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Jan 23 2026

Title Subject Paper
संक्षेप में समाचार
अटल पेंशन योजना (APY) social justice, GS Paper 3,GS Paper 2,
BNS की धारा 69 Polity and governance ​, GS Paper 2,
इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) international Relation, GS Paper 2,

पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971

मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा ने 21 जनवरी, 2026 को अपना राज्य दिवस मनाया, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 के अंतर्गत उनके गठन का प्रतीक है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 के बारे में

  • यह अधिनियम भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के पुनर्गठन हेतु प्रशासनिक दक्षता, जातीय आकांक्षाओं और क्षेत्रीय विकास को संबोधित करने के लिए अधिनियमित किया गया था।
  • राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का गठन (धारा 3–8)
    • मणिपुर और त्रिपुरा को केंद्रशासित प्रदेश से पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किया गया।
    • मेघालय को असम से अलग कर राज्य का दर्जा प्रदान किया गया।
    • मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को केंद्रशासित प्रदेश के रूप में स्थापित किया गया (दोनों वर्ष 1987 में राज्य बने)।
  • न्यायिक पुनर्गठन (धारा 28): असम, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के लिए एक साझा गुवाहाटी उच्च न्यायालय की स्थापना की गई।
    • मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के लिए अलग-अलग उच्च न्यायालयों की स्थापना बाद में 2012 के संशोधन अधिनियम (जो वर्ष 2013 से प्रभावी हुआ) द्वारा संभव हुई।
  • स्वायत्त जिले (धारा 71): मेघालय में स्वायत्त जिला परिषदों के पुनर्गठन हेतु छठी अनुसूची में संशोधन किया गया।
  • संस्थागत समर्थन: इस अधिनियम के साथ ही क्षेत्रीय विकास, संपर्कता और सुरक्षा को बढ़ावा देने हेतु उत्तर-पूर्वी परिषद अधिनियम, 1971 भी पारित किया गया।

इस अधिनियम ने भारत के उत्तर-पूर्व में राजनीतिक स्थिरता, पहचान की मान्यता और संतुलित विकास के लिए संवैधानिक आधार प्रदान किया।

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य ‘इको-सेंसिटिव जोन’ घोषित

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य कोइको-सेंसिटिव जोन’ (ESZ) घोषित करने संबंधी अधिसूचना जारी की है।

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के बारे में

  • अवस्थिति: यह मुख्यतः राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित है तथा उदयपुर और पाली जिलों के कुछ हिस्सों में भी विस्तृत है।
    • ऐतिहासिक कुंभलगढ़ किले (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल) को चारों ओर विस्तृत है।
  • भू-विशेषता: यह अभयारण्य अरावली पर्वतमाला में स्थित है और अरावली की चार उप-पर्वतमालाओं—कुंभलगढ़, सादड़ी, देसूरी और बोखाड़ा—को समाहित करता है।
  • बनास और लूणी नदी प्रणालियों के लिए जलग्रहण कार्यों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण।
  • पारिस्थितिकी तंत्र: खाथियार–गिर शुष्क पर्णपाती वन पारिस्थितिकी क्षेत्र  का भाग।
  • वन्यजीव
    • स्तनधारी: तेंदुआ, भेड़िया, सुस्त भालू, धारीदार लकड़बग्घा, सियार, वाइल्ड कैट, साँभर, नीलगाय, चिंकारा, भारतीय पैंगोलिन और ‘इंडियन हेयर’।
    • पक्षियों में पेंटेड फ्रैंकोलिन, ग्रे वाइल्डफाउल, व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर तथा अनेक अन्य स्थायी और प्रवासी पक्षी प्रजातियाँ शामिल हैं।
  • इतिहास: वर्ष 1971 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया।
  • संरक्षण स्थिति: हाल ही में अभयारण्य की सीमा से 1 किमी. तक के क्षेत्र को इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) घोषित किया गया है।

इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) के बारे में

  • परिभाषा: इको-सेंसिटिव जोन संरक्षित क्षेत्रों के आस-पास अधिसूचित बफर या संक्रमण क्षेत्र होते हैं।
    • संरक्षित क्षेत्रों में राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, टाइगर रिजर्व और जैवमंडल रिजर्व शामिल हैं।
  • उद्देश्य: ये संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र और मूल संरक्षण क्षेत्रों पर मानव गतिविधियों के नकारात्मक प्रभाव को कम करने हेतुशॉक एब्जॉर्बर” के रूप में कार्य करते हैं, साथ ही विनियमित सतत् विकास की अनुमति देते हैं।
  • कानूनी आधार: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा अधिसूचित।
    • यह अवधारणा राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (2002–2016) से प्रेरित है, जिसमें संरक्षित क्षेत्र की सीमाओं से 10 किमी. के भीतर के क्षेत्रों को ESZ घोषित करने की सिफारिश की गई थी।
  • ESZ की चौड़ाई: ESZ की वास्तविक चौड़ाई स्थल-विशिष्ट होती है, जो पारिस्थितिकी संवेदनशीलता और राज्य सरकारों से परामर्श पर आधारित होती है।
    • यह 10 किमी. से कम या अधिक हो सकती है, परंतु मूल संरक्षित सीमा के चारों ओर 1 किमी. से कम नहीं होनी चाहिए।

ESZ में गतिविधियाँ

  • वर्ष 2011 के MoEFCC दिशा-निर्देशों और अधिसूचनाओं के अनुसार तीन श्रेणियों में वर्गीकृत:
    • निषिद्ध: वाणिज्यिक खनन, पत्थर खदानें, आरा मिलें, प्रदूषणकारी उद्योग (वायु/जल/मृदा/ध्वनि), बड़ी जलविद्युत परियोजनाएँ, वाणिज्यिक ईंधन लकड़ी का संग्रह/उपयोग।
    • विनियमित: पूर्व अनुमति आवश्यक गतिविधियाँ (जैसे पर्यटन/रिसॉर्ट, भवन/सड़क निर्माण, वृक्ष कटाई, कुछ कृषि प्रथाएँ आदि)।
    • अनुमत: संचालित पारंपरिक/ग्रामीण गतिविधियाँ, पर्यावरण-अनुकूल प्रथाएँ, संरक्षण के अनुकूल लघु-स्तरीय विकास।

भारत में  ‘एंट फ्लाइज’ (Ant flies) की दो नई दुर्लभ प्रजातियों की खोज

केरल और तमिलनाडु के शोधकर्ताओं ने एंट फ्लाइज’ (Ant flies) की दो पहले अज्ञात प्रजातियों मेटाडॉन घोरपाडेई (Metadon Ghorpadei) और मेटाडॉन रीमेरी (Metadon reemeri) की पहचान की है।

एंट फ्लाइज’ (Microdontinae) की प्रमुख विशेषताएँ 

  • वर्गीकरण: ये सर्फिडी’ (हॉवरफ्लाइज) कुल के अंतर्गत माइक्रोडोंटिनाई उपकुल से संबंधित हैं।
  • इन मक्खियों की जीवन-शैली अत्यंत विशिष्ट होने के कारण ये अत्यंत दुर्लभ हैं।
    • इनके लार्वा चींटी के घोंसलों के भीतर रहते हैं और चींटी के अंडों, लार्वा और प्यूपा से पोषण ग्रहण करते हैं।
  • वयस्क मक्खियाँ फूलों पर कम जाती हैं और प्रायः चींटी कॉलोनियों के आस-पास ही रहती हैं, जिससे इन्हें देखना कठिन हो जाता है।
  • पारिस्थितिक भूमिका:
    • ये खोजें शहरी हरित क्षेत्रों और संरक्षित जैव-विविधता हॉटस्पॉट्स दोनों के जैव-विविधता महत्व को रेखांकित करती हैं।

मेटाडॉन घोरपाडेई (Metadon Ghorpadei)

  • स्थान: नॉर्दर्न रिज फॉरेस्ट, दिल्ली।
    • यह सड़क, यातायात और आवासीय क्षेत्रों के बीच स्थित एक बाधित शहरी वन क्षेत्र है।
  • आवास: कँटीले झाड़ीदार वन के भीतर मध्यम घनत्व वाली वनस्पति वाले क्षेत्र में पाया गया।
  • नामकरण: प्रख्यात भारतीय डिप्टेरिस्ट डॉ. के. जी. घोरपड़े के सम्मान में इसका नाम मेटाडॉन घोरपाडेई रखा गया।
  • महत्त्व: यह शहरी वनों के छिपे हुए पारिस्थितिक मूल्य को प्रदर्शित करता है, जिन्हें प्रायः शहरों में केवल हरित आवरण तक सीमित संरक्षण दृष्टि के कारण अप्रभावी किया जाता है।
  • खतरे: शहरी विखंडन और मानव दबाव के कारण दिल्ली रिज (अरावली का विस्तार) अपने मूल क्षेत्रफल के लगभग 1% तक रह गया है।

