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Jan 12 2026

संदर्भ

प्रधानमंत्री ने इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 से पहले भारतीय AI स्टार्ट-अप्स के साथ एक गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता की।

संबंधित तथ्य

  • यह संवाद भारत के उस रणनीतिक उद्देश्य को उजागर करता है, जिसके तहत भारत को नैतिक, समावेशी और स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
  • भारत में अगले महीने होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित गोलमेज सम्मेलन में फाउंडेशन मॉडल पिलर के तहत अर्हता प्राप्त करने वाले कुल 12 भारतीय AI स्टार्ट-अप ने भाग लिया।
    • इंडियाAI मिशन का एक प्रमुख घटक, फाउंडेशन मॉडल पिलर का उद्देश्य स्वदेशी, बड़े पैमाने पर AI मॉडल विकसित करना है, जिन्हें भाषा, स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान, शासन और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में उपयोग किया जा सके।

भारत का AI स्टार्ट-अप इकोसिस्टम: भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्ट-अप हैं और पिछले वर्ष लॉन्च हुए नए स्टार्ट-अप्स में से लगभग 89% ने अपने उत्पादों या सेवाओं में AI का उपयोग किया।

गोलमेज सम्मेलन के प्रमुख परिणाम

  • AI स्टार्ट-अप्स द्वारा अवलोकन
    • वैश्विक AI केंद्र में बदलाव: स्टार्ट-अप्स के अनुसार, AI नवाचार और अनुप्रयोग का केंद्र भारत की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
    • क्षेत्रीय तीव्र वृद्धि: भारत में AI क्षेत्र में तीव्र वृद्धि देखी जा रही है और इसमें भविष्य की अपार संभावनाएँ हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण
    • सामाजिक परिवर्तन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): प्रधानमंत्री ने समाज के परिवर्तन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के महत्त्व पर जोर दिया और आगामी शिखर सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक प्रौद्योगिकी नेता के रूप में भारत की भूमिका को दोहराया।
    • राष्ट्र निर्माता के रूप में स्टार्ट-अप: उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्टार्ट-अप और AI उद्यमी भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं, जो नवाचार एवं व्यापक कार्यान्वयन के लिए भारत की क्षमता को दर्शाते हैं।
    • भारत में निर्मित, विश्व के लिए निर्मित: प्रधानमंत्री ने ‘भारत में निर्मित, विश्व के लिए निर्मित’ की भावना को समाहित करने वाले एक विशिष्ट भारतीय AI मॉडल के विकास का आग्रह किया।
    • नैतिकता और विश्वास: प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय AI मॉडल नैतिक, निष्पक्ष, पारदर्शी और डेटा गोपनीयता सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए।
    • समावेशी और किफायती AI: उन्होंने किफायती AI, समावेशी AI और मितव्ययी नवाचार में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया।
    • स्थानीय सामग्री का प्रोत्साहन: भारतीय AI मॉडल को भारत की सांस्कृतिक और भाषायी विविधता को प्रतिबिंबित करने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं सहित स्थानीय तथा स्वदेशी सामग्री को बढ़ावा देना चाहिए।
    • समर्थन का आश्वासन: प्रधानमंत्री ने भारतीय AI मॉडलों की सफलता और वैश्विक स्तर पर विस्तार के लिए पूर्ण सरकारी समर्थन का आश्वासन दिया।

इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 के बारे में

  • मेजबान: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
  • स्थान: नई दिल्ली, फरवरी 2026
  • विषय: AI का लोकतंत्रीकरण, AI विभाजन को पाटना।
  • AI इंपैक्ट समिट इस शृंखला का चौथा आयोजन होगा, इससे पहले:
    • ब्लेचली पार्क समिट (यू.के., 2023)
    • सियोल समिट (दक्षिण कोरिया, 2024)
    • AI एक्शन समिट (पेरिस, फ्रांस, 2025)
  • पेरिस AI एक्शन समिट 2025 के प्रमुख विषय: सार्वजनिक हित में AI, कार्य का भविष्य, नवाचार और संस्कृति, AI में विश्वास, वैश्विक AI शासन।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य वैश्विक दक्षिण पर विशेष जोर देते हुए, उत्तरदायी, समावेशी और विकास-केंद्रित AI सहयोग को बढ़ावा देना है।
    • यह G20 AI सिद्धांतों, संयुक्त राष्ट्र और GPAI प्रस्तावों, AI पर अफ्रीकी घोषणा और AI पर हैम्बर्ग घोषणा जैसे मौजूदा वैश्विक प्रयासों पर आधारित है।
  • वैचारिक ढाँचा
    • इंडिया AI इंपैक्ट समिट निम्नलिखित तीन प्रमुख सूत्रों’ पर आधारित है। ये स्तंभ दर्शाते हैं कि बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग वैश्विक स्तर पर साझा लाभ के लिए कैसे किया जा सकता है।
      • लोग: मानव-केंद्रित, समावेशी, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और भरोसेमंद AI को बढ़ावा देता है।
      • ग्रह: जलवायु परिवर्तन, स्थिरता और कम ऊर्जा खपत के अनुरूप जिम्मेदार AI का समर्थन करता है।
      • प्रगति: स्वास्थ्य, शिक्षा, शासन, कृषि और सार्वजनिक सेवाओं में AI-संचालित समान विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।

  • परिचालनात्मक ढाँचा: सात चक्र
    • सूत्रों को सात चक्रों के माध्यम से क्रिया में रूपांतरित किया जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मूर्त AI परिणामों के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत में AI स्टार्ट-अप्स की आवश्यकता क्यों है? / भारतीय AI स्टार्ट-अप्स की भूमिका

