संदर्भ:
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जमीनी स्तर के खेलों को सुदृढ़ करने और भारत को 2036 ओलंपिक खेलों हेतु तैयार करने के उद्देश्य से ₹29,054 करोड़ के व्यय (कुल खेल व्यय ₹36,441 करोड़) के साथ खेलो इंडिया योजना के नए चरण (2026–31) को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
पृष्ठभूमि:
- ओलंपिक खेलों मे प्रदर्शन : भारत ने टोक्यो 2021 में 7 पदकों के साथ 48वें स्थान की अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ ओलंपिक स्थिति हासिल की, इसके पश्चात पेरिस 2024 में 6 पदकों के साथ 71वाँ स्थान प्राप्त किया।
- दीर्घकालिक दृष्टि: पुनर्गठित खेलो इंडिया योजना का उद्देश्य एक सशक्त खेल परिवेश का निर्माण करना है, जो 2036 ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन में सुधार लाने में सक्षम हो।
योजना की मुख्य विशेषताएँ:
- खेल अवसंरचना का विस्तार: खेलो इंडिया केंद्रों, राज्य एवं राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों तथा अनुमोदित अकादमियों की संख्या को लगभग 1,000 केंद्रों से बढ़ाकर प्रति जिला 2–3 केंद्र करना।
- प्रतिभा पहचान : उदीयमान खेलो इंडिया खिलाड़ी पहल के माध्यम से खिलाड़ियों का आधार 2,904 खेलो इंडिया खिलाड़ियों से बढ़ाकर लगभग 28,000 खिलाड़ियों तक विस्तृत करना।
- प्रशिक्षक विकास : एक राष्ट्रीय प्रशिक्षक अनुमोदन बोर्ड की स्थापना करना, तल-स्तरीय प्रशिक्षण का उन्नयन करना, और शारीरिक शिक्षा से संबंधित शिक्षकों के काम-काज में सुधार करना।
- विद्यालय एकीकरण : राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के अनुरूप खेलो इंडिया फीडर विद्यालयों और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय के माध्यम से खेलों को प्रोत्साहन देना।
- खेल का डिजिटलीकरण : प्रतिभा अनुरेखण और निष्पादन अनुवीक्षण हेतु एक डिजिटल खिलाड़ी आधार तैयार करना और नीचे से ऊपर की ओर संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करना।
महत्त्व:
- जमीनी स्तर पर खेलों को सुदृढ़ करना: प्रारंभिक चरण में प्रतिभा की पहचान और खिलाड़ियों के व्यवस्थित विकास को सुगम बनाता है।
- खेल अवसंरचना में सुधार: गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, प्रशिक्षण सुविधाओं और खेल अकादमियों तक पहुँच का विस्तार करता है।
- मानव संसाधन को सशक्त करना: अनुमोदन और क्षमता निर्माण के माध्यम से प्रशिक्षण की गुणवत्ता को मानकीकृत करता है।
- ओलंपिक दृष्टि को समर्थन: टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना के साथ-साथ प्रतिभा पाइपलाइन को सुदृढ़ करता है।
चुनौतियाँ:
- प्रभावी क्रियान्वयन: पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और निधियों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करना।
- अवसंरचनात्मक अंतराल : सभी राज्यों में विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं की आवश्यकता।
- योग्य प्रशिक्षकों की कमी: जमीनी-स्तर पर प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की सीमित उपलब्धता।
- डोपिंग संबंधी चिंताएँ: भारत की सतत डोपिंग चुनौती खेल विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को प्रभावित करती है।
आगे की राह:
- जमीनी स्तर पर परिवेश को सुदृढ़ करना: जिला स्तर पर खेल अवसंरचना, प्रशिक्षण गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा के अवसरों का विस्तार करना।
- खेल संस्कृति को प्रोत्साहन: खेलों को शिक्षा के साथ एकीकृत करना और फिट इंडिया मूवमेंट को सुदृढ़ करना।
- डोपिंग-रोधी उपायों को बढ़ाना: स्वच्छ खेल सुनिश्चित करने हेतु परीक्षण , जागरूकता और प्रवर्तन में सुधार करना।
- उच्च-निष्पादन प्रशिक्षण पर ध्यान: अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं हेतु टीओपीएस (TOPS) और विशिष्ट प्रशिक्षण के माध्यम से खिलाड़ियों की उन्नति को सुदृढ़ करना।
निष्कर्ष:
पुनर्गठित खेलो इंडिया योजना भारत को एक खेल राष्ट्र में रूपांतरित करने हेतु एक सशक्त आधार प्रदान करती है। तथापि, इसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन, सुदृढ़ अवसंरचना, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, स्वच्छ खेल पद्धतियों तथा भारत की 2036 ओलंपिक आकांक्षाओं को साकार करने हेतु निरंतर जमीनी स्तर के विकास पर निर्भर करेगी।