मेटाडॉन रीमेरी (Metadon reemeri)

  • स्थान: सिरुवानी पहाड़ियाँ, पश्चिमी घाट, तमिलनाडु।
    • यह उच्च स्थानिकता (Endemism) वाला वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त जैव-विविधता हॉटस्पॉट है।
  • आवास: संरक्षित क्षेत्र, किंतु माइक्रोडोंटिनाई उपकुल जैसे कम अध्ययन किए गए कीट समूह अभी भी अपर्याप्त रूप से प्रलेखित हैं।
  • नामकरण: माइक्रोडोंटिनाई और हॉवरफ्लाइज के वर्गीकरण हेतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. एम. रीमर के सम्मान में इसका नाम ‘मेटाडॉन रीमेरी’ रखा गया।
  • महत्त्व: यह दर्शाता है कि संरक्षित क्षेत्रों में भी दुर्लभ प्रजातियों की खोज अब भी संभव है।

विली रिसर्च हीरोज पुरस्कार, 2025

भारतीय जन-स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पूर्व स्टाफ के सदस्य रहे हैं, ने ‘विली रिसर्च हीरोज पुरस्कार 2025’ (Wiley Research Heroes Prize) प्राप्त किया है।

वाइली रिसर्च हीरोज पुरस्कार के बारे में

  • पुरस्कार का स्वरूप: यह पुरस्कार उन शोधकर्ताओं को वैश्विक मान्यता प्रदान करता है, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि शोध कार्य समावेशी, नवाचारी तथा प्रभावशाली हो।
  • कुल पुरस्कारार्थी: विभिन्न श्रेणियों में वैश्विक स्तर पर पाँच शोधकर्ताओं का चयन किया जाता है।
  • पुरस्कार श्रेणियाँ
    • ओपन साइंस एडवोकेट पुरस्कार: यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को सम्मानित करता है, जो शोध में पारदर्शिता, पुनरुत्पादकता तथा मुक्त अभिगम (ओपन एक्सेस) को बढ़ावा देते हैं।
    • इक्विटी एंड इन्क्लूजन इन रिसर्च पुरस्कार: यह पुरस्कार शोध को अधिक समावेशी, विविधतापूर्ण तथा न्यायसंगत बनाने के प्रयासों को मान्यता देता है।
    • करेज इन रिसर्च’ पुरस्कार: यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने शोध के लिए सिद्धांतगत साहस दिखाया या प्रतिकूल परिस्थितियों के उपरांत अनुसंधान कार्य किया।
    • रिसर्च कल्चर पुरस्कार: यह पुरस्कार सकारात्मक एवं सहायक शोध वातावरण के निर्माण तथा अंतर्विषयक सहयोग को प्रोत्साहित करने वालों को प्रदान किया जाता है।
    • इंपैक्ट बियॉन्ड एकेडेमिया पुरस्कार: यह पुरस्कार उन शोधकर्ताओं को दिया जाता है, जिनके कार्य का नीति-निर्माण, उद्योग अथवा समाज पर प्रत्यक्ष एवं ठोस प्रभाव पड़ा हो।

डॉ. चंद्रकांत लहरिया के बारे में

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के पूर्व स्टाफ सदस्य।
  • डॉ. लहरिया अब तक इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले पहले और एकमात्र भारतीय हैं।
  • उन्होंने इंपैक्ट बियॉन्ड एकेडेमिया” श्रेणी में यह पुरस्कार प्राप्त किया।
  • स्पष्ट नीतिगत प्रभाव वाले उत्कृष्ट शोध योगदान के लिए उनका चयन किया गया।
  • मुख्य शोध योगदान
    • टीकाकरण नीति: टीकाकरण रणनीतियों तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण पर अनुसंधान।
    • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: स्वास्थ्य परिणामों में सुधार हेतु सशर्त नकद अंतरण योजनाओं पर अध्ययन।
    • प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल: प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर साक्ष्य-आधारित शोध कार्य।

इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार

मोजांबिक की मानव अधिकार कार्यकर्ता एवं मानवतावादी ग्रासा माशेल को इंदिरा गांधी स्मारक ट्रस्ट की घोषणा के अनुसार इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार, 2025 के लिए चयनित किया गया है।

इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार के बारे में

  • अन्य नाम: इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण एवं विकास पुरस्कार।
  • स्थापना: यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा वर्ष 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के असाधारण राष्ट्रीय एवं वैश्विक योगदानों की स्मृति में स्थापित किया गया।
  • चयन निकाय: पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन की अध्यक्षता वाली अंतरराष्ट्रीय जूरी द्वारा चयन।
  • पुरस्कार के घटक
    • आर्थिक पुरस्कार: इस पुरस्कार के अंतर्गत ₹10 मिलियन (₹1 करोड़) अथवा इसके समकक्ष विदेशी मुद्रा प्रदान की जाती है।
    • ट्रॉफी एवं प्रशस्ति-पत्र: पुरस्कार में विशेष रूप से डिजाइन की गई ट्रॉफी तथा योगदान को मान्यता देने वाला औपचारिक प्रशस्ति-पत्र सम्मिलित है।
  • ट्रॉफी का प्रतीकात्मक महत्त्व
    • यह ट्रॉफीडेड हेमेटाइट जैस्पर’ पत्थर द्वारा निर्मित है, वही पत्थर जिसका उपयोग नई दिल्ली स्थित शक्ति स्थल में इंदिरा गांधी की समाधि पर किया गया है।
  • पात्रता एवं पुरस्कार का स्वरूप
    • सार्वभौमिक पात्रता: यह पुरस्कार किसी भी व्यक्ति अथवा संगठन को राष्ट्रीयता, नस्ल या धर्म के भेद के बिना प्रदान किया जा सकता है।
    • आवृत्ति: उपयुक्त नामांकन तथा जूरी की संस्तुति के अधीन यह पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
  • नामांकन प्रक्रिया: पुरस्कार हेतु अनुशंसाएँ निम्नलिखित द्वारा प्रस्तुत की जा सकती हैं:
    • इंदिरा गांधी पुरस्कार के पूर्व प्राप्तकर्ता।
    • जूरी के पूर्व सदस्य।
    • भारतीय संसद के किसी भी सदन के सदस्य।
    • संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों की राष्ट्रीय संसदों के सदस्य।
    • शांति एवं अंतरराष्ट्रीय समझ को बढ़ावा देने वाले प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठन।
    • जूरी द्वारा आमंत्रित या अनुमत व्यक्ति अथवा संगठन।

प्रमुख पूर्व पुरस्कार विजेता

  • मिखाइल गोर्बाचेव (1987): परमाणु निरस्त्रीकरण एवं शीतयुद्ध की समाप्ति में योगदान के लिए।
  • यूनिसेफ (1989): वैश्विक बाल कल्याण एवं मानवीय कार्यों के लिए।
  • डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन (1999): पादप आनुवंशिकी के क्षेत्र में तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान के लिए।
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (2014): विकास हेतु अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए।
  • प्रथम गैर-सरकारी संगठन (2021): शिक्षा एवं अधिगम परिणामों में योगदान के लिए।
  • इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एवं ट्रेंड नर्सेज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (2022): कोविड-19 महामारी के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा हेतु।
  • मिशेल बाचेलेट (2024): चिली की पूर्व राष्ट्रपति एवं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त।

ग्रासा माशेल के बारे में

  • राष्ट्रीयता: मोजांबिक।
  • भूमिका:
    • मोजांबिक की प्रथम महिला (राष्ट्रपति समोरा माशेल की पत्नी)।
    • दक्षिण अफ्रीका की प्रथम महिला (नेल्सन मंडेला की पत्नी)।
  • प्रतिष्ठा
    • एक प्रतिष्ठित अफ्रीकी राजनेत्री एवं मानवाधिकार समर्थक के रूप में व्यापक रूप से मान्य।
  • मुख्य योगदान
    • बच्चों एवं सशस्त्र संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र अध्ययन (1990 का दशक): सशस्त्र संघर्ष के बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव पर संयुक्त राष्ट्र के एक महत्त्वपूर्ण अध्ययन का नेतृत्व किया।
    • महिला सशक्तीकरण, बाल विकास तथा सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देने वाले संस्थानों की स्थापना एवं नेतृत्व।

