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Jan 21 2026

‘ब्लू इकोनॉमी’ के लिए एक हब के तौर पर अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

हाल ही में केंद्र सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह को भारत की ‘ब्लू इकॉनॉमी’ का एक प्रमुख केंद्र विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

‘ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग’ परियोजना के बारे में 

  • भारत ने अंडमान सागर के नॉर्थ बे में अपनी पहली ‘ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग’ परियोजना शुरू की, जो ‘ब्लू इकोनॉमी’ विजन के तहत महासागरीय संसाधनों के दोहन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
  • उद्देश्य
    • भारत के महासागरों की आर्थिक क्षमता का दोहन करना।
    • सतत् समुद्री जलीय कृषि और तटीय आजीविका को बढ़ावा देना।
    • वैज्ञानिक नवाचार को समुदाय-आधारित मत्स्यपालन के साथ एकीकृत करना।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) तथा अंडमान एवं निकोबार केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन द्वारा कार्यान्वित।
    • प्राकृतिक महासागरीय परिस्थितियों में फिनफिश उत्पादन हेतु NIOT द्वारा विकसित ‘ओपन-सी केज’ का उपयोग किया जाता है।
    • स्थानीय मछुआरों को बीज वितरण के माध्यम से ‘ओपन-सी’ समुद्री शैवाल कृषि को शामिल किया गया।
    • भविष्य में सार्वजनिक–निजी भागीदारी मॉडलों के माध्यम से विस्तार योग्य स्वरूप में डिजाइन किया गया।

ब्लू इकोनॉमी के केंद्र के रूप में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह

  • अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह रणनीतिक रूप से अवस्थित है तथा समृद्ध समुद्री जैव विविधता से युक्त है, जिससे यह भारत की उभरती ‘ब्लू इकोनॉमी’ रणनीति का केंद्रीय घटक बनता है।
  • विजन: महासागर विज्ञान, समुद्री प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी को एकीकृत कर आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना।
  • संभावनाएँ: द्वीपों में रोजगार सृजन, निर्यातोन्मुख समुद्री उत्पादों, ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ प्रौद्योगिकियों और वैकल्पिक समुद्री-आधारित पोषण के लिए व्यापक संभावनाएँ हैं।
  • स्व-सहायता समूहों और महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी घरेलू आय को सुदृढ़ कर सकती है, साथ ही “वोकल फॉर लोकल, लोकल फॉर ग्लोबल” विजन को आगे बढ़ा सकती है।

सामूहिक रूप से, ये पहलें अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह को एक सतत् ‘ब्लू इकोनॉमी’ केंद्र में परिवर्तित कर सकती हैं।

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के बारे में

  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह भारत का एक केंद्रशासित प्रदेश है, जो अपनी रणनीतिक स्थिति, समृद्ध समुद्री जैव विविधता और पारिस्थितिकी महत्त्व के लिए जाना जाता है।
  • स्थिति: ये बंगाल की खाड़ी में, भारतीय मुख्य भूमि के दक्षिण-पूर्व में, दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिक निकट स्थित हैं तथा इन्हें 10 डिग्री चैनल द्वारा पृथक किया गया है।
    • 6 डिग्री चैनल निकोबार द्वीपों को सुमात्रा (इंडोनेशिया) से अलग करता है।
  • मुख्य विशेषताएँ: इस द्वीपसमूह में लगभग 572 द्वीप शामिल हैं और सघन उष्णकटिबंधीय वन, प्रवाल भित्तियाँ पाई जाती हैं तथा यह भारत की समुद्री सुरक्षा एवं विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।
  • संरक्षण स्थल
    • महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क – दक्षिण अंडमान द्वीप
    • रानी झांसी मरीन नेशनल पार्क – रिची द्वीपसमूह
    • कैंपबेल बे नेशनल पार्क – ग्रेट निकोबार द्वीप
    • गलाथिया नेशनल पार्क – ग्रेट निकोबार द्वीप

बागुरुम्बा धोउ 2026 (Bagurumba Dwhou 2026)

हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री ने असम के गुवाहाटी स्थित सरुसजाई स्टेडियम में बागुरुम्बा धोउ 2026 में भाग लिया।

संबंधित तथ्य

  • इस आयोजन में असम के 23 जिलों की 81 विधानसभा क्षेत्रों से 10,000 से अधिक बोडो कलाकारों द्वारा सामूहिक समन्वित बागुरुम्बा नृत्य प्रस्तुत किया गया।
  • शिल्पी दिवस (ज्योति प्रसाद अग्रवाल की पुण्यतिथि) के साथ आयोजित यह उत्सव वर्ष 2020 के बोडो शांति समझौते के बाद स्थापित “शांति युग” का प्रतीक था।

‘बागुरुम्बा धोउ’ के बारे में

  • अर्थ: “धोउ” शब्द का बोडो भाषा में अर्थ “लहर” होता है, जो सांस्कृतिक गर्व और पहचान की विशाल लहर को दर्शाता है।
  • समुदाय एवं उद्गम: यह बोडो जनजाति का पारंपरिक लोक नृत्य है, जो असम का सबसे बड़ा नृजातीय-भाषायी समूह है।
    • यह नृत्य उनकी कृषि-आधारित संस्कृति और प्रकृति-केंद्रित विश्वदृष्टि का कलात्मक प्रतिबिंब है।
  • प्रदर्शक एवं शैली
    • मुख्यतः समूहों में बोडो महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें धीमी, सौम्य गतियों और समन्वित कदम के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
    • कोमल हस्त मुद्राएँ तितलियों से प्रेरित होती हैं (इसी कारण इसे “तितली नृत्य” भी कहा जाता है), साथ ही पक्षियों, नदियों और लहराते खेतों से भी प्रेरणा ली जाती है।
  • अवसर: यह ब्विसागु पर्व से निकटता से जुड़ा है, जो बोडो नववर्ष और वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है।
  • प्रतीकात्मकता: यह नवोत्थान, उर्वरता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक है।
  • संगीत एवं वाद्ययंत्र: यह प्रस्तुति पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक संप्रेषण का माध्यम है, जिसमें निम्नलिखित पारंपरिक वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है:
    • खाम: एक पारंपरिक लंबा ढोल।
    • सिफुंग: पाँच छिद्रों वाली विशिष्ट बाँसुरी।
    •  सेरजा: धनुष से बजाया जाने वाला वायलिन जैसा वाद्य।
    • जोथा एवं गोंग्वना: झाँझ और वीणा।

बोडो पहचान के लिए नीतिगत उपलब्धियाँ

  • भाषायी दर्जा: बोडो भाषा को वर्ष 2020 में असम की सह-आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई तथा इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
  • शासन एवं शिक्षा: बोडो-कछारी कल्याण स्वायत्त परिषद तथा एक समर्पित बोडोलैंड प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज की स्थापना।
    • स्वदेशी शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु बोडो माध्यम शिक्षा के लिए एक पृथक निदेशालय का गठन।