  • तकनीकी आत्मनिर्भरता
    • विदेशी AI प्लेटफॉर्म और मॉडलों पर भारत की निर्भरता को कम करके तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करने के लिए AI स्टार्ट-अप्स आवश्यक हैं।
    • स्वदेशी AI समाधान राष्ट्रीय डेटा, रणनीतिक स्वायत्तता और डिजिटल सुरक्षा की रक्षा में सहायक होते हैं।
  • भारत की जनसांख्यिकीय और डेटा संबंधी उपलब्धियों का लाभ उठाना
    • भारत की विशाल जनसंख्या से विशाल और विविध डेटासेट उत्पन्न होते हैं, जिनका घरेलू AI स्टार्ट-अप्स द्वारा प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है।
    • स्थानीय स्टार्ट-अप्स भारत की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप विशिष्ट AI समाधान विकसित करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।
  • भारतीय भाषाओं और संस्कृति का संवर्द्धन
    • बहुभाषी और भारतीय भाषा में AI मॉडल विकसित करने में भारतीय AI स्टार्ट-अप्स की प्रमुख भूमिका है।
    • भाषा-समावेशी AI डिजिटल समावेशन सुनिश्चित करता है और गैर-अंग्रेजी भाषी आबादी के बहिष्कार को रोकता है।
  • समावेशी और किफायती नवाचार
    • AI स्टार्ट-अप किफायती और लागत-प्रभावी नवाचार को बढ़ावा देते हैं, जिससे उन्नत तकनीक अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुँच सके।
    • स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए किफायती AI समाधान अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
  • आर्थिक विकास और रोजगार सृजन
    • AI स्टार्ट-अप डेटा साइंस, अनुसंधान और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में उच्च मूल्य वाले रोजगार सृजन में योगदान करते हैं।
    • वे वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाते हैं और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य का समर्थन करते हैं।
  • क्षेत्रीय परिवर्तन
    • स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, AI स्टार्ट-अप निदान, चिकित्सा अनुसंधान और रोग पूर्वानुमान में सुधार करते हैं।
    • उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र में, AI स्वचालन, पूर्वानुमानित रखरखाव और सिमुलेशन के माध्यम से दक्षता बढ़ाता है।
    • शासन में, AI डेटा-आधारित निर्णय लेने और सेवा वितरण में सहायता कर सकता है।

भारत द्वारा की गई पहल

  • इंडियाAI मिशन
    • इंडियाAI मिशन एक राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम है, जिसे भारत के AI नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मार्च 2024 में अनुमोदित किया गया था।
    • इसका उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, कंप्यूटिंग अवसंरचना और कौशल विकास को बढ़ावा देकर भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करना है।
    • कार्यान्वयनकर्ता: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC)।
    • फाउंडेशन मॉडल विकास
      • इस मिशन के तहत, लार्ज लैंग्वेज मॉडल और बहुआयामी AI प्रणालियों सहित मूलभूत मॉडलों के विकास के लिए सहायता प्रदान की जा रही है।
      • इस पहल का उद्देश्य विदेशी AI प्लेटफार्मों पर निर्भरता कम करना और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए राष्ट्रीय रणनीति
    • नीति आयोग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए राष्ट्रीय रणनीति जारी की है, जिसमें ‘AI फॉर ऑल’ की परिकल्पना प्रस्तुत की गई है।
    • इस रणनीति का मूल उद्देश्य सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने और नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए AI का उपयोग करना है।
    • रणनीति में स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट शहरों और परिवहन जैसे क्षेत्रों में AI अनुप्रयोगों को प्राथमिकता दी गई है।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना AI प्रवर्तक के रूप में
    • डेटा-आधारित शासन: भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), जिसमें आधार, UPI और डिजिलॉकर शामिल हैं, AI-आधारित नवाचार के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
    • DPI बड़े पैमाने पर डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित करता है, साथ ही दक्षता और समावेशिता को बढ़ावा देता है।
  • केरल: केरल AI फ्यूचर कॉन
    • इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 से पूर्व, केरल सरकार जनवरी में ‘केरल AI फ्यूचर कॉन‘ नामक एक दिवसीय शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रही है।
    • यह शिखर सम्मेलन इंडिया AI मिशन, MeitY के तत्त्वावधान में और केरल IT, स्टार्ट-अप मिशन और डिजिटल यूनिवर्सिटी जैसे विभिन्न स्थानीय भागीदारों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
  • तमिलनाडु: डीप-टेक स्टार्ट-अप नीति
    • तमिलनाडु सरकार ने ‘उमैगिन तमिलनाडु प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन’ के दौरान 100 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक गहन प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप नीति का अनावरण किया है।
      • इसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और अनुसंधान को व्यावसायिक परियोजनाओं में परिवर्तित करना है।
    • इस नीति का लक्ष्य AI सहित गहन प्रौद्योगिकी नवाचार को प्रोत्साहित करना और तमिलनाडु को आईटी सेवाओं के केंद्र से प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र में बदलने में सहयोग करना है।

वैश्विक पहल

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वैश्विक साझेदारी (GPAI): GPAI एक बहु-हितधारक पहल है, जिसमें सरकारें, उद्योग, शिक्षाविद और नागरिक समाज शामिल हैं, जिसका उद्देश्य AI नवाचार को बढ़ावा देना है।
    • यह अनुसंधान सहयोग, नीतिगत मार्गदर्शन और सर्वोत्तम प्रथाओं के माध्यम से AI स्टार्ट-अप्स को सहायता प्रदान करता है।
    • भारत इसका संस्थापक सदस्य है, जिससे वैश्विक AI शासन को आकार देने में इसकी भूमिका और मजबूत होती है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर संयुक्त राष्ट्र की पहल
    • संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप पहलों के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नवाचार को बढ़ावा देता है।
    • संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ ​​AI स्टार्ट-अप्स को स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और गरीबी उन्मूलन के लिए समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
  • यूरोपीय संघ AI रणनीति
    • यूरोपीय संघ अनुसंधान निधि, AI सैंडबॉक्स और नवाचार केंद्रों के माध्यम से AI स्टार्ट-अप्स को समर्थन देता है।
    • EU AI फ्रेमवर्क का उद्देश्य नवाचार, उपभोक्ता संरक्षण और नैतिक सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
  • तकनीकी दिग्गजों के नेतृत्व वाले एक्सेलरेटर
    • गूगल फॉर स्टार्ट-अप्स एक्सेलरेटर: AI-फर्स्ट (AI-First): तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन आधारित वैश्विक समूह आधारित एक्सेलरेटर।
    • AWS जनरेटिव AI एक्सेलरेटर: जनरेटिव AI स्टार्ट-अप्स को महत्त्वपूर्ण AWS क्रेडिट और 8-सप्ताह के गहन कार्यक्रम के साथ सहायता प्रदान करता है।
    • Google.org एक्सेलरेटर: जनरेटिव AI: प्रभाव-केंद्रित AI समाधानों के लिए मुक्त आमंत्रण, जिसमें फंडिंग (जैसे- $30 मिलियन का हिस्सा), निःशुल्क सहायता, प्रशिक्षण और क्लाउड क्रेडिट शामिल हैं।
    • इग्निशन AI एक्सेलरेटर: NVIDIA और Tribe का सहयोग, विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में AI स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
    • Intel® लिफ्टऑफ  फॉर स्टार्ट-अप्स: यह कार्यक्रम तकनीकी मार्गदर्शन, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर संसाधन और इंटेल के बाजार पारिस्थितिकी तंत्र तक पहुँच प्रदान करता है।

