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Feb 16 2026

मैंग्रोव क्लैम (Mangrove Clam) 

 

ICAR–सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टिट्यूट (CMFRI) ने नियंत्रित परिस्थितियों में मैंग्रोव क्लैम के सफलतापूर्वक ‘प्रेरित प्रजनन’ (Inducing Breeding) द्वारा एक प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है।

मैंग्रोव क्लैम (गेलोइना एरोसा) के बारे में

  • मैंग्रोव क्लैम, जिन्हें ‘मड क्लैम’ भी कहा जाता है, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों में पाए जाने वाले पारिस्थितिकी और आर्थिक रूप से महत्त्वपूर्ण पटलक्लोमी अकशेरुकी हैं।
  • ये क्लैम ‘फिल्टर फीडर’ होते हैं, जो मुख्यतः जलमग्नता (उच्च ज्वार या जलभराव) की अवधि के दौरान सक्रिय रहते हैं, जिससे जल को छानने और कार्बनिक पदार्थों के प्रसंस्करण में सहायता मिलती है।
  • वैज्ञानिक नाम: गेलोइना एरोसा
  • सामान्य नाम: मैंग्रोव क्लैम, मड क्लैम; उत्तरी केरल (भारत) में स्थानीय रूप से “कंडल कक्का” कहलाते हैं।
  • पसंदीदा आवास: मैंग्रोव वनों, मुहानों और कभी-कभी बड़ी नदियों या दलदलों के ज्वारीय क्षेत्रों में जैविक पदार्थों से भरपूर दलदली तल।
  • भौगोलिक विस्तार: दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, जिसमें भारत (विशेषकर केरल और पूर्वी तट), मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस और चीन के कुछ हिस्से शामिल हैं।
  • पारिस्थितिक भूमिका: मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    • ये पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण करते हैं, अवसादों को स्थिर करते हैं, मृदा गुणवत्ता में सुधार करते हैं और समग्र जैव-विविधता का समर्थन करते हैं।
    • बेंथिक जीव होने के कारण, ये तटीय प्रदूषण और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के संकेतक के रूप में भी कार्य करते हैं।
  • पतन के कारण: अत्यधिक दोहन, आवास क्षरण, प्रदूषण और नियमन की कमी के कारण प्राकृतिक भंडार घट गए हैं, जिससे पुनर्प्राप्ति के लिए हैचरी तकनीक अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गई है।

मैंग्रोव क्लैम का प्रेरित प्रजनन

  • पूर्ण हैचरी चक्र: ICAR-CMFRI के वैज्ञानिकों ने नियंत्रित परिस्थितियों में संपूर्ण भ्रूणीय और लार्वा विकास चक्र पूरा किया, जिसमें स्पॉनिंग के 18वें दिन से सफल ‘स्पैट सेटलमेंट’ हुआ।
  • प्रथम-प्रकार की उपलब्धि: हैचरी प्रणालियों में मैंग्रोव क्लैम का प्रेरित स्पॉनिंग, लार्वा पालन और स्पैट उत्पादन विश्व स्तर पर प्रलेखित अत्यंत सीमित उदाहरणों में से एक है
  • संरक्षण से संबंध: हैचरी में उत्पादित बीज क्षतिग्रस्त मैंग्रोव क्षेत्रों में रैंचिंग का समर्थन कर सकते हैं, जिससे स्टॉक संवर्द्धन और मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में सहायता मिलती है।
  • सतत् जलीय कृषि मॉडल: यह सफलता मैंग्रोव संरक्षण के साथ एकीकृत, समुदाय-प्रबंधित, कम लागत आधारित मुहाना जलीय कृषि के विकास को सक्षम बनाती है।

सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टिट्यूट (CMFRI)

  • ICAR-CMFRI भारत का एक प्रमुख सरकारी समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान है।
  • इसकी स्थापना फरवरी 1947 में भारत सरकार द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी।
  • वर्ष 1967 में यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का हिस्सा बना, जो भारत में कृषि और संबद्ध अनुसंधान का शीर्ष निकाय है।
  • मुख्यालय: कोच्चि, केरल।

एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs)

नैटको फार्मा की चेन्नई APIs सुविधा को हालिया नियामकीय निरीक्षण के बाद अमेरिकी FDA से ‘वॉलंटरी एक्शन इंडिकेटेड’ (VAI) वर्गीकरण प्राप्त हुआ है।

निरीक्षण रिपोर्ट के बारे में

  • VAI वर्गीकरण: अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने एक एस्टैब्लिशमेंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट जारी की, जिसमें सुविधा को वॉलंटरी एक्शन इंडिकेटेड के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया, जिसका अर्थ है कि बिना तत्काल नियामकीय कार्रवाई के कुछ टिप्पणियाँ की गई हैं।
  • फॉर्म 483 अवलोकन: नियामक ने पहले फॉर्म 483 के अंतर्गत सात अवलोकन जारी किए थे, जिनमें सुधारात्मक अनुपालन उपायों की आवश्यकता वाले प्रक्रियात्मक मुद्दों को उजागर किया गया था।
  • नियामकीय महत्त्व: VAI स्थिति ‘करेंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज’ (CGMP) मानकों के अंतर्गत सुधार अनिवार्य करते हुए निरंतर संचालन की अनुमति देती है।

APIs के बारे में

  • एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) दवाओं में मौजूद जैविक रूप से सक्रिय पदार्थ होते हैं, जो उपचारात्मक प्रभावों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • फार्मास्यूटिकल भूमिका: तैयार दवाएँ सुरक्षित वितरण और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए APIs को फिलर्स या बाइंडर्स जैसे सहायक पदार्थों के साथ संयोजित करती हैं।
  • APIs के प्रकार
    • रासायनिक-संश्लेषण APIs: क्रिस्टलीकरण और शुद्धिकरण से जुड़ी बहु-चरणीय रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से उत्पादित किए जाते हैं।
      • ये पैरासिटामोल, आइबुप्रोफेन और मेटफॉर्मिन जैसे कम आणविक भार और उच्च-शुद्धता वाले यौगिक होते हैं।
    • किण्वन-आधारित APIs: नियंत्रित वातावरण में सूक्ष्मजीवों के प्रजनन द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं। इन जटिल जैविक उत्पादों में पेनिसिलिन और सेफालोस्पोरिन जैसे एंटीबायोटिक्स शामिल होते हैं।
    • सेमी-आर्टिफीशियल APIs: प्राकृतिक या किण्वन-आधारित अणुओं से व्युत्पन्न होते हैं और बेहतर प्रभावशीलता के लिए रासायनिक रूप से संशोधित किए जाते हैं।
      • उदाहरणों में सेफ्ट्रियाक्सोन और सेफ्डिनिर शामिल हैं।
    • प्राकृतिक/निष्कर्षण APIs: निष्कर्षण और शुद्धिकरण प्रक्रियाओं के माध्यम से सीधे पौधों या जानवरों से पृथक किए जाते हैं।
      • उदाहरणों में मॉर्फीन और क्विनिन शामिल हैं।

