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Feb 10 2026

जापान में संसदीय चुनाव

प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के नेतृत्व वाली जापान की सत्ताधारी पार्टी, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP), ने संसदीय चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।

संबंधित तथ्य

  • यह पंद्रह माह में जापान का तीसरा राष्ट्रीय चुनाव था, जो असामान्य रूप से बार-बार आयोजित हुआ और इसे राजनीतिक स्थिरता तथा सार्वजनिक जनादेश सुरक्षित करने के लिए एक रणनीतिक प्रयास के रूप में देखा गया।
  • ताकाइची जापान की प्रथम महिला प्रधानमंत्री और रूढ़िवादी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) की नेता हैं।
  • चुनाव परिणाम: LDP और उसके गठबंधन सहयोगी, जापान इनोवेशन पार्टी (इशिन) ने 465 सीटों वाले निम्न सदन में सुपर मेजॉरिटी (दो-तिहाई बहुमत) प्राप्त की।
    • अकेले LDP ने लगभग 316 सीटें हासिल कीं, जिससे उसे मजबूत विधायी नियंत्रण प्राप्त हुआ।
  • राजनीतिक महत्त्व: सुपर मेजॉरिटी का अर्थ है, कि ताकाइची का गठबंधन ऊपरी सदन के निर्णयों को परिवर्तित कर सकता है, कानून को अधिक आसानी से पारित तथा कम-से-कम वर्ष 2028 तक जापान की नीतिगत दिशा निर्धारित कर सकता है।

जापान की राजनीतिक संरचना

  • राज्य का प्रकार: जापान के संविधान के तहत संसदीय लोकतंत्र के साथ संवैधानिक राजतंत्र।
  • सम्राट: सम्राट (वर्तमान में सम्राट नारुहितो) राज्य का प्रतीक हैं, जिनकी शक्तियाँ विशुद्ध रूप से औपचारिक हैं।
  • कार्यपालिका: वास्तविक कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री और कैबिनेट के पास होती है, जो सामूहिक रूप से संसद के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
  • विधायिका: द्विसदनीय नेशनल डाइट।
    • हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव (निचला सदन): अधिक शक्तिशाली; यह ऊपरी सदन के निर्णयों पर असहमति व्यक्त कर सकता है; प्रधानमंत्री का चुनाव इसी सदन से होता है।
    • हाउस ऑफ काउंसलर्स (ऊपरी सदन): समीक्षात्मक भूमिका; छह वर्ष का निश्चित कार्यकाल (प्रत्येक तीन वर्षों में आधे सदस्य चुने जाते हैं)।
  • प्रधानमंत्री: निचले सदन में बहुमत का नेता; डाइट के नामांकन पर सम्राट द्वारा नियुक्त।

अमरावती – भारत की पहली ‘क्वांटम वैली’

आंध्र प्रदेश के उद्दंडरायुनिपालम में अमरावती क्वांटम वैली परियोजना की आधारशिला रखी गई, जिसका उद्देश्य राज्य को क्वांटम प्रौद्योगिकियों और उन्नत अनुसंधान के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

क्वांटम वैली परियोजना के बारे में

  • दृष्टिकोण: यह परियोजना कंप्यूटिंग, सेंसिंग, संचार और सामग्री अनुसंधान में एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का नार्माण कर अमरावती को क्वांटम प्रौद्योगिकियों की वैश्विक राजधानी में परिवर्तित करने का प्रयास करती है।
  • वैश्विक स्थिति: इस पहल की कल्पना सिलिकॉन वैली जैसे वैश्विक प्रौद्योगिकी समूहों के आधार पर की गई है, जिसका लक्ष्य अमरावती को विश्व के अग्रणी क्वांटम केंद्रों की श्रेणी में शामिल करता  है।
  • संस्थागत अभिसरण: यह नवाचार और तकनीकी नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार को एक साझा मंच पर लाता है।
  • मूल अवसंरचना और पारितंत्र विकास
    • क्वांटम कंप्यूटिंग सुविधा: इस परिसर में भारत का प्रथम 133-क्यूबिट (Qubit) क्वांटम कंप्यूटर स्थापित करने की योजना है, जिसके परियोजना के आरंभिक चरण में ही स्थापित होने की आशा है।
    • नवाचार केंद्र: यह घाटी एआई (AI), साइबर सुरक्षा, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और वित्त जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान, विनिर्माण तथा कौशल विकास केंद्र के रूप में कार्य करेगी।
    • हार्डवेयर एक्सेस: यह एक “क्वांटम नर्व सेंटर” के रूप में कार्य करेगा, जो क्वांटम हार्डवेयर और उन्नत अनुसंधान बुनियादी ढाँचे तक पहुँच प्रदान करेगा।
  • उद्योग भागीदारी और कौशल विकास
    • कॉरपोरेट भागीदारी: आईबीएम (IBM), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी प्रमुख कंपनियाँ इसकी प्रमुख तकनीकी भागीदार हैं।
    • प्रशिक्षण पहल: विप्रो (Wipro) क्वांटम शिक्षा पर केंद्रित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के माध्यम से कार्यबल विकास में सहायता करेगी।
    • स्टार्ट-अप और उद्योग समझौते (MoUs): क्वांटम हार्डवेयर, एल्गोरिदम, क्रिप्टोग्राफी और सेंसिंग प्रौद्योगिकियों में काम करने वाली कई कंपनियों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
    • मानव पूँजी लक्ष्य: राज्य का लक्ष्य भविष्य के लिए तैयार कार्यबल निर्मित करने हेतु लंबी अवधि में लाखों विद्यार्थियों को क्वांटम कंप्यूटिंग और संबद्ध प्रौद्योगिकियों में प्रशिक्षित करना है।

क्वांटम प्रौद्योगिकियाँ/तकनीकी

  • वैज्ञानिक आधार: क्वांटम तकनीकी पारंपरिक प्रणालियों से परे कंप्यूटिंग और सेंसिंग क्षमताओं को सक्षम बनाने के लिए, सुपरपोजिशन और एंटैंगलमेंट  जैसी उप-परमाणु घटनाओं का उपयोग करती हैं।
  • कंप्यूटिंग लाभ: क्वांटम कंप्यूटर अत्यधिक जटिल समस्याओं को पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में अत्यंत तीव्र गति से हल कर सकते हैं, विशेष रूप से ऑप्टिमाइजेशन और सिमुलेशन कार्यों में।
  • क्षेत्रीय अनुप्रयोग: संभावित उपयोगों में दवा की खोज, रोग निदान, मौसम पूर्वानुमान, कृषि उपज अनुमान और वित्तीय सुरक्षा प्रणालियाँ शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय नीतिगत प्रोत्साहन: भारत का ₹6,000 करोड़ का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (2023) क्वांटम कंप्यूटिंग, संचार और सेंसिंग प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास का समर्थन करता है।

ई-स्पोर्ट्स नेशंस कप (ENC), 2026 में शतरंज

ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप फाउंडेशन ने रियाद, सऊदी अरब में होने वाले उद्घाटन ई-स्पोर्ट्स नेशंस कप (ENC), 2026 के लिए 16 शीर्षकों में शतरंज को शामिल किया है, जो एक वैश्विक ई-स्पोर्ट के रूप में शतरंज के विकास में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

शतरंज का बढ़ता ई-स्पोर्ट्स एकीकरण

  • पूर्व उपलब्धि: शतरंज ने वर्ष 2025 ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप में पदार्पण किया, जिसने वैश्विक ई-स्पोर्ट्स दर्शकों को आकर्षित किया।
    • मैग्नस कार्लसन ने टीम लिक्विड का प्रतिनिधित्व करते हुए ई-स्पोर्ट्स शतरंज का खिताब जीता था।

ई-स्पोर्ट्स नेशंस कप (ENC) के बारे में

  • ई-स्पोर्ट्स नेशंस कप (ENC) एक वैश्विक ई-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट है, जहाँ विश्व की राष्ट्रीय टीमें प्रतिस्पर्द्धा करती हैं। यह राष्ट्रीय पहचान और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व द्वारा संचालित प्रतिस्पर्द्धा का एक नया स्तर जोड़ता है।
  • प्रतियोगिताएँ टीम-आधारित प्रारूप और सोलो-प्लेयर प्रारूप दोनों में आयोजित की जाएँगी।
  • कवरेज/विस्तार
    • ENC में सभी प्रमुख क्षेत्रों की टीमें शामिल होंगी: उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, MENA (मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका), अफ्रीका, यूरोप, एशिया तथा दक्षिण-पूर्व एशिया और ओशिनिया।
  • आवृत्ति : इसे प्रत्येक दो वर्षों में एक बार आयोजित किया जाएगा।
  • मेजबानी: पहला संस्करण नवंबर 2026 में रियाद, सऊदी अरब में आयोजित किया जाएगा।
  • पुरस्कार की संरचना
    • सभी खिलाड़ियों को गारंटीकृत पुरस्कार राशि प्राप्त होगी।
    • निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी खेलों में इक्वल प्लेसमेंट अवार्ड/पुरस्कार दिए जाएँगे।
  • क्वालिफिकेशन (अर्हता) मॉडल: ENC प्रतिस्पर्द्धात्मकता और समावेशिता दोनों सुनिश्चित करने के लिए, एक बहु-स्तरीय अर्हता प्रणाली का पालन करेगा।
  • महत्त्व: यह ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप (EWC) की गति को और आगे बढ़ाता है।

ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप फाउंडेशन (EWCF)

  • ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप फाउंडेशन (EWCF) एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसका मुख्यालय रियाद, सऊदी अरब में है। यह वैश्विक ई-स्पोर्ट्स पारितंत्र को आगे बढ़ाने तथा इसे पेशेवर बनाने हेतु कार्य कर रहा है।

मोल्टबुक

हाल ही में मोल्टबुक (Moltbook) नामक एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया, जो विशेष रूप से AI एजेंटों के लिए बनाया गया है। इस प्लेटफॉर्म ने ऑनलाइन स्वायत्त रूप से वार्ता करने वाले 15 लाख से अधिक AI बॉट्स की उपस्थिति दर्ज की है।