AI स्टार्ट-अप्स के लिए चुनौतियाँ

  • डेटा संबंधी चुनौतियाँ
    • उच्च गुणवत्ता वाले डेटा तक पहुँच: AI मॉडल को बड़े, विविध और ‘लेबल्ड डेटासेट’ की आवश्यकता होती है, जो महँगे होते हैं।
      • भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग के एक अध्ययन में पाया गया है कि 68% AI स्टार्ट-अप बड़े, उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट तक पहुँच को एक बड़ी बाधा मानते हैं।
    • गोपनीयता और अनुपालन: डेटा सुरक्षा कानूनों (GDPR, DPDP अधिनियम आदि) का पालन करने से अनुपालन का बोझ बढ़ जाता है।
  • प्रौद्योगिकी और अवसंरचना की उच्च लागत
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के लिए उच्च कंप्यूटिंग क्षमता, GPU, क्लाउड सेवाओं और निरंतर मॉडल प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
    • बड़ी तकनीकी कंपनियों पर निर्भरता स्वायत्तता को कम कर सकती है।
    • किफायती कंप्यूटिंग अवसंरचना तक सीमित पहुँच परिचालन लागत बढ़ाती है और नवाचार को बाधित करती है।
      • AI चिप्स और क्लाउड क्रेडिट की बढ़ती लागत प्रारंभिक चरण के स्टार्ट-अप्स पर दबाव डालती है।
  • प्रतिभा की कमी
    • AI स्टार्ट-अप्स को डेटा साइंटिस्ट और AI शोधकर्ताओं जैसे कुशल पेशेवरों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ता है।
      • वर्ष 2027 तक, भारत में AI से संबंधित नौकरियों की संख्या 23 लाख से अधिक हो सकती है, जबकि प्रतिभा पूल बढ़कर लगभग 12 लाख होने की उम्मीद है।
    • शीर्ष प्रतिभाओं का वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों में पलायन प्रतिभा पलायन का कारण बनता है और भर्ती लागत को बढ़ाता है।
  • नियामक और अनुपालन अनिश्चितता
    • डेटा सुरक्षा, AI नैतिकता और सीमा पार डेटा प्रवाह से संबंधित बदलते नियम स्टार्ट-अप्स के लिए अनिश्चितता उत्पन्न करते हैं।
    • अनुपालन लागत का बोझ छोटे और शुरुआती चरण के AI उद्यमों पर असमान रूप से पड़ सकता है।
  • नैतिक और विश्वास की कमी
    • डेटा पूर्वाग्रह और प्रतिनिधित्व संबंधी चिंताएँ: एल्गोरिदम पूर्वाग्रह, पारदर्शिता की कमी और AI के दुरुपयोग से संबंधित चिंताओं के कारण जनता का विश्वास कम होता है।
    • स्टार्ट-अप्स को नैतिक व्याख्या योग्य AI सिस्टम सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों का निवेश करना होगा।
  • बाजार पहुँच और विस्तार संबंधी मुद्दे
    • स्वीकृति में बाधाएँ: AI स्टार्ट-अप्स को अक्सर पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
    • पारंपरिक उद्योगों और सरकारों द्वारा स्वीकृति के प्रति प्रतिरोध बाजार के विस्तार को धीमा कर देता है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा और बाजार प्रभुत्व
    • प्रतिस्पर्द्धा का असमान माहौल: AI स्टार्ट-अप्स को उन वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गजों से प्रतिस्पर्द्धा करनी पड़ती है, जिनके पास बेहतर डेटा, पूँजी और बाजार तक व्यापक पहुँच है।
      • उदाहरण के लिए, ओपनAI, एंथ्रोपिक और परप्लैक्सिटी जैसी AI-टेक दिग्गज कंपनियाँ भारत में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं।
    • बड़ी कंपनियों का प्रभुत्व नवाचार को कम कर सकता है और छोटे हितधारकों के लिए अवसरों को कम कर सकता है।
  • साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से जुड़े जोखिम
    • सुरक्षा संबंधी कमजोरियाँ: AI सिस्टम साइबर हमलों, डेटा लीक और मॉडल में हस्तक्षेप के प्रति संवेदनशील हैं।
    • अपर्याप्त साइबर सुरक्षा उपाय उपयोगकर्ताओं के भरोसे और नियामक अनुपालन को कमजोर कर सकते हैं।
  • वित्तपोषण संबंधी बाधाएँ
    • आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ती ब्याज दरों के बीच, AI स्टार्ट-अप्स के लिए फंडिंग जुटाना एक लगातार चुनौती बनी हुई है।
    • वेंचर कैपिटलिस्ट अधिक सतर्क हो रहे हैं और ऐसे व्यवसायों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनके मॉडल सिद्ध हो चुके हैं और लाभप्रदता के स्पष्ट संकेत मौजूद हैं।