भारत में APIs की स्थिति

  • वैश्विक स्थिति: भारत विश्व का सबसे बड़ा जेनेरिक दवाओं का आपूर्तिकर्ता है और 60 उपचारात्मक श्रेणियों में 500 से अधिक APIs का उत्पादन करता है।
  • आयात निर्भरता: क्षमता होने के बावजूद, भारत लगभग 70% APIs चीन से आयात करता है, विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण किण्वन और रासायनिक-संश्लेषण क्षेत्रों में अधिक निर्भरता है।
  • नीतिगत पहल: फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने मेक इन इंडिया के अंतर्गत 56 प्रमुख APIs को प्राथमिकता दी है, जिन्हें प्रौद्योगिकी सर्वेक्षणों और उद्योग–शिक्षा सहयोग द्वारा आयात निर्भरता कम करने के लिए समर्थन दिया गया है।
    • प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना (वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2028-29) ₹6,940 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ महत्त्वपूर्ण ‘की स्टार्टिंग मटेरियल्स’ (KSM), ड्रग इंटरमीडिएट्स (DI) और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखती है, ताकि आयात निर्भरता कम की जा सके।

प्रौद्योगिकीय नवाचार और नियामकीय अनुपालन के माध्यम से घरेलू APIs विनिर्माण को मजबूत करना भारत की औषधि आत्मनिर्भरता और वैश्विक आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता के लिए आवश्यक है।

कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF)

हाल ही में भारतीय नौसेना ने बहरीन के मनामा में कंबाइंड टास्क फोर्स 154 की कमान सँभाली, जिससे बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग में भारत की भूमिका मजबूत हुई।

कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) के बारे में

  • कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज 47 देशों की एक बहुराष्ट्रीय समुद्री साझेदारी है, जिसका मुख्यालय मनामा, बहरीन में स्थित है और जिसका नेतृत्व अमेरिकी नौसेना के वाइस एडमिरल द्वारा किया जाता है।
    • भारत वर्ष 2022 में भारत–अमेरिका (2+2) संवाद के दौरान CMF में शामिल हुआ।
  • मुख्य उद्देश्य: CMF अवैध गैर-राज्यीय तत्त्वों का मुकाबला करके तथा समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और नौवहन स्वतंत्रता को बढ़ावा देकर अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को स्थापित रखता  है।
  • संचालन क्षेत्र: यह लगभग 3.2 मिलियन वर्ग मील क्षेत्र में कार्य करता है, जिसमें अरब खाड़ी, लाल सागर, ओमान की खाड़ी और आस-पास के क्षेत्र शामिल हैं।
  • प्रमुख दायित्व: मादक पदार्थों की तस्करी विरोध, तस्करी विरोध, समुद्री डकैती विरोध, समुद्री अवरोधन तथा सहयोगात्मक सहभागिता के माध्यम से क्षेत्रीय समुद्री क्षमताओं को मजबूत करना।
  • प्रशिक्षण अभ्यास: CMF इंटरऑपरेबिलिटी और क्षमता निर्माण बढ़ाने के लिए मैरीटाइम सिक्योरिटी एन्हांसमेंट ट्रेनिंग (MSET) तथा कंपास रोज और नॉर्दर्न/सदर्न रेडीनेस जैसे अभ्यास आयोजित करता है।
  • टास्क फोर्स संरचना: CMF पाँच कंबाइंड टास्क फोर्स के माध्यम से कार्य करता है:
    • CTF 150 (अरब खाड़ी के बाहर समुद्री सुरक्षा)
    • CTF 151 (समुद्री डकैती विरोध)
    • CTF 152 (अरब खाड़ी सुरक्षा)
    • CTF 153 (लाल सागर सुरक्षा)
    • CTF 154 (समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण)।
  • CTF 154 की भूमिका: वर्ष 2023 में स्थापित, CTF 154 समुद्री क्षेत्र जागरूकता, समुद्री कानून के अनुपालन, अवरोधन अभियानों, संयुक्त बचाव अभियान समन्वय और नेतृत्व विकास को सुदृढ़ करता है।
  • लचीली संरचना: सदस्य देश बिना किसी निश्चित राजनीतिक या सैन्य दायित्व के स्वेच्छा से शामिल होते हैं, जिससे लचीला और सहमति-आधारित समुद्री सहयोग संभव होता है।

महत्त्व 

CTF 154 की कमान भारत को प्राप्त होने से उसकी हिंद-प्रशांत समुद्री अवस्थिति मजबूत होती है, रक्षा कूटनीति को बढ़ावा मिलता है और मुक्त, खुली एवं सुरक्षित समुद्री व्यवस्था के प्रति उसकी प्रतिबद्धता सुदृढ़ होती है।

भारत–थाईलैंड वायु अभ्यास

हाल ही में भारतीय वायु सेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में थाईलैंड के साथ एक द्विपक्षीय इन-सीटू वायु युद्ध अभ्यास आयोजित किया।

