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शहरी दुःस्वप्न — एक ऐसी आग जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं

शहरी दुःस्वप्न — एक ऐसी आग जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं 29 Jul 2026

संदर्भ:

हाल ही में लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड ने, दिल्ली, राजस्थान, तमिलनाडु और अन्य शहरों में हुई इसी प्रकार की घटनाओं के साथ, शहरी शासन, अग्नि सुरक्षा प्रवर्तन और संस्थागत जवाबदेहिता के संदर्भ में गहरी खामियों को उजागर किया है, जिसने व्यापक शहरी शासन सुधारों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है।

भारत के शहरों में भीषण आग की घटनाओं में बारंबारता की स्थिति क्यों ? 

  • भवन निर्माण विनियमों का अप्रभावी प्रवर्तन : मौजूदा भवन निर्माण संबंधी विनियमों के बावजूद अवैध भवन निर्माण, अनाधिकृत वाणिज्यिक गतिविधियाँ तथा अग्नि सुरक्षा जैसे मानकों का उल्लंघन प्रायः बिना किसी रोक-टोक के जारी है।
  • भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण : राजनीतिक हस्तक्षेप, प्रशासनिक मिलीभगत और स्थानीय प्राधिकरणों के अप्रभावी प्रवर्तन की वजह से नियमकीय उल्लंघन बार-बार होते रहते हैं।
  • विखंडित शहरी शासन : नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों, लोक निर्माण विभागों और उपयोगिता एजेंसियों जैसी कई एजेंसियों के मध्य उत्तरदायित्व के बंटे होने की वजह से समन्वय और जवाबदेहिता में कमी आती है।
  • अप्रभावी शहरी स्थानीय निकाय : 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के बावजूद, अनेक शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) पर्याप्त वित्तीय, कार्यात्मक और प्रशासनिक स्वायत्तता के अभाव से जूझते रहते हैं।
  • अपर्याप्त आपदा तैयारी: कई भवनों में अग्नि निकास, आपातकालीन निकासी योजनाएँ, समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और पर्याप्त अग्निशमन संबंधी अवसंरचनाओं का अभाव है।
  • तीव्र और अनियोजित शहरीकरण: अनियंत्रित शहरी विकास, मिश्रित भू-उपयोग और बढ़ते जनसंख्या घनत्व ने शहरी सुरक्षा जोखिमों में वृद्धि की है।

संवैधानिक एवं विधिक ढाँचा

  • 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 : शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है और विकेंद्रीकरण के माध्यम से शहरी स्व-शासन को सुदृढ़ करने का प्रयास करता है।
  • बारहवीं अनुसूची : नगरपालिकाओं को शहरी नियोजन, भू-उपयोग विनियमन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, अग्निशमन सेवाओं, शहरी अवसंरचना और सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित कार्य सौंपती है।
  • राष्ट्रीय भवन संहिता 2016: भवनों में अग्नि निवारण, संरचनात्मक सुरक्षा और आपातकालीन निकासी के मानक निर्धारित करती है।
  • राज्य अग्निशमन सेवा अधिनियम एवं नगरपालिका कानून : भवन विनियमों के अनुपालन के साथ-साथ अधिभोग या परिचालन अनुमति देने से पहले अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और समय-समय पर निरीक्षण को अनिवार्य करते हैं।

प्रमुख मुद्दे 

  • शासन में खामी : मौजूदा सुरक्षा कानून प्रायः विधायी अपर्याप्तता के कारण नहीं, बल्कि अप्रभावी क्रियान्वयन जैसी समस्याओं की वजह से विफल होते हैं।
  • जवाबदेही की अनुपस्थिति : आपदा जाँचें प्रायः विभागीय जाँच तक ही सीमित रह जाती हैं, जिनमें प्रणालीगत सुधार या प्रशासनिक जवाबदेही सीमित होती है।
  • प्रौद्योगिकी–शासन अंतराल: भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), उपग्रह इमेजरी, ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों का अवैध निर्माणों की निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने में अभी भी कम उपयोग किया जा रहा है।
  • शहरी अवसंरचना पर दबाव : नागरिक अवसंरचना में समुचित निवेश के बिना बढ़ते शहरीकरण ने आपदाओं के प्रति सुभेद्यता को बढ़ा दिया है।
  • जनविश्वास का क्षरण : सार्थक जवाबदेही के बिना बार-बार होने वाली दुर्घटनाएँ शासन संस्थाओं में नागरिकों के विश्वास को कमज़ोर करती हैं।

आगे की राह 

  • शहरी स्थानीय निकायों को सुदृढ़ करना: नगरपालिकाओं को अधिक कार्य, निधियाँ और कार्मिक हस्तांतरित करके 74वें संविधान संशोधन अधिनियम को वास्तविक अर्थों में लागू करना।
  • सख्त प्रवर्तन सुनिश्चित करना: नियमित अग्नि सुरक्षा ऑडिट करना, भवन विनियमों को लागू करना, तथा अवैध निर्माण संबंधी गतिविधियों और अनधिकृत वाणिज्यिक गतिविधियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करना।
  • प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना: उल्लंघनों का पता लगाने और नियामक निगरानी में सुधार हेतु GIS मानचित्रण, रिमोट सेंसिंग, AI-आधारित निगरानी प्रणाली और डिजिटल संपत्ति डेटाबेस को एक साथ समाहित की जाने की आवश्यकता है।
  • संस्थागत जवाबदेहिता में सुधार: पारदर्शी जाँच और लापरवाही के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई के माध्यम से प्रशासनिक और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर उत्तरदायित्व तय करना।
  • शहरी लचीलेपन का निर्माण: आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को सुदृढ़ करना, अग्निशमन अवसंरचना में सुधार करना और आपदा-प्रतिरोधी शहरी नियोजन  को बढ़ावा देना।
  • नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना: सामुदायिक जागरूकता, सुरक्षा उल्लंघनों की सार्वजनिक रिपोर्टिंग और सामाजिक ऑडिट को प्रोत्साहित कर शहरी शासन में सुधार करना।

निष्कर्ष 

बार-बार होने वाले शहरी अग्निकांड इस बात को रेखांकित करते हैं कि कानूनों का अभाव नहीं, बल्कि प्रभावी शासन ही भारत की सबसे बड़ी शहरी चुनौती बना हुआ है। सुरक्षित, जवाबदेह और लचीले शहरों का निर्माण करने के लिए सुदृढ़ संस्थाओं, कठोर प्रवर्तन, तकनीकी एकीकरण और अधिक राजनीतिक व प्रशासनिक जवाबदेही की आवश्यकता होगी।

UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: भारत में तीव्र शहरीकरण के कारण उत्पन्न होने वाली मुख्य चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। इन समस्याओं के समाधान हेतु आवश्यक उपायों की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: भारत के संविधान के 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. इसने नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया।
  2. इसने नगरपालिकाओं के कार्यों का उल्लेख बारहवीं अनुसूची में किया।
  3. इसका उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को सुदृढ़ करना है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d) 1, 2 और 3

शहरी दुःस्वप्न — एक ऐसी आग जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं

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