संदर्भ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030–31 तक जारी रखने की स्वीकृति प्रदान की है।

अटल पेंशन योजना (APY) के बारे में

  • प्रारंभ: वर्ष 2015, भारत सरकार द्वारा
  • प्रकृति: वृद्धावस्था आय सुरक्षा हेतु स्वैच्छिक, अंशदायी पेंशन योजना
  • प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना
  • नोडल मंत्रालय: वित्त मंत्रालय (भारत सरकार)
  • प्रशासन: पेंशन फंड विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA)।
  • ढाँचा: राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) की संरचना के अंतर्गत कार्यान्वित।
  • आधार
    • असंगठित कार्यबल में दीर्घायु जोखिम तथा सेवानिवृत्ति सुरक्षा के अभाव को संबोधित करती है।
    • औपचारिक रोजगार प्रणालियों से बाहर के श्रमिकों तक पेंशन कवरेज का विस्तार करती है।
  • उद्देश्य
    • वृद्धावस्था में सुनिश्चित आय प्रदान करना और सेवानिवृत्ति पश्चात् वित्तीय निर्भरता को कम करना।
    • असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों में दीर्घकालिक बचत संस्कृति को प्रोत्साहित करना।
    • विशेष रूप से ग्रामीण एवं निम्न-आय वाले वर्गों में बैंकिंग तथा पेंशन जैसे आर्थिक लाभों तक पहुँच के माध्यम से वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करना।
  • दायरा (अप्रैल 2025 तक)
    • APY के अंतर्गत 7.65 करोड़ से अधिक अभिदाता सम्मिलित हो चुके हैं तथा कुल ₹45,974.67 करोड़ का कोष संचित किया गया है।
    • महिला सहभागिता कुल अभिदाताओं का लगभग 48% है।

अटल पेंशन योजना (APY) की प्रमुख विशेषताएँ

  • लक्षित लाभार्थी:
    • मुख्यतः वे असंगठित क्षेत्र के श्रमिक जिनके पास औपचारिक पेंशन की सुविधा नहीं है।
    • पात्रता: 18–40 वर्ष आयु के भारतीय नागरिक।
    • आयकर दाताओं को 1 अक्टूबर 2022 से नामांकन से बाहर रखा गया है।
  • परिभाषित पेंशन लाभ
    • 60 वर्ष की आयु के पश्चात सुनिश्चित मासिक पेंशन: ₹1,000 / ₹2,000 / ₹3,000 / ₹4,000 / ₹5,000।
  • अंशदान संरचना
    • न्यूनतम अंशदान अवधि: 20 वर्ष।
    • अंशदान की राशि प्रवेश आयु तथा चयनित पेंशन श्रेणी पर निर्भर करती है।
    • शीघ्र नामांकन से अंशदान भार कम होता है।
  • सरकारी सह-अंशदान: 1 जून 2015 से 31 मार्च 2016 के मध्य योजना में सम्मिलित अभिदाताओं के लिए सरकार ने पाँच वर्षों तक अभिदाता के अंशदान का 50% या ₹1,000 प्रतिवर्ष (जो भी कम हो) सह-अंशदान के रूप में प्रदान किया।
  • पात्रता शर्तें
    • स्वतः-डेबिट सुविधा सहित बैंक खाता अनिवार्य।
    • अंशदान: मासिक / त्रैमासिक / अर्द्धवार्षिक।
  • निकासी प्रावधान
    • 60 वर्ष से पूर्व निकासी केवल मृत्यु या गंभीर बीमारी की स्थिति में अनुमन्य है।
    • स्वैच्छिक निकास की स्थिति में केवल स्वयं का अंशदान एवं उस पर अर्जित ब्याज प्राप्त होगा; सरकारी सह-अंशदान जब्त हो जाएगा।
  • नामांकन सुविधा: अभिदाता अपनी मृत्यु के पश्चात् पेंशन लाभ अथवा संचित कोष प्राप्त करने हेतु नामित व्यक्ति निर्धारित कर सकता है।
  • कर लाभ: आयकर अधिनियम की धारा 80C तथा धारा 80CCD के अंतर्गत, निर्धारित शर्तों के अधीन कर कटौती उपलब्ध है।