भारत–थाईलैंड वायु अभ्यास के बारे में

  • यह एक द्विपक्षीय अभ्यास है, जिसका उद्देश्य रक्षा सहयोग को मजबूत करना, अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाना और दोनों मित्र वायु सेनाओं के बीच परिचालन समन्वय में सुधार करना है।
  • शामिल  सेनाएँ: भारतीय वायु सेना और रॉयल थाई वायु सेना, जिन्होंने अग्रिम पंक्ति के मल्टी रोल फाइटर विमानों को तैनात किया।
  • परिचालन स्थल: भारतीय वायु सेना के विमान अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के ठिकानों से संचालित हुए, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक पहुँच प्रदर्शित हुई, जबकि थाई जेट ने घरेलू हवाई अड्डों से उड़न भरी।
  • प्रमुख फोकस क्षेत्र: इस अभ्यास में नौसैनिक युद्धाभ्यास, समुद्री क्षेत्र संचालन, निगरानी समन्वय, आकाश या हवा में ईंधन भरना और एयरोस्पेस संचालन में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर बल  दिया गया।
  • रणनीतिक महत्त्व: इस सहभागिता ने भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मजबूत किया, हिंद-प्रशांत सुरक्षा सहयोग को बढ़ाया, लंबी दूरी की तैनाती क्षमताओं को सुदृढ़ किया और रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण समुद्री हवाई क्षेत्र में पारस्परिक विश्वास को गहरा किया।

छठा भारत–दक्षिण कोरिया विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद (FPSD)

हाल ही में भारत और कोरिया गणराज्य (ROK) ने अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए सियोल में छठा विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद आयोजित किया।

भारत–दक्षिण कोरिया विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद (FPSD) के बारे में

  • विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद भारत और कोरिया गणराज्य (दक्षिण कोरिया) के बीच राजनीतिक, सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा के लिए एक उच्च-स्तरीय संस्थागत तंत्र है।
  • संरचनात्मक उत्पत्ति: FPSD भारत–दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत संचालित होता है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर समन्वय को मजबूत करना है।
    • प्रथम कोरिया–भारत विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद वर्ष 2005 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था, जिसमें विदेश और रक्षा मंत्रालय शामिल थे।
  • संस्थागत उद्देश्य: यह संवाद रक्षा सहयोग, आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी सहयोग तथा इंडो-पैसिफिक और उससे बढ़कर नीति समन्वय को बढ़ाने का प्रयास करता है।

छठे FPSD की प्रमुख विशेषताएँ

  • नेतृत्व सहभागिता: इस संवाद की सह-अध्यक्षता पी. कुमारन, सचिव (पूर्व), और पार्क यून-जू, कोरिया गणराज्य के प्रथम उप-विदेश मंत्री द्वारा की गई।
  • व्यापक एजेंडा: चर्चाओं में राजनीतिक संबंधों, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति तथा लोगों-से-लोगों के मध्य संपर्क जैसे प्रमुख विषय शामिल रहे।
  • उभरती प्रौद्योगिकियाँ: दोनों पक्षों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन, महत्त्वपूर्ण खनिजों और सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं में साझेदारी की संभावनाओं पर विचार किया।
  • क्षेत्रीय समन्वय: संवाद में कोरियाई प्रायद्वीप, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विकास तथा बहुपक्षीय मंचों में सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया गया।

यह संवाद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत–दक्षिण कोरिया रणनीतिक अभिसरण को मजबूत करता है, आर्थिक सुरक्षा सहयोग को बढ़ाता है तथा निरंतर उच्च-स्तरीय कूटनीतिक सहभागिता को सुदृढ़ करता है।

संदर्भ

केंद्र सरकार ने सरकार की ₹1 लाख करोड़ की RDI पहल के अंतर्गत ₹2,000 करोड़ के BIRAC–RDI फंड के तहत प्रस्तावों के लिए पहली राष्ट्रीय घोषणा की है।

संबंधित तथ्य

  • सरकार की ₹1 लाख करोड़ की आरडीआई पहल के अंतर्गत ₹2,000 करोड़ की वित्तपोषण व्य१वस्था का उद्देश्य उच्च-प्रभाव वाले जैव-प्रौद्योगिकी नवाचारों का समर्थन करना है।
  • भारत की जैव-अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जो वर्ष 2014 में 10 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024 में 165.7 अरब डॉलर हो गई है, और वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर तक पहुँचने का लक्ष्य रखती है।

बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) के बारे में

  • यह भारत सरकार के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
  • इसे जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने, समर्थन करने और पोषित करने के लिए स्थापित किया गया था, जिसमें स्टार्ट-अप्स, SMEs और प्रारंभिक चरण की बायोटेक कंपनियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

BIRAC–RDI फंड के बारे में

  • BIRAC–RDI फंड का अर्थ है-बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल – रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड।
  • BIRAC–RDI फंड व्यापक राष्ट्रीय RDI पहल का हिस्सा है, जिसे जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के अंतर्गत अनुमोदित किया गया था।
    • नवंबर 2025 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तत्त्वावधान में लॉन्च किया गया।
  • वित्त प्रबंधक: बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC)
  • उद्देश्य
    • प्रारंभिक चरण के बायोटेक नवाचारों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।
    • बायोटेक और जीवन विज्ञान में उद्यमिता को बढ़ावा देना।
    • सस्ती स्वास्थ्य सेवा, कृषि और औद्योगिक बायोटेक समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करना।
      • भारत की जैव-अर्थव्यवस्था और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना।
    • यह फंड इक्विटी, परिवर्तनीय ऋण उपकरणों और दीर्घकालिक ऋणों के संयोजन का उपयोग करते हुए टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) 4 से TRL 9 तक की तकनीकों के लिए सहायता प्रदान करेगा।

बायो E3 नीति के बारे में

  • बायो E3 नीति अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को बढ़ावा देती है, जिसका उद्देश्य नवाचार, सतत् औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ाना है।
  • यह जैव-फार्मास्यूटिकल्स, बायोएनर्जी, बायो-मैन्युफैक्चरिंग और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान, स्टार्ट-अप्स और उद्योग सहयोग का समर्थन करती है।

ANRF के बारे में

  • वैधानिक निकाय: अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन अधिनियम, 2023 के अंतर्गत स्थापित।
  • ANRF देश में वैज्ञानिक अनुसंधान को उच्च-स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करने के लिए एक शीर्ष निकाय के रूप में कार्य करता है।
  • नोडल मंत्रालय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय।
  • पूर्ववर्ती: साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड (SERB) का स्थान लेता है।
  • कार्य: शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और उद्योगों में अनुसंधान एवं नवाचार को वित्तपोषित करना, बढ़ावा देना तथा समन्वय करना।