मोल्टबुक के बारे में

  • मोल्टबुक एक रेडिट (Reddit) जैसा सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म है, जिसे लोगों के लिए नहीं बल्कि AI एजेंटों के लिए डिजाइन किया गया है। सामान्य लोगों द्वारा बनाए गए बॉट्स यहाँ पोस्ट, कमेंट और अपवोट कर सकते हैं।
  • लॉन्च: इसे जनवरी 2026 में AI संस्थापक और उद्यमी मैट श्लिक्ट (Matt Schlicht) द्वारा लॉन्च किया गया था।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • केवल AI संबंध: केवल AI एजेंट ही सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं; जबकि अन्य लोग केवल निष्क्रिय अवलोकन तक सीमित हैं। सामान्य लोग यहाँ कोई पोस्ट या कमेंट नहीं कर सकते हैं।
    • रेडिट-शैली संरचना: इसमें विषय-आधारित फोरम (जैसे- सबरेडिट्स), थ्रेडेड चर्चाएँ और अपवोटिंग सिस्टम शामिल हैं।
    • एजेंटिक AI वातावरण: यह ‘मोल्टबॉट’ (Moltbot) पर आधारित है, जो एक ओपन-सोर्स AI एजेंट है। यह ईमेल क्रियान्वयन, शेड्यूलिंग और ऑनलाइन शोध जैसे स्वायत्त कार्यों में सक्षम है।
  • सामग्री की प्रकृति: लोकप्रिय चर्चाओं में AI चेतना (consciousness), धर्म, भू-राजनीति, क्रिप्टोकरेंसी और दर्शनशास्त्र शामिल हैं।
    • कुछ बॉट्स ने एक साथ ‘विश्वास प्रणालियाँ’ भी निर्मित की हैं, जो उभरते हुए व्यवहार को उजागर करती हैं, हालाँकि ये अक्सर लोगों  द्वारा दिए गए प्रॉम्प्ट से प्रेरित होते हैं।
  • चिंताएँ
    • विशेषज्ञ मोल्टबुक को एक ‘सामाजिक प्रयोग’ या ‘परफॉरमेंस आर्ट’ के रूप में देखते हैं, तथा यह नोट करते हैं कि अधिकांश बॉट गतिविधियाँ अभी भी मानव-निर्देशित हैं।
    • साइबर सुरक्षा शोधकर्ता, AI एजेंटों को अप्रतिबंधित पहुँच प्रदान करने के खिलाफ चेतावनी देते हैं, क्योंकि इसमें प्रॉम्प्ट इंजेक्शन और डेटा के दुरुपयोग जैसे जोखिम होते हैं।
  • महत्त्व: हालाँकि वर्तमान में यह व्यापक रूप से प्रयोगात्मक है, मोल्टबुक उस भविष्य की झलक प्रस्तुत करता है, जहाँ AI एजेंट सामाजिक रूप से सीख सकते हैं, समन्वय और विकसित हो सकते हैं। यह AI एजेंट की प्रणालियों,  स्वायत्तता, सुरक्षा और शासन पर गंभीर प्रश्न उत्पन्न करता है।

संदर्भ

हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को सूचित किया है, कि PM केयर्स फंड, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) और राष्ट्रीय रक्षा निधि (NDF) से संबंधित संसदीय प्रश्न, लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं हैं।

इन निधियों/कोष पर संसदीय प्रश्न अब अस्वीकार्य क्यों हैं?

यह विशिष्ट संसदीय नियमों पर आधारित है:-

  • नियम 41(2)(viii): प्रश्न ऐसे मामले से संबंधित होना चाहिए, जो मुख्य रूप से भारत सरकार के उत्तरदायित्व और कार्यों से संबंधित हो।
  • नियम 41(2)(xvii): इसमें ऐसे निकायों/व्यक्तियों के नियंत्रण वाले मामले नहीं उठाए जाने चाहिए, जो मुख्य रूप से सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।
  • PMO का पक्ष
    • ये कोष सार्वजनिक स्वैच्छिक योगदान के माध्यम से वित्तपोषित हैं।
    • इन्हें भारत की संचित निधि (CFI) से कोई धन प्राप्त नहीं होता है।
    • इसलिए, इन्हें संसद के प्रति प्रत्यक्ष बजटीय जवाबदेही से बाहर माना जाता है, जिससे संसदीय प्रश्नों की अस्वीकार्यता उत्पन्न होती है।

तीनों निधियों का अवलोकन

  • प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति राहत कोष (PM केयर्स फंड)
    • स्थापना और उद्देश्य: आपातकालीन या संकट की स्थितियों के दौरान राहत प्रदान करने के लिए कोरोना वायरस महामारी के बाद 27 मार्च, 2020 को स्थापित किया गया था।
    • विधिक स्थिति: पंजीकरण अधिनियम, 1908 के तहत एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत।
    • संरचना:
      • प्रधानमंत्री — पदेन अध्यक्ष
      • रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री — पदेन ट्रस्टी
    • वित्तपोषण: व्यक्तियों और संगठनों से 100% स्वैच्छिक योगदान प्राप्त करता है।
      • भारत सरकार से कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती।
    • कर और कॉरपोरेट प्रावधान
      • आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80G के तहत दान पर 100% कटौती के पात्र।
      • कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) व्यय के रूप में मान्यता प्राप्त।
    • विदेशी योगदान: एक निर्दिष्ट खाते के माध्यम से FCRA, 2010 के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने की अनुमति।
    • ऑडिट: एक स्वतंत्र लेखा परीक्षक द्वारा प्रतिवर्ष ऑडिट।
  • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF)
    • उत्पत्ति और उद्देश्य: पाकिस्तान से विस्थापित लोगों  की सहायता के लिए जनवरी 1948 में स्थापित किया गया था।
      • वर्तमान में प्राकृतिक आपदाओं, बड़ी दुर्घटनाओं और दंगों के पीड़ितों को राहत प्रदान करता है।
    • वित्तपोषण और प्रशासन: पूरी तरह से सार्वजनिक दान द्वारा वित्तपोषित; कोई बजटीय आवंटन नहीं।
      • वितरण प्रधानमंत्री द्वारा अनुमोदित किया जाता है।
    • विधिक स्थिति: संसद द्वारा निर्मित नहीं; आयकर अधिनियम, 1961 के तहत एक ट्रस्ट के रूप में मान्यता प्राप्त।
      • यह प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से कार्य करता है।
    • प्रशासन: प्रधानमंत्री — अध्यक्ष
    • कर प्रावधान
      • आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 और 139 के तहत छूट प्राप्त।
      • धारा 80G के तहत 100% कटौती (Deduction) के लिए पात्र योगदान।
      • केवल स्वैच्छिक और बिना शर्त दान स्वीकार करता है।
  • राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF)
    • उद्देश्य: सशस्त्र बलों और अर्द्धसैनिक बलों के सदस्यों तथा उनके आश्रितों को कल्याणकारी सहायता प्रदान करना।
    • प्रशासन: एक कार्यकारी समिति द्वारा प्रबंधित
      • प्रधानमंत्री — अध्यक्ष
      • रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और गृह मंत्री — सदस्य
      • वित्त मंत्री — कोषाध्यक्ष
      • संयुक्त सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय — सचिव
    • वित्तपोषण
      • पूरी तरह से स्वैच्छिक सार्वजनिक योगदान पर निर्भर; कोई बजटीय सहायता नहीं।
      • इसके खाते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास रखे जाते हैं।

विशेषता PM केयर्स फंड PMNRF राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF)
उत्पत्ति मार्च 2020 (कोविड-19) जनवरी 1948 (भारत- पाकिस्तान विभाजन) 1962 (भारत-चीन युद्ध)
कानूनी प्रकृति सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट
अध्यक्ष प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री
पदेन ट्रस्टी रक्षा, गृह, वित्त कोई नहीं (PMO द्वारा प्रबंधित) रक्षा, गृह, वित्त
बजटीय सहायता नहीं नहीं नहीं
CAG ऑडिट नहीं (स्वतंत्र लेखापरीक्षक) नहीं (स्वतंत्र लेखापरीक्षक) नहीं (स्वतंत्र लेखापरीक्षक)
FCRA स्थिति छूट प्राप्त छूट प्राप्त छूट प्राप्त
CSR स्थिति हाँ (कंपनी अधिनियम) नहीं नहीं

प्रमुख विधिक और संवैधानिक विशेषताएँ

  • ट्रस्ट बनाम वैधानिक कोष: PM केयर्स / PMNRF सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट हैं। ये संसदीय अधिनियम (गैर-वैधानिक) द्वारा निर्मित नहीं हैं।
  • NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष): यह आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 46 के तहत बनाया गया एक वैधानिक कोष है। इसका ऑडिट CAG द्वारा किया जाता है।
  • ऑडिट, RTI, पारदर्शिता और विवाद
    • ऑडिट विवाद: सर्वोच्च न्यायालय (2020) ने निर्णय सुनाया, कि PM केयर्स फंड को सरकारी धन प्राप्त नहीं होता है, इसलिए CAG ऑडिट अनिवार्य नहीं है।
      • हालाँकि, राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF), एक ट्रस्ट होने के बावजूद अद्वितीय प्रकृति का है क्योंकि इसके खाते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास रखे जाते हैं।
    • RTI अस्पष्टता: PMO का तर्क है कि PM केयर्स फंड, RTI अधिनियम की धारा 2(h) के तहत एक ‘लोक प्राधिकरण’ (Public Authority) नहीं है क्योंकि यह सरकार द्वारा वित्तपोषित नहीं है।
      • विपक्ष का तर्क है, कि इसे RTI के दायरे में होना चाहिए क्योंकि यह राजकीय प्रतीक, सरकारी अवसंरचना और ‘gov.in’ डोमेन का उपयोग करता है।

