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| Title | Subject | Paper |
|---|---|---|
| संक्षेप में समाचार | ||
| लिरियोथेमिस केरलेंसिस | Environment and Ecology, | GS Paper 3, |
| भारत–सेशेल्स द्विपक्षीय संबंध | international Relation, | GS Paper 2, |
| लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| भारत का पर्यावरणीय न्यायशास्त्र | Environment, | GS Paper 3, |
केरल में ड्रैगनफ्लाई की एक नई प्रजाति, लिरियोथेमिस केरलेंसिस (Lyriothemis keralensis), की पहचान की गई है, जो पश्चिमी घाट के बागान परिदृश्यों में अदृश्य जैव-विविधता को प्रदर्शित करती है। यह वर्ष 2013 से केरल में उपस्थित थी, लेकिन एक दशक से अधिक समय तक इसे गलती से लिरियोथेमिस एसीगैस्ट्रा (Lyriothemis Acigastra) के रूप में पहचाना जाता रहा, जिसे पहले केवल पूर्वोत्तर भारत तक सीमित माना जाता था।

भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की, जो राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष और सेशेल्स की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगाँठ के अवसर पर हुई।

INDIA गठबंधन की विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंप दिया। जिसमें बार-बार व्यवधान और सांसदों के निलंबन के बीच पक्षपातपूर्ण आचरण का आरोप लगाया गया है।
भारत में औद्योगिक विकास और संवैधानिक पर्यावरण संरक्षण के बीच बढ़ता संघर्ष देखा जा रहा है, क्योंकि नीतिगत और न्यायिक परिवर्तन कार्बन सिंक और जल सुरक्षा की तुलना में अल्पकालिक आर्थिक लाभों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे पारिस्थितिकी संवैधानिकवाद की माँग उठ रही है, जो पर्यावरण अधिकारों को पर्यावरण कानून के शासन के मूल में रखता है।

हालिया कानूनी और विधायी परिवर्तन ‘नियामक छूट’ की ओर एक प्रवृत्ति का संकेत देते हैं, जहाँ पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को ठोस सुरक्षा के बजाय प्रक्रियात्मक बाधाओं के रूप में माना जा रहा है।
कठोर नियमन विकास में बाधा नहीं है; बल्कि यह सतत् समृद्धि का आधारभूत ढाँचा है। यह “साझा संसाधनों के दुरुपयोग” को रोकता है, जहाँ स्वच्छ हवा और जल जैसे साझा संसाधनों का अल्पकालिक व्यक्तिगत लाभ के लिए दोहन हो जाता है, और इसके परिणामस्वरूप राज्य और आने वाली पीढ़ियों को पुनर्स्थापन का बोझ उठाना पड़ता है।
वर्ष 2026 में भारत की पर्यावरणीय यात्रा ‘आर्थिक सुविधा’ से आगे बढ़कर पारिस्थितिकी संवैधानिकता की ओर परिवर्तन की माँग करती है। AI-आधारित निगरानी और प्रकृति-आधारित वित्त को एकीकृत करके राज्य विकास को पर्यावरणीय क्षरण से अलग कर सकता है, ताकि विकासात्मक प्रगति कभी भी नागरिकों की अंतर-पीढ़ीगत समानता से समझौता न करे।
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