महत्त्व

  • स्टार्ट-अप्स और अनुसंधान संस्थानों पर प्रभाव: इससे स्टार्ट-अप्स और अनुसंधान संस्थानों को प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट चरणों से बाजार हेतु तैयार उत्पादों तक स्थानांतरित होने में सहायता मिलने की अपेक्षा है।
  • राष्ट्रीय नीति के साथ संरेखण: यह बायोE3 नीति के पूरक है, जो जैव-प्रौद्योगिकी-नेतृत्वित विकास का समर्थन करता है।
  • प्रयोगशाला-से-उद्योग सेतु: यह फंड प्रयोगशाला प्रोटोटाइप से औद्योगिक अनुप्रयोग तक बायोटेक अनुसंधान के विस्तार पर केंद्रित है, जिससे भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्त्वपूर्ण अंतर को संबोधित किया जाता है।
  • रणनीतिक प्रोत्साहन: यह भारत के वैश्विक जैव-प्रौद्योगिकी नेतृत्वकर्ता बनने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, जो उसके IT-नेतृत्वित विकास पथ के समान है।

संदर्भ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक और ‘नोवल ओरल पोलियो वैक्सीन टाइप-2’ (nOPV2) की प्री-क्वालिफिकेशन (पूर्व-योग्यता) की घोषणा की है।

संबंधित तथ्य

  • यह प्री-क्वालिफिकेशन, दवा के घटक और अंतिम वैक्सीन उत्पाद दोनों को शामिल करता है, जिससे एक ही एकीकृत इकाई में संपूर्ण उत्पादन संभव हो पाता है।
  • यह विकास बहुपक्षीय सहयोग (WHO, फार्मास्युटिकल भागीदार, ग्लोबल पोलियो इरैडिकेशन इनिशिएटिव) का उदाहरण है, जिसका उद्देश्य एक निर्धारित SDG लक्ष्य — पोलियो उन्मूलन को प्राप्त करना है।

प्री-क्वालिफिकेशन (Prequalification) के बारे में

प्री-क्वालिफिकेशन का अर्थ है कि वैक्सीन सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता के अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करती है। इससे संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियाँ, जैसे UNICEF, इसे वैश्विक स्तर पर खरीद और वितरित कर सकती हैं।

प्री-क्वालिफिकेशन का महत्त्व

प्री-क्वालिफिकेशन का महत्त्व (UN/WHO संदर्भ में)

  • संयुक्त राष्ट्र की खरीद एजेंसियों (जैसे- यूनिसेफ, पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) को वैक्सीन वैश्विक स्तर पर खरीदने और वितरित करने की अनुमति देता है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों को प्रकोप के दौरान गुणवत्तापूर्ण वैक्सीन उपलब्ध हो सके।
  • आपातकालीन टीकाकरण अभियानों में वैश्विक आपूर्ति विविधता और त्वरित प्रतिक्रिया को बढ़ावा देता है।

nOPV2 के बारे में

  • nOPV2 का अर्थ नोवेल ओरल पोलियो वैक्सीन टाइप 2 है।
  • इसे विशेष रूप से सर्कुलेटिंग वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप 2 (cVDPV2) से होने वाले प्रकोपों से निपटने के लिए विकसित किया गया है।
  • स्थिरता: पारंपरिक टाइप-2 ओरल पोलियो वैक्सीन की तुलना में nOPV2 आनुवंशिक रूप से अधिक स्थिर है, जिससे इसके रोग-उत्पादक रूप में पुनः परिवर्तित होने का जोखिम काफी कम हो जाता है।
  • WHO स्थिति: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा आपातकालीन उपयोग सूचीकरण (EUL) को स्वीकृति।
  • निर्माण
    • बायोलॉजिकल ई लिमिटेड (भारत) और पीटी बायो फार्मा (इंडोनेशिया) द्वारा निर्मित।
  • प्रकार: पोलियो टाइप 2 को लक्षित करने वाला ओरल वैक्सीन

पोलियोमायलाइटिस (पोलियो) के बारे में

  • पोलियोमायलाइटिस एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो मुख्य रूप से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करता है।

  • संचरण: यह मुख्यतः मल-मुख मार्ग के माध्यम से व्यक्ति-से-व्यक्ति संपर्क द्वारा या कम सामान्यतः दूषित जल या भोजन के माध्यम से फैलता है।
    • हालिया शोध से संकेत मिलता है कि श्वसन संचरण एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • गले में पोलियोवायरस का उत्सर्जन श्वसन संचरण के सिद्धांत का समर्थन करता है, जो खसरा और काली खाँसी जैसे अन्य संक्रामक बाल्यकालीन रोगों के समान है।
  • प्रभाव: यह वायरस आँतों में वृद्धि करता है और तंत्रिका तंत्र में प्रवेश कर सकता है, जिससे पक्षाघात होता है।
  • विश्वभर में वाइल्ड पोलियोवायरस स्ट्रेन की स्थिति
    • टाइप 1: वर्ष 2022 तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान में स्थानिक बना हुआ है।
    • टाइप 2: वर्ष 1999 में उन्मूलित घोषित किया गया।
    • टाइप 3: वर्ष 2020 में उन्मूलित घोषित किया गया।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भारत को वर्ष 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित किया गया और अंतिम रिपोर्ट किया गया वाइल्ड पोलियो वायरस मामला वर्ष 2011 में था।

संदर्भ

लोकसभा में विपक्ष के नेता के विरुद्ध सत्तारूढ़ दल के एक नेता द्वारा एक मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) प्रस्तुत किया गया है।

मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) के बारे में

  • मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) की परिभाषा: एक मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) लोकसभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया एक स्वतंत्र प्रस्ताव होता है, जिसका उद्देश्य सदन से किसी विषय पर स्पष्ट और बाध्यकारी निर्णय प्राप्त करना होता है।
    • उदाहरण: उपसभापति के चुनाव हेतु प्रस्ताव, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव तथा उस सदस्य की सीट को रिक्त घोषित करने का प्रस्ताव, जिसे अनुपस्थिति की अनुमति न दी गई हो—ये सभी राज्यसभा में प्रस्तुत किए जाने वाले मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) के उदाहरण हैं।
  • स्वतंत्र प्रकृति: यह अपने आप में पूर्ण होता है और किसी अन्य विचाराधीन कार्य से जुड़ा नहीं होता है।
    • जब इसे स्वीकार किया जाता है, तो यह किसी विशिष्ट विषय पर सदन की औपचारिक राय या इच्छा को दर्शाता है।
  • स्वीकृति की अनिवार्यता: लोकसभा की कार्य संचालन नियमावली के अंतर्गत, ऐसा प्रस्ताव केवल अध्यक्ष की स्वीकृति से ही स्वीकार किया जा सकता है।
  • अध्यक्ष का विवेकाधिकार: अध्यक्ष को नोटिस को स्वीकार या अस्वीकार करने तथा यह निर्णय लेने का पूर्ण विवेकाधिकार होता है कि इसे किस प्रकार प्रस्तुत किया जाएगा।
    • यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो इस पर सदन में चर्चा की जा सकती है और इसे मतदान के लिए रखा जा सकता है।
  • विशेष स्वरूप: दैनिक बहस में शामिल सामान्य हस्तक्षेपों के विपरीत, मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) सदन को उठाए गए मुद्दे पर सीधे विचार करने और उस पर औपचारिक रूप से अपना मत व्यक्त करने के लिए बाध्य करता है।
  • चर्चा की शर्त: उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों के आचरण पर केवल विधिवत शब्दों में तैयार किए गए मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) के माध्यम से ही चर्चा की जा सकती है।
  • द्वितीयक समर्थन की शर्त: उपसभापति के चुनाव हेतु प्रस्ताव और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को छोड़कर, किसी भी मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) के लिए समर्थन आवश्यक नहीं होता है।
  • नोटिस और प्रस्ताव प्रस्तुत करना: मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) के लिए पहले नोटिस देना आवश्यक होता है।
  • प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अधिकार: यह प्रस्ताव केवल वही सदस्य प्रस्तुत कर सकता है जिसने इसका नोटिस दिया हो।
    • यदि कोई प्रस्ताव किसी मंत्री के नाम पर हो, तो उसे कोई अन्य मंत्री भी प्रस्तुत कर सकता है। ऐसे मामले में प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले मंत्री को यह स्पष्ट करना होता है कि वह इसे दूसरे मंत्री की ओर से प्रस्तुत कर रहा है।

पूर्व उदाहरण

वर्ष एवं मामला लोकसभा द्वारा की गई कार्रवाई
2005 – कैश-फॉर-क्वेरी घोटाला (10 सांसद) जाँच समिति (पवन कुमार बंसल की अध्यक्षता में); सदन ने प्रस्ताव अपनाया और सभी 10 सदस्यों को निष्कासित कर दिया।
2006 – MPLADS अनुचित आचरण (4 सांसद) समान प्रक्रियात्मक चरणों के बाद MPLADS योजना से संबंधित मामले में सदस्यों को फटकार लगाई गई और निलंबित किया गया।
2008 – बाबूभाई के. कटारा मामला समिति ने गंभीर कदाचार पाया; सदस्य को निष्कासित करने हेतु सदन ने प्रस्ताव पारित किया।
2007 – राजेश कुमार माँझी (हवाई यात्रा का दुरुपयोग) समिति की रिपोर्ट के आधार पर 30 बैठकों के लिए निलंबन और आधिकारिक यात्रा विशेषाधिकारों पर प्रतिबंध लगाया गया।

प्रस्ताव (Motion) क्या है?

संसदीय शब्दों में, प्रस्ताव सदन के किसी सदस्य द्वारा किया गया एक आधिकारिक सुझाव होता है, जिसके माध्यम से वह सदन से किसी विशेष कार्रवाई करने, किसी आदेश को लागू करने, या किसी विशेष मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करने का अनुरोध करता है।

  • इसे इस प्रकार तैयार किया जाता है कि सदन इसे एक निर्णय के रूप में स्वीकार कर सके।

प्रस्ताव के प्रकार

1. प्रतिस्थापन प्रस्ताव (Substitute Motion)

  • इसे मूल प्रस्ताव के स्थान पर प्रस्तुत किया जाता है।
  • यदि इसे स्वीकार कर लिया जाए, तो यह मूल प्रस्ताव को पूरी तरह से प्रतिस्थापित कर देता है।
  • यह मूल प्रस्ताव के समान विषय से संबंधित होना चाहिए।

2. सहायक प्रस्ताव (Subsidiary Motion)

ये किसी अन्य प्रस्ताव पर निर्भर होते हैं या उससे संबंधित होते हैं और इन्हें आगे निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

  • अनुषंगी प्रस्ताव (Ancillary Motions)
    • इन्हें किसी अन्य प्रस्ताव के निपटान में सहायता के लिए सामान्य कार्यवाही के दौरान प्रस्तुत किया जाता है।
      • उदाहरण: किसी विधेयक को चयन समिति को भेजने का प्रस्ताव।
  • अधिरोहण प्रस्ताव (Superseding Motions)
    • इन्हें किसी अन्य प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उसे स्थगित करने या बाधित करने के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
    • उदाहरण: बहस स्थगित करने का प्रस्ताव।
  • संशोधन प्रस्ताव (Amendment Motions)
    • ये मूल प्रस्ताव में संशोधन, परिवर्तन या सुधार करने के लिए लाए जाते हैं, बिना उसे पूरी तरह से बदले।

महत्त्वपूर्ण विशेष प्रस्ताव

1. अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion)

  • मंत्रिपरिषद के प्रति विश्वास की कमी को दर्शाता है।
  • केवल लोकसभा में

2. निंदा प्रस्ताव (Censure Motion)

  • सरकार की किसी विशेष नीति या कार्य की अस्वीकृति व्यक्त करता है।

3. स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion)

  • सामान्य कार्यवाही को स्थगित करके अत्यंत महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक विषय पर चर्चा के लिए लाया जाता है।

4. ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Calling Attention Motion)

  • किसी सदस्य को किसी मंत्री का ध्यान किसी तात्कालिक विषय की ओर आकर्षित करने में सक्षम बनाता है।

संदर्भ

नीति आयोग द्वारा जारी 10-वर्षीय रोडमैप के अनुसार, भारत का 265 अरब डॉलर का प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र वर्ष 2035 तक बढ़कर 750–850 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है, जिससे विकसित भारत@2047 विजन में योगदान मिलेगा।

संबंधित तथ्य

  • रोडमैप ने विकास के पाँच प्राथमिक साधनों की पहचान की है:
    • एजेंटिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एजेंटिक AI),
    • सॉफ्टवेयर और उत्पाद,
    • डिजिटल अवसंरचना,
    • नवाचार-प्रेरित इंजीनियरिंग, तथा
    • इंडिया-फॉर-इंडिया समाधान।