यूरोपियन संघ का ‘एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट’

ग्रीनलैंड से संबंधित विवाद की पृष्ठभूमि में, यूरोपीय संघ (EU) डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ के सदस्य देशों पर शुल्क (टैरिफ) लगाने की धमकी दिए जाने के उपरांत अपने ‘एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट’ (Anti-Coercion Instrument) को सक्रिय करने पर विचार कर रहा है।

यूरोपीय संघ का एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट (ACI) अथवा ‘ट्रेड बाजूका’

  • कानूनी आधार: ‘एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट’ एक यूरोपीय संघीय विनियमन है, जिसे वर्ष 2023 में यूरोपीय संघ अथवा उसके सदस्य देशों के विरुद्ध अन्य देशों द्वारा अपनाई जाने वाली ‘एंटी-कोएर्शन’ का प्रतिकार करने हेतु अधिसूचित किया गया।
  • ‘एंटी-कोएर्शन’ की अवधारणा: व्यापार, निवेश अथवा वित्तीय उपायों के प्रयोग या उनकी धमकी के माध्यम से यूरोपीय संघ या उसके किसी सदस्य देश को नीतिगत परिवर्तन हेतु बाध्य करना ‘एंटी-कोएर्शन’ की श्रेणी में आता है।
  • प्राथमिक उद्देश्य: इस उपकरण का मूल उद्देश्य प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) का सृजन करना है। यूरोपीय संघ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से पूर्व संवाद, कूटनीतिक सहभागिता एवं तनाव-न्यूनीकरण को प्राथमिकता देता है।
  • निर्णय-निर्माण प्रक्रिया: यूरोपीय आयोग द्वारा जाँच की जाती है, जिसके उपरांत यूरोपीय संघ परिषद, योग्य बहुमत (Qualified Majority) के माध्यम से इसकी पुष्टि करती है; सर्वसम्मति की आवश्यकता नहीं होती।
  • संभावित प्रतिकार उपाय: सक्रिय किए जाने की स्थिति में यूरोपीय संघ निम्नलिखित कठोर प्रतिकारात्मक उपाय अपना सकता है—
    • आयात पर उच्च टैरिफ अथवा प्रतिबंध
    • नए करों का आरोपण (प्रौद्योगिकी कंपनियों सहित)
    • निवेश प्रवाह पर नियंत्रण
    • यूरोपीय संघ के एकल बाजार तक पहुँच को सीमित करना
    • सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं से विदेशी कंपनियों का बहिष्कार।
  • विशेषताएँ
    • ये उपाय आनुपातिक, लक्षित तथा प्रत्यावर्तनीय होंगे तथा जब आर्थिक जबरदस्ती समाप्त हो जाएगी, तब इन्हें वापस ले लिया जाएगा।
    • इसी कारण इसे यूरोपीय संघ का सर्वाधिक शक्तिशाली व्यापारिक प्रतिशोध उपकरण अथवा “ट्रेड बाजूका” कहा जाता है।
    • अब तक इसका प्रयोग नहीं हुआ है; इसका सक्रिय होना एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक उन्नयन को दर्शाएगा।

होप द्वीप (Hope Island)

आंध्र प्रदेश सरकार ने होप द्वीप पर एक उपग्रह प्रक्षेपण सुविधा विकसित करने की योजना की घोषणा की है, जो राज्य की महत्त्वाकांक्षी ‘स्पेस सिटी परियोजना’ का हिस्सा है।

होप द्वीप के बारे में

  • भौगोलिक स्थिति: होप द्वीप आंध्र प्रदेश में काकीनाडा खाड़ी में, बंगाल की खाड़ी में गोदावरी नदी के मुहाने पर स्थित है।
    • यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के मुख्य प्रक्षेपण स्थल, श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 600 किमी. से अधिक दूर स्थित है।
  • निर्माण: यह गोदावरी नदी द्वारा अवसाद निक्षेपण के कारण लगभग एक सदी पूर्व प्राकृतिक रूप से निर्मित हुआ।
  • आपदा संरक्षण भूमिका: यह द्वीप चक्रवातों, तूफानी ज्वार और तटीय अपरदन के विरुद्ध प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य करता है, जिससे काकीनाडा शहर और निकटवर्ती तटीय क्षेत्रों की रक्षा होती है।
  • पारिस्थितिकी महत्त्व: होप द्वीप कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा है, जो भारत के सबसे बड़े मैंग्रोव पारितंत्रों में से एक है।
  • जैव-विविधता हॉटस्पॉट: यह 42 प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का शीतकालीन प्रवास स्थल तथा ‘ऑलिव रिडले टर्टल’ का प्रजनन स्थल है।
  • नौवहन एवं बंदरगाह: होप द्वीप काकीनाडा एंकरज पोर्ट और काकीनाडा डीप-सी पोर्ट के संचालन हेतु सुरक्षित नौवहन चैनल उपलब्ध कराता है।
  • रणनीतिक एवं विकासात्मक महत्त्व: यह मुख्य भूमि पर स्थित पूर्वी नौसेना कमान अड्डे के सामने स्थित है।
    • प्रस्तावित स्पेस सिटी और उपग्रह प्रक्षेपण सुविधा के कारण इस द्वीप का रणनीतिक और पर्यावरणीय महत्त्व बढ़ गया है।

स्कॉच अवॉर्ड 2025’

C-DOT को उसकी स्वदेशी ‘सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन’ के लिए ‘स्कॉच अवॉर्ड 2025’ (SKOCH Award) प्राप्त हुआ, जो भारत की आपदा और आपातकालीन संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने में उसकी भूमिका को मान्यता देता है।

स्कॉच अवॉर्ड के बारे में

  • परिचय: स्कॉच अवॉर्ड, भारत में शासन, प्रौद्योगिकी-आधारित विकास और सार्वजनिक सेवा वितरण में उत्कृष्टता को सम्मानित करता है।
  • आयोजक: स्कॉच समूह, जो सामाजिक-आर्थिक सुधारों और समावेशी विकास पर केंद्रित एक अग्रणी नीति थिंक टैंक है।
    • इसकी स्थापना वर्ष 2003 में स्कॉच समूह द्वारा की गई थी।
  • मानदंड: प्रौद्योगिकी, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, शासन और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण में प्रभावी पहलों को पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।
  • स्कॉच अवॉर्ड 2025: “रिसोर्सिंग विकसित भारत” (Resourcing Viksit Bharat) विषय पर आयोजित 104वें स्कॉच शिखर सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया, जो राष्ट्रीय विकास और अनुकूलन संबंधी परियोजनाओं को मान्यता देता है।

C-DOT के सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन (CBS) के बारे में

  • C-DOT का सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन एक स्वदेशी आपदा और आपातकालीन अलर्ट प्लेटफॉर्म है, जो मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से लगभग वास्तविक समय में जीवनरक्षक सूचनाओं का प्रसार सक्षम बनाता है।