भारत की संवैधानिक निधियों के बारे में

  • भारत की संचित निधि (अनुच्छेद-266): इसमें केंद्र सरकार के सभी राजस्व, ऋण और ऋण प्राप्तियाँ शामिल होती हैं।
    • संसदीय अनुमति के बिना इससे कोई व्यय नहीं किया जा सकता है।
  • भारत की आकस्मिकता निधि (अनुच्छेद-267): संसद की अनुमति प्राप्त होने तक, तत्काल अप्रत्याशित व्यय के लिए इसे भारत के राष्ट्रपति के पास रखा जाता है।
    • वर्तमान कोष: ₹30,000 करोड़।
  • भारत का सार्वजनिक खाता (अनुच्छेद-266): इसमें सरकार द्वारा ट्रस्ट के रूप में रखी गई निधियाँ शामिल हैं (जैसे- भविष्य निधि, लघु बचत)।
    • इसकी निकासी के लिए पूर्व संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है।

संवैधानिक निधियों के साथ तुलना

निधि अनुच्छेद प्रबंधन प्राधिकरण 
संचित निधि (CFI) 266(1) संसद आवश्यक (विनियोग विधेयक)
सार्वजनिक खाता 266(2) कार्यपालिका आवश्यक नहीं (बैंकिंग-प्रकार के लेन-देन)
आकस्मिकता निधि 267 राष्ट्रपति व्यय के बाद संसदीय अनुमोदन

सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ

जनहित याचिका केंद्र (CPIL) बनाम भारत संघ मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने PM केयर्स फंड की राशि को NDRF में स्थानांतरित करने से मना कर दिया, क्योंकि:

  • प्रकृति: NDRF विशिष्ट प्राकृतिक आपदाओं के लिए है; जबकि PM केयर्स फंड व्यापक ‘आपातकाल/संकट’ (जैसे- जैविक महामारी) के लिए है।
  • स्वैच्छिक भावना: व्यक्तियों के पास यह चयन की स्वतंत्रता है, कि वे कहाँ दान करना चाहते हैं।
  • ऑडिट (लेखापरीक्षा): एक वैधानिक निधि (NDRF) के ऑडिट के कानूनी प्रावधानों को एक निजी ट्रस्ट (PM केयर्स) पर बाध्यकारी रूप से लागू नहीं किया जा सकता है।

निष्कर्ष

इन निधियों की (संसद में) अस्वीकार्यता कार्यकारी लचीलेपन और विधायी निरीक्षण के मध्य के संघर्ष को उजागर करती है। जबकि ट्रस्ट मॉडल तेजी से आपातकालीन प्रतिक्रिया को सक्षम बनाता है, यह पारंपरिक वित्तीय शक्ति को अनदेखी करता है, जो शासन में पारदर्शिता तथा सार्वजनिक जवाबदेही संबंधी महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।

संदर्भ 

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों द्वारा लगातार ‘कार्यवाहक’ DGP पर निर्भरता पर चिंता जताई और प्रकाश सिंह (2006) वाद से संबंधी पुलिस सुधार निर्णय के अनिवार्य अनुपालन को दोहराया।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा चिह्नित प्रमुख मुद्दे

  • राज्य जानबूझकर UPSC को प्रस्ताव भेजने में देरी कर रहे हैं, ताकि निश्चित कार्यकाल वाले नियमित DGP की नियुक्ति से बचा जा सके।
    • तेलंगाना में अंतिम नियमित DGP की नियुक्ति नवंबर 2015 में हुई थी और अधिकारी नवंबर 2017 में सेवानिवृत्त हुए।
  • कार्यवाहक” DGP की नियुक्ति की प्रथा पुलिस की स्वतंत्रता को कमजोर करती है और बाध्यकारी न्यायिक निर्देशों का उल्लंघन करती है।
  • मनमाने और विलंबित नियुक्तियों के कारण योग्य वरिष्ठ IPS अधिकारियों को कॅरियर के अवसरों से वंचित होना पड़ता है।
  • पुलिस नेतृत्व में राजनीतिक हस्तक्षेप कानून के शासन और आंतरिक सुरक्षा प्रशासन को कमजोर करता है।

DGP नियुक्तियों पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेश

  • प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006): सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक हस्तक्षेप को रोकने और जवाबदेही बढ़ाने हेतु पुलिस सुधारों के लिए सात अनिवार्य निर्देश जारी किए।
    • राज्य सुरक्षा आयोग: सरकार द्वारा अनुचित प्रभाव से बचाव सुनिश्चित करने हेतु आयोग का गठन।
    • न्यूनतम कार्यकाल: DGP का चयन योग्यता-आधारित, पारदर्शी प्रक्रिया से, न्यूनतम कार्यकाल के साथ।
    • निश्चित कार्यकाल: परिचालन दायित्वों पर तैनात पुलिस अधिकारियों को न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल।
    • कार्यात्मक पृथक्करण: जाँच और कानून-व्यवस्था कार्यों का पृथक्करण।
    • स्थापना बोर्ड: स्थानांतरण, पदस्थापन और पदोन्नति के लिए पुलिस स्थापना बोर्ड का गठन।
    • शिकायत प्राधिकरण: दुराचार के मामलों के लिए राज्य एवं जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण की स्थापना।
    • राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (NSC): केंद्रीय पुलिस बलों के प्रमुखों के चयन हेतु आयोग का गठन।
  • SC आदेश (2018 एवं 2019): सर्वोच्च न्यायालय ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए UPSC के नेतृत्व में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के पैनल गठन हेतु स्पष्ट समय-सीमा, पात्रता मानदंड और प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय निर्धारित किए।
  • अनुच्छेद-142 की शक्तियाँ: न्यायालय द्वारा पुलिस सुधारों को लागू करने तथा नियुक्तियों और स्थानांतरणों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने के लिए अनुच्छेद-142 का प्रयोग किया गया है।
  • हालिया आदेश (2026): सर्वोच्च न्यायालय ने UPSC की भूमिका को सशक्त करते हुए उसे यह अधिकार दिया कि वह राज्यों द्वारा पैनल प्रस्तावों में देरी या रोक लगाए जाने की स्थिति में स्पष्टीकरण माँग सके और अनुपालन न होने के कारणों के बारे में जान सके।

पुलिस महानिदेशक (DGP) के बारे में

  • पुलिस महानिदेशक (DGP) राज्य का सर्वोच्च रैंक वाला पुलिस अधिकारी होता है, जो राज्य पुलिस बल के समग्र प्रशासन, पर्यवेक्षण और परिचालन नियंत्रण के लिए उत्तरदायी होता है।
  • पात्रता एवं अनुभव
    • कानून-व्यवस्था, अपराध जाँच, खुफिया, या आर्थिक अपराधों में व्यापक अनुभव वाला वरिष्ठ IPS अधिकारी होना आवश्यक है।
    • UPSC दिशा-निर्देशों के अनुसार, कार्यकाल की स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु न्यूनतम शेष सेवा अवधि आवश्यक है।
  • नियुक्ति प्रक्रिया
    • राज्य सरकार, वर्तमान DGP की सेवानिवृत्ति से तीन महीने पूर्व UPSC को प्रस्ताव भेजती है।
    • UPSC तीन सबसे वरिष्ठ और योग्य अधिकारियों का पैनल तैयार करता है।
    • राज्य सरकार पैनल में से एक अधिकारी को नियमित DGP के रूप में नियुक्त करती है।
  • भूमिका एवं कार्य
    • सार्वजनिक व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना।
    • पुलिसिंग मानकों, जाँच और बल अनुशासन का पर्यवेक्षण।
    • राजनीतिक कार्यपालिका और पुलिस प्रशासन के बीच प्रमुख सेतु के रूप में कार्य करना।
  • राज्यों की शक्तियाँ
    • पुलिस राज्य सूची (सूची II, सातवीं अनुसूची) का विषय है।
    • पुलिस का अधीक्षण पुलिस अधिनियम, 1861 के तहत राज्य सरकार में निहित है, किंतु यह संवैधानिक और न्यायिक सीमाओं के अधीन है।

निष्कर्ष

पुलिस सुधार निर्देशों का लगातार अनुपालन न होना संस्थागत स्वायत्तता को कमजोर करता है; पेशेवर पुलिसिंग, लोकतांत्रिक जवाबदेही और विधि के शासन के लिए नियमित DGP की नियुक्ति सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

संदर्भ 

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक नाबालिग के 30 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दी, जिससे मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत सांविधिक गर्भकाल की सीमाओं के परे प्रजनन स्वायत्तता को पुनः पुष्टि मिली।

प्रमुख विशेषताएँ

  • न्यायालय के अनुसार, किसी भी महिला, खासकर नाबालिग, को अनचाहे गर्भ को जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
  • कठोर सांविधिक समय-सीमाओं की तुलना में प्रजनन स्वायत्तता और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर दिया गया।
  • 24 सप्ताह से अधिक अवधि में पहुँच अस्वीकृत होने पर असुरक्षित और अवैध गर्भपात के जोखिमों की चेतावनी दी।

प्रजनन स्वायत्तता (Reproductive Autonomy)

  • प्रजनन स्वायत्तता से तात्पर्य एक महिला के अपने शरीर, प्रजनन क्षमता और मातृत्व के संबंध में स्वतंत्र, सूचित और स्वैच्छिक निर्णय लेने के अधिकार से है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • अनुच्छेद-21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का अभिन्न हिस्सा।
    • गर्भ को जारी रखने या समाप्त करने का अधिकार शामिल।
    • शारीरिक अखंडता, गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य को शामिल करना।

प्रजनन स्वायत्तता को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दे

  • पितृसत्तात्मक नियंत्रण: सामाजिक मानदंड और संस्थागत प्रथाएँ महिलाओं के निर्णय लेने की क्षमता को सीमित करती हैं।
  • सहमति बाधाएँ: अस्पताल प्रायः वैध स्थिति के बावजूद पति या माता-पिता की सहमति माँगते हैं।
  • किशोरावस्था संबंधी संवेदनशीलता: यौन शिक्षा की कमी और किशोर यौनिकता संबंधी उपेक्षा।
  • स्वास्थ्य सेवा में अंतर: विशेषज्ञों की कमी और सुरक्षित गर्भपात सेवाओं का असमान ग्रामीण पहुँच।
  • लैंगिक असमानता: NFHS-5 के अनुसार, केवल 10% महिलाएँ स्वतंत्र रूप से स्वास्थ्य संबंधी निर्णय ले पाती हैं।

