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| Title | Subject | Paper |
|---|---|---|
| संक्षेप में समाचार | ||
| सेनेगल | Geography, | GS Paper 1, |
| वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट, 2025 | Environment, | GS Paper 3, |
| अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन परिषद | international Relation, | GS Paper 2, |
| राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| बाँझपन उपचार के लिए WHO दिशा-निर्देश | Health,social issues, | GS Paper 2,GS Paper 3, |
| भारत स्थित न्यूट्रिनो वेधशाला | Science and Technology, | GS Paper 3, |
| भारत का आपदा-प्रतिक्रिया वित्तपोषण ढाँचा | Polity and governance , | GS Paper 2, |
गिनी-बिसाउ में हुए एक सैन्य तख्तापलट में अपदस्थ राष्ट्रपति उमरो सिसोको एंबोलो, पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय (ECWAS) के हस्तक्षेप के बाद सेनेगल में शरण लेने पर मजबूर हुए।

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट, 2025 के अनुसार दिल्ली का भूजल भारत में सर्वाधिक प्रदूषित है, जिसमें यूरेनियम, सीसा, नाइट्रेट तथा अन्य विषैले धातुओं का उच्च स्तर पाया गया है।
भारत को वर्ष 2026–27 के द्विवर्षीय कार्यकाल के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन परिषद में सर्वाधिक मतों के साथ पुनः निर्वाचित किया गया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के विरुद्ध लोकपाल द्वारा प्रारंभ की गई कार्यवाही को निरस्त कर दिया, जो राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) में पदोन्नति संबंधी कथित अनियमितताओं से जुड़ा मामला था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बाँझपन (Infertility) की रोकथाम, निदान और उपचार हेतु अपने प्रथम वैश्विक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें विश्वभर में सुरक्षित, न्यायसंगत और सुलभ प्रजनन-देखभाल की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
हाल ही में चीन ने अपनी जियांगमेन भूमिगत न्यूट्रिनो वेधशाला (Jiangmen Underground Neutrino Observatory- JUNO) का निर्माण पूरा कर लिया है और प्रारंभिक शोध निष्कर्ष जारी कर दिए हैं, जबकि भारत की न्यूट्रिनो वेधशाला (INO) वर्षों की देरी के बाद अभी भी कार्यशील नहीं हो पाई है।
राज्यों की आपदा आवश्यकताओं और केंद्र द्वारा किए जाने वाले व्यय के बीच बढ़ता असंतुलन, जैसा कि हाल ही में केरल के वायनाड मामले में स्पष्ट हुआ है, यह दर्शाता है कि भारत का आपदा-जोखिम वित्त, सहकारी संघवाद से हटकर, अधिक केंद्रीकृत, सशर्त मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
भारत का आपदा-प्रतिक्रिया वित्तपोषण, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 द्वारा शासित, दो-स्तरीय है:
आपदा एकजुटता को संघीय स्वायत्तता को कम नहीं करना चाहिए। पारदर्शी, नियम-आधारित निधि हस्तांतरण के माध्यम से केंद्रीय विवेकाधिकार को कम करके और राज्य एवं जिला अधिकारियों को सशक्त बनाकर, अनुमोदन-आधारित राहत की जगह एक पूर्वानुमानित, विश्वास-आधारित प्रणाली स्थापित की जा सकती है, जिससे सहकारी संघवाद को कायम रखते हुए तीव्र प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी।
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