CBS की विशेषताएँ

  • सरकारी अलर्ट प्रणालियों और दूरसंचार नेटवर्क के बीच स्वचालित एकीकरण स्थापित करता है।
  • 2G, 3G, 4G और 5G प्रौद्योगिकियों का समर्थन
  • भू-लक्षित, बहु-आपदा अलर्ट सक्षम।
  • 21 भारतीय भाषाओं में संचार का समर्थन
  • निम्नलिखित अनेक अलर्ट-सृजन एजेंसियों का एकीकरण:
    • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (मौसम संबंधी घटनाएँ)
    • केंद्रीय जल आयोग (बाढ़)
    • भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (सुनामी)
    • डिफेंस जियो-इन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (भूस्खलन)
    • भारतीय वन सर्वेक्षण (वनाग्नि)।
  • मोबाइल सेवा प्रदाताओं, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को एकीकृत अनुमोदन तथा वितरण प्रणाली के माध्यम से जोड़ता है।

पूर्व पुरस्कार प्राप्तकर्ता एवं लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्राप्तकर्ता व्यक्ति

  • नंदन नीलेकणी (2013) – इमैजिनिंग इंडिया
  • मोंटेक सिंह अहलूवालिया (2011) – ग्रोथ मेकर
  • सी. रंगराजन (2010) – फिलॉसफर किंग
  • दीपक पारेख (2014) – ग्रोथ टर्नपाइक
  • नितिन गडकरी (2018) – चैलेंजिंग पॉवर्टी
  • एम. वेंकैया नायडू (2016) – ए व्यू फ्रॉम द इनसाइड।

महत्त्व

  • समय पर और लक्षित संचार के माध्यम से आपदा जोखिम न्यूनीकरण को सुदृढ़ करता है।
  • विशेषकर दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार करता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के “अर्ली वार्निंग्स फॉर ऑल” कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के ‘कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल’ के अनुरूप है।
  • सतत् विकास लक्ष्यों और आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप, भारत को आपातकालीन अलर्ट प्रौद्योगिकियों में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करता है।

सेम्मोझी साहित्यिक पुरस्कार

हाल ही में तमिलनाडु ने साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर चिंताओं के मध्य ‘सेम्मोझी साहित्यिक पुरस्कार’ की शुरुआत की।

सेम्मोझी राष्ट्रीय साहित्यिक पुरस्कार के बारे में

  • यह एक वार्षिक, राज्य-प्रायोजित राष्ट्रीय स्तर का साहित्यिक सम्मान है।
  • भाषाएँ (चरण I): तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया, बंगाली, मराठी।
  • चयन प्रक्रिया: भाषा-वार स्वतंत्र जूरी, जिसमें किसी प्रकार का राजनीतिक या नौकरशाही हस्तक्षेप नहीं होगा।
  • पुरस्कार घटक: प्रत्येक चयनित साहित्यिक कृति के लिए ₹5 लाख।
  • विजन: रचनात्मक स्वतंत्रता, भाषायी विविधता और भारतीय साहित्य में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना।

साहित्य अकादमी पुरस्कार के बारे में

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मान है, जो कविता, उपन्यास, नाटक, निबंध और लघु कथा जैसी विधाओं में भारतीय साहित्य में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है।
  • भाषा श्रेणियाँ 
    • आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाएँ।
    • इसके अतिरिक्त अंग्रेजी और राजस्थानी,
    • भारतीय साहित्य के अनुवादित कार्यों को भी शामिल करता है।

अंतरराष्ट्रीय डुगोंग संरक्षण केंद्र

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने तटीय क्षेत्र की पारिस्थितिकी संवेदनशीलता के कारण तमिलनाडु को मनोर डुगोंग संरक्षण केंद्र के डिजाइन में संशोधन करने का निर्देश दिया है।

अंतरराष्ट्रीय डुगोंग संरक्षण केंद्र, मनोर (तंजावुर)

  • प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय डुगोंग संरक्षण केंद्र ₹40.94 करोड़ की परियोजना है, जिसे तंजावुर जिले के मनोर में, पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील तटीय विनियमन क्षेत्र में नियोजित किया गया है।
  • उद्देश्य
    • डुगोंग का संरक्षण और सीग्रास पारितंत्रों का संरक्षण
    • घायल समुद्री स्तनधारियों पर अनुसंधान, बचाव और पुनर्वास
    • जन-जागरूकता और समुद्री जैव-विविधता पर आधारित शिक्षा।
  • पर्यावरणीय चिंताएँ
    • परियोजना का लगभग 22,000 वर्ग मीटर क्षेत्र CRZ-III ‘नो डेवलपमेंट जोन’ में स्थित है और यह मैंग्रोव तथा ‘सीग्रास मीडोज’ वाले CRZ-I क्षेत्रों से भी आच्छादित है।
    • विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने कंक्रीट संरचनाओं के अत्यधिक उपयोग को चिह्नित किया।
    • कम प्रभाव वाले, पर्यावरण-अनुकूल निर्माण, प्री-फैब्रिकेटेड सामग्री के उपयोग और ‘नो डेवलपमेंट जोन’ के बाहर संरचनाओं के स्थानांतरण की सिफारिश की।

डुगोंग (Dugong dugon) के बारे में

  • डुगोंग एक बड़ा, धीमी गति से चलने वाला समुद्री स्तनधारी है, जिसे सामान्यतः “सी काउ” कहा जाता है, और यह एकमात्र पूर्णतः समुद्री शाकाहारी स्तनधारी है।
  • आवास: भारतीय और पश्चिमी प्रशांत महासागरों के गर्म, उथले तटीय जल में पाया जाता है।
  • पारिस्थितिकी भूमिका 
    • खाद्य के लिए केवल ‘सीग्रास’ पर निर्भर है, जिससे यह एक की-स्टोन प्रजाति के रूप में कार्य करता है।
    • सीग्रास मीडोज, लैगून, मुहाने और निकटवर्ती समुद्री क्षेत्रों में निवास करता है।
    • पारिस्थितिकी पारितंत्र अभियंता की भूमिका निभाता है, जिससे सीग्रास के पुनर्जनन और समुद्री जैव-विविधता को सहायता मिलती है।
  • संरक्षण स्थिति
    • IUCN रेड लिस्ट: सुभेद्य (Vulnerable)
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची I (सर्वोच्च संरक्षण)
    • CITES: परिशिष्ट I

यह परियोजना समुद्री संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, लेकिन साथ ही संवेदनशील तटीय पारितंत्रों के साथ अवसंरचना विकास में संतुलन की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

सुखात्मे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार

राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से वर्ष 2026 के लिए सुखात्मे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार के लिए नामांकन आमंत्रित किए गए हैं।