आगे की राह

  • नीति और नियामक ढाँचे को मजबूत बनाना
    • पूर्वानुमानित शासन: भारत को एक स्पष्ट, स्थिर और अनुकूलनीय नियामक ढाँचा विकसित करना होगा, जो नवाचार और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखे।
    • नियामक सैंडबॉक्स AI स्टार्ट-अप्स को नैतिक और कानूनी मानदंडों के अनुपालन को सुनिश्चित करते हुए नवाचारों का परीक्षण करने की अनुमति दे सकते हैं।
  • कंप्यूटिंग और बुनियादी ढाँचे तक पहुँच का विस्तार
    • सरकार द्वारा समर्थित उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और क्लाउड अवसंरचना तक पहुँच, AI स्टार्ट-अप्स के लिए प्रवेश बाधाओं को कम कर सकती है।
    • सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत साझा कंप्यूटिंग सुविधाएँ AI अनुसंधान और विकास को गति दे सकती हैं।
  • डेटा तक पहुँच और उसकी गुणवत्ता में सुधार
    • विश्वसनीय डेटा पारिस्थितिकी तंत्र: सुरक्षित, गोपनीय और उच्च गुणवत्ता वाले सार्वजनिक डेटासेट का निर्माण उत्तरदायी AI नवाचार को बढ़ावा दे सकता है।
    • डेटा साझाकरण ढाँचे को गोपनीयता, सहमति और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहिए।
  • कुशल मानव पूँजी का निर्माण
    • प्रतिभा की कमी को दूर करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश करना आवश्यक है।
    • शिक्षा जगत, उद्योग और स्टार्ट-अप्स के बीच सहयोग से व्यावहारिक AI अनुसंधान को मजबूती मिल सकती है।
  • नैतिक और जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुनिश्चित करना
    • AI स्टार्ट-अप्स को डिजाइन चरण में ही नैतिक सिद्धांतों, पारदर्शिता और पूर्वाग्रह निवारण को शामिल करना चाहिए।
    • अनिवार्य पूर्वाग्रह ऑडिट और व्याख्या योग्य AI सिस्टम से जनता का विश्वास बढ़ सकता है।
  • वित्त तक पहुँच बढ़ाना
    • अनुसंधान-प्रधान AI स्टार्ट-अप्स के लिए सरकारी निधियों और वेंचर फाइनेंसिंग के माध्यम से दीर्घकालिक जोखिम पूँजी आवश्यक है।
    • गहन प्रौद्योगिकी निवेश के लिए प्रोत्साहन निवेशकों के वित्तीय जोखिमों को कम कर सकते हैं।
    • स्वदेशी और समावेशी AI को बढ़ावा देना: AI स्टार्ट-अप्स को भारतीय भाषाओं, क्षेत्रीय आवश्यकताओं और स्थानीय संदर्भों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • समावेशी AI डिजिटल विभाजन को पाट सकता है और प्रौद्योगिकी के लाभों को वंचित आबादी तक पहुँचा सकता है।
  • अन्य
    • नवाचारी व्यापार मॉडल: AI स्टार्ट-अप्स को परिचालन लागत कम करने के लिए, विशेष रूप से प्रारंभिक चरणों में, फेडरेटेड लर्निंग, ओपन-सोर्स टूल्स और विकेंद्रीकृत AI आर्किटेक्चर जैसे लागत-प्रभावी समाधानों का पता लगाना चाहिए।
    • नीतिगत समर्थन: AI स्टार्ट-अप्स के लिए नीति निर्माताओं के साथ जुड़कर ऐसे नियम बनाना आवश्यक है, जो उत्तरदायी AI विकास को बढ़ावा दें और साथ ही यह सुनिश्चित करना कि नवाचार बाधित न हो।
    • प्रतिभा विकास में निवेश
      • आंतरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी करना, प्रतिभा की कमी को दूर करने और AI क्षेत्र के लिए कुशल पेशेवरों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
      • मार्गदर्शन और विशेषज्ञ नेटवर्क के माध्यम से उद्यमशीलता प्रतिभा को बढ़ावा देना, स्टार्ट-अप्स के विकास को और अधिक गति प्रदान करेगा।
  • राज्यों की भूमिका
    • राज्य सरकारें राज्य नवाचार नीतियों, AI हब और क्षेत्र-विशिष्ट पायलट परियोजनाओं के माध्यम से AI स्टार्ट-अप को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • सहकारी संघवाद स्वास्थ्य, कृषि और शहरी नियोजन जैसी स्थानीय शासन संबंधी चुनौतियों के अनुरूप AI समाधानों को सक्षम बना सकता है।

राज्यों की भूमिका

  • राज्य सरकारें राज्य नवाचार नीतियों, AI हब और क्षेत्र-विशिष्ट पायलट परियोजनाओं के माध्यम से AI स्टार्ट-अप को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • सहकारी संघवाद स्वास्थ्य, कृषि और शहरी नियोजन जैसी स्थानीय शासन संबंधी चुनौतियों के अनुरूप AI समाधान प्रदान कर सकता है।

निष्कर्ष

AI स्टार्ट-अप्स की सतत् वृद्धि एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करती है, जो नवाचार, नैतिकता और समावेशिता को एकीकृत करता है। संस्थागत क्षमता को मजबूत करके, जिम्मेदार AI को बढ़ावा देकर और अपनी जनसांख्यिकीय तथा डिजिटल शक्तियों का लाभ उठाकर, भारत AI स्टार्ट-अप्स को तकनीकी नेतृत्व, सुशासन एवं समावेशी राष्ट्रीय विकास के प्रमुख कारक बनने में सक्षम बना सकता है।

अभ्यास प्रश्न 

भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 जैसे शिखर सम्मेलनों की भूमिका का गहन विश्लेषण कीजिए। सरकार और स्टार्ट-अप के बीच सहयोग, AI अनुसंधान और अनुप्रयोग में भारत के दीर्घकालिक नेतृत्व को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है?

ओरेशनिक मिसाइल

(Oreshnik Missile)

रूस ने यूक्रेन पर किए गए एक बड़े हमले में ओरेशनिक बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग किया है।

ओरेशनिक मिसाइल के बारे में

  • प्रकार: ओरेशनिक एक रूस द्वारा निर्मित मध्यम दूरी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है।
  • नाम और उत्पत्ति: ओरेशनिक (रूसी भाषा में हेजल वृक्ष/झाड़ी”) को ‘RS-26 रुबेझ’ मिसाइल के एक संस्करण के रूप में विकसित किया गया है।
  • प्रथम सार्वजनिक जानकारी: यूक्रेन युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच वर्ष 2024–25 में रूस द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया।
  • मारक दूरी (Range): अनुमानित 3,000–5,500 किमी.।
  • गति (Speed): हाइपरसोनिक गति (10 मैक से अधिक)।
  • वारहेड: पारंपरिक या परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम; MIRV (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicles) क्षमता से युक्त है।
  • रणनीतिक भूमिका: NATO के निरोधक (Deterrence) रूप में तथा कमांड सेंटरों, एयरबेस और महत्त्वपूर्ण अवसंरचना को लक्ष्य बनाने के लिए अभिकल्पित।
  • वायु रक्षा चुनौती: अत्यधिक गति और प्रक्षेप पथ के कारण पैट्रियट/THAAD जैसी मौजूदा प्रणालियों के लिए अवरोधन (Interception) कठिन।

नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD)

केंद्रीय गृह मंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 9वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक में भारत में नशीली दवाओं के संकट के उन्मूलन हेतु तीन वर्षीय राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की।

नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD)

