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| Title | Subject | Paper |
|---|---|---|
| संक्षेप में समाचार | ||
| हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र का ह्रास | disaster management, | GS Paper 3, |
| केरल का राजकीय सूक्ष्मजीव: बैसिलस सब्टिलिस | Science and Technology, | GS Paper 3, |
| स्टेट ऑफ फाइनेंस फॉर नेचर, 2026 | Environment and Ecology, | GS Paper 3, |
| अंतरिक्ष-तकनीक अर्थव्यवस्था | Science and Technology, | GS Paper 3, |
हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन से प्रेरित आपदाओं में चिंताजनक वृद्धि का सामना कर रहा है, जिस कारण वर्ष 2025 में 4,000 से अधिक मौतें हुई हैं।
हिमालयी विकास की आधारशिला लचीलापन होना चाहिए। जैसा कि सेंडाई फ्रेमवर्क हमें याद दिलाता है, “आपदाएँ प्राकृतिक नहीं होतीं, वे समाज में अंतर्निहित जोखिमों का परिणाम होती हैं।” SDG-11 (सतत् शहर और समुदाय) और SDG-13 (जलवायु कार्रवाई) के अनुरूप, भविष्य के पर्यावरणीय मॉडल को प्रकृति पर नियंत्रण से सह-अस्तित्व की ओर और परियोजना-आधारित विकास से पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित शासन की ओर स्थानांतरित होना चाहिए।
जनवरी 2026 में, केरल बैसिलस सब्टिलिस (Bacillus Subtilis) को अपना राजकीय सूक्ष्मजीव घोषित करने वाला भारत का प्रथम राज्य बना।
केरल द्वारा ‘बैसिलस सब्टिलिस’ को दी गई मान्यता यह दर्शाती है कि सूक्ष्मजीव स्वास्थ्य, सतत् कृषि तथा विज्ञान-आधारित नवाचार के माध्यम से भारत की उभरती जैव-अर्थव्यवस्था के प्रमुख प्रेरक तत्त्व हैं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने ‘स्टेट ऑफ फाइनेंस फॉर नेचर’ 2026 (State of Finance for Nature 2026) रिपोर्ट जारी की है।



भारत स्पेसटेक-2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के वर्ष 2030 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी स्पेस-टेक अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान है। इसका शीर्षक “भारत की अंतरिक्ष यात्रा” (India’s Space Odyssey) है (और जिसे वेंचर कैपिटल फर्म आर्कम वेंचर्स द्वारा जारी किया गया)।
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