सुखात्मे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार के बारे में

  • सुखात्मे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है, जिसे प्रो. पी. वी. सुखात्मे की स्मृति में स्थापित किया गया है।
    • प्रो. पी. वी. सुखात्मे कृषि सांख्यिकी और बायोमेट्री में यादृच्छिक नमूनाकरण विधियों के अनुप्रयोग में अपने अग्रणी कार्य के लिए जाने जाते हैं।
    • विज्ञान और मानव कल्याण में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1973 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
  • आयोजक: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI), भारत सरकार।
  • अवधि: यह पुरस्कार वर्ष 2000 से प्रत्येक दो वर्ष में एक बार (द्विवार्षिक) प्रदान किया जाता है।
  • पुरस्कार समारोह: सांख्यिकी दिवस (29 जून) को प्रदान किया जाता है, जो प्रो. पी. वी. सुखात्मे की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
  • पात्रता 
    • सांख्यिकी के क्षेत्र में आजीवन योगदान के लिए प्रतिष्ठित भारतीय सांख्यिकीविद्।
    • 45 वर्ष या उससे अधिक आयु के सांख्यिकीविदों के लिए भी उपलब्ध।
    • यदि नामांकित व्यक्ति का निधन नामांकन से एक वर्ष के भीतर हुआ हो, तो मरणोपरांत पुरस्कार की अनुमति है।
  • नामांकन प्रक्रिया: आवेदन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (awards.gov.in) के माध्यम से प्रस्तुत किए जाते हैं।
    • स्व-नामांकन की अनुमति है।
    • संस्थानों द्वारा भी नामांकन प्रस्तावित किए जा सकते हैं।
  • पुरस्कार घटक: प्रशस्ति-पत्र, शॉल और स्मृति-चिह्न।
    • पुरस्कार प्राप्तकर्ता अपने कार्य के महत्त्व को रेखांकित करते हुए एक विशेष व्याख्यान देता है।

महत्त्व

यह पुरस्कार सांख्यिकीय अनुसंधान में उत्कृष्टता को बढ़ावा देता है, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सुदृढ़ करता है तथा योजना, शासन एवं सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए आवश्यक योगदानों को चिह्नित करता है।

संदर्भ

सेबी (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए ‘आउटराइट कैश मार्केट’ लेन–देन में फंड्स की नेटिंग’ (Netting of Funds) का प्रस्ताव किया है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के बारे में

  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का तात्पर्य किसी अन्य देश की वित्तीय परिसंपत्तियों (जैसे—इक्विटी एवं बॉण्ड) में विदेशी निवेशकों द्वारा किया गया निष्क्रिय निवेश है, जिसमें प्रबंधन पर नियंत्रण शामिल नहीं होता है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • इसमें इक्विटी शेयर, ऋण प्रतिभूतियाँ, अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीप्ट्स (ADR), ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीप्ट्स (GDR), म्यूचुअल फंड तथा एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) शामिल हैं।
    • स्वामित्व या प्रबंधन नियंत्रण नहीं (FDI के विपरीत)।
    • उच्च तरलता एवं बाजार-आधारित होने के कारण यह अस्थिर होता है तथा वैश्विक जोखिम के प्रति संवेदनशील रहता है।
    • इसे भुगतान संतुलन के पूँजी खाते में दर्ज किया जाता है।

PW OnlyIAS विशेष

नेटिंग’ क्या है?

  • ‘नेटिंग’ एक वित्तीय प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत दो या अधिक पक्षों के बीच मौजूद अनेक देय (Payables) एवं प्राप्य राशियों को समायोजित कर एकल शुद्ध भुगतान निकाला जाता है। इससे लेन–देन की संख्या, लागत तथा निपटान/क्रेडिट जोखिम में उल्लेखनीय कमी आती है। यह प्रक्रिया सामान्यतः ट्रेडिंग, अंतर-कंपनी अंतरण तथा वित्तीय दायित्वों के प्रबंधन में दक्षता एवं नकदी प्रवाह सुधारने हेतु अपनाई जाती है।
  • अनेक छोटे भुगतानों के स्थान पर केवल शुद्ध राशि का निपटान किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि पार्टी A पर पार्टी B का $100 बकाया है और पार्टी B पर A का $80 बकाया है, तो केवल $20 का ही लेन-देन होता है।

FPI के लिए ‘फंड्स की नेटिंग’

  • फंड्स की नेटिंग’ FPI को उसी दिन बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग खरीद को वित्तपोषित करने की अनुमति देती है, जिसमें केवल शुद्ध फंड दायित्व का निपटान आवश्यक होता है।
  • FPI के लिए ‘’फंड्स की नेटिंग’’ की अनुमति देने का प्रभाव
    • तरलता दक्षता में सुधार: नेटिंग से सकल वित्तपोषण आवश्यकताओं में कमी आती है, जिससे तरलता का तनाव कम होता है, खासकर सूचकांक पुनर्संतुलन के दिनों में।
    • पूँजी की लागत में कमी: अस्थायी वित्तीय आवश्यकताओं को न्यूनतम करके, FPI को कम उधारी और लेन–देन लागत का सामना करना पड़ता है, जिससे भारत के बाजार की आकर्षण क्षमता बढ़ती है।
    • बाजार स्थिरता के सुरक्षा उपाय:इंट्रा-डे’ खरीद-बिक्री (गैर-स्पष्ट) लेनदेन को नेटिंग से बाहर रखने से यह सुनिश्चित होता है कि बड़े FPI बाजारों को विकृत नहीं कर सकते; सुरक्षा निपटान सकल ही रहता है।

सेबी की अन्य पहलें 

  • SWAGAT–FI फ्रेमवर्क: सिंगल विंडो ऑटोमैटिक और जनरलाइज्ड एक्सेस फॉर ट्रस्टेड फॉरेन इन्वेस्टर्स, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशकों के लिए पंजीकरण और अनुपालन को सरल बनाता है।
  • एकीकृत पंजीकरण प्रणाली: सेबी ने निवेश मार्गों के बीच एकीकृत पंजीकरण का प्रस्ताव किया है ताकि दस्तावेजों की पुनरावृत्ति और बार-बार अनुपालन आवश्यकताओं को कम किया जा सके।
  • FPI के लिए अनुपालन बोझ में कमी: संप्रभु संपत्ति कोष, पेंशन कोष और केंद्रीय बैंक, जैसे- पात्र विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को प्रक्रियात्मक मानदंडों में शिथिलता दी गई है।
  • FPI के लिए जोखिम-आधारित विनियमन: सेबी की बाजार पहुँच और प्रणालीगत स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए निवेशक जोखिम प्रोफाइल के आधार पर विभेदित नियामकीय आवश्यकताओं को अपनाना जारी रखता है।
  • निपटान तंत्र में सुधार: सेबी भारतीय पूँजी बाजारों में तरलता, पारदर्शिता और परिचालन दक्षता में सुधार के लिए निपटान प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर रहा है।

सेबी का ‘नेटिंग’ संबंधी सुधार तरलता दक्षता को बढ़ाता है, लेन–देन लागत को कम करता है और निवेशक विश्वास को मजबूत करता है, साथ ही बाजार स्थिरता को बनाए रखते हुए भारत की वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्द्धी पूँजी बाजार के रूप में स्थिति को सुदृढ़ करता है।