भारत की गर्भपात नीति

  • भारत में गर्भपात को एक वैधानिक ढाँचे  के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है, जो महिलाओं की प्रजनन स्वायत्तता और चिकित्सा निगरानी के बीच संतुलन स्थापित करता है, बजाय इसके कि इसे एक असीमित मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी जाए।
  • उद्गम: IPC, 1860 (धारा 312) ने महिलाओं का जीवन बचाने के उद्देश्य को छोड़कर गर्भपात को अपराध माना गया है।
  • हालिया संशोधन: MTP (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत गर्भपात की अनुमति 20 सप्ताह तक एक डॉक्टर की राय पर दी जाती है, और 20–24 सप्ताह तक निर्दिष्ट वर्गों (दुष्कर्म पीड़ित, नाबालिग, विधवाएँ/तलाकशुदा महिलाएँ) के लिए अनुमति है।
  • MTP (संशोधन) अधिनियम, 2021 के प्रावधान
    • 20 सप्ताह तक: एक पंजीकृत चिकित्सक की राय पर गर्भपात की अनुमति।
    • 20–24 सप्ताह: निर्दिष्ट वर्गों (दुष्कर्म पीड़ित, नाबालिग आदि) के लिए दो डॉक्टरों की राय आवश्यक।
    • 24 सप्ताह से अधिक: भ्रूण असामान्यताओं के मामलों में मेडिकल बोर्ड की मंजूरी पर अनुमति।
    • व्यापक पहुँच: “पति” से “साथी” तक विस्तार, जिससे वैवाहिक स्थिति से परे पहुँच का विस्तार।

गर्भपात पर अन्य सर्वोच्च न्यायालय के आदेश

  • X बनाम प्रधान सचिव, भारत सरकार, एनसीटी दिल्ली (2022): न्यायालय ने कहा कि अविवाहित महिलाओं को 24 सप्ताह तक गर्भपात के समान अधिकार हैं और स्पष्ट किया कि MTP अधिनियम के तहत “दुष्कर्म” में वैवाहिक दुष्कर्म भी शामिल है।
  • XYZ बनाम गुजरात राज्य (2023): 25–26 सप्ताह के गर्भ की समाप्ति की अनुमति दी, यह मान्यता देते हुए कि अनचाहे गर्भ का जारी रहना गंभीर मानसिक पीड़ा उत्पन्न करता है।
  • गर्भपात के रिवर्सल पर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश (2024): पुनः दोहराया कि गर्भवती महिला की सहमति या नाबालिग होने पर उसके अभिभावक की सहमति सर्वोपरि है और इसे किसी भी चरण में वापस लिया जा सकता है।
  • जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017): यह स्थापित किया कि प्रजनन संबंधी विकल्प अनुच्छेद-21 के तहत निजता, गरिमा और शारीरिक स्वायत्तता का हिस्सा हैं।

वैश्विक प्रथाएँ

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: डॉब्स वर्सस जैक्सन (2022) मामले के बाद गर्भपात पर प्रतिबंध, अब गर्भपात संघीय संवैधानिक अधिकार नहीं रहा, जिससे राज्यों में भिन्नता उत्पन्न हुई—कुछ राज्यों में लगभग पूर्ण प्रतिबंध और कुछ में विस्तारित पहुँच शामिल है।
  • फ्राँस: गर्भपात अनुरोध पर 14 सप्ताह तक कानूनी है और इसे स्पष्ट संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है, जो प्रजनन अधिकारों को मौलिक मानता है।
  • चीन: गर्भपात व्यापक रूप से कानूनी और सुलभ बना हुआ है, हालाँकि हाल के नीतिगत परिवर्तन गैर-चिकित्सीय गर्भपात को प्रोत्साहित नहीं करते, ताकि घटती प्रजनन दर का समाधान किया जा सके।
  • लैटिन अमेरिका (ग्रीन वेव): अर्जेंटीना, कोलंबिया और मैक्सिको में प्रगतिशील उदारीकरण हुआ है, जबकि अल-सल्वाडोर और होंडुरास में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है।
    • अर्जेंटीना में: किसी भी कारण से अनुरोध पर गर्भपात 14 सप्ताह तक कानूनी है। 14 सप्ताह के बाद, दुष्कर्म के मामलों में या माँ के जीवन/स्वास्थ्य पर जोखिम होने पर गर्भपात की अनुमति है।
  • पोलैंड: यूरोप के सबसे कठोर प्रावधानों में से एक, जहाँ गर्भपात केवल दुष्कर्म, विवाहेतर संबंध या महिला के जीवन पर जोखिम होने की स्थिति में ही अनुमति है।

सर्वोच्च न्यायालय का विकसित होता गर्भपात संबंधी न्यायशास्त्र महिलाओं की गरिमा, स्वायत्तता और मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखता है, और संवैधानिक नैतिकता को प्रक्रियात्मक कठोरता पर प्राथमिकता देता है।

संदर्भ

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के शोधकर्ताओं ने उत्तरी बंगाल की खाड़ी में पश्चिम बंगाल तट पर दो नई नेरिडिड पॉलीकीट (समुद्री) कृमि प्रजातियों की खोज की है।

  • इन कृमियों को “बायो-वॉरियर्स” के रूप में वर्णित किया जा रहा है क्योंकि ये प्रदूषित और चरम वातावरण में भी जीवित रह सकते हैं, जहाँ अधिकांश प्रजातियाँ जीवित नहीं रह पाती हैं।

पॉलीकीट कृमि (Polychaete Worms)

  • पॉलीकीट कृमि फाइलम ऐनेलिडा (Annelida) से संबंधित समुद्री खंडित कृमि होते हैं, और इन्हें “पॉलीकीट” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके शरीर के खंडों पर अनेक ब्रिसल्स (सेटी/काँटेनुमा संरचनाएँ) पाई जाती हैं।
  • पारिस्थितिकी महत्त्व
    • पॉलीकीट कृमि आवास निर्माण की क्रिया के माध्यम से अवसाद को वायुरहित करते हैं, जिससे पोषक तत्त्व चक्र को समर्थन मिलता है और समुद्री तल की गुणवत्ता सुधरती है।
    • ये समुद्री खाद्य जाल का समर्थन करते हैं क्योंकि ये मछलियों, केकड़ों और समुद्री पक्षियों के लिए भोजन का स्रोत होते हैं।

खोजी गई प्रजातियों के बारे में

  • नैमालिकैस्टिस सोलेनोटोनेथा (Namalycastis solenotognatha)
    • नामोत्पत्ति और विशिष्ट विशेषता: इसका नाम ग्रीक शब्दों से लिया गया है, जिसका अर्थ “नलिकायुक्त जबड़ा” है, जो इसकी कई नलिकाओं वाले असामान्य जबड़े की संरचना को दर्शाता है।

    • आवास वरीयता: यह सल्फाइड-समृद्ध, दुर्गंधयुक्त कीचड़ वाले क्षेत्रों जैसे चरम वातावरण में पनपता है।
    • पारिस्थितिकी नीस: यह सामान्यतः सड़ती हुई मैंग्रोव काष्ठ और कठोर मृदा की सतहों पर पाया जाता है।
    • अनुकूलन और सहनशीलता: विषैले आवासों में इसका जीवित रहना कठोर पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति इसकी उच्च सहनशीलता को दर्शाता है।
  • नेराइस धृतिये (Nereis dhritiae)
    • नामोत्पत्ति: इस प्रजाति का नाम ZSI की प्रथम महिला निदेशक डॉ. धृति बनर्जी के नाम पर रखा गया है।
    • आवास और व्यवहार: यह रेतीले समुद्र तटों पर लकड़ी के स्तंभों के भीतर पाया जाता है, जो उच्च ज्वार के समय जलमग्न हो जाते हैं।
    • तटीय अनुकूलन: यह प्रजाति मानव-परिवर्तित तटीय क्षेत्रों में जीवित रहने की विशेषीकृत रणनीतियाँ प्रदर्शित करती है।

प्रजातियों का महत्त्व

  • नेरिडिड कृमियों की पारिस्थितिकी भूमिका
    • पोषक तत्त्व चक्रण: ये कृमि तटीय पारिस्थितिकी तंत्र में जैविक पदार्थ के पुनर्चक्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    • अवसाद वायवीयता (Sediment Aeration): इनकी बिल बनाने की गतिविधि ऑक्सीजन प्रवाह और तलछट की गुणवत्ता में सुधार करती है।
    • तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण: ये दलदली मैदानों और निकट-तटीय आवासों की उत्पादकता बनाए रखने में योगदान देते हैं।
  • प्रदूषण सहनशीलता का संकेतक
    • प्रदूषित क्षेत्रों में जीवित रहना: दोनों प्रजातियाँ ऐसे आवासों में पाई गईं, जो औद्योगिक प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों से अत्यधिक प्रभावित हैं।
    • जैव-संकेतक क्षमता (Bioindicator Potential): इनकी उपस्थिति तटीय स्वास्थ्य और प्रदूषण स्तर की निगरानी के लिए एक पारिस्थितिकी संकेतक के रूप में कार्य कर सकती है।
    • अनुसंधान निहितार्थ: पर्यावरणीय आकलन के लिए पॉलीकीट कृमियों को तेजी से उपयोगी उपकरण के रूप में देखा जा रहा है।
  • संरक्षण और नीतिगत प्रासंगिकता: यह खोज क्षरण के बावजूद संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों की सुरक्षा के महत्त्व को सुदृढ़ करती है।

संदर्भ

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने भारत में बाघ संरक्षण के 50 वर्ष पूर्ण होने पर बाघ संरक्षण नीतियों की व्यापक समीक्षा का आह्वान किया।