  • NCORD भारत में मादक पदार्थों की तस्करी और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के लिए एक बहु-एजेंसी समन्वय तंत्र है।
  • स्थापना: गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा वर्ष 2016 में स्थापित।
    • वर्ष 2019 में बेहतर परिचालन प्रभावशीलता हेतु पुनर्गठित एवं सुदृढ़ किया गया।
  • उद्देश्य
    • केंद्र और राज्यों के बीच अंतर-एजेंसी समन्वय में सुधार।
    • ड्रग नेटवर्क पर वास्तविक समय (रियल-टाइम) आधारित खुफिया सूचना साझा करना।
    • प्रवर्तन, रोकथाम और पुनर्वास को प्रभावी बनाना।
  • संगठनात्मक संरचना (चार-स्तरीय)
    • शीर्ष स्तर (Apex Level): केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता।
    • कार्यकारी स्तर (Executive Level): विशेष सचिव, MHA की अध्यक्षता।
    • राज्य स्तर (State Level): मुख्य सचिवों की अध्यक्षता।
    • जिला स्तर (District Level): जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता।
  • NCORD पोर्टल: ज्ञान प्रबंधन, डेटा साझाकरण, सर्वोत्तम प्रथाओं तथा ड्रग्स और प्रवर्तन से संबंधित जानकारी हेतु एक केंद्रीकृत मंच।
  • समर्थित पहलें
    • मानस (मादक-पदार्थ निषेध सूचना केंद्र) हेल्पलाइन (1933 — 24×7 टोल-फ्री)।
    • निदान (नेशनल इंटीग्रेटेड डेटाबेस ऑन अरेस्टेड नार्को-ऑफेंडर्स) पोर्टल।
    • मिशन स्पंदन (स्पिरिचुअल पार्टनरशिप अगेंस्ट नार्कॉटिक ड्रग एब्यूज – नेशनवाइड)।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा में भूमिका: मादक पदार्थों की तस्करी को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में मानता है।
    • ड्रग्स, आतंकी वित्तपोषण और संगठित अपराध के बीच संबंधों को संबोधित करता है।

तीन-वर्षीय राष्ट्रीय नशा-विरोधी अभियान (2026–2029)

  • भारत को नशा-मुक्त बनाने हेतु एक समयबद्ध और लक्ष्य-आधारित अभियान।
  • 31 मार्च, 2026 के बाद तत्काल प्रारंभ किया जाएगा, जो नक्सल-विरोधी अभियानों की समय-सीमा की समाप्ति के साथ संरेखित है।

IED विस्फोट पर डिजिटल डेटाबेस

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री ने IED और बम विस्फोट घटनाओं के व्यवस्थित अभिलेखन, विश्लेषण और डेटा साझाकरण हेतु भारत के पहले राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस का उद्घाटन किया।

राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS)

  • परिचय: NIDMS एक सुरक्षित, केंद्रीकृत डिजिटल मंच है, जिसे वर्ष 1999 से भारत में हुए बम विस्फोटों और IED घटनाओं के डेटा को संकलित और विश्लेषित करने के लिए विकसित किया गया है।
  • उद्देश्य: डेटा-आधारित खुफिया जानकारी और अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से आतंकवाद-रोधी जाँच को सुदृढ़ करना।
  • नोडल एजेंसी: राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) NIDMS की नोडल एजेंसी है।
    • NSG पोस्ट-ब्लास्ट’ विश्लेषण और तकनीकी आकलन के लिए प्रमुख बल के रूप में कार्य करता है।
  • मुख्यालय: NSG गैरीसन, मानेसर (हरियाणा)।
  • पहुँच: राज्य पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) तथा अन्य अधिकृत जाँच एजेंसियाँ गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत इस मंच तक पहुँच प्राप्त कर सकती हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • केंद्रीकृत भंडार: पूरे देश में बम और IED घटनाओं से संबंधित डेटा को एक मंच पर समेकित करता है, जो पहले विभिन्न एजेंसियों से संबंधित था।
  • AI-सक्षम विश्लेषण: उन्नत पैटर्न पहचान, प्रवृत्ति विश्लेषण और पूर्वानुमानात्मक आकलन को समर्थन।
  • सिग्नेचर लिंकिंग: स्थान, प्रयुक्त विस्फोटक और सर्किट/कार्य-प्रणाली (Modus Operandi) के आधार पर घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करता है।
  • सुरक्षित डेटा साझाकरण: अधिकृत एजेंसियों के लिए वन-क्लिक एक्सेस’ विंडो प्रदान करते हुए डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • परिचालन एकीकरण: तेज फॉरेंसिक और जाँच प्रतिक्रिया के लिए ‘NSG रीजनल हब्स’ से जुड़ा हुआ।

महत्त्व

NIDMS आतंकवाद-रोधी क्रिया को सुदृढ़ करता है, जाँच की गुणवत्ता में सुधार करता है, प्रारंभिक खतरा पहचान को सक्षम बनाता है तथा केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच वास्तविक समय खुफिया साझाकरण के माध्यम से सहकारी संघवाद को मजबूत करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देता है।

जेहनपोरा स्तूप

हाल ही में उत्तरी कश्मीर के जेहनपोरा में हुए पुरातात्त्विक उत्खननों में कुषाण-कालीन विशाल स्तूपों का पता चला है।

जेहनपोरा स्तूपों के बारे में

  • बारामूला जिले में स्थित जेहनपोरा स्थल लगभग 10 एकड़ में फैला एक विशाल पुरातात्त्विक परिसर है, जिसे हाल ही में एक प्रमुख बौद्ध स्तूप परिसर के रूप में चिह्नित किया गया है।
  • लंबे समय तक प्राकृतिक टीले माने जाने वाले इस स्थल को अब कश्मीर की सबसे बड़ी बौद्ध संरचनाओं में से एक के रूप में मान्यता दी गई है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • कुषाण-कालीन उत्पत्ति: उत्खननों से संकेत मिलता है कि ये संरचनाएँ कुषाण काल की हैं, जिनका संबंध कनिष्क जैसे शासकों से है और इनकी तिथि 2000 वर्ष से अधिक प्राचीन है।
  • स्तूप-सदृश पठार: इनकी आकृति मानव-निर्मित पठार के समान है, जो विशाल बौद्ध स्तूपों के समान प्रतीत होते हैं, संभवतः इनके ऊपर लकड़ी की अधिरचना (Superstructure) रही होगी।
  • आकार और संरचनात्मक अखंडता: कश्मीर में कोई अन्य ज्ञात पुरातात्त्विक स्थल आकार में जेहनपोरा के समकक्ष नहीं है; कई टीले अब भी अक्षुण्ण हैं।
  • आधुनिक प्रलेखन: स्थल का मानचित्रण ड्रोन, रिमोट सेंसिंग तथा फ्राँस से प्राप्त अभिलेखीय फोटोग्राफिक साक्ष्यों के माध्यम से किया गया है।

सांस्कृतिक महत्त्व

  • बौद्ध केंद्र: यह स्थल कश्मीर को बौद्ध अध्ययन और आचरण के एक प्रारंभिक एवं प्रभावशाली केंद्र के रूप में स्थापित करने वाले साक्ष्यों को सुदृढ़ करता है।
  • व्यापार मार्ग: यह कश्मीर से होकर गुजरने वाले प्राचीन ट्रांस-हिमालयी व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान मार्गों की जानकारी प्रदान करता है।
  • महायान का आधार: यह ऐतिहासिक विवरणों का समर्थन करता है कि महायान बौद्ध धर्म ने कश्मीर में स्वरूप ग्रहण किया, जिसके बाद यह मध्य एशिया और चीन तक विस्तृत हुआ।
  • विरासत: जेहनपोरा कश्मीर के बौद्ध स्थलों के नेटवर्क में एक महत्त्वपूर्ण शृंखला को जोड़ता है, जो क्षेत्र के बहुलतावादी और सभ्यतागत अतीत को रेखांकित करता है।