संदर्भ

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन के केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की स्थायी समिति (SC-NBWL) की 88वीं बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक के बारे में

  • वैधानिक आधार: यह विचार-विमर्श वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत किया गया।
  • मुख्य उद्देश्य: पारिस्थितिकी संवेदनशीलता और सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं, अवसंरचना विकास तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना।
  • भौगोलिक क्षेत्राधिकार: स्थायी समिति ने संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, टाइगर रिजर्व तथा पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों के भीतर एवं उनके आस-पास स्थित सार्वजनिक उपयोगिता, अवसंरचना तथा रणनीतिक आवश्यकताओं से संबंधित 70 प्रस्तावों की समीक्षा की।
  • आवृत प्रमुख क्षेत्र:
    • जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति परियोजनाएँ
    • प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना
    • सड़कों के चौड़ीकरण से संबंधित परियोजनाएँ
    • 4G मोबाइल टॉवरों की स्थापना
    • विद्युत पारेषण लाइनों का बिछाया जाना।
  • निगरानी एवं नीति समीक्षा
    • समिति ने पूर्व बैठकों में जारी निर्णयों एवं निर्देशों पर आधारित कार्यवाही प्रतिवेदन रिपोर्ट (Action Taken Report) की समीक्षा की।
    • पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से परिवेश (PARIVESH) पोर्टल जैसी प्रणालियों में सुधार पर विशेष बल दिया गया।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL)

  • वैधानिक निकाय: SC-NBWL का गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत किया गया है।
  • परामर्शात्मक भूमिका: यह समिति सरकार को वन्यजीव एवं वन संरक्षण से संबंधित विषयों पर परामर्श प्रदान करती है।
  • अध्यक्ष: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री।
  • संरचना: NBWL के सदस्यों में से मंत्री द्वारा नामित अधिकतम दस सदस्य
  • संतुलित विकास: यह समिति यह सुनिश्चित करती है कि संरक्षित क्षेत्रों के भीतर एवं उनके आस-पास विकासात्मक गतिविधियाँ सतत् एवं पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी ढंग से संपन्न हों।

परिवेश (PARIVESH) पोर्टल

  • पूर्ण रूप: ‘प्रो-एक्टिव एंड रिस्पॉन्सिव फेसीलिटेशन बाय इंटरएक्टिव, वर्चुअस एंड एनवायरनमेंटल सिंगल-विंडो हब’ (PARIVESH)
  • सारांश: परिवेश एक एकीकृत एकल-खिड़की पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली है, जो पर्यावरण, वन, वन्यजीव तथा तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) से संबंधित स्वीकृतियों हेतु प्रस्तावों के ऑनलाइन प्रस्तुतीकरण, निगरानी एवं प्रसंस्करण को सक्षम बनाती है।
  • प्रारंभ: परिवेश पोर्टल को विश्व जैवईंधन दिवस, 2018 के अवसर पर डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत भारत के प्रधानमंत्री द्वारा प्रारंभ किया गया।
  • संस्थागत ढांचा: इस पोर्टल का डिजाइन एवं विकास पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) द्वारा की गई है, जिसमें राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) का तकनीकी सहयोग प्राप्त है।
  • परिवेश पोर्टल के उद्देश्य
    • पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं दक्षता को बढ़ाना।
    • ई-गवर्नेंस के माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करते हुए उत्तरदायी व्यवसाय को सुगमता प्रदान करना।
  • दायरा: परिवेश पोर्टल के माध्यम से परियोजना प्रस्तावक निम्नलिखित स्वीकृतियों हेतु आवेदन कर सकते हैं-
    • पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance – EC)
    • वन स्वीकृति (Forest Clearance – FC)
    • वन्यजीव स्वीकृति
    • तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) स्वीकृति।
    • यह पोर्टल केंद्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर संसाधित होने वाली स्वीकृतियों को एकीकृत करता है, जिसमें राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) द्वारा दी जाने वाली स्वीकृतियाँ भी सम्मिलित हैं।

संदर्भ

भारतीय पुलिस बल अपने अभियानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को तेजी से एकीकृत कर रहे हैं, उदाहरण के लिए दिल्ली पुलिस की सेफ सिटी परियोजना।

  • AI निगरानी, ​​जाँच, प्रीडिक्टिव पुलिसिंग और फोरेंसिक एनालिसिस को नया रूप दे रहा है।

कानून प्रवर्तन में AI के प्रमुख अनुप्रयोग

  • फेसियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (Facial Recognition Technology-FRT)
    • CCTV फुटेज और इमेज डेटाबेस से अपराधियों, लापता व्यक्तियों और संदिग्धों की पहचान करने के लिए उपयोग किया जाता है।
    • यह बड़ी मात्रा में उपस्थित लोगों (जैसे- स्टेडियम, सार्वजनिक कार्यक्रम) के मध्य वांछितों की पहचान करने में सक्षम है।
  • AI-सक्षम निगरानी प्रणालियाँ
    • संदिग्ध गतिविधियों, हथियारों, यातायात नियमों के उल्लंघन और दुर्घटनाओं का पता लगाने के लिए लाइव और रिकॉर्ड किए गए CCTV फुटेज का विश्लेषण करना।
    • ऑब्जेक्ट रिकग्निशन कानून प्रवर्तन एजेंसियों को विभिन्न स्थानों पर वाहनों या व्यक्तियों को ट्रैक करने की अनुमति देता है।
    • ड्रोन निगरानी से भीड़ प्रबंधन और खोज एवं बचाव अभियान बेहतर होते हैं।
  • प्रीडिक्टिव पुलिसिंग (Predictive Policing) 
    • ऐतिहासिक अपराध आँकड़ों का उपयोग करके अपराध के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करना, अपराध के प्रकार, संभावित अपराधियों और संभावित पीड़ितों का अनुमान लगाना।
    • बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार जैसे उभरते क्षेत्रों सहित अपराध रोकथाम में इसकी संभावित उपयोगिता है।
  • पुलिस व्यवस्था में रोबोट का उपयोग
    • रोबोट निगरानी और गश्त में सहायता करते हैं, साथ ही बम निरोधक और खतरनाक क्षेत्रों में प्रवेश जैसे उच्च जोखिम वाले अभियानों में भी सहायक सिद्ध होते हैं।
      • उदाहरण के लिए, दुबई के स्ट्रीट रोबोट वास्तविक समय में डेटा भेजते रहते हैं।
  • अहिंसक अपराधों का पता लगाना
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता वित्तीय धोखाधड़ी, धन शोधन, नकली मुद्रा और वस्तुओं की पहचान करने में सहायता करती है।
  • मुकदमे से पूर्व रिहाई और पैरोल संबंधी निर्णय
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग आपराधिक न्याय प्रणाली में मुकदमे से पूर्व की प्रक्रिया में और अपराधी की पैरोल की शर्तों को निर्धारित करने में किया जाता है।
      • उदाहरण के लिए, अमेरिका अपराधियों के जोखिम का आकलन करने के लिए वैकल्पिक दंडों के लिए सुधारात्मक अपराधी प्रबंधन प्रोफाइलिंग (Correctional Offender Management Profiling for Alternative Sanctions- COMPAS) का उपयोग करता है।