सम्मेलन के प्रमुख बिंदु

  • NTCA बैठकों की समीक्षा: मंत्री ने सभी नीतिगत निर्णयों की समीक्षा करने का आग्रह किया ताकि यह पहचाना जा सके कि कौन-से निर्णय पुराने, अप्रवर्तित, या पूर्ण रूप से लागू हो चुके हैं।
  • औपचारिक नीति समेकन: उन्होंने पाँच दशकों के नीतिगत निर्णयों को एक औपचारिक नीति वक्तव्य में समेकित करने का सुझाव दिया और इस विषय को अगली NTCA बैठक के प्रथम एजेंडा के रूप में रखने की बात कही।
  • प्रमुख प्राथमिकता क्षेत्र
    • बाघ आबादी आकलन: मंत्री ने बाघों की आबादी अनुमान संबंधी अभ्यासों में सुधार पर केंद्रित विचार-विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया।
    • रेस्क्यू और पुनर्वास अवसंरचना: बाघ अभयारण्यों के आसपास रेस्क्यू, पुनर्वास और ट्रांजिट उपचार केंद्रों को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।
    • मानव–वन्यजीव संघर्ष: मानव–वन्यजीव अंतःक्रियाओं के सक्रिय प्रबंधन को एक प्रमुख उभरती आवश्यकता के रूप में चिह्नित किया गया है।
    • टाइगर रिजर्व फंड का उपयोग: टाइगर रिजर्व फंड और प्रोजेक्ट टाइगर संबंधी संसाधनों के बेहतर उपयोग पर बल दिया गया।
    • संरक्षण आधारों को सुदृढ़ करना: दीर्घकालिक स्थिरता के लिए टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशनों को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
  • कार्य समूहों का गठन
    • चार क्षेत्र-विशिष्ट कार्य समूह: मंत्री ने क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों, जिनमें बाघ आबादी में परिवर्तन शामिल हैं, की समीक्षा हेतु चार कार्य समूह गठित करने का प्रस्ताव रखा है।
    • ये समूह बाघ अभयारण्यों में केंद्र प्रायोजित संरक्षण योजनाओं के क्रियान्वयन का भी आकलन करेंगे।

बाघ संरक्षण ढाँचा

  • प्रोजेक्ट टाइगर
    • शुरुआत: प्रोजेक्ट टाइगर वर्ष 1973 में एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किया गया, ताकि व्यवहार्य बाघ आबादी सुनिश्चित की जा सके और महत्त्वपूर्ण आवासों की रक्षा की जा सके।
    • सर्वप्रथम जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में लागू किया गया।
    • प्रकार: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत एक केंद्रीय प्रायोजित योजना।
    • सर्वाधिक बाघ आबादी वाला राज्य: मध्य प्रदेश।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)
    • स्थापना: वर्ष 2005
    • स्थिति: NTCA वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (2006 संशोधन) के अंतर्गत गठित एक वैधानिक निकाय है।
    • दायित्व: यह बाघ संरक्षण योजनाओं को स्वीकृति देता है, बाघ अभयारण्यों की निगरानी करता है, और प्रोजेक्ट टाइगर दिशा-निर्देशों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है।
  • बाघ अभयारण्यों का नेटवर्क
    • ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के अंतर्गत सुरक्षित प्रजनन आवास प्रदान करने हेतु बाघ अभयारण्यों का निर्माण किया गया।
    • NTCA द्वारा प्रशासित।
    • बाघ अभयारण्यों की संख्या: 58 (मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 9 अभयारण्य हैं)।
    • सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य: नागार्जुनसागर–श्रीशैलम् बाघ अभयारण्य (आंध्र प्रदेश–तेलंगाना) भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है।

  • आबादी प्रवृत्तियाँ
    • नवीनतम बाघों की गणना (2022) के अनुसार, बाघों की अनुमानित आबादी 3,682 (औसत संख्या) है।
    • अग्रणी राज्य: मध्य प्रदेश 785 के साथ अग्रणी है, इसके बाद कर्नाटक (563), उत्तराखंड (560), और महाराष्ट्र (444) हैं।
    • दीर्घकालिक वृद्धि प्रवृत्ति: वर्ष 2006 से भारत की बाघ आबादी लगभग 6% वार्षिक दर से बढ़ी है।
    • घनत्व: टाइगर रिजर्व के भीतर बाघों की सर्वाधिक प्रचुरता कॉर्बेट (260) में है, इसके बाद बाँदीपुर (150), नागरहोल (141)।
    • भारत वर्तमान में विश्व की लगभग 75% वन्य बाघ आबादी का आश्रयस्थल है।

  • बाघ कॉरिडोर संरक्षण
    • कॉरिडोर संरक्षित क्षेत्रों को जोड़ते हैं और बाघों के सुरक्षित आवागमन की अनुमति देते हैं।
    • परिदृश्य-स्तरीय संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण; बाघ कॉरिडोर आनुवंशिक अलगाव को रोकते हैं और दीर्घकालिक प्रजाति अस्तित्व का समर्थन करते हैं।
    • देश भर में 32 प्रमुख कॉरिडोर।
    • उदाहरण
      • शिवालिक पहाड़ियाँ एवं गंगा के मैदान: राजाजी–कॉर्बेट
      • मध्य भारत एवं पूर्वी घाट: रणथंभौर–कूनो–माधव
      • पश्चिमी घाट: नागरहोल–बाँदीपुर–मुदुमलाई–वायनाड
      • उत्तर-पूर्व: काजीरंगा–कार्बी आंगलोंग
  • अखिल भारतीय बाघ आकलन (टाइगर गणना)
    • प्रत्येक 4 वर्ष में आयोजित।
    • क्रियान्वयनकर्ता: NTCA, राज्य वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII)।
  • बाघों के लिए निगरानी प्रणाली: इंटेंसिव प्रोटेक्शन एंड इकोलॉजिकल स्टेटस प्रोग्राम (MSTrIPES)
    • एक प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी प्रणाली।
    • रियल-टाइम , डेटाबेस निर्माण, पारिस्थितिक आकलन और बेहतर रिजर्व प्रबंधन में सहायक।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
    • बाघ संरक्षण के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।
    • बाघों को अनुसूची I (सर्वोच्च संरक्षण) के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है।
  • ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF)
    • एक अंतरराष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन।
    • मुख्यालय: नई दिल्ली, भारत।
    • बाघ संरक्षण हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने का उद्देश्य।
  • ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव (GTI)
    • वर्ष 2008 में सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र की वैश्विक साझेदारी के रूप में शुरू।
    • समन्वित वैश्विक कार्रवाई के माध्यम से बाघों के विलुप्त होने को रोकने का लक्ष्य।
    • वर्ष 2013 में इसके दायरे का विस्तार ‘स्नो लेपर्ड’ संरक्षण तक किया गया।

इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA)

  • अवलोकन
    • इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है, जो सहयोग, क्षमता निर्माण और वित्तीय सहायता के माध्यम से प्रमुख बिग कैट्स प्रजातियों के वैश्विक संरक्षण को बढ़ावा देता है।
    • इसे अप्रैल 2023 में प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया और वर्ष 2024 में एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी इकाई के रूप में औपचारिक रूप दिया गया।
  • मुख्यालय और सचिवालय: नई दिल्ली, भारत।
  • मुख्य फोकस प्रजातियाँ: IBCA सात प्रमुख ‘बिग कैट’ प्रजातियों के संरक्षण के लिए कार्य करता है: बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जैगुआर, प्यूमा।
  • ग्लोबल बिग कैट समिट: केंद्रीय बजट 2026–27 में घोषणा की गई है कि पहला ग्लोबल बिग कैट समिट भारत में आयोजित किया जाएगा।

संदर्भ

हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री ने मलेशिया का दौरा (7-8 फरवरी, 2026) किया, और भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (2024) की पुष्टि की।

संबंधित तथ्य

प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया की यह तीसरी यात्रा थी और अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिए जाने के बाद यह उनकी पहली यात्रा थी।

यात्रा के प्रमुख परिणाम

  • राजनीतिक ढाँचा और बहुपक्षीय सामंजस्य
    • संबंधों में प्रगाढ़ता: दोनों नेताओं ने वर्ष 2024 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) की पुष्टि करते हुए इस बात पर जोर दिया कि संबंध पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर उच्च-तकनीकी सामंजस्य और रणनीतिक विश्वास पर आधारित साझेदारी की ओर अग्रसर हो गए हैं।
    • आसियान की केंद्रीयता और एक्ट ईस्ट नीति: भारतीय प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 में दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) की सफल अध्यक्षता के लिए मलेशिया की सराहना की।
      • दोनों देशों ने एक स्वतंत्र और खुले समुद्री क्षेत्र को सुनिश्चित करने के लिए भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) के साथ आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक  (AOIP) को संरेखित करने का संकल्प लिया।

    • ब्रिक्स और वैश्विक शासन: एक महत्त्वपूर्ण परिणाम ब्रिक्स के भागीदार देश के रूप में मलेशिया के लिए भारत का समर्थन रहा
      • मलेशिया ने भारत की वर्ष 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का स्वागत किया और दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि अधिक प्रतिनिधि और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए ऐसे मंच आवश्यक हैं।
    • संयुक्त राष्ट्र सुधार: मलेशिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की माँग के प्रति अपने निरंतर समर्थन को दोहराया।
      • इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण किया।
  • आर्थिक, डिजिटल और वित्तीय संपर्क
    • फिनटेक एकीकरण (UPI-PayNet): डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए, NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और पेनेट मलेशिया ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को मलेशिया के ड्यूटनाउ (DuitNow) से जोड़ने के लिए एक समझौता किया है।
      • इससे पर्यटकों, छात्रों और व्यवसायों के लिए वास्तविक समय में, कम लागत पर सीमा पार धन प्रेषण और क्यूआर-आधारित भुगतान संभव हो सकेंगे।
    • स्थानीय मुद्रा निपटान ढाँचा: अमेरिकी डॉलर जैसी तृतीय-पक्ष मुद्राओं पर निर्भरता कम करने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बैंक नेगारा मलेशिया (BNM) को भारतीय रुपये (INR) और मलेशियाई रिंगिट (MYR) में द्विपक्षीय व्यापार की बिलिंग और निपटान की प्रक्रिया को शीघ्रता से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
    • मलेशिया-भारत डिजिटल परिषद (MIDC): यह नवगठित निकाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सर्वोच्च रणनीतिक तंत्र के रूप में कार्य करेगा।
  • व्यापार सुगमता और औद्योगिक सहयोग
    • व्यापार समझौतों की समीक्षा: दोनों नेताओं ने आधुनिक व्यापार प्रथाओं के अनुरूप और अधिक सुगम बनाने के लिए आसियान-भारत व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा के महत्त्व पर बल दिया।
      • उन्होंने मलेशिया-भारत व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (MICECA) के अधिकतम उपयोग को भी प्रोत्साहित किया।

    • सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला: एक सुदृढ़ सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला के निर्माण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें कार्यबल विकास और तकनीकी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ग्लोबल और मलेशिया की एडवांस्ड सेमीकंडक्टर एकेडमी के बीच एक ऐतिहासिक साझेदारी शामिल है।
    • खाद्य सुरक्षा हेतु सतत् ताड़ तेल सहयोग: भारत को एक प्रमुख उपभोक्ता के रूप में स्वीकार करते हुए, मलेशिया ने निरंतर ताड़ के तेल का एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बने रहने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
      • दोनों पक्ष मूल्य वर्द्धित ताड़ उत्पादों पर सहयोग करने और मुख्य खाद्य पदार्थों के लिए सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला स्थापित करने पर सहमत हुए।
  • रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग
    • Su-30 फोरम: Su-30 फोरम के लिए कार्यक्षेत्र को अंतिम रूप दिया गया, जो भारतीय वायु सेना और रॉयल मलेशियाई वायु सेना को अपने साझा सुखोई-30 लड़ाकू जेट बेड़े के रखरखाव, पुर्जों और उन्नयन पर सहयोग करने के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करता है।
    • आतंकवाद विरोधी पहल: दोनों देशों ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टालरेंस’ की नीति पर सहमति व्यक्त की।
      • उन्होंने क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी तैयारियों को बढ़ाने के लिए वर्ष 2026 में आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (ADMM-Plus) ढाँचे के तहत एक टेबल-टॉप एक्सरसाइज (TTX) की सह-अध्यक्षता करने पर सहमति व्यक्त की।
    • शासन और भ्रष्टाचार विरोधी: भ्रष्टाचार से निपटने और रोकथाम में सहयोग के लिए एक नए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे भारत के केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और मलेशियाई भ्रष्टाचार विरोधी आयोग (MACC) के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा मिलेगा।
    • समुद्री सुरक्षा: रणनीतिक मामलों के कार्य समूह (SAWG) की स्थापना और पहले मलेशिया-भारत सुरक्षा वार्ता का मुख्य उद्देश्य खुफिया जानकारी साझा करना और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (1982) के अनुरूप नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना होगा।
  • सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संबंध
    • श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा: मलेशिया में कार्यरत भारतीय श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा की रक्षा के लिए भारत के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) और मलेशिया के सामाजिक सुरक्षा संगठन (PERKESO) के बीच एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
    • स्वास्थ्य सेवा एवं पारंपरिक चिकित्सा: नेताओं ने मलेशियाई अस्पतालों में पारंपरिक भारतीय चिकित्सा (TIM) विशेषज्ञों की तैनाती पर सहमति व्यक्त की।
      • इसके अलावा, होम्योपैथी अनुसंधान के लिए केंद्रीय परिषद (CCRH) और साइबरजाया विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन संयुक्त अनुसंधान और अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।
    • शिक्षा एवं कौशल: भारत ने मलेशियाई छात्रों को “स्टडी इन इंडिया” कार्यक्रम का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।
      • दोनों देशों ने छात्रों के कौशल को उच्च-तकनीकी उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (TVET) पर एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।
    • तिरुवल्लुवर केंद्र और छात्रवृत्तियाँ: सभ्यतागत संबंधों का लाभ उठाने के लिए, यूनिवर्सिटी मलाया में एक तिरुवल्लुवर केंद्र स्थापित किया गया, साथ ही भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक मलेशियाई छात्रों के लिए विशेष तिरुवल्लुवर छात्रवृत्तियाँ शुरू की गईं।
    • पर्यावरण प्रतिबद्धता: मलेशिया ने भारत के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के फ्रेमवर्क समझौते की आधिकारिक रूप से पुष्टि की, जिससे वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को बल मिला।

PWOnly IAS विशेष

मलेशिया के बारे में

  • भू-राजनीति और समुद्री रणनीति: मलेशिया, मलक्का जलडमरूमध्य का एक प्रमुख तटीय देश है, जो विश्व का सबसे व्यस्त समुद्री परिवहन मार्ग है और जहाँ से भारत का लगभग 60% पूर्वी व्यापार गुजरता है।
    • यह आसियान का संस्थापक सदस्य है और वर्ष 2025 में आसियान की अध्यक्षता की, जिससे यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का एक प्रमुख स्तंभ बन जाता है।
  • अद्वितीय राजनीतिक प्रणाली: यह एक संघीय संवैधानिक राजतंत्र है, जिसमें एक अनूठी चक्रीय राजतंत्र प्रणाली है, जहाँ राजा (यांग दी-पर्टुआन अगोंग) का चुनाव नौ वंशानुगत मलय शासकों में से हर पाँच वर्ष में होता है।
    • सरकार वेस्टमिंस्टर संसदीय मॉडल का अनुसरण करती है।
  • भौगोलिक विभाजन: दक्षिण चीन सागर द्वारा देश को विशिष्ट रूप से प्रायद्वीपीय मलेशिया (पश्चिम) और पूर्वी मलेशिया (बोर्नियो द्वीप पर) में विभाजित किया गया है।
    • पश्चिम में इसकी सीमा थाईलैंड और सिंगापुर से लगती है, जबकि पूर्व में इंडोनेशिया और ब्रुनेई से।
  • जलवायु एवं भू-भाग: मलेशिया में भूमध्यरेखीय जलवायु पाई जाती है, जिसमें उच्च आर्द्रता और नियमित वर्षा होती है।
    • यह दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट किनाबालू (सबाह) और लेंगगोंग घाटी का आवास है, जहाँ अफ्रीका के बाहर पाए गए सबसे प्राचीन मानव अवशेष मौजूद हैं।
  • आर्थिक कारक: मलेशिया निरंतर ताड़ के तेल के उत्पादन में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है और वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है, जो वैश्विक बैक-एंड विनिर्माण (परीक्षण और पैकेजिंग) का लगभग 13% हिस्सा है।
  • बुमिपुतेरा और प्रवासी: यहाँ की आबादी बहुजातीय है, जिसमें बुमिपुतेरा (नृजातीय मलय और स्वदेशी समूह) लगभग 70% हैं।
    • मलेशिया में लगभग 29 लाख की संख्या वाला विश्व का तीसरा सबसे बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय और दूसरा सबसे बड़ा PIO समुदाय उपस्थित है।

भारत-मलेशिया संबंधों के बारे में

  • ऐतिहासिक और सभ्यतागत आधार: भारत और मलेशिया के मध्य संबंध हिंद महासागर में दो सहस्राब्दियों से अधिक के साझा समुद्री इतिहास पर आधारित हैं।
    • प्राचीन समुद्री नेटवर्क: व्यापार, धर्म और भाषायी आदान-प्रदान ने सभ्यताओं के मध्य निरंतर और गहन संपर्क को बढ़ावा दिया।
      • हिंदू-बौद्ध परंपराओं और संस्कृत का प्रभाव मलय प्रायद्वीप के सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक ताने-बाने में गहराई से समाया हुआ है।
    • चोल विरासत: 9वीं और 13वीं शताब्दी के बीच, चोल साम्राज्य ने एक महत्त्वपूर्ण सेतु का काम किया।
      • राजराजा चोल प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम जैसे सम्राटों के शासनकाल में, इस राजवंश ने विशाल समुद्री मार्ग स्थापित किए और वर्तमान मलेशिया (श्रीविजय और केदाह/कडाराम) के कुछ हिस्सों पर राजनीतिक प्रभाव स्थापित किया।
      • इस युग ने एक स्थायी सांस्कृतिक छाप छोड़ी, जो मलेशिया की स्थापत्य शैली और शाही उपाधियों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
    • साहित्यिक रूपांतरण: रामायण साझा विरासत का प्रमाण है।
      • मलय साहित्यिक रूपांतरण, हिकायत सेरी रामा, संस्कृत महाकाव्य को स्थानीय भाषा और परंपरा के अनुरूप पुनर्सृजित करता है, साथ ही इसके धर्म के मूल आदर्शों को भी संरक्षित रखता है।
      • श्री वीर हनुमान मंदिर जैसे सांस्कृतिक स्थल इस स्थापत्य और कथात्मक मिश्रण का और भी बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
  • राजनीतिक और रणनीतिक अभिसरण: भारत और मलेशिया ऐतिहासिक मित्र से आधुनिक रणनीतिक साझेदार बन गए हैं, विशेष रूप से एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत।
  • व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP): अगस्त 2024 में उन्नत हुई यह साझेदारी गहरे राजनीतिक विश्वास और संस्थागत सहयोग की ओर एक परिवर्तन का संकेत देती है।
    • बहुपक्षीय गठबंधन: फरवरी 2026 की यात्रा जैसी उच्च स्तरीय वार्ताएँ वैश्विक शासन के लिए एक साझा दृष्टिकोण को मजबूत करती हैं।
      • मलेशिया ने लगातार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की वकालत की है और भारत की वर्ष 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन किया है।
    • क्षेत्रीय सुरक्षा: दोनों देश आसियान की केंद्रीयता पर जोर देते हैं। मलक्का जलडमरूमध्य पर मलेशिया की रणनीतिक स्थिति इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री संपर्क और सुरक्षा रणनीति में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी बनाती है।
  • व्यापार और आर्थिक संतुलन: मजबूत संस्थागत ढाँचों द्वारा संचालित द्विपक्षीय संबंधों का आधार आज भी अर्थशास्त्र ही है।
    • व्यापार परिदृश्य (2024-25): कुल द्विपक्षीय व्यापार 19.86 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। इसमें भारत का 7.32 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात (खनिज ईंधन, इंजीनियरिंग सामान, जैविक रसायन और बीफ) और 12.54 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात (ताड़ का तेल, विद्युत मशीनरी और लकड़ी) शामिल है।
    • निवेश और वित्त: वर्ष 2000 से वर्ष 2025 के बीच, भारत में मलेशिया का संचयी निवेश लगभग 1.27 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
    • मुद्रा और फिनटेक नवाचार: जुलाई 2022 में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि ने भारतीय रुपये (INR) में व्यापार निपटान की सुविधा प्रदान की। हाल ही में, वर्ष 2026 में, भारत के यूपीआई को मलेशिया के पेनेट (DuitNow) से जोड़ने से सीमा पार वित्तीय लेन-देन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है।
    • नियामक ढाँचा: व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) और आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) के माध्यम से व्यापार को सुगम बनाया जाता है, जिनमें से AITIGA की वर्तमान में बाजार पहुँच को और आसान बनाने के लिए समीक्षा की जा रही है।
  • रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग: सुरक्षा साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक परिष्कृत ढाँचे के रूप में विकसित हो चुकी है।
    • आधारभूत समझौता ज्ञापन: वर्ष 1993 का रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन, जिसमें जुलाई 2023 में महत्त्वपूर्ण संशोधन किए गए, व्यापक संयुक्त उद्यमों और खरीद परियोजनाओं को सक्षम बनाता है।
    • सैन्य अंतरसंचालनीयता: नियमित संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से रणनीतिक संबंध सुदृढ़ होते हैं:
      • हरिमाऊ शक्ति (सेना)
      • समुद्र लक्ष्मण (नौसेना)
      • उदरा शक्ति (वायु सेना)
    • औद्योगिक सहयोग: कुआलालंपुर में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन, विशेष रूप से साझा सुखोई-30 प्लेटफॉर्मों के संबंध में, एयरोस्पेस और रखरखाव सहयोग के एक नए युग का प्रतीक है।
  • प्रवासी और जन-जन संबंध: दोनों देशों के बीच मानवीय संबंध विश्व के सबसे मजबूत संबंधों में से एक है।
    • जनसांख्यिकी: मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो विश्व स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा भारतीय मूल का समुदाय है।
      • यह मुख्य रूप से तमिल भाषी समुदाय मलेशिया के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • सांस्कृतिक कूटनीति: कुआलालंपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय सांस्कृतिक केंद्र (NSCBICC) भारतीय शास्त्रीय कला, योग और हिंदी भाषा की शिक्षा का केंद्र है।
    • सामाजिक और कांसुलर सहायता: इस समुदाय की बेहतर सेवा करने और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए, भारत ने वर्ष 2026 में कोटा किनाबालू, सबाह में एक नए वाणिज्य दूतावास की घोषणा की।
    • चुनौतियों का समाधान: दोनों सरकारें अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और वर्ष 2026 के ईएसआईसी-पेरकेसो सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत श्रम अधिकारों की सुरक्षा सहित गैर-पारंपरिक सुरक्षा मुद्दों को हल करने में लगी हुई हैं।

आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) के बारे में

  • संस्थागत उत्पत्ति एवं कार्यक्षेत्र: AITIGA की उत्पत्ति वर्ष 2003 के फ्रेमवर्क समझौते से हुई और यह 1 जनवरी, 2010 को लागू हुआ।
    • महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इसमें केवल भौतिक वस्तुओं का ही समावेश है; सेवाओं और निवेश में व्यापार अलग-अलग समझौतों (जिन पर वर्ष 2014 में हस्ताक्षर किए गए) द्वारा नियंत्रित होता है, जो मिलकर आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र (AIFTA) का निर्माण करते हैं।
  • आधुनिकीकरण’ अधिदेश (2026): 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के बाद, एक व्यापक समीक्षा चल रही है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2026 के आरंभ से मध्य तक पूरा करना है।
    • इसका उद्देश्य समझौते को आधुनिक और संतुलित’ बनाना है, विशेष रूप से भारत द्वारा RCEP से बाहर निकलने के बाद, AITIGA को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत का प्राथमिक व्यापार माध्यम बनाना।
  • व्यापार विषमता का सुधार: भारत का मुख्य उद्देश्य भारी व्यापार घाटे को कम करना है, जो 8 अरब डॉलर (2010) से बढ़कर 45 अरब डॉलर (2025) से अधिक हो गया है।
    • भारत समान टैरिफ उदारीकरण के लिए प्रयासरत है और चाहता है कि आसियान सदस्य देश कम-से-कम 80% टैरिफ लाइनों के उदारीकरण के लिए भारत की प्रतिबद्धता का समर्थन करें।
  • उत्पाद-विशिष्ट मूल नियम (PSR): भारत सामान्य 35% स्थानीय मूल्यवर्द्धन नियम से हटकर सख्त उत्पाद-विशिष्ट नियमों की ओर बढ़ने के लिए बातचीत कर रहा है।
    • यह एक रणनीतिक कदम है, जिसका उद्देश्य ‘चोरी’ को रोकना है- अर्थात चीनी निर्मित वस्तुओं को आसियान देशों के माध्यम से भारतीय बाजार में शून्य शुल्क पर प्रवेश दिलाने के प्रयास को रोकना।
  • टैरिफ वर्गीकरण और “विशेष उत्पाद”: समझौते में एक स्तरीय प्रणाली का उपयोग किया गया है – सामान्य ट्रैक (0% शुल्क), संवेदनशील ट्रैक (4-5%), और एक बहिष्करण सूची।
    • विशेष रूप से, भारत “विशेष उत्पादों” (कच्चा और परिष्कृत ताड़ का तेल, कॉफी, काली चाय और काली मिर्च) के लिए विशेष संरक्षण बनाए रखता है, जो घरेलू कृषि सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
  • टैरिफ से परे (गैर-टैरिफ बाधाएँ और डिजिटल): वर्ष 2026 के अद्यतन में जटिल कोटा और तकनीकी मानकों जैसी गैर-टैरिफ बाधाओं (NTB) को हटाने पर जोर दिया गया है।
    • इसके अतिरिक्त, यह लेन-देन लागत को कम करने के लिए स्थानीय मुद्रा निपटान (जैसे- INR-रिंगिट) और ASEAN भुगतान प्रणालियों के साथ सीमा पार UPI लिंकेज जैसे आधुनिक वित्तीय स्तंभों को एकीकृत करता है।

भारत-मलेशिया संबंधों का रणनीतिक महत्त्व

वर्ष 2026 में भारत-मलेशिया संबंधों का महत्त्व पारंपरिक कूटनीति से उच्च तकनीक वाले, सुरक्षा-उन्मुख गठबंधन में परिवर्तन द्वारा परिभाषित किया जाएगा।

  • समुद्री संप्रभुता और हिंद-प्रशांत संतुलन: भूगोल के अनुसार, मलेशिया भारत की “एक्ट ईस्ट” नीति का प्रवेश द्वार है।
    • महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग सुरक्षा: मलक्का जलडमरूमध्य की साझा सुरक्षा (जिससे होकर भारत का 60% पूर्वी व्यापार गुजरता है) नौकायन की स्वतंत्रता के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
    • भू-राजनीतिक विश्वास: दक्षिण चीन सागर के निकट कोटा किनाबालू (सबाह) में भारतीय वाणिज्य दूतावास का खुलना रणनीतिक तालमेल और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता के एक नए स्तर का प्रतीक है।
    • आसियान की केंद्रीय भूमिका: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए मलेशिया का समर्थन और वर्ष 2025 में आसियान की अध्यक्षता और ब्रिक्स की आकांक्षाओं के लिए भारत का समर्थन क्षेत्रीय स्थिरता में उनकी भूमिका को मजबूत करता है।
  • सिलिकॉन शील्ड’-औद्योगिक परस्पर निर्भरता: इस संबंध का सबसे परिवर्तनकारी स्तंभ सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का एकीकरण है।
    • आपूर्ति शृंखला लचीलापन: मलेशिया के परिपक्व बैक-एंड इकोसिस्टम (वैश्विक परीक्षण और पैकेजिंग का 13%) और भारत की फ्रंट-एंड डिजाइन प्रतिभा के संयोजन से, दोनों देशों ने भू-राजनीतिक झटकों से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए एक “सिलिकॉन शील्ड” का निर्माण किया है।
    • उच्च-तकनीकी तालमेल: मलेशिया की एडवांस्ड सेमीकंडक्टर अकादमी और IIT मद्रास के बीच सहयोग वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने के लिए विशेषज्ञ कार्यबल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • रणनीतिक स्वायत्तता और डॉलर पर निर्भरता में कमी: भारत और मलेशिया पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर निर्भरता कम करने के लिए वैश्विक दक्षिण के लिए एक अग्रणी मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं।
    • स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS): व्यापार निपटान के लिए INR और रिंगिट को बढ़ावा देने से द्विपक्षीय व्यापार को अमेरिकी डॉलर की अस्थिरता से सुरक्षा मिलती है।
    • फिनटेक एकीकरण: UPI और पेनेट (DuitNow) का एकीकरण वास्तविक समय में कम लागत वाले सीमा पार भुगतान को सुगम बनाता है, जिससे लघु एवं मध्यम उद्यमों और प्रतिवर्ष मलेशिया आने वाले 14 लाख भारतीय पर्यटकों को लाभ मिलता है।
  • रक्षा एवं सुरक्षा अभिसरण: यह संबंध ऐतिहासिक मतभेदों से आगे बढ़कर सुरक्षा खतरों के प्रति “शून्य-सहिष्णुता” के रुख की ओर अग्रसर हो चुका है।
    • औद्योगिक सहयोग: चूँकि दोनों देश Su-30 लड़ाकू जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का संचालन करते हैं, इसलिए कुआलालंपुर स्थित HAL का क्षेत्रीय कार्यालय साझा रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण (MRO) के केंद्र के रूप में कार्य करता है।
    • आतंकवाद विरोधी अभियान: ADMM-Plus विशेषज्ञ कार्य समूह की संयुक्त सह-अध्यक्षता करते हुए, दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद और समुद्री डकैती से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने में समन्वय स्थापित किया है।
  • जीवंत सेतु’- सभ्यतागत सौम्य शक्ति: यह संबंध अपनी गहरी मानवीय नींव के कारण भविष्य के लिए अद्वितीय रूप से सुरक्षित है।
    • प्रवासी प्रभाव: मलेशिया में रहने वाले 29 लाख भारतीय मूल के लोग (विश्व स्तर पर तीसरे सबसे बड़े) एक स्थायी आर्थिक और सांस्कृतिक संपर्क सूत्र का काम करते हैं।
    • नॉलेज डिप्लोमेसी: तिरुवल्लुवर केंद्र की स्थापना और आयुर्वेद की साझा मान्यता 2000 वर्षों के इतिहास को आधुनिक संस्थागत सहयोग से जोड़ती है।

