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| Title | Subject | Paper |
|---|---|---|
| संक्षेप में समाचार | ||
| मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| केंद्रीय बजट वित्त वर्ष 2026–27: पूँजीगत वस्तु क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण | economy, | GS Paper 3, |
| विमुक्त जनजातियों द्वारा संवैधानिक मान्यता की माँग | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| वैश्विक सहायता में कटौती स्वास्थ्य क्षेत्र में प्राप्त प्रगति को प्रतिगामी दिशा में मोड़ सकती है | Science and Technology, | GS Paper 3, |
| डिजिटल लत का विनियमन: भारत के युवाओं के लाभ की सुरक्षा | Polity and governance , | GS Paper 2, |
लगभग एक वर्ष के राष्ट्रपति शासन के पश्चात्, युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
राष्ट्रपति शासन के प्रभाव
केंद्रीय बजट 2026–27 में पूँजीगत वस्तु क्षेत्र को भारत की निवेश-आधारित विकास रणनीति के एक मुख्य स्तंभ के रूप में पुनः विशेष महत्त्व दिया गया है।

विमुक्त जनजातियों (DNTs), घुमंतू जनजातियों (NTs) और अर्द्ध-घुमंतू जनजातियों (SNTs) ने प्रस्तावित वर्ष 2027 की जातिगत जनगणना में संवैधानिक मान्यता और एक अलग जनगणना स्तंभ की माँग की है।
लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित एक नई सहकर्मी-समीक्षित अध्ययन रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि वैश्विक सहायता में गिरावट से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य परिणामों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
भारत ने “डिजिटल एक्सेस” की नीति से हटकर “डिजिटल वेलनेस” की नीति अपना ली है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने आधिकारिक तौर पर “डिजिटल लत” को भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए एक संरचनात्मक खतरे के रूप में वर्गीकृत किया है।
वर्ष 2026 की गाजियाबाद त्रासदी इस बात को रेखांकित करती है कि डिजिटल सुरक्षा एक संवैधानिक आवश्यकता है, न कि नीतिगत विकल्प। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में एल्गोरिथम के दुरुपयोग से युवाओं की सुरक्षा को भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को संरक्षित करने के लिए आवश्यक बताया गया है और प्रतिबंधों से हटकर सुरक्षा-आधारित शासन की ओर बढ़ने का आह्वान किया गया है।
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