कानून प्रवर्तन में AI के उपयोग के प्रेरक कारक

  • अपराध की बढ़ती जटिलता: साइबर अपराध, आतंकवाद, वित्तीय अपराध और संगठित अपराध के लिए डेटा-आधारित उपकरणों की आवश्यकता होती है।
  • संसाधन संबंधी बाधाएँ: भारत में पुलिस-जनसंख्या अनुपात (प्रति 1,00,000 पर 153) संयुक्त राष्ट्र के मानक (222) से काफी कम है, जिसके कारण दक्षता बढ़ाने वाली प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता है।
  • शहरीकरण और भीड़ प्रबंधन: बड़े शहरी क्षेत्रों की आबादी, जनसभाएँ और बड़े आयोजन निगरानी और सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को बढ़ाते हैं।
  • बाजार विस्तार: ग्लोबल प्रीडिक्टिव पुलिसिंग बाजार के वर्ष 2034 तक 157 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जो AI-आधारित कानून प्रवर्तन उपकरणों पर सरकारी निर्भरता में वृद्धि को दर्शाता है।

भारतीय कानून प्रवर्तन में AI के अनुप्रयोग

  • दिल्ली सेफ सिटी प्रोजेक्ट: आपातकालीन स्थिति से संबंधित ध्वनियों और चेहरे के हाव-भाव की पहचान करने के लिए चेहरे की पहचान प्रणाली और डिस्ट्रेस डिटेक्शन टेक्नोलॉजी से लैस 10,000 AI-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
  • महाक्राइम ओएस AI (MahaCrime OS AI) (महाराष्ट्र): यह AI-संचालित जाँच मंच शिकायतों के त्वरित निपटान, जटिल डेटा विश्लेषण और जाँच प्रक्रियाओं के कुशल पालन के लिए बनाया गया है।
  • आपराधिक फोरेंसिक: AI प्रणालियों को आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम से दशकों पुराने आपराधिक डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है, जिससे पैटर्न पहचान और पूर्वानुमान विश्लेषण संभव हो पाता है।
    • उदाहरण के लिए, उँगलियों के निशान का डिजिटलीकरण और उच्च सटीकता के साथ संरक्षण।
  • साइबर और डार्क वेब निगरानी: पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) द्वारा विकसित उपकरण, खुफिया जानकारी जुटाने के लिए डीप और डार्क वेब डेटा का विश्लेषण करते हैं।
  • वित्तीय अपराध का पता लगाना: प्रवर्तन निदेशालय संदिग्ध लेन-देन, अवैध खातों और आभासी डिजिटल संपत्ति की हेरा-फेरी का पता लगाने के लिए FIU के AI/ML उपकरणों का उपयोग करता है।
  • राज्य पुलिस की अन्य तैनाती
    • उत्तर प्रदेश: अपराधियों की निगरानी के लिए त्रिनेत्र ऐप (Trinetra App)
    • दिल्ली: हॉटस्पॉट की पहचान के लिए क्राइम मैपिंग, एनालिटिक्स और प्रेडिक्टिव सिस्टम (CMAPS)

पुलिस व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सीमाएँ और जोखिम

  • एल्गोरिदम आधारित पूर्वाग्रह और भेदभाव: AI सिस्टम ऐतिहासिक अपराध डेटा पर प्रशिक्षित होते हैं, जो अक्सर मौजूदा सामाजिक और संस्थागत पूर्वाग्रहों को दर्शाता है।
  • समानता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारों का हनन: पक्षपातपूर्ण AI परिणाम, कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत और निर्दोषता की धारणा को कमजोर करते हैं।
    • स्वामित्व वाले “ब्लैक-बॉक्स” एल्गोरिदम का उपयोग आरोपियों को AI-आधारित निर्णयों को समझने या चुनौती देने से रोकता है, जिससे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन होता है।
  • निगरानी और निजता का हनन: AI-आधारित चेहरे की पहचान बड़े पैमाने पर निगरानी, ​​निरंतर ट्रैकिंग और व्यक्तियों की सहमति के बिना उनकी प्रोफाइलिंग को सक्षम बनाती है।
  • स्वचालन पर अत्यधिक निर्भरता: जनरेटिव AI-आधारित पुलिस रिपोर्ट कानूनी बारीकियों, प्रासंगिक कारकों और मूल वास्तविकताओं की अनदेखी कर सकती हैं।
    • तकनीकी नियतिवाद का खतरा, जहाँ एल्गोरिदम आउटपुट को वस्तुनिष्ठ सत्य माना जाता है।
  • जवाबदेही और शासन में कमियाँ: पारंपरिक पुलिस नियमावली के विपरीत, AI के उपयोग को नियंत्रित करने वाली कोई वैधानिक AI नियमावली या पुलिसिंग नियमावली नहीं है।
    • अपारदर्शी AI सिस्टम,  पारदर्शिता और जवाबदेही को कम करते हैं।

आगे की राह

  • कानूनी और संस्थागत सुरक्षा उपाय
    • पुलिस व्यवस्था में AI सिस्टम की खरीद या तैनाती से पूर्व, सरकारों को मानवाधिकारों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन अनिवार्य करना होगा।
    • बायोमेट्रिक डेटा के संग्रह, भंडारण और उपयोग को विनियमित करने के लिए एक मजबूत डेटा संरक्षण कानून आवश्यक है।
    • AI की तैनाती को वैधता, आवश्यकता और आनुपातिकता को मजबूत करना होगा।
  • मानव पर्यवेक्षण और जवाबदेही
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणालियों को केवल निर्णय लेने में सहायता करने वाले उपकरणों के रूप में ही कार्य करना चाहिए, न कि पुलिसिंग या न्यायिक प्रक्रियाओं में मानवीय निर्णय का स्थान लेना चाहिए।
    • स्पष्ट जवाबदेही तंत्रों के माध्यम से AI प्रणालियों द्वारा उत्पन्न त्रुटियों, दुरुपयोग या मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए।
  • पारदर्शिता और स्पष्टता
    • कानून प्रवर्तन एजेंसियों को AI द्वारा लिए गए निर्णयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि प्रभावित व्यक्ति परिणामों को समझ सकें और उन पर आपत्ति जता सकें।
    • पक्षपात और त्रुटियों की पहचान करने के लिए नियमित रूप से स्वतंत्र ऑडिट और एल्गोरिदम परीक्षण किए जाने चाहिए।
  • क्षमता निर्माण और AI साक्षरता
    • पुलिस कर्मियों और न्यायिक अधिकारियों को AI के नैतिक उपयोग, सीमाओं और संभावित हानियों के संबंध में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
    • पुलिस व्यवस्था में AI के उपयोग के बारे में जन जागरूकता, विश्वास और लोकतांत्रिक जवाबदेही स्थापित करने के लिए आवश्यक है।
  • एडॉप्टिव और संदर्भ-विशिष्ट तैनाती
    • बड़े पैमाने पर अपनाने से पूर्व पायलट आधारित तैनाती और संदर्भ-विशिष्ट परीक्षण।
    • AI से संबंधित हानि को दर्ज करने और अनुकूल जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों को सक्षम करने के लिए एक घटना डेटाबेस का निर्माण।