जागरूकता एवं पहुँच उपाय

  • संस्थागत जागरूकता पहल: PFRDA द्वारा नामांकन को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य एवं जिला स्तर पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यशालाएँ तथा आउटरीच शिविर आयोजित किए गए हैं।
  • डिजिटल सक्षमकरण: पहुँच में सुधार हेतु e-APY, नेट बैंकिंग, मोबाइल अनुप्रयोगों तथा बैंक पोर्टलों के माध्यम से ऑनलाइन ऑनबोर्डिंग सुविधाएँ सक्रिय की गई हैं।
  • सूचना प्रसार: हिंदी, अंग्रेजी तथा 22 अनुसूचित भाषाओं में बहुभाषी APY पर्चे जारी किए गए हैं; साथ ही QR-कोड आधारित APY सेवाओं तक पहुँच, पॉडकास्ट, वीडियो तथा कॉल सेंटर सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।

संदर्भ

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 69 तथा उससे संबंधित धाराओं के अंतर्गत आरोपित एक अधिवक्ता के विरुद्ध दर्ज FIR और आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

  • एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि एक अधिवक्ता ने विवाह का झाँसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, किंतु बाद में उससे विवाह करने से इनकार कर दिया।

धारा 69 BNS पर कर्नाटक उच्च न्यायालय का निर्णय

  • उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रेम की विफलता या किसी संबंध का टूटना, अपने-आप में, BNS की धारा 69 के अंतर्गत कोई आपराधिक अपराध नहीं है।
    • कपट (Deceit) केंद्रीय तत्त्व है: यह प्रावधान धोखाधड़ी और यौन शोषण को लक्षित करता है, न कि ऐसे सहमति-आधारित संबंधों को, जो बाद में समाप्त हो जाएँ।
  • विवाह का झूठा वादा केवल तभी दंडनीय है जब वह शुरू से ही उसे पूरा करने के उद्देश्य के बिना किया गया हो।
  • केवल बाद में विवाह से इनकार करना, अपने-आप में, आपराधिक उद्देश्य को सिद्ध नहीं करता है।
  • प्रतिगामी अपराधीकरण: यह प्रावधान विवाद उत्पन्न होने के बाद सहमति-आधारित संबंधों को प्रतिगामी रूप से आपराधिक ठहराने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है।
  • आपराधिक उद्देश्य (mens rea): न्यायालयों को केवल रिश्ते के परिणाम की ही नहीं, बल्कि सहमति के समय के आपराधिक उद्देश्य (mens rea) की भी जाँच करनी चाहिए।
  • दुरुपयोग के विरुद्ध सुरक्षा: यह निर्णय धारा 69 BNS के दुरुपयोग के विरुद्ध एक सुरक्षा-कवच के रूप में कार्य करता है, साथ ही यौन शोषण से संरक्षण को बनाए रखता है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 69 के बारे में

  • धारा 69, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (जो 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी हुई) का एक नया प्रावधान है, जिसने भारतीय दंड संहिता (IPC) का स्थान लिया है।
  • मुख्य अपराध: कपटपूर्ण साधनों द्वारा प्राप्त यौन संबंध को अपराध घोषित करता है, जिसमें विवाह का झूठा वादा भी सम्मिलित है।
  • केंद्रबिंदु: इसका ध्यान धोखाधड़ी, कपट और शोषण पर है, न कि भावनात्मक आघात या संबंध की विफलता पर।

संदर्भ

स्पेन औपचारिक रूप से इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव’ (IPOI) में शामिल हो गया है तथा उसने भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया है।

इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) के बारे में

  • इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) का शुभारंभ भारत द्वारा नवंबर 2019 में आसियान के नेतृत्व वाले पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS), बैंकॉक में किया गया था।
  • उद्देश्य: मुक्त और समावेशी इंडो-पैसिफिक को बढ़ावा देना, समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना, नियम-आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करना तथा समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता एवं सतत् विकास को प्रोत्साहित करना।
  • स्वरूप और ढाँचा
    • IPOI एक गैर-संधि-आधारित, स्वैच्छिक और अनुकूलित ढाँचा है।
    • यह कोई नया संस्थान स्थापित नहीं करता और मुख्यतः EAS तंत्र पर निर्भर करता है, जिसमें आसियान सदस्य तथा आठ संवाद साझेदार शामिल हैं।
    • औपचारिक गठबंधनों के स्थान पर साझा समझ और व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से सामंजस्य पर बल देता है।
  • दार्शनिक आधार: IPOI भारत की व्यापक समुद्री परिकल्पना सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) को क्रियान्वित करता है तथाइंडो-पैसिफिक’ पर भारत के बढ़े हुए रणनीतिक फोकस का संकेत देता है।

