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| Title | Subject | Paper |
|---|---|---|
| सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| संक्षेप में समाचार | ||
| उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) में केंद्रीकरण | Polity and governance , | GS Paper 2, |
| गर्भकालीन मधुमेह (GDM) | स्वास्थ्य, | GS Paper 2, |
| सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल, 2025 | Polity and governance , | GS Paper 2, |
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी दी है, जिससे इसे संसद में प्रस्तुत किए जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
हाल के विधायी कदम, विशेष रूप से प्रस्तावित भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) विधेयक, 2025 का मसौदा और इससे पहले का भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2023, स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) को केंद्रीकृत करने के लिए केंद्र सरकार के समन्वित प्रयास को करते हैं।

यद्यपि संवैधानिक रूप से वैध होने के बावजूद, उच्च शिक्षा प्रशासन तेजी से कार्यपालिका-केंद्रित होता जा रहा है, जिसमें नियम और अनुमोदन संस्थानों को आकार दे रहे हैं, जिससे संसदीय निगरानी और लोकतांत्रिक जवाबदेही कमजोर हो रही है।
भारत सरकार इस केंद्रीकरण को निम्नलिखित आवश्यकताओं के आधार पर उचित ठहराती है:-
अधीनता की ओर बढ़ती प्रवृत्ति गंभीर चिंताएँ उत्पन्न करती है, जो प्रमुख शासन संबंधी विषयों से परस्पर संबंधित हैं:-
प्रमुख वैश्विक विश्वविद्यालय उच्च स्वायत्तता और उच्च जवाबदेही को बढ़ावा देने वाले मॉडल के तहत विकसित हो रहे हैं:-
उच्च शिक्षा संस्थानों के अत्यधिक केंद्रीकरण से ज्ञान-महाशक्ति बनने हेतु आवश्यक बौद्धिक गतिशीलता के दबने का जोखिम उत्पन्न होता है। वास्तविक सुधारों की दिशा नौकरशाही नियंत्रण से हटकर संस्थागत स्वायत्तता की ओर होनी चाहिए। साथ ही, विद्या (ज्ञान) की मूल भावना का पुनर्जीवन आवश्यक है, ताकि विश्वविद्यालयों को आलोचनात्मक अनुसंधान के वैश्विक केंद्रों (आधुनिक नालंदा) के रूप में सशक्त बनाया जा सके और नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों की प्रभावी प्राप्ति हो सके।
दक्षिण भारत के प्रसवपूर्व क्लीनिकों में किए गए हालिया स्ट्राइड (STRiDE) अध्ययन से यह सामने आया है कि प्रारंभिक गर्भकालीन मधुमेह की व्यापकता देर से होने वाले गर्भकालीन मधुमेह की तुलना में अधिक है तथा इससे माताओं में दीर्घकालिक मधुमेह का जोखिम भी अधिक रहता है।

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल, 2025 को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य अत्यधिक प्रतिबंधित परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलना तथा भारत के परमाणु प्रशासन ढाँचे का पुनर्गठन करना है।
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