकीकृत करना।

निष्कर्ष

बंगाल की खाड़ी की शांति’ को एक रणनीतिक दृष्टि से व्यावहारिक क्षेत्रीय सहयोग में परिवर्तित करने हेतु एक आदर्श मंच प्रदान करती है। एक नियम-आधारित, विश्वास-प्रेरित और सक्षम समुद्री ढाँचा क्षेत्रीय सुरक्षा, सतत विकास और उभरते हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ कर सकता है।

UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न : बंगाल की खाड़ी भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति तथा क्षेत्रीय समुद्री शासन की आधारशिला बनकर उभरी है। इस कथन के आलोक में भारत की शांति (SHAANTI)’ संबंधी समुद्री पहल का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक | 250 शब्द)

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: भारत की शांति (SHAANTI)’ समुद्री पहल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. इसका उद्देश्य नियम-आधारित, विश्वास-आधारित तथा सहयोगात्मक समुद्री शासन को बढ़ावा देना है।
  2. इस पहल के क्रियान्वयन हेतु भारत ने बंगाल की खाड़ी को एक आदर्श क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है।
  3. यह पहल मुख्यतः हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य गठबंधन स्थापित करने और सामूहिक रक्षा व्यवस्था विकसित करने पर केंद्रित है।
  4. यह पहल समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), समुद्री क्षेत्र जागरूकता तथा क्षमता निर्माण पर भी बल देती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1, 2 और 4
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (a) केवल 1, 2 और 4

बंगाल की खाड़ी: भारत के ‘शांति’ दृष्टिकोण की आधारशिला

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.