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| Title | Subject | Paper |
|---|---|---|
| संक्षिप्त समाचार | ||
| LSDs के लिए राष्ट्रीय बायोबैंक | Science and Technology, | GS Paper 3, |
| एग्रीस्टैक | economy, | GS Paper 3, |
| ‘राइट टू रिकॉल’ | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| विकसित भारत 2047 के लिए नेट जीरो कृषि | economy, | GS Paper 3, |
भारत ने लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर (Lysosomal Storage Disorders) के लिए अपना पहला सरकारी सहायता प्राप्त राष्ट्रीय बायोबैंक लॉन्च किया है, जिसमें 15 राज्यों के 530 रोगियों के डेटा और नमूनों को एकीकृत किया गया है।
भारत का राष्ट्रीय LSD बायोबैंक, स्वदेशी अनुसंधान को सक्षम बनाकर, निदान में सुधार करके और कमजोर रोगियों के लिए किफायती, जीवन रक्षक उपचारों का मार्ग प्रशस्त करके दुर्लभ बीमारियों के प्रबंधन में एक परिवर्तनकारी कदम है।
हाल ही में, अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) की घोषणा की, जो एग्रीस्टैक (AgriStack) और ICAR के कृषि पद्धतियों के डेटा को एकीकृत करने वाला एक बहुभाषी एआई प्लेटफॉर्म है।
हाल ही में राज्यसभा के एक सांसद ने संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ कानून लागू करने का प्रस्ताव रखा है, उनका तर्क है कि मतदाताओं को अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही गैर-कार्यशील प्रतिनिधियों को हटा देना चाहिए।
‘राइट टू रिकॉल’ जवाबदेही को मजबूत करता है, लेकिन अस्थिरता, राजनीतिक दुरुपयोग और प्रतिनिधि लोकतंत्र के क्षरण को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होती है।
हाल ही में नीति आयोग ने विकसित भारत 2047 और नेट जीरो 2070 को प्राप्त करने के माध्यमों को रेखांकित करने वाली रिपोर्ट जारी कीं। इस कृषि अध्ययन में यह उल्लेख किया गया है कि जहाँ कृषि अपशिष्ट उत्सर्जन अधिक है, वहीं सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील क्षेत्र भी है, जो मानव-केंद्रित परिवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।












यह क्षेत्र केवल कैलोरी का प्रदाता होने से आगे बढ़कर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का “आधार स्तंभ” और वैश्विक व्यापार का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है।

वर्तमान में यह क्षेत्र विखंडित संरचनात्मक समस्याओं का सामना कर रहा है, जहाँ व्यक्तिगत समस्याएँ छोटी होती हैं, लेकिन उनका सामूहिक प्रभाव राष्ट्रीय विकास के लिए बड़े अवरोध उत्पन्न करता है।

विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, कृषि क्षेत्र को “उत्पादन-केंद्रित” मॉडल से “सतत् आय-केंद्रित” पारिस्थितिकी तंत्र की ओर स्थानांतरित होना होगा। इसके लिए इनपुट सब्सिडी से हटकर दीर्घकालिक निवेश-आधारित अवसंरचना की ओर एक मौलिक परिवर्तन आवश्यक है।
नीति आयोग की वर्ष 2026 की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत की नेट जीरो यात्रा विकास के साथ समझौता नहीं, बल्कि उसकी पूर्व शर्त है। कृषि क्षेत्र के लिए लक्ष्य केवल “कार्बन न्यूनीकरण” नहीं, बल्कि “हरित विकास” है, जहाँ उत्सर्जन में कमी, बेहतर उत्पादन, अधिक किसान आय और एक सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सह-लाभ के रूप में प्राप्त होती है।
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