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| Title | Subject | Paper |
|---|---|---|
| संक्षेप में समाचार | ||
| कार्यकारी निधि बनाम संसदीय निरीक्षण | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| सर्वोच्च न्यायालय की ‘कार्यवाहक’ डीजीपी नियुक्त करने की प्रथा पर आपत्ति | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| प्रजनन संबंधी स्वायत्तता | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| “बायो-वॉरियर्स” प्रजातियाँ | Environment and Ecology, | GS Paper 3, |
| भारत की बाघ संरक्षण नीति | Environment and Ecology, | GS Paper 3, |
| भारत-मलेशिया संबंध | international Relation, | GS Paper 2, |
हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को सूचित किया है, कि PM केयर्स फंड, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) और राष्ट्रीय रक्षा निधि (NDF) से संबंधित संसदीय प्रश्न, लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं हैं।
यह विशिष्ट संसदीय नियमों पर आधारित है:-
जनहित याचिका केंद्र (CPIL) बनाम भारत संघ मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने PM केयर्स फंड की राशि को NDRF में स्थानांतरित करने से मना कर दिया, क्योंकि:
इन निधियों की (संसद में) अस्वीकार्यता कार्यकारी लचीलेपन और विधायी निरीक्षण के मध्य के संघर्ष को उजागर करती है। जबकि ट्रस्ट मॉडल तेजी से आपातकालीन प्रतिक्रिया को सक्षम बनाता है, यह पारंपरिक वित्तीय शक्ति को अनदेखी करता है, जो शासन में पारदर्शिता तथा सार्वजनिक जवाबदेही संबंधी महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों द्वारा लगातार ‘कार्यवाहक’ DGP पर निर्भरता पर चिंता जताई और प्रकाश सिंह (2006) वाद से संबंधी पुलिस सुधार निर्णय के अनिवार्य अनुपालन को दोहराया।
पुलिस सुधार निर्देशों का लगातार अनुपालन न होना संस्थागत स्वायत्तता को कमजोर करता है; पेशेवर पुलिसिंग, लोकतांत्रिक जवाबदेही और विधि के शासन के लिए नियमित DGP की नियुक्ति सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक नाबालिग के 30 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दी, जिससे मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत सांविधिक गर्भकाल की सीमाओं के परे प्रजनन स्वायत्तता को पुनः पुष्टि मिली।
सर्वोच्च न्यायालय का विकसित होता गर्भपात संबंधी न्यायशास्त्र महिलाओं की गरिमा, स्वायत्तता और मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखता है, और संवैधानिक नैतिकता को प्रक्रियात्मक कठोरता पर प्राथमिकता देता है।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के शोधकर्ताओं ने उत्तरी बंगाल की खाड़ी में पश्चिम बंगाल तट पर दो नई नेरिडिड पॉलीकीट (समुद्री) कृमि प्रजातियों की खोज की है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने भारत में बाघ संरक्षण के 50 वर्ष पूर्ण होने पर बाघ संरक्षण नीतियों की व्यापक समीक्षा का आह्वान किया।
हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री ने मलेशिया का दौरा (7-8 फरवरी, 2026) किया, और भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (2024) की पुष्टि की।
प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया की यह तीसरी यात्रा थी और अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिए जाने के बाद यह उनकी पहली यात्रा थी।


वर्ष 2026 में भारत-मलेशिया संबंधों का महत्त्व पारंपरिक कूटनीति से उच्च तकनीक वाले, सुरक्षा-उन्मुख गठबंधन में परिवर्तन द्वारा परिभाषित किया जाएगा।
हालाँकि यह साझेदारी “गति और गहराई के अभूतपूर्व चरण” में है, फिर भी इसे गहरी जड़ें जमा चुकी ऐतिहासिक समस्याओं और उभरती संरचनात्मक प्रतिस्पर्द्धा से निपटना होगा।
वर्ष 2026 तक संबंधों को उच्च स्तर पर ले जाना एक रणनीतिक मोड़ है, जो साझेदारी को तकनीकी परस्पर निर्भरता और समुद्री सुरक्षा के आधार पर सुदृढ़ करता है। आपसी विश्वास को संस्थागत रूप देकर, दोनों देशों ने सभ्यतागत बंधन को एक लचीले, आधुनिक गठबंधन में बदल दिया है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देता है।
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