IPOI के स्तंभ

  • स्तंभ-आधारित दृष्टिकोण: IPOI सात विषयगत स्तंभों के निकट संरचित है, जिनमें प्रत्येक स्तंभ का नेतृत्व एक या अधिक देश स्वैच्छिक रूप से करते हैं, जबकि अन्य देश भागीदार के रूप में जुड़ते हैं।
  • विस्तारित सहभागिता: ग्रीस हाल ही में IPOI में शामिल हुआ है और उससे किसी एक स्तंभ का सह-नेतृत्व करने की अपेक्षा है, जबकि दक्षिण कोरिया सहभागिता पर विचार कर रहा है, जो इस पहल की बढ़ती स्वीकृति को दर्शाता है।

स्तंभ

नेतृत्वकर्ता देश

समुद्री सुरक्षा भारत, यूनाइटेड किंगडम
समुद्री पारिस्थितिकी ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड
समुद्री संसाधन फ्राँस, इंडोनेशिया
क्षमता निर्माण एवं संसाधन साझाकरण जर्मनी
आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन भारत, बांग्लादेश
विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं शैक्षणिक सहयोग इटली, सिंगापुर
व्यापार, कनेक्टिविटी  एवं समुद्री परिवहन जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका

विकास और रणनीतिक अभिसरण

  • क्षेत्रीय दृष्टिकोणों के साथ संरेखण: IPOI, इंडो-पैसिफिक पर आसियान दृष्टिकोण (AOIP) के साथ घनिष्ठ रूप से संरेखित है, जिससे आसियान की केंद्रीयता और समावेशिता को सुदृढ़ किया जाता है।
  • अन्य समूहों के साथ समन्वय: यह पहल क्वाड के समुद्री एजेंडे, इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) के चयनित स्तंभों तथा अन्य हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्रीय तंत्रों की पूरक है।
  • द्विपक्षीय और बहुपक्षीय परिणाम: ‘ऑस्ट्रेलिया–भारत इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव’ साझेदारी (AIIPOIP) विशेषकर समुद्री पारिस्थितिकी के क्षेत्र में IPOI-प्रेरित सहयोग का उदाहरण है।
  • चीन की स्थिति: चीन ने वर्ष 2021 में IPOI को स्वीकार किया, किंतु औपचारिक समर्थन या विरोध व्यक्त नहीं किया, जो रणनीतिक सावधानी को दर्शाता है।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र

  • इंडो-पैसिफिक एक रणनीतिक और भू-राजनीतिक अवधारणा है, जिसके अनेक अर्थ हैं और यह कोई स्थिर भौगोलिक इकाई नहीं है।
  • इंडो-पैसिफिक को हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को समाहित करने वाले परस्पर-संबद्ध क्षेत्र के रूप में समझा जाता है, जिसे मुख्यतः मलक्का जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री मार्ग जोड़ते हैं।
  • भारत की परिभाषा: भारत इंडो-पैसिफिक को अफ्रीका के पूर्वी तट से लेकर अमेरिका के पश्चिमी तट तक विस्तारित मानता है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका की परिभाषा: संयुक्त राज्य अमेरिका इंडो-पैसिफिक को भारत के पश्चिमी तट से अमेरिका तक विस्तारित मानता है, जो अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड की भौगोलिक सीमा के अनुरूप है।