भारत-मलेशिया संबंधों में चुनौतियाँ और संघर्ष के बिंदु

हालाँकि यह साझेदारी “गति और गहराई के अभूतपूर्व चरण” में है, फिर भी इसे गहरी जड़ें जमा चुकी ऐतिहासिक समस्याओं और उभरती संरचनात्मक प्रतिस्पर्द्धा से निपटना होगा।

  • राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष
    • आंतरिक मामलों की संवेदनशीलता: जम्मू-कश्मीर और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर बाहरी टिप्पणियों को लेकर भारत बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
      • हालांकि प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने वर्ष 2024-2026 के दौरान कश्मीर को “घरेलू मुद्दा” बताते हुए अधिक व्यावहारिक रुख अपनाया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की छिटपुट गूँज राजनयिक तनाव को भड़काने का एक संभावित कारण बनी हुई है।
    • जाकिर नाइक का गतिरोध: मलेशिया में भगोड़े उपदेशक की उपस्थिति एक लगातार बनी रहने वाली “कम तीव्रता वाली” समस्या है।
      • फरवरी 2026 की यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं के बावजूद, मलेशिया में तकनीकी कानूनी प्रक्रियाओं और घरेलू राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण प्रत्यर्पण रुका हुआ है।
    • आतंकवाद विरोधी गठबंधन: हालाँकि दोनों देश सीमा पार आतंकवाद की निंदा करते हैं, लेकिन उनकी परिभाषाएँ कभी-कभी भिन्न होती हैं।
      • भारत के सुरक्षा-प्रथम दृष्टिकोण और मलेशिया के मानवाधिकार-केंद्रित कानूनी ढाँचे के बीच की खाई को पाटना एक निरंतर राजनयिक चुनौती है।
  • व्यापार असंतुलन और आर्थिक बाधाएँ
    • 5 अरब अमेरिकी डॉलर का घाटा: भारत को मलेशिया के साथ लगातार व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है (वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 5.22 अरब अमेरिकी डॉलर)।
      • भारत गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने और अपने फार्मास्यूटिकल्स और IT सेवाओं के लिए बेहतर बाजार पहुँच प्राप्त करने के लिए AITIGA (आसियान-भारत व्यापार समझौता) की समीक्षा के लिए आक्रामक रूप से प्रयास कर रहा है।
    • ताड़ के तेल पर निर्भरता: भारत मलेशियाई ताड़ के तेल का विश्व का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन के माध्यम से आत्मनिर्भरता के लिए किए जा रहे प्रयासों से मलेशिया की दीर्घकालिक बाजार हिस्सेदारी खतरे में पड़ रही है।
    • उत्पत्ति के नियम (ROO): भारत “छूट” को लेकर चिंतित है, जहाँ चीनी सामानों को कम टैरिफ का लाभ उठाने के लिए मलेशिया के रास्ते भेजा जाता है, जिसके कारण प्रवर्तन सख्त हो सकता है और वैध व्यापार की गति धीमी पड़ सकती है।
  • सामरिक और भूराजनीतिक भिन्नता
    • चीन का प्रभाव: मलेशिया अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार बीजिंग के साथ “संतुलन” बनाए रखने की रणनीति अपनाता है।
      • भारत के विपरीत, मलेशिया RCEP का सदस्य है और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में महत्त्वपूर्ण निवेश करता है, यह आसियान की सहमति-आधारित ‘शांत कूटनीति’ और भारत के अधिक मुखर हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण के बीच नीतिगत संतुलन की चुनौती को उजागर करता है।
    • सेमीकंडक्टर प्रतिस्पर्द्धा: हालाँकि सेमीकंडक्टर पर वर्ष 2026 के समझौता ज्ञापन में सहयोग को बढ़ावा दिया गया है, लेकिन दोनों देश मूल रूप से एक ही वैश्विक निवेश पूल के लिए प्रतिस्पर्द्धा कर रहे हैं।
      • भारत की PLI (उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन) योजनाएँ उसी “बैक-एंड” विनिर्माण को आकर्षित करने का लक्ष्य रखती हैं, जिस पर वर्तमान में मलेशिया का दबदबा है।
    • क्वाड बनाम आसियान केंद्रीयता: मलेशिया क्वाड को लेकर सतर्क रहता है, क्योंकि उसे डर है कि यह आसियान केंद्रीयता को कमजोर कर सकता है।
      • भारत के सुरक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण और मलेशिया की आर्थिक-केंद्रित तटस्थता के बीच संतुलन बनाए रखना एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक कार्य बना हुआ है।
  • श्रम एवं मानवीय संबंध संबंधी मुद्दे
    • श्रमिक कल्याण: लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोगों और बढ़ते प्रवासी श्रमिक वर्ग के साथ, “लिविंग ब्रिज” भी विवादों का एक स्रोत है।
      • नैतिक भर्ती, मानव तस्करी और नाविकों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों के लिए निरंतर, उच्च स्तरीय संस्थागत निगरानी की आवश्यकता है।
    • डिजिटल मानक: मलेशिया-भारत डिजिटल परिषद (MIDC) AI और फिनटेक पर काम कर रही है, ऐसे में डेटा संप्रभुता और साइबर सुरक्षा पर विभिन्न राष्ट्रीय मानक पूर्ण डिजिटल एकीकरण में बाधा बन सकते हैं।

आगे की राह

  • आर्थिक परिवर्तन – “वस्तुओं से चिप्स की ओर”: इसका प्राथमिक उद्देश्य ताड़ के तेल पर पारंपरिक निर्भरता से आगे बढ़कर मूल्य-शृंखला एकीकरण की ओर बढ़ना है।
    • सेमीकंडक्टर कॉरिडोर: वर्ष 2026 के समझौता ज्ञापन को क्रियान्वित करते हुए, दोनों देश भारत की फ्रंट-एंड डिजाइन प्रतिभा (इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से) को मलेशिया की असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग (ATP) में बैक-एंड विशेषज्ञता से जोड़ेंगे।
    • डिजिटल वित्तीय एकीकरण: मलेशिया में फरवरी 2026 में UPI के लॉन्च के बाद, अगला कदम UPI-पेनेट लिंकेज का विस्तार करके इसमें छोटे पैमाने के व्यापार और वास्तविक समय में B2B प्रेषण को शामिल करना है, जिससे सीमा पार व्यापार घरेलू लेन-देन की तरह ही सुगम हो जाएगा।
    • AITIGA समीक्षा: दोनों देशों ने व्यापार असंतुलन को दूर करने और “उत्पत्ति के नियमों” को आधुनिक बनाने के लिए वर्ष के अंत तक आसियान-भारत व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा को अंतिम रूप देने का संकल्प लिया है।
  • रणनीतिक एवं सुरक्षा संरचना: यह साझेदारी अब मलक्का जलडमरूमध्य को एक साझा सुरक्षा जिम्मेदारी के रूप में देखती है।
    • समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA): समुद्री डकैती और गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर वास्तविक समय के डेटा साझाकरण को संस्थागत रूप देना।
    • रक्षा औद्योगिक केंद्र: संयुक्त अभ्यासों से संयुक्त उत्पादन की ओर अग्रसर होना। HAL का क्षेत्रीय कार्यालय Su-30 लड़ाकू जेट और डॉर्नियर विमान जैसे साझा प्लेटफॉर्मों के लिए एक क्षेत्रीय रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण (MRO) केंद्र के विकास का नेतृत्व करेगा।
    • आतंकवाद विरोधी सह-अध्यक्षता: सीमा पार आतंकवाद के प्रति “शून्य-सहिष्णुता” की क्षेत्रीय प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए, मलेशिया वर्ष 2026 में भारत के साथ सह-अध्यक्षता में ADMM-प्लस विशेषज्ञ कार्य समूह की तालिका-शीर्ष अभ्यास की मेजबानी करेगा।
  • संस्थागत एवं सांस्कृतिक आधार: राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए “लिविंग ब्रिज” को संस्थागत रूप दिया जा रहा है।
    • वाणिज्य दूतावास की उपस्थिति: जोहोर बह्रू (Johor Bahru) में वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन और सबाह में प्रस्तावित कार्यालय 30 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों की सेवा करेगा और समुद्री व्यापार को बढ़ावा देगा।
    • सामाजिक सुरक्षा समझौता: मलेशिया में भारतीय कामगारों के लिए कल्याणकारी संरक्षण प्रदान करने और श्रम कल्याण और नैतिक भर्ती से संबंधित लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करने के लिए ESIC-PERKESO समझौते को अंतिम रूप देना।
    • नॉलेज डिप्लोमेसी: यूनिवर्सिटी मलाया में तिरुवल्लुवर केंद्र की स्थापना और हरित ऊर्जा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों के लिए विशेष प्रतिभा समूह बनाने हेतु IIT मद्रास-मलेशिया सहयोग का विस्तार करना।
  • भू-राजनीतिक समन्वय
    • ब्रिक्स और आसियान: भारत, वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान मलेशिया को ब्रिक्स की पूर्ण सदस्यता दिलाने में सक्रिय रूप से सहयोग करेगा, जबकि मलेशिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सीट के लिए लगातार प्रयास करता रहेगा।
    • हिंद-प्रशांत समन्वय: आसियान की केंद्रीयता का सम्मान करने वाली नियम-आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भारत की IPOI (इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव) को आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक (AOIP) के साथ समन्वित करना।

निष्कर्ष

वर्ष 2026 तक संबंधों को उच्च स्तर पर ले जाना एक रणनीतिक मोड़ है, जो साझेदारी को तकनीकी परस्पर निर्भरता और समुद्री सुरक्षा के आधार पर सुदृढ़ करता है। आपसी विश्वास को संस्थागत रूप देकर, दोनों देशों ने सभ्यतागत बंधन को एक लचीले, आधुनिक गठबंधन में बदल दिया है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देता है।

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