PW OnlyIAS विशेष

वैश्विक पहल

विश्वभर में कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ ​​(LEP) दक्षता बढ़ाने के लिए, विशेष रूप से पूर्वानुमानित पुलिसिंग, निगरानी और अपराध रोकथाम में, AI-संचालित उपकरणों को तेजी से तैनात कर रही हैं।

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: NYPD अपराध पैटर्न विश्लेषण और तैनाती निर्णयों के लिए पैटर्नइजर का उपयोग करता है; क्लियरव्यू AI जैसे AI उपकरण, बाल संरक्षण में सहायता करते हैं।
  • चीन: वास्तविक समय में पुलिसिंग और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए रोबोट, ड्रोन, डिटेंशन कैमरों का व्यापक उपयोग और शंघाई के वर्चुअल रियलिटी मॉडल का विकास।
  • दक्षिण कोरिया: वाइस रिकॉग्निशन, वीडियो एनालिसिस और वास्तविक समय डेटा प्रसंस्करण को एकीकृत करने वाले AI-संचालित गश्ती वाहनों की शुरुआत।
  • ऑस्ट्रेलिया: बाल शोषण का मुकाबला करने के लिए AI-सक्षम प्लेटफॉर्म का प्रयोग किया जा रहा है।

संदर्भ

हाल ही में शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भारत का दौरा किया इस यात्रा के दौरान, भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहरा करने पर सहमति व्यक्त की।

परिणामों की सूची

  • सामरिक रक्षा सहयोग
    • भारत और संयुक्त अरब अमीरात के मध्य सामरिक रक्षा साझेदारी ढाँचागत समझौते की शुरुआत और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने के लिए आशय-पत्र (LOP) पर हस्ताक्षर किए गए।
  • व्यापार और आर्थिक विस्तार
    • वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य।
    • पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया में MSME उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर और भारत-अफ्रीका सेतु के माध्यम से MSME संबंधों को मजबूत करना।
    • भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (गुजरात) में UAE के निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक अनुबंध-पत्र (LoI) पर हस्ताक्षर किए।
  • ऊर्जा सुरक्षा सहयोग
    • HPCL और ADNOC गैस के बीच 10 वर्ष का LNG आपूर्ति समझौता संपन्न हुआ, जिससे भारत वर्ष 2028 से प्रति वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG का आयात कर सकेगा।
  • नागरिक परमाणु सहयोग
    • बड़े रिएक्टरों और लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) सहित उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में सहयोग का विस्तार किया जाएगा।
    • यह साझेदारी भारत के शांति (SHANTI) अधिनियम, 2025 द्वारा संभव होगी, जिसमें परमाणु सुरक्षा और संचालन एवं रखरखाव शामिल हैं।
  • डिजिटल और वित्तीय एकीकरण
    • गिफ्ट सिटी में यू.ए.ई. की कंपनियों के कार्यालय: फर्स्ट अबू धाबी बैंक (FAB) गुजरात के गिफ्ट सिटी में एक शाखा खोलेगा।
    • भारत और यू.ए.ई. आपसी मान्यता प्राप्त संप्रभुता ढाँचों के तहत डिजिटल/डेटा दूतावासों की स्थापना की संभावनाओं का पता लगाएँगे।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग
    • संयुक्त अंतरिक्ष अवसंरचना विकसित करने, वाणिज्यिक अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, स्टार्ट-अप्स को समर्थन देने और प्रशिक्षण एवं विनिमय कार्यक्रमों को सक्षम बनाने के लिए IN-SPACe (भारत) और UAE अंतरिक्ष एजेंसी के बीच एक आशय-पत्र (LoI) हस्तक्षरित किया गया है।
  • खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यापार
    • भारत में एपीडा (APEDA) और संयुक्त अरब अमीरात के जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भारत से चावल तथा कृषि उत्पादों के निर्यात को सुगम बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं तकनीकी मानकों पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार
    • भारत और यू.ए.ई. ने एआई इंडिया मिशन के तहत भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की है।
    • यह सुविधा सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के लिए अनुसंधान, नवाचार और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों को बढ़ावा देगी।
  • सांस्कृतिक सहयोग
    • संयुक्त अरब अमीरात राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (लोथल) के लिए कलाकृतियाँ प्रदान करेगा।
    • अबू धाबी में हाउस ऑफ इंडिया’ स्थापित करने के लिए समझौता।
    • युवा आदान-प्रदान, विश्वविद्यालय संबंधों और छात्र गतिशीलता को बढ़ावा देना।

भारत-UAE द्विपक्षीय संबंध

  • राजनीतिक संबंध
    • राजनयिक संबंध (1972-73): वर्ष 1972 में स्थापित, दोनों देशों में भारत का दूतावास खोला गया।
    • वर्ष 2015 के बाद का परिवर्तन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2015 में संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा, जो 34 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी, ने एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत को चिह्नित किया।
  • बहुपक्षीय सहयोग
    • ये दोनों BRICS, I2U2 (भारत-इजरायल-यूएई-अमेरिका), UFI त्रिपक्षीय (यू.ए.ई.-फ्राँस-भारत) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEEC) जैसे प्रमुख समूहों का हिस्सा हैं।