प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र के बारे में

  • प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएँ, व्यवसाय प्रक्रिया प्रबंधन (BPM), डिजिटल इंजीनियरिंग, क्लाउड सेवाएँ, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधान तथा वैश्विक और घरेलू ग्राहकों को प्रदान की जाने वाली उद्यम आधुनिकीकरण सहायता शामिल हैं।
    • इस क्षेत्र में सॉफ्टवेयर विकास, एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) का कार्यान्वयन, क्लाउड माइग्रेशन, डेटा विश्लेषण, AI मॉडल परिनियोजन, साइबर सुरक्षा प्रबंधन, तथा डिजिटल परिवर्तन परामर्श शामिल है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • निर्यात-उन्मुख विकास मॉडल: यह क्षेत्र विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका से होने वाले निर्यात के माध्यम से राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अर्जित करता है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 7% का योगदान देता है।
    • प्रतिभा-आधारित प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ: कुशल और लागत-प्रभावी इंजीनियरों के बड़े समूह ने भारत को निरंतर वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता और विस्तार क्षमता प्रदान की है।
    • AI-नेतृत्व आधारित सेवा प्रणाली की ओर संक्रमण: उद्योग श्रम-आर्बिट्राज मॉडल से हटकर बौद्धिक संपदा-आधारित, AI-सक्षम, परिणाम-आधारित सेवा-प्रदान ढाँचों की ओर बढ़ रहा है।
    • वैश्विक प्रौद्योगिकी सेवा परिदृश्य: वैश्विक प्रौद्योगिकी सेवा बाजार का मूल्य लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर आँका गया है।
      • इसने डिजिटल योग के प्रारंभ (2015–2020), कोविड-प्रेरित तीव्रता (2020–2022), तथा महामारी के बाद AI-नेतृत्व वाले व्यवधान (2022–2024) के चरण अवलोकित किए गए हैं।

भारत में प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति

  • बाजार हिस्सेदारी: भारत का प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग 265 अरब डॉलर का राजस्व उत्पन्न करता है और वैश्विक बाजार में लगभग 20% हिस्सेदारी रखता है।
  • क्षेत्र में वृद्धि: कोविड-19 महामारी अवधि के दौरान इस क्षेत्र ने 11–13% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की, लेकिन व्यापक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, वीजा प्रतिबंध और प्रारंभिक चरण के AI व्यवधान के कारण यह घटकर 7–8% CAGR रह गई है।
  • सबसे बड़ा हिस्सा: लगभग 60% निर्यात संयुक्त राज्य अमेरिका के बाजार में केंद्रित है, जिससे यह उद्योग उस क्षेत्र में नियामक और आर्थिक परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील बन जाता है।
  • डेटा अवसंरचना का विस्तार: भारत वैश्विक डेटा का लगभग 20% उत्पन्न करता है और वर्तमान में डेटा सेंटर क्षमता 1.4 गीगावाट है, जिसके अगले दशक में उल्लेखनीय रूप से बढ़ने की संभावना है।

प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र में भारत की संभावनाएँ

  • AI-नेतृत्व वाली परिवर्तन की संभावना: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विशेष रूप से जेनAI और एजेंटिक AI, सेवा-प्रदान मॉडलों को पुनर्परिभाषित कर रही है। भारत AI एकीकरण, मॉडल इंजीनियरिंग और शासन का वैश्विक केंद्र बन सकता है।
  • सन्निकट बाजारों में विस्तार: भारत उद्यम संचालन स्वचालन, सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस उत्पाद, डिजिटल अवसंरचना, AI-नेटिव प्लेटफॉर्म और अनुसंधान एवं विकास इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में प्रवेश कर सकता है, जिनका संयुक्त संभावित बाजार लगभग 14 ट्रिलियन डॉलर है।
  • अवसंरचना और डेटा लाभ: भारत डेटा सेंटर क्षमता को 1.4 गीगावाट से बढ़ाकर वर्ष  2035 तक 10–12 गीगावाट करने तथा AI कार्यभार के लिए जीपीयू-सक्षम अवसंरचना बढ़ाकर वैश्विक AI केंद्र बन सकता है।
  • घरेलू बाजार का लाभ (इंडिया-फॉर-इंडिया रणनीति): शासन, UPI भुगतान, हेल्थ-टेक और बहुभाषी AI प्लेटफॉर्म में डिजिटलीकरण से घरेलू स्तर पर बड़े अवसर बनते हैं।
  • नवाचार और बौद्धिक संपदा सृजन: अनुसंधान एवं विकास पर व्यय को 1–2% तक बढ़ाकर भारतीय कंपनियाँ उच्च मूल्य प्राप्ति की ओर बढ़ सकती हैं।

प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने हेतु सरकारी पहल

  • इंडियाAI मिशन (2024): इस मिशन का उद्देश्य स्वदेशी आधारभूत AI मॉडल बनाना, कंप्यूटिंग अवसंरचना तैयार करना और इंडियाAI इनोवेशन सेंटर के माध्यम से समावेशी AI नवाचार पारितंत्र स्थापित करना है।
  • ANRF  के अंतर्गत अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कोष: 1 लाख करोड़ रुपये का यह कोष सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और AI जैसे उच्च-जोखिम डीप-टेक क्षेत्रों को रियायती वित्तपोषण प्रदान करता है।
  • राष्ट्रीय डीप-टेक स्टार्टअप नीति: यह नीति वित्तपोषण, बौद्धिक संपदा और नियामक बाधाओं का समाधान करती है तथा डीप-टेक नवाचारों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देती है।
  • डिजिटल इंडिया फ्यूचर लैब्स (2024): यह पहल अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली डिजाइन को बढ़ावा देती है और स्वदेशी बौद्धिक संपदा विकास के लिए शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्ट-अप्स और सरकार के मध्य सहयोग को प्रोत्साहित करती है।
  • भारतजेन (2024): भारतजेन भारतीय भाषाओं में बहु-माध्यम ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ विकसित करने पर केंद्रित है, जिससे सार्वजनिक सेवा वितरण और बहुभाषी AI पहुँच में सुधार होता है।