डिस्ट्रिक्ट-लेड टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन (DLTT) योजना

हाल ही में वस्त्र मंत्रालय ने गुवाहाटी, असम में आयोजित राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों के सम्मेलन में ‘डिस्ट्रिक्ट-लेड टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन’ (DLTT) योजना का शुभारंभ किया।

डिस्ट्रिक्ट-लेड टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन’ (DLTT) योजना के बारे में

  • डिस्ट्रिक्ट-लेड टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन (DLTT) एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य जिला-विशिष्ट विकास दृष्टिकोण अपनाकर भारत के वस्त्र क्षेत्र में समावेशी, सतत् और निर्यात-उन्मुख वृद्धि को प्रोत्साहित करना है।
  • नोडल मंत्रालय: यह पहल भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा संचालित है, जिसमें राज्य सरकारों, उद्योग हितधारकों और शैक्षणिक संस्थानों का सक्रिय सहयोग है।
  • लक्ष्य
    • 100 उच्च-संभावनाशील जिलों को वैश्विक निर्यात चैंपियन के रूप में विकसित करना।
    • 100 आकांक्षी जिलों को आत्मनिर्भर वस्त्र हब में परिवर्तित करना।
    • प्रतिस्पर्द्धात्मकता और उत्पादकता बढ़ाने हेतु जिला-स्तरीय वस्त्र क्लस्टरों को सुदृढ़ करना।
  • जिलों का वर्गीकरण: जिलों को डेटा-आधारित स्कोरिंग पद्धति के माध्यम से वर्गीकृत किया जाता है, जो निम्नलिखित मानकों पर आधारित है: निर्यात प्रदर्शन, MSME पारितंत्र की मजबूती और कार्यबल की उपलब्धता।
  • चैंपियन जिले: उच्च निर्यात प्रदर्शन, सशक्त MSME पारितंत्र और पर्याप्त कुशल कार्यबल वाले जिले, जिन्हें विस्तार, तकनीकी उन्नयन और वैश्विक बाजारों से गहन एकीकरण के लिए चुना गया है।
  • आकांक्षी जिले: कम या निहित निर्यात क्षमता और कमजोर MSME/कार्यबल आधार वाले जिले, जिन्हें कौशल विकास, औपचारिकीकरण और जमीनी स्तर पर उद्यम विकास के माध्यम से पारितंत्र निर्माण हेतु चुना गया है।
  • सहायता ढाँचा
    • चैंपियन जिले: मेगा कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFCs) में उन्नयन, इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को अपनाना और प्रत्यक्ष निर्यात बाजार संपर्क स्थापित करना।
    • आकांक्षी जिले: बुनियादी कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन, ‘रॉ मेटेरियल बैंक’ की स्थापना तथा स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से सूक्ष्म उद्यमों का प्रोत्साहन।
  • दृष्टिकोण
    • निर्यात प्रदर्शन, MSME पारितंत्र की मजबूती और कार्यबल उपलब्धता के आधार पर डेटा-आधारित जिला चयन।
    • पूर्वोदय अभिसरण, जिसमें पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान, जनजातीय क्षेत्र विकास, बेहतर संपर्क और भौगोलिक संकेत (GI) टैगिंग शामिल है।

महत्त्व

DLTT स्थानीय मूल्य शृंखलाओं को सुदृढ़ करता है, MSME की भागीदारी बढ़ाता है, क्षेत्रीय समानता को प्रोत्साहित करता है, वस्त्र निर्यात को बढ़ावा देता है तथा आत्मनिर्भर भारत और संतुलित क्षेत्रीय विकास के लक्ष्यों के अनुरूप है।

व्हीकल-टू-व्हीकल’ (V2V) संचार प्रौद्योगिकी

हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री ने सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाने के उद्देश्य से भारत में ‘व्हीकल-टू-व्हीकल’ (V2V) संचार प्रौद्योगिकी को चरणबद्ध रूप से लागू करने की घोषणा की।

व्हीकल-टू-व्हीकल’ (V2V) संचार प्रौद्योगिकी के बारे में

  • व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) संचार एक उन्नत सड़क सुरक्षा प्रौद्योगिकी है, जो वाहनों को मोबाइल या इंटरनेट नेटवर्क पर निर्भर हुए बिना वास्तविक समय की सुरक्षा-संबंधी जानकारी सीधे एक-दूसरे के साथ साझा करने में सक्षम बनाती है, जिससे दुर्घटना-निवारण और चालक जागरूकता में वृद्धि होती है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • प्रत्यक्ष वाहन संचार: वाहन सेल्युलर या इंटरनेट कनेक्टिविटी का उपयोग किए बिना निकटवर्ती वाहनों के साथ सुरक्षा अलर्ट साझा करते हैं।
  • 360-डिग्री आधारित खतरे की पहचान: आगे, पीछे और पार्श्व दिशाओं में कार्य करता है और सड़क के मोड़ों तथा भू-आकृति को ध्यान में रखता है।
  • दृष्टि-रेखा से परे चेतावनी: मोड़ों के आस-पास या कम दृश्यता की स्थितियों में छिपे अवरोधों जैसे खतरों के प्रति चालक को सतर्क करता है।
  • ADAS के साथ एकीकरण: स्वचालित ब्रेकिंग को बेहतर बनाने के लिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम्स (ADAS) में एकीकरण।
  • किफायती परिनियोजन: प्रति वाहन अनुमानित लागत ₹5,000–₹7,000 तथा प्रथम चरण में नए वाहनों में अनिवार्य स्थापना की योजना।
  • स्पेक्ट्रम समर्थन: राष्ट्रीय आवृत्ति आवंटन योजना के तहत दूरसंचार विभाग द्वारा निशुल्क स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया जाएगा।