  • रक्षा सहयोग
    • गल्फ स्टार-1 (Gulf Star-1), पासेक्स (PASSEX), डेजर्ट साइक्लोन (भारत-यूएई) और डेजर्ट नाइट (भारत-फ्राँस-यू.ए.ई.) जैसे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यास समुद्री सुरक्षा और अंतरसंचालनीयता को बढ़ाते हैं।
  • आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंध
    • द्विपक्षीय व्यापार 1970 के दशक में 180 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 100.05 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
    • संयुक्त अरब अमीरात वर्तमान में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, जबकि भारत संयुक्त अरब अमीरात का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
  • निवेश सहयोग
    • फरवरी 2024 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) (अगस्त 2024 से प्रभावी) निवेशकों के संरक्षण और पारदर्शिता को मजबूत करती है।
    • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश: संयुक्त अरब अमीरात भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सातवाँ सबसे बड़ा स्रोत है, जिसमें वर्ष 2000-2025 के बीच कुल 22.85 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ है।
    • भारतीय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (ODI): संयुक्त अरब अमीरात में भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (ODI) वर्ष 2000-2025 के मध्य 16.54 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
    • भारत-संयुक्त अरब अमीरात व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) (2022): व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर 18 फरवरी, 2022 को हस्ताक्षर किए गए, जो 1 मई, 2022 से प्रभावी हुआ।
      • 80 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर टैरिफ या तो कम कर दिए गए अथवा समाप्त कर दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप मई 2022 से अप्रैल 2023 के मध्य गैर-तेल व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
      • CEPA का लक्ष्य वर्ष 2030 तक गैर-तेल व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाना है।
  • वित्तीय और डिजिटल कनेक्टिविटी
    • स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (2023): RBI और यू.ए.ई. के केंद्रीय बैंक के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत रुपये और दिरहम में व्यापार संभव हुआ।
    • पहलें
      • UPI को यू.ए.ई. की ANI भुगतान प्रणाली के साथ एकीकृत करना।
      • रुपे (भारत) और जयवान (यू.ए.ई.) कार्ड नेटवर्क को आपस में जोड़ना।
    • प्रेषण: वर्ष 2024 में, भारतीय प्रवासियों ने संयुक्त अरब अमीरात से भारत को 21.6 बिलियन डॉलर भेजे, जो देश में कुल डॉलर प्रवाह का 19.2% था, जिससे यह अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बन गया।
  • ऊर्जा सुरक्षा: संयुक्त अरब अमीरात कच्चे तेल का भारत का चौथा सबसे बड़ा स्रोत और LNG और LPG का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।
  • सांस्कृतिक संबंध
    • भारतीय प्रवासी: संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 43 लाख भारतीय रहते हैं, जो इसे सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय बनाता है।
    • सांस्कृतिक उपलब्धि: अबू धाबी में BAPS मंदिर का उद्घाटन (2024) सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने का प्रतीक है।
  • शिक्षा सहयोग
    • भारतीय विद्यालय: संयुक्त अरब अमीरात में 108 भारतीय पाठ्यक्रम (CBSE और केरल बोर्ड) वाले विद्यालय संचालित हैं, जिन्हें दुबई स्थित CBSE क्षेत्रीय कार्यालय का सहयोग प्राप्त है।
    • उच्च शिक्षा: संयुक्त अरब अमीरात में IIT दिल्ली-अबू धाबी परिसर, BITS पिलानी, मणिपाल, एमिटी, सिम्बायोसिस और IIM अहमदाबाद (दुबई) तथा भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT एक्सपो सिटी दुबई) जैसे संस्थान कार्यरत हैं।

भारत-यू.ए.ई. संबंधों के लिए चुनौतियाँ

  • व्यापार में गैर-टैरिफ बाधाएँ (NTBs): संयुक्त अरब अमीरात के सैनिटरी एंड फाइटोसैनिटरी (SPS) उपायों और व्यापार में तकनीकी बाधाओं (TBT) ने भारतीय निर्यात को सीमित कर दिया है।
    • विशेष रूप से कुक्कुट पालन, मांस और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों में हलाल प्रमाणन अनिवार्य है।
  • चीन की चेक-बुक कूटनीति: खाड़ी देशों में कम ब्याज वाले ऋणों, अवसंरचना वित्तपोषण और निवेशों के आक्रामक उपयोग ने प्रतिस्पर्द्धा को तीव्र कर दिया है।
    • बंदरगाहों, रसद, दूरसंचार और अवसंरचना जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी कंपनियाँ अक्सर भारतीय कंपनियों को पीछे धकेल देती हैं, जिससे इस क्षेत्र में भारत की आर्थिक उपस्थिति सीमित हो जाती है।
  • पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात की वित्तीय सहायता: संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान को महत्त्वपूर्ण ऋणदाता बना हुआ है, जो सीमा पार आतंकवाद में पाकिस्तान की संलिप्तता को देखते हुए भारत के लिए चिंता का विषय है।
    • जनवरी 2025 में, संयुक्त अरब अमीरात ने 2 अरब डॉलर के ऋण की चुकौती अवधि बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
    • भारत को यह आशंका है कि इस तरह की वित्तीय सहायता अप्रत्यक्ष रूप से उसके राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को नुकसान पहुँचा सकती है।
  • पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय अस्थिरता: ईरान और अमेरिका की अप्रत्यक्ष भागीदारी वाले इजरायल-फिलिस्तीन-लेबनान संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं।
    • ईरान में जारी संकट क्षेत्र की स्थिरता को और भी चुनौती देता है।
  • व्यापार असंतुलन और आर्थिक समायोजन: व्यापार की मात्रा में वृद्धि के बावजूद, व्यापार घाटा लगातार बना हुआ है।
    • वित्त वर्ष 2025 में संयुक्त अरब अमीरात को भारत का कुल माल निर्यात 36.63 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 63.40 अरब डॉलर रहा, जिससे 26.76 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।
  • कफाला प्रणाली और श्रमिक कल्याण संबंधी चिंताएँ: कफाला प्रायोजन प्रणाली भारतीय प्रवासी श्रमिकों, विशेषकर श्रमिक वर्ग के अधिकारों और कल्याण को लेकर चिंताएँ उत्पन्न करती रहती है।

आगे की राह

  • रणनीतिक संवाद तंत्रों को संस्थागत रूप प्रदान करना: भारत को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ अमेरिका और रूस के साथ स्थापित व्यवस्थाओं के समान एक संस्थागत 2+2 संवाद (विदेश और रक्षा मंत्रियों का) स्थापित करना चाहिए, ताकि तेजी से बदलते पश्चिम एशियाई परिदृश्य में सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, रक्षा सहयोग और रणनीतिक चिंताओं को संबोधित करने के लिए एक संरचित मंच प्रदान किया जा सके।
  • श्रम कल्याण और मानवाधिकारों पर संवाद को बढ़ावा देना: भारत को कफाला प्रायोजन प्रणाली से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए यू.ए.ई. अधिकारियों के साथ निरंतर और रचनात्मक संवाद में संलग्न होना चाहिए।
    • भारत, UAE द्वारा किए गए हालिया सुधारों को मान्यता देते हुए, अधिक श्रम गतिशीलता, बेहतर कार्य परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के साथ संरेखण की वकालत कर सकता है।
  • व्यापार विविधीकरण को बढ़ावा देना: CEPA के प्रभावी कार्यान्वयन में गैर-टैरिफ बाधाओं (NTBs) के उपयोग में पारदर्शिता और पूर्वानुमान में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। इसके लिए लेबलिंग, लाइसेंसिंग, आयात निगरानी और पर्यवेक्षण आवश्यकताओं पर नियमित सूचना साझाकरण आवश्यक है, जिससे भारतीय निर्यात के लिए सुगम बाजार पहुँच सुनिश्चित हो सके।
  • आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना: दोनों देशों को व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए अवसंरचना, रसद, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा तथा स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में संयुक्त उद्यमों एवं रणनीतिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
    • संयुक्त अरब अमीरात की पूँजी अधिशेष और भारत की विशाल बाजार तथा विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाकर पारस्परिक आर्थिक लचीलापन सुनिश्चित किया जा सकता है और उच्च मूल्य वाले आयातों पर निर्भरता कम की जा सकती है।

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