भारत की संभावनाओं को प्राप्त करने हेतु सिफारिशें

  • संरक्षित बौद्धिक संपदा और प्लेटफॉर्म-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश: कंपनियों को अपने राजस्व का 1–2% अनुसंधान एवं विकास में लगाकर दोहराए जाने योग्य सेवाओं को स्केलेबल, AI-नेटिव प्लेटफॉर्म में परिवर्तित करना चाहिए।
  • एजेंटिक AI के साथ सेवा मॉडल की पुनर्कल्पना: उद्योग को “मानव + एजेंट + प्लेटफॉर्म” मॉडल अपनाना चाहिए और परिणाम-आधारित वाणिज्यिक अनुबंधों की ओर बढ़ना चाहिए।
  • बाजार और क्षेत्र विविधीकरण: कंपनियों को स्वास्थ्य, रक्षा, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों तथा जापान, मध्य पूर्व और घरेलू बाजार जैसे गंतव्यों में विस्तार करना चाहिए।
  • AI-केंद्रित पुनः-कौशल और परिवर्तन प्रबंधन का विस्तार: कार्यबल परिवर्तन में AI साक्षरता, समस्या-समाधान, शासन कौशल और अनुकूलनशील सीखने की क्षमताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

निष्कर्ष

भारत का प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र AI-आधारित परिवर्तन के निर्णायक मोड़ पर है। रणनीतिक नवाचार, अवसंरचना विस्तार और बौद्धिक संपदा-आधारित वृद्धि इसे वर्ष 2035 तक 750–850 अरब डॉलर का वैश्विक अग्रणी बना सकती है।

संदर्भ

केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने अद्यतन आधार वर्ष 2024 पर आधारित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) शृंखला के नए आँकड़े जारी किए हैं।

संबंधित तथ्य

  • पिछली शृंखला का आधार वर्ष 2012 था और यह वर्ष 2011-12 के उपभोग पैटर्न पर आधारित थी।
  • नई शृंखला को वर्ष 2023-24 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) के परिणामों के आधार पर उपभोग बास्केट पर पुनर्गठित किया गया है।

घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) के बारे में

  • इसका उद्देश्य परिवारों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए उपभोग और व्यय की जानकारी एकत्र करना है।
  • यह परिवारों के उपभोग और व्यय के पैटर्न, जीवन स्तर तथा खुशहाल जीवन-स्तर को समझने में सहायक है।

नई CPI शृंखला की विशेषताएँ

  • खाद्य एवं पेय पदार्थों का भार घटाया गया: समग्र सीपीआई में खाद्य एवं पेय पदार्थों का भार 45.86% से घटाकर 36.75% कर दिया गया है।
  • बेहतर प्रतिनिधित्व: संशोधित सीपीआई बास्केट में अधिक वस्तुओं और सेवाओं को शामिल किया गया है, जिससे सूचकांक वर्तमान उपभोग पैटर्न को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करता है।

  • व्यापक बाजार कवरेज: यह नई शृंखला देश भर के बाजारों से मूल्य शृंखला का विस्तार करती है।
  • ऑनलाइन बाजारों का समावेश: पहली बार, 12 ऑनलाइन बाजारों के मूल्यों को सीपीआई गणना में शामिल किया गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप: संशोधित सीपीआई शृंखला COICOP 2018 (उद्देश्य के अनुसार व्यक्तिगत उपभोग का वर्गीकरण) ढाँचे का अनुसरण करती है, जिसमें वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप 12 उपभोग श्रेणियों को शामिल किया गया है।
  • अधिक विस्तृत विश्लेषण और वैश्विक तुलनीयता: पहले के 6 व्यापक समूहों से 12 विस्तृत विभाजनों में परिवर्तन वर्गीकरण की गहराई को बढ़ाता है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रास्फीति मानकों के साथ तुलनीयता में सुधार करता है।
  • नई सीपीआई बास्केट: नई सीपीआई बास्केट में 358 वस्तुएँ और सेवाएँ शामिल हैं, जबकि पिछली बास्केट में 299 वस्तुएँ और सेवाएँ थीं।
    • हटाए गए आइटम: VCR/VCD/DVD प्लेयर, टेप रिकॉर्डर, रेडियो, CD/DVD कैसेट, पुराने कपड़े, नारियल का रेशा/रस्सी।
    • नए आइटम जोड़े गए
      • ग्रामीण आवास किराया (पहली बार प्रस्तुत किया गया)
      • ऑनलाइन मीडिया और स्ट्रीमिंग सेवाएँ
      • मूल्यवर्द्धित दुग्ध उत्पाद
      • जौ और संबंधित उत्पाद
      • पेन ड्राइव, बाहरी हार्ड डिस्क
      • अटेंडेंट और बेबीसिटर सेवाएँ
      • व्यायाम उपकरण
      • स्वच्छ ईंधन (CNG/PNG)।

संशोधन की आवश्यकता

  • पुराने आधार वर्ष और सर्वेक्षण डेटा: पुरानी CPI शृंखला वर्ष 2012 के आधार वर्ष और वर्ष 2011-12 के सर्वेक्षण के उपभोग पैटर्न पर आधारित थी, जो अब वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है।
    • उदाहरण के लिए: अब 80 करोड़ परिवारों को मुफ्त अनाज मिलता है, जिससे स्वाभाविक रूप से भोजन पर उनका व्यय कम हो जाता है।
    • साथ ही, ओवर-द-टॉप (OTT) वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन मार्केटप्लेस जैसी कई नई सेवाएँ सामने आई हैं। नई शृंखला इन परिवर्तनों को ध्यान में रखने का प्रयास करती है।
  • समकालीन मुद्रास्फीति माप की आवश्यकता: पिछले एक दशक में भारत के उपभोग व्यवहार में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आया है, जिसके कारण अधिक समकालीन मुद्रास्फीति माप की आवश्यकता है।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के बारे में 

  • CPI समय के साथ परिवारों द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की एक बास्केट की खुदरा कीमतों में परिवर्तन को मापता है।
  • प्रकाशक: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)।
  • आवृत्ति: CPI मासिक रूप से जारी किया जाता है।
  • आधार वर्ष: 2024।
  • प्रकार
    • औद्योगिक कामगारों के लिए CPI (CPI-IW): श्रम ब्यूरो द्वारा संकलित।
    • कृषि कामगारों के लिए CPI (CPI-AL): श्रम ब्यूरो द्वारा संकलित।
    • ग्रामीण कामगारों के लिए CPI (CPI-RL): श्रम ब्यूरो द्वारा संकलित, यह विशेष रूप से ग्रामीण कामगारों के लिए मूल्य परिवर्तनों को दर्शाता है।
    • संयुक्त CPI: NSO द्वारा संकलित।

