//php print_r(get_the_ID()); ?>
| Title | Subject | Paper |
|---|---|---|
| संक्षेप में समाचार | ||
| निर्वाचक सूची में नाम का समावेशन एक ‘योग्यतासापेक्ष अधिकार’ | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| कर्नाटक गिग वर्कर्स कल्याण बोर्ड | social issues,Indian society, | GS Paper 1,GS Paper 2, |
| ध्रुवीय भँवर (पोलर वॉर्टेक्स) | Geography, | GS Paper 1, |
| विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| भारत के शहरी क्षेत्रों में राज्य की उदासीनता और जीवन का अधिकार | ethics, | GS Paper 4, |
भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास से संबंधित चल रही सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय को अवगत कराया है कि निर्वाचक सूची में नाम का समावेशन एक ‘योग्यतासापेक्ष अधिकार’ (Qualified Right) है।
कर्नाटक सरकार ने प्लेटफॉर्म-आधारित गिग श्रमिकों के लिए संरक्षण को संस्थागत रूप देने हेतु गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड का गठन किया है।
जनवरी 2026 में अमेरिका के 17 राज्यों में एक शीतकालीन तूफान आया, जिसने ध्रुवीय भँवर (पोलर वॉर्टेक्स) के दक्षिण की ओर विस्तार के कारण अत्यधिक ठंड और भारी हिमपात के माध्यम से लाखों लोगों को प्रभावित किया।


हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में नव अधिसूचित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 के विनियमन 3(c) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की गई थी।

UGC समता विनियम, 2026 उच्च शिक्षा में समानता को संस्थागत रूप देने, जातिगत भेदभाव को दूर करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इनकी सफलता स्पष्ट प्रक्रियाओं, समावेशी कार्यान्वयन और निष्पक्षता पर निर्भर करती है, जिसमें सुरक्षात्मक उपायों को संवैधानिक समानता के साथ संतुलित करना और SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और SDG 10 (असमानताओं में कमी) को आगे बढ़ाना शामिल है।
हाल ही में नोएडा (उत्तर प्रदेश) में 27 वर्षीय युवराज मेहता की डूबने से हुई मौत को पुलिस और आस-पास मौजूद लोगों की निष्क्रियता ने उजागर किया, जबकि एक गिग वर्कर के नैतिक साहस ने जवाबदेही तथा जीवन की रक्षा करने के अपने कर्तव्य में राज्य की विफलता को रेखांकित किया।
प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता और डिलीवरी पार्टनर/गिग वर्कर के सक्रिय हस्तक्षेप के बीच का विरोधाभास आधुनिक शासन की तीखी आलोचना के रूप में सामने आता है।
“समृद्ध” नोएडा के बीचोंबीच युवराज मेहता की मृत्यु इस बात की याद दिलाती है कि सहानुभूति के बिना बुनियादी ढाँचा खोखला होता है। यदि राज्य द्वारा प्रबंधित संकट में सबसे साहसी भूमिका निभाने वाला व्यक्ति सबसे कम सुरक्षित नागरिक है, तो राज्य वैधता की अपनी प्राथमिक कसौटी पर विफल हो गया है।
To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.
<div class="new-fform">
</div>