IPOI की प्रासंगिकता

  • विकसित होता सुरक्षा परिदृश्य: इंडो-पैसिफिक में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा, समुद्री डकैती, नौवहन पर हमले तथा अवैध मत्स्यन ने सहयोगात्मक समुद्री ढाँचों की आवश्यकता को सुदृढ़ किया है।
  • जलवायु और महासागरीय चुनौतियाँ: महासागर 92% अतिरिक्त ऊष्मा और 28% कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करते हैं, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी वैश्विक जलवायु कार्रवाई का केंद्रीय तत्त्व बनती है।
  • समुद्री कनेक्टिविटी और व्यापार: समुद्री गलियारों और अवसंरचना का तीव्र विस्तार IPOI को भारत की समुद्री भारत विजन 2030 और समुद्री अमृत काल विजन 2047 के साथ निकटता से जोड़ता है।
  • भारत के लिए रणनीतिक महत्त्व: सुरक्षा साझेदारियों, क्षमता-निर्माण सहायता, समुद्री डोमेन जागरूकता और क्षेत्रीय नेतृत्व को संस्थागत रूप देकर भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित करता है।
  • समुद्री स्थिरता और क्षेत्रीय व्यवस्था: IPOI नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के सम्मान और वैश्विक कॉमन्स के नियम-आधारित शासन का समर्थन करता है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) और व्यापक इंडो-पैसिफिक के रणनीतिक समुद्री मार्गों में स्थिरता सुदृढ़ होती है।

भारत–स्पेन द्विपक्षीय संबंध

  • राजनयिक संबंध
    • राजनयिक संबंध: वर्ष 1956 में स्थापित।
    • द्विपक्षीय संबंध वर्ष 2017 से शांति, विकास और नवाचार के लिए साझेदारी (APCI) के ढाँचे के अंतर्गत सुदृढ़ हुए हैं।
  • बहुपक्षीय सहयोग
    • स्पेन, वैश्विक शासन और सुरक्षा व्यवस्थाओं में भारत की भूमिका का समर्थन करता है, जिसमें मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR) में भारत का प्रवेश भी शामिल है।
  • रक्षा सहयोग
    • तेजी से बढ़ते रक्षा संबंध, एयरबस (स्पेन) से 56 C-295 विमानों की 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर के समझौते से परिलक्षित होते हैं; इनमें से 40 विमान ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में निर्मित किए जाएँगे।
    • इस सहयोग में संयुक्त कार्य समूह, वायुसेना अभ्यास, नौसैनिक मार्ग अभ्यास, पोर्ट कॉल्स तथा ‘तरंग शक्ति’ और ‘ओशन स्काई’ जैसे बहुपक्षीय अभ्यासों में सहभागिता शामिल है।
  • व्यापार और आर्थिक संबंध
    • स्पेन यूरोप में भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, वर्ष 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 11 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया।
    • भारत का व्यापार अधिशेष है
      • निर्यात: खनिज ईंधन, रसायन, लोहा एवं इस्पात, वस्त्र, मशीनरी, समुद्री खाद्य उत्पाद, चमड़ा।
      • आयात: यांत्रिक उपकरण, रसायन, प्लास्टिक, खनिज ईंधन।
  • निवेश सहयोग
    • स्पेन भारत का 16वाँ सबसे बड़ा निवेशक है, इसका संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 4.29 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
    • भारत में 200 से अधिक स्पेनिश कंपनियाँ तथा स्पेन में लगभग 80 भारतीय कंपनियाँ कार्यरत हैं।
    • स्पेन में भारतीय निवेश: लगभग 900 मिलियन अमेरिकी डॉलर।
    • मुख्य तंत्र: संयुक्त आर्थिक सहयोग आयोग (JCEC, 1972), भारत–स्पेन सीईओ फोरम, इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (2023)
  • क्षेत्रीय सहयोग
    • रक्षा विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट सिटी, दूरसंचार, शहरी अवसंरचना, पर्यटन और ऑडियो-विजुअल उत्पादन।
  • सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग
    • सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम (2024–2028), विश्वविद्यालय एमओयू और ऑडियो-विजुअल सहयोग द्वारा निर्देशित।
    • स्पेन में भारतीय प्रवासी: लगभग 75,000।
    • भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के माध्यम से योग, शास्त्रीय नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
    • वैलाडोलिड स्थित ‘कासा दे ला इंडिया’ जैसी संस्थाएँ जन-से-जन संपर्क को बढ़ावा देती हैं।
    • नगर संबंध: अहमदाबाद–वैलाडोलिड उप-राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करते हैं।
    • वर्ष 2026 को संस्कृति, पर्यटन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारत–स्पेन वर्ष घोषित किया गया है, जो सॉफ्ट पॉवर’ अभिसरण और भविष्य-उन्मुख सहयोग को दर्शाता है।

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