महत्त्व

  • सड़क दुर्घटनाओं में कमी: प्रारंभिक चेतावनियाँ और स्वचालित हस्तक्षेप सक्षम कर टक्कर के जोखिम को घटाता है।
  • ADAS की प्रभावशीलता में वृद्धि:व्हीकल-टू-व्हीकल’ AI से जोड़कर सेंसर-आधारित प्रणालियों को पूरक बनाता है।
  • भविष्य के अनुरूप गतिशीलता: भारत को वैश्विक AI परिवहन प्रणालियों और कनेक्टेड मोबिलिटी प्रवृत्तियों के अनुरूप बनाता है।
  • सार्वजनिक सुरक्षा में वृद्धि: कैशलेस दुर्घटना उपचार और कड़े वाहन सुरक्षा मानकों के साथ भारत के सड़क सुरक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करता है।

संदर्भ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रवासी भारतीय दिवस 2026 के अवसर पर शुभकामनाएँ प्रेषित कीं और प्रवासी समुदाय को भारत तथा विश्व के बीच “सेतु-निर्माता” के रूप में संबोधित किया।

प्रवासी भारतीय दिवस के बारे में

  • तिथि: यह प्रतिवर्ष 9 जनवरी को मनाया जाता है।
  • ऐतिहासिक महत्त्व: 9 जनवरी, 1915 को महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने की स्मृति में।
  • स्थापना: वर्ष 2003 में भारतीय प्रवासी पर उच्च स्तरीय समिति (अध्यक्ष: एल. एम. सिंघवी) की सिफारिशों के आधार पर आरंभ किया गया।
  • उद्देश्य: भारत के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास में प्रवासी भारतीय समुदाय के योगदान को मान्यता प्रदान करना तथा सम्मानित करना।
  • पुरस्कार: प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार भारत अथवा प्रवासी समुदाय के लिए असाधारण उपलब्धियों और योगदान को मान्यता देने हेतु प्रदान किया जाता है।
  • प्रारूप: वर्ष 2015 से मुख्य प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन द्विवार्षिक (प्रत्येक दो वर्ष में) रूप से आयोजित किया जाता है, जबकि मध्यवर्ती वर्षों में विषय-आधारित सम्मेलन होते हैं।
    • वर्ष 2026 ऐसा वर्ष है, जिसमें कोई सम्मेलन नहीं होगा, वर्ष 2025 में 18वाँ सम्मेलन (भुवनेश्वर, ओडिशा; 8–10 जनवरी, 2025) हुआ था।
  • संलग्नता का मंच: यह विदेश मंत्रालय का एक प्रमुख आयोजन है, जो नेटवर्किंग तथा निवेश, कौशल गतिशीलता, OCI से जुड़े मुद्दों आदि पर चर्चा का अवसर प्रदान करता है।

भारत के प्रवासी समुदाय का महत्त्व

  • प्रेषण (Remittances): प्रेषण स्थिर और विश्वसनीय विदेशी मुद्रा प्रवाह प्रदान करते हैं, जो प्रायः FDI से अधिक होते हैं और लाखों परिवारों की सहायता करते हैं।
    • वित्त वर्ष 2024–25 (अप्रैल 2024–मार्च 2025) में भारत को रिकॉर्ड 135.46 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रेषण प्राप्त हुआ।
  • वैश्विक सॉफ्ट पावर और कूटनीतिक सेतु: तकनीक, व्यवसाय, राजनीति और शिक्षा जगत में उपलब्धियों (जैसे- विश्वभर में प्रभावशाली CEO और नेतृत्वकर्ता) के माध्यम से प्रवासी समुदाय भारत की वैश्विक छवि को सुदृढ़ करता है।
  • निवेश, ज्ञान और उद्यमिता का अंतरण: नकद प्रवाह से आगे बढ़कर, प्रवासी सदस्य FDI, स्टार्ट-अप निवेश, कौशल/ज्ञान प्रवाह और प्रौद्योगिकी साझेदारियों को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे भारत की नवाचार तथा विकास संबंधी आकांक्षाओं को बल मिलता है।

भारत के प्रवासी समुदाय की रूपरेखा

  • भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है, जिसमें 35.4 मिलियन से अधिक प्रवासी भारतीय (अनिवासी भारतीय—NRIs और भारतीय मूल के व्यक्ति—PIOs) शामिल हैं।
  • कुल संख्या के आधार पर यह विश्व का सबसे बड़ा विदेशी प्रवासी समुदाय है।
  • NRIs वे भारतीय नागरिक हैं, जो विदेश में रहते हैं, जबकि PIOs भारतीय वंश के विदेशी नागरिक हैं (जिसमें OCI भी शामिल हैं)।

सर्वाधिक भारतीय प्रवासी वाले शीर्ष देश

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: 5.4 मिलियन (कुल मिलाकर सर्वाधिक; तकनीक, स्वास्थ्य सेवा और उद्यमिता में PIOs की उल्लेखनीय उपस्थिति)।
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE): ~3.4–3.6 मिलियन (NRIs की सर्वाधिक सघनता; निर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्रों में प्रवासी कार्यबल का प्रमुख हिस्सा)।
  • सऊदी अरब: ~2.4–2.6 मिलियन (मुख्यतः श्रम और पेशेवर क्षेत्रों में NRIs)।

संदर्भ

एडवांसेज इन एटमॉस्फेरिक साइंसेज’ (Advances in Atmospheric Sciences) में प्रकाशित एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, वैश्विक महासागरों में वर्ष 2025 में आधुनिक रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद किसी भी वर्ष की तुलना में सर्वाधिक तापन दर्ज किया गया।

संबंधित तथ्य 

  • इस अध्ययन में विश्वभर के 31 संस्थानों से जुड़े 50 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया, जिसमें एशिया, यूरोप और अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्रों तथा स्वतंत्र शोध समूहों के संयुक्त आँकड़ों का उपयोग किया गया।

