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| Title | Subject | Paper |
|---|---|---|
| संक्षेप में समाचार | ||
| स्टार्ट-अप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 | economy, | GS Paper 3, |
| CBDC-आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली | economy, | GS Paper 3, |
| डिस्ट्रिक्ट कूलिंग: एक सतत् समाधान | Environment and Ecology, | GS Paper 3, |
| NGT ने ग्रेट निकोबार परियोजना को मंजूरी प्रदान की | Environment and Ecology, | GS Paper 3, |
| महिलाओं के नेतृत्व वाली विकेंद्रित नवीकरणीय ऊर्जा | Indian society, | GS Paper 1, |
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और वेंचर कैपिटल को प्रोत्साहित करने के लिए ₹10,000 करोड़ के स्टार्ट-अप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दी है।
भारत सरकार ने गुजरात में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC)-आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट परियोजना शुरू की है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
उचित मूल्य की दुकानें (FPS)
सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC)
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बढ़ती गर्मी और AC की बढ़ती माँग के साथ, ‘डिस्ट्रिक्ट कूलिंग’ भारतीय शहरों को आरामदायक बनाए रखने का एक माध्यम प्रदान करती है, साथ ही विद्युत की खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करती है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की छह सदस्यीय विशेष पीठ ने ग्रेट निकोबार मेगा परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति को बरकरार रखा और हस्तक्षेप के लिए कोई वैध आधार नहीं पाया।

भारत भले ही वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रख रहा हो, लेकिन असली कमी गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति और ग्रामीण क्षेत्रों में लैंगिक समानता में है। केवल विद्युत कनेक्शन प्रदान करने से आगे बढ़कर महिलाओं के नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा (DRI) की ओर होना चाहिए।
प्रधानमंत्री सहज विद्युत हर घर योजना (सौभाग्य) ने लगभग हर घर तक भौतिक विद्युत कनेक्शन तो पहुँचा दिया, लेकिन विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता—जैसे नियमितता, पर्याप्त वोल्टेज और विश्वसनीयता—अब भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
एनर्जी पाॅवर्टी एक लैंगिक बोझ है और स्थानीयकृत नवीकरणीय समाधान इसके कई महत्त्वपूर्ण आयामों को संबोधित करते हैं:
संभावनाओं के बावजूद, वर्ष 2025–26 तक कुछ संरचनात्मक ‘अवरोध बिंदु’ बने हुए हैं:

भारत का नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने का सफर केवल मेगा-पार्कों के आधार पर पूरा नहीं किया जा सकता है। एक न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण के लिए आवश्यक है कि हाशिये पर खड़ी महिलाएँ ऊर्जा मूल्य शृंखला के केंद्र में लाई जाएँ। महिला-नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा को व्यापक रूप से अपनाकर, भारत एक साथ एनर्जी पाॅवर्टी, जलवायु परिवर्तन और लैंगिक असमानता—इस त्रि-संकट—का समाधान कर सकता है।
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