CPI का महत्त्व

  • प्राथमिक मुद्रास्फीति मापक: यह भारत में खुदरा मुद्रास्फीति का मुख्य मापक है, जो शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता कीमतों में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाता है।
  • मौद्रिक नीति आधार: यह RBI के मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचे (4% ± 2%) के लिए नाममात्र आधार का कार्य करता है, जो ब्याज दर संबंधी निर्णयों का मार्गदर्शन करता है।
  • सूचकांक उपकरण: इसका उपयोग सरकारी कर्मचारियों के महँगाई भत्ता (DA) और विभिन्न सामाजिक क्षेत्र हस्तांतरणों जैसे मदों के सूचकांकीकरण के लिए किया जाता है।
  • वास्तविक क्षेत्र विश्लेषण: यह वास्तविक जीडीपी और अन्य वास्तविक आर्थिक संकेतकों को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय खातों को अपस्फीत करने में सहायक होता है।

CPI बनाम WPI

पहलू WPI CPI
मानक थोक/उत्पादक स्तर पर कीमतों में परिवर्तन खुदरा/उपभोक्ता स्तर पर कीमतों में परिवर्तन
दायरा मुख्यतः वस्तुएँ (प्राथमिक वस्तुएँ, निर्मित वस्तुएँ, ईंधन) घरों द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुएँ और सेवाएँ
उद्देश्य उत्पादक मुद्रास्फीति, औद्योगिक और व्यापार नीति पर नजर रखता है। उपभोक्ता मुद्रास्फीति, जीवन यापन की लागत और मौद्रिक नीति पर नजर रखता है।
प्रभाव औद्योगिक मूल्य निर्धारण, व्यापार और अनुबंधों को प्रभावित करता है। RBI की नीति, सब्सिडी और मजदूरी को प्रभावित करता है।

संदर्भ

बांग्लादेश में BNP की निर्णायक चुनावी जीत एक बड़ा राजनीतिक परिवर्तन है, जिसके लिए भारत को क्षेत्रीय गतिशीलता में हो रहे परिवर्तनों के मध्य द्विपक्षीय संबंधों को फिर से समायोजित करने की आवश्यकता है।

बांग्लादेश चुनावी जनादेश

  • भारी बहुमत से जीत: तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) ने 300 सदस्यीय जातीय संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया।
    • तारिक रहमान (जन्म वर्ष 1965) बांग्लादेश के राजनेता और बीएनपी के अध्यक्ष हैं और बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।
  • विपक्ष की बढ़त: जमात-ए-इस्लामी ने पिछले चुनावों की तुलना में संसद में अपनी उपस्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
  • राजनीतिक परिवर्तन: यह अगस्त 2024 में शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद पहला संसदीय चुनाव था, जिसने राष्ट्रीय सत्ता समीकरणों को नया रूप दिया।

बांग्लादेश राजनीतिक व्यवस्था के बारे में

  • संसद संरचना: बांग्लादेश में एक सदनीय विधायिका, जातीय संसद है, जिसमें 300 सीधे निर्वाचित सदस्य होते हैं।
  • कार्यकारी अधिकार: प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख होते हैं और कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करते हैं, जबकि राष्ट्रपति औपचारिक राष्ट्राध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
  • चुनावी प्रक्रिया: बांग्लादेश निर्वाचन आयोग के अंतर्गत सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के माध्यम से आम चुनाव कराए जाते हैं।

भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय चुनौतियाँ

सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: BNP के कार्यकाल में विद्रोही समूहों के प्रति सहिष्णुता के आरोपों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में अविश्वास उत्पन्न किया है।

  • प्रत्यर्पण मुद्दा: शेख हसीना का भारत में रहना नई राजनीतिक व्यवस्था के तहत राजनयिक संवेदनशीलताएँ उत्पन्न कर सकता है।
  • व्यापार असंतुलन: द्विपक्षीय वार्ताओं में व्यापार विषमता और सीमा प्रबंधन के मुद्दे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं।
    • वित्त वर्ष 2024 में बांग्लादेश को भारत का निर्यात लगभग 11 अरब अमेरिकी डॉलर था, जबकि आयात लगभग 1.84 अरब अमेरिकी डॉलर था।
  • तीस्ता नदी जल विवाद: तीस्ता नदी के जल बँटवारे का अनसुलझा समझौता संबंधों में तनाव उत्पन्न करता रहता है, क्योंकि बांग्लादेश शुष्क मौसम में जल के समान प्रवाह की माँग करता है, जबकि भारत राज्य स्तरीय सहमति, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से, के लंबित होने का हवाला देता है।
  • भू-राजनीतिक दबाव: चीन और पाकिस्तान का क्षेत्रीय प्रभाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बांग्लादेश के रणनीतिक विकल्पों को प्रभावित कर सकता है।

नवीनीकरण की संभावनाएँ

  • कूटनीतिक संपर्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शीघ्र बधाई नए नेतृत्व के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने की भारत की तत्परता का संकेत देती है।
  • आर्थिक सहयोग: भारत का सबसे बड़ा दक्षिण एशियाई व्यापारिक साझेदार बांग्लादेश, वस्त्र, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में गहन एकीकरण की संभावनाएँ प्रदान करता है।
  • सुरक्षा सहयोग: आतंकवाद विरोधी समन्वय और अवसंरचना सहयोग से दीर्घकालिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है।
  • मानवीय संबंध: चिकित्सा पर्यटन, शैक्षिक आदान-प्रदान और सरलीकृत वीजा प्रक्रिया से मूलभूत स्तर पर सद्भावना को बढ़ावा मिल सकता है।

निष्कर्ष

संतुलित कूटनीति, आर्थिक सहभागिता और रणनीतिक संवेदनशीलता यह निर्धारित करेगी कि नया राजनीतिक चरण स्थिर तथा यह देखना शेष है कि भारत पारस्परिक रूप से लाभकारी भारत–बांग्लादेश संबंधों को पुनः सुदृढ़ कर पाएगा या नहीं।

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