जेटाजूल (ZJ) ऊर्जा की एक इकाई है; 1 जेटाजूल = 10²¹ जूल

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

  • महासागरीय तापन में रिकॉर्ड वृद्धि: वर्ष 2025 में महासागरीय तापन में लगभग 23 जेटाजूल की वृद्धि हुई, जो वर्ष 2023 के स्तर पर वैश्विक ऊर्जा खपत के लगभग 37 वर्षों के बराबर है।
    • वर्ष 2025 में वैश्विक महासागर सतह का लगभग 16 प्रतिशत भाग अपने इतिहास का सबसे गर्म वर्ष रहा, जबकि 33 प्रतिशत क्षेत्र रिकॉर्ड किए गए तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा।
  • ऊपरी महासागर का ऊष्मीकरण: महासागर के ऊपरी 2,000 मीटर में संचित ऊष्मा रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई, जिससे अतिरिक्त ऊष्मा के दीर्घकालिक संचयन की पुष्टि होती है।
  • ग्रीनहाउस गैसों से संबंध: ग्रीनहाउस गैसों द्वारा एकत्रित अतिरिक्त ऊष्मा का लगभग 90% महासागर अवशोषित कर लेते हैं, जिससे वे वायुमंडलीय तापन के विरुद्ध प्राथमिक बफर बन जाते हैं।
  • महासागरीय तापन के क्षेत्रीय प्रतिरूप
    • प्रभावित सतह क्षेत्र: वर्ष 2025 में वैश्विक महासागर सतह का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा अब तक का सबसे गर्म रहा, जबकि 33 प्रतिशत हिस्सा रिकॉर्ड किए गए तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा।
    • सर्वाधिक तीव्र तापन वाले क्षेत्र: सर्वाधिक तीव्र तापन उष्णकटिबंधीय एवं दक्षिण अटलांटिक, उत्तर प्रशांत तथा दक्षिणी महासागर में दर्ज किया गया।
  • गहरे महासागर में तापन: गहरे महासागर में संचित ऊष्मा भी एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई, जो यह दर्शाता है कि तापन केवल सतही परतों तक सीमित नहीं है।
  • समुद्र नितल के तापमान की प्रवृत्ति
    • वाष्पीकरण और वर्षा में वृद्धि: महासागर सतही तापमान में वृद्धि के कारण वाष्पीकरण बढ़ा, जिससे वर्षा के प्रतिरूप अधिक तीव्र हुए।
    • चरम मौसमी घटनाएँ: वर्ष 2025 के दौरान इन परिस्थितियों के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया और मैक्सिको में भीषण बाढ़ तथा मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में सूखा पड़ा।
  • स्तरीकरण में वृद्धि: अधिक गर्म महासागर स्तरीकरण को बढ़ाते हैं, जिसमें हल्का, गर्म और पोषक तत्त्व रहित सतही जल, ठंडे और पोषक तत्त्व समृद्ध गहरे जल के ऊपर स्तरित हो जाता है।
  • महासागरीय तापन के दीर्घकालिक परिणाम
    • समुद्र-स्तर में वृद्धि: निरंतर ऊष्मीकरण से समुद्री जल का तापीय प्रसार होता है, जिससे समुद्र-स्तर वृद्धि की प्रक्रिया तेज होती है।
    • समुद्री हीटवेव: अधिक महासागरीय तापन समुद्री हीटवेव को तीव्र करता है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होते हैं।
    • अधिक शक्तिशाली तूफान: वायुमंडल में अतिरिक्त ऊष्मा और नमी के कारण अधिक तीव्र तूफानों तथा चरम मौसमी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
  • भविष्य का परिदृश्य
    • नए रिकॉर्ड बनने की संभावना: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जब तक पृथ्वी अतिरिक्त ऊष्मा संचित करती रहेगी, आने वाले वर्षों में महासागरीय तापन के नए रिकॉर्ड बनने की संभावना बनी रहेगी, जो वैश्विक जलवायु शमन प्रयासों की तात्कालिकता को रेखांकित करता है।
  • वैश्विक शोध प्रयास: इस अध्ययन में पूरे विश्व के 31 संस्थानों से जुड़े 50 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया और इसमें एशिया, यूरोप तथा अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्रों और स्वतंत्र शोध समूहों के संयुक्त आँकड़ों का उपयोग किया गया।

तापमान वृद्धि के परिणाम

  • समुद्री पर्यटन पर प्रभाव: महासागरीय तापन में वृद्धि से प्रवाल विरंजन होता है, जिससे अंडमान द्वीपसमूह और ग्रेट बैरियर रीफ जैसे क्षेत्रों में समुद्री पर्यटन के प्रमुख आकर्षण क्षतिग्रस्त होते हैं और पर्यटन राजस्व में गिरावट आती है।
  • शिपिंग मार्गों पर प्रभाव: आर्कटिक समुद्री बर्फ के पिघलने से नए शिपिंग मार्ग खुल रहे हैं और परिवहन समय घट रहा है, किंतु बढ़ते तूफान और पर्यावरणीय जोखिम मौजूदा शिपिंग लेनों तथा वैश्विक व्यापार लॉजिस्टिक्स के लिए चुनौती उत्पन्न करते हैं।
  • बंदरगाह अवसंरचना पर प्रभाव: महासागरीय तापन से उत्पन्न समुद्र स्तर वृद्धि, निम्न-तटीय क्षेत्रों में स्थित बंदरगाह अवसंरचना को खतरे में डालती है, जिससे बाढ़ और तूफानी ज्वार से होने वाले व्यवधानों को रोकने हेतु जलवायु अनुकूलन में वृद्धि हेतु बड़े निवेश की आवश्यकता होती है।
  • तटीय आजीविका पर प्रभाव: महासागरीय तापन में वृद्धि से मछलियों के प्रवासन प्रतिरूप बदलते हैं, जिससे मत्स्यन उद्योग प्रभावित होता है और मत्स्यन पर निर्भर तटीय समुदायों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, साथ ही जलवायु-जनित आपदाओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता बढ़ जाती है।

महासागरीय तापन से निपटने के उपाय

  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी: वैश्विक ऊष्मीकरण और महासागरों पर इसके प्रभाव को धीमा करने के लिए GHG उत्सर्जन में कमी अत्यंत आवश्यक है।
  • समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन: प्रवाल भित्तियों और मैंग्रोव जैसे संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा के लिए समुद्री संरक्षित क्षेत्र (MPAs) और समुद्री अभयारण्यों का विस्तार किया जाना चाहिए।
    • मैंग्रोव व सीग्रास का पुनर्स्थापन कार्बन पृथक्करण में सहायक होता है और तटीय सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे समुद्री जैव-विविधता पर महासागर ऊष्मीकरण के प्रभाव कम होते हैं।
  • तटीय क्षेत्रों में जलवायु लचीलापन बढ़ाना: तटीय रक्षा को सुदृढ़ करना, बाढ़ संरक्षण और सतत् शहरी नियोजन जैसी तटीय अनुकूलन रणनीतियाँ, समुद्र स्तर में वृद्धि तथा चरम मौसमी घटनाओं के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकती हैं।
  • महासागर अम्लीकरण कम करना: महासागरीय तापन के कारण महासागर अम्लीकरण में वृद्धि होती है, जो समुद्री जीवन को नुकसान पहुँचा सकता है।
    • CO₂ उत्सर्जन में कमी से महासागर ऊष्मीकरण और अम्लीकरण—दोनों को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।
  • सतत् शिपिंग और समुद्री प्रथाएँ: स्वच्छ शिपिंग तकनीकों (जैसे- हाइड्रोजन-चालित पोत) को अपनाना और सतत् समुद्री प्रथाओं को लागू करना इस क्षेत्र के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में सहायक होगा।

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