संदर्भ:
कथित नीट परीक्षा पेपर लीक की वजह से नीट-यूजी 2026 के रद्द होने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक परीक्षाओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा को मजबूत करने के उद्देश्य से नीट-यूजी को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने पर नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाले उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल से सिफारिशें माँगी हैं।
पृष्ठभूमि:
- नीट-यूजी 2026 को रद्द किया जाना : केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने बड़े पैमाने पर पेपर लीक के आरोपों के बाद नीट-यूजी 2026 को रद्द कर दिया।
- न्यायिक हस्तक्षेप: सर्वोच्च न्यायालय ने ऑफ़लाइन से कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलाव सहित अन्य सुधारों की माँग की है ।
- प्रणालीगत सुधारों की आवश्यकता: न्यायालय ने पाया कि अस्थायी प्रशासनिक उपाय स्थायी संस्थागत और तकनीकी सुधारों का स्थान नहीं ले सकते।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा क्या है?
- कंप्यूटर आधारित परीक्षा एक डिजिटल परीक्षा मोड है जिसमें उम्मीदवार निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर माउस और की बोर्ड का उपयोग करके कंप्यूटर पर प्रश्नों के उत्तर देते हैं, जिससे भौतिक प्रश्न पत्रों, पेन और ओएमआर शीट की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा के प्रमुख लाभ:
- पेपर लीक को रोकता है: भौतिक प्रश्न पत्रों की छपाई, परिवहन और भंडारण से जुड़े जोखिमों को समाप्त करता है।
- परीक्षा की सत्यनिष्ठा को बढ़ाता है: सुरक्षित डिजिटल ऑडिट ट्रेल बनाता है और मानवीय हस्तक्षेप को कम करता है।
- दक्षता में सुधार करता है: तेजी से मूल्यांकन, सटीक परिणाम प्रसंस्करण और कम रसद लागत को सक्षम बनाता है।
- ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देता है: डिजिटल इंडिया और प्रौद्योगिकी-संचालित सार्वजनिक सेवा वितरण के उद्देश्यों को आगे बढ़ाता है।
- सुरक्षा को सुदृढ़ करता है: यादृच्छिक प्रश्न पत्र, एआई-आधारित रीयल-टाइम निगरानी, बहु-कारक प्रमाणीकरण (Multi-factor Authentication) और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को सक्षम बनाता है।
सर्वोच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ:
- संस्थागत सुरक्षा उपाय: सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक परीक्षाओं में स्थायी संस्थागत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होती है।
- मजबूत साइबर सुरक्षा: कंप्यूटर आधारित परीक्षा को एन्क्रिप्शन, डेटाबेस सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित डेटा भंडारण द्वारा समर्थित होना चाहिए।
- व्यापक सुधार योजना: केंद्र सरकार को साइबर सुरक्षा ढाँचे, कार्यान्वयन एजेंसी और डेटा उल्लंघनों के खिलाफ सुरक्षा उपायों का विवरण देने वाला एक रोडमैप प्रस्तुत करना चाहिए।
- विशेषज्ञ परामर्श: उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल कंप्यूटर आधारित परीक्षा की व्यवहार्यता का आकलन करेगा और सुरक्षा उपायों की सिफारिश करेगा।
उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल के बारे में:
- संरचना: नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल कर ।
- जनादेश:
- एक लीक-प्रूफ, प्रौद्योगिकी-संचालित परीक्षा प्रणाली विकसित करना।
- कंप्यूटर आधारित परीक्षा के लिए चरणबद्ध रोडमैप तैयार करना।
- साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण तथा साइबर सुगमता को मजबूत करना।
- शासन और संस्थागत सुधारों की सिफारिश करना।
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कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को लागू करने में प्रमुख चुनौतियाँ:
- डिजिटल बुनियादी ढाँचे में अंतराल: अपर्याप्त कंप्यूटर सुविधाएँ, इंटरनेट कनेक्टिविटी और विद्युत आपूर्ति।
- साइबर सुरक्षा जोखिम: हैकिंग, मैलवेयर, रैनसमवेयर और आंतरिक स्तर पर उत्पन्न होने वाली समस्याएँ के प्रति संवेदनशीलता।
- डिजिटल विभाजन: असमान डिजिटल पहुँच और कंप्यूटर साक्षरता ग्रामीण तथा आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों को नुकसान पहुँचा सकती है।
- डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएँ: बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत डेटा के संग्रह के लिए सुदृढ़ डेटा सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होती है।
- तकनीकी व्यवधान: सर्वर की विफलता, सॉफ्टवेयर की खराबी एवं नेटवर्क बाधा परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे की राह:
- CBT को चरणबद्ध स्तर पर अपनाना: पर्याप्त डिजिटल बुनियादी ढाँचे और संस्थागत तैयारी सुनिश्चित करने के बाद कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) की ओर रुख किया जा सकता है ।
- साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करना: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, मल्टी-फैक्टर ऑथेन्टकैशन, एआई-सक्षम निगरानी व्यवस्था, नियमित सुरक्षा ऑडिट और आपात स्थितियों में परीक्षा संबंधी व्यवस्था को उसी स्टेज पर पुनः शुरू करने संबंधी तंत्र की व्यवस्था सुनिश्चित करना ।
- इसके इतर यदि किन्ही कारणों से परीक्षा संबंधी आँकड़े विलुप्त हों जाते हैं तो उसकी पुनः रिकवरी की व्यवस्था करना |
- डिजिटल विभाजन को पाटना: डिजिटल बुनियादी ढाँचे का विस्तार करना, मॉक कंप्यूटर आधारित परीक्षाएँ आयोजित करना और डिजिटल साक्षरता में सुधार करना।
- संस्थागत निगरानी में वृद्धि : स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट, निरंतर निगरानी और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करना।
- कानूनी प्रवर्तन को सुदृढ़ करना: नकल विरोधी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करना और फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से त्वरित अभियोजन सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष:
कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलाव विविध परीक्षाओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को काफी मजबूत कर सकता है, बशर्ते कि यह मजबूत साइबर सुरक्षा, डिजिटल समावेशन, संस्थागत जवाबदेही और प्रभावी कानूनी सुरक्षा उपायों द्वारा समर्थित हो।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा (Computer Based Test – CBT) एक प्रभावी समाधान हो सकती है। भारत में कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली के लाभ, चुनौतियों तथा इसे सफलतापूर्वक लागू करने हेतु आवश्यक संस्थागत एवं कानूनी सुधारों की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न : सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024′ (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह अधिनियम केवल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर लागू होता है।
- प्रश्नपत्र लीक, उत्तर पुस्तिका से छेड़छाड़ तथा संगठित परीक्षा धोखाधड़ी को दंडनीय अपराध बनाया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (b) केवल 2 |