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शिक्षा में त्रिभाषा फॉर्मूला और इसकी अनिवार्यता

Lokesh Pal February 27, 2025 05:00 16 0

संदर्भ:

केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार नई शिक्षा नीति (NEP), 2020 के तहत विद्यालयों में त्रिभाषा नियम को लेकर एक-दूसरे से असहमत हैं।

मुख्य बिंदु :

  • केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत जारी की जाने वाली धनराशि को त्रिभाषा नीति के अनुपालन से जोड़ दिया है। 
  • तमिलनाडु सरकार इसे हिंदी भाषा थोपने का प्रयास मानती है और अपनी द्विभाषा नीति पर दृढ़ बनी हुई है।

भाषा संबंधी संवैधानिक प्रावधान:

  • आधिकारिक भाषा अथवा राजभाषा: हिंदी संघ की आधिकारिक भाषा (राजभाषा) है। प्रारंभ में अंग्रेज़ी भाषा को 15 वर्ष (1965 तक) तक समानांतर रूप से प्रयोग करने का प्रावधान था, लेकिन राजभाषा अधिनियम, 1963 के तहत इसका प्रयोग जारी रहा, जो इसे अनिश्चित काल तक प्रयोग की अनुमति देता है।
  • राज्य की भाषा: कोई भी राज्य आधिकारिक उद्देश्यों के लिए उपयोग में आने वाली किसी भी भाषा या हिंदी को अपनी आधिकारिक भाषा के रूप में अपना सकता है।
  • हिंदी का प्रचार: संविधान संघ को भारत की समग्र संस्कृति के लिए अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में हिंदी को बढ़ावा देने का अधिकार देता है।

त्रिभाषा सूत्र:

  • उत्पत्ति: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 1968 में प्रस्तुत किया गया।
  • अधिदेश: आधिकारिक भाषा संकल्प, 1968 के साथ, इसने गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी पढ़ाने को अनिवार्य बना दिया।
  • प्रभाव: तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसने सरकारी स्कूलों में अपनी द्विभाषा नीति (तमिल और अंग्रेज़ी) का पालन किया है।
  • नई शिक्षा नीति, 2020: NEP, 2020 ने त्रिभाषा सूत्र को एक महत्वपूर्ण संशोधन के साथ बनाए रखा:
    • किसी भी राज्य पर कोई भी भाषा थोपी नहीं गई है।
    • भाषा का चयन राज्यों, क्षेत्रों और विद्यार्थियों पर छोड़ दिया गया है, बशर्ते कि तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारत की मूल भाषा हों।
  • आवश्यकता: 2011 की जनगणना के अनुसार, 26% भारतीय द्विभाषी और 7% त्रिभाषी हैं, शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों (22% द्विभाषी, 5% त्रिभाषी) की तुलना में, बहुभाषिकता (44% द्विभाषी, 15% त्रिभाषी) अधिक है।

भारतीय विद्यालयों में समस्याएँ:

  • खराब शिक्षण परिणाम: प्रथम एनजीओ द्वारा वार्षिक शिक्षा स्थिति अनुसंधान (ASER) ने शिक्षण परिणामों में महत्त्वपूर्ण अंतर को उजागर किया है:
    • कक्षा 5 के 60% विद्यार्थी कक्षा 2 के स्तर की पाठ्य-सामग्री नहीं पढ़ सकते थे। 25% वयस्क   (14-18 वर्ष) अपनी क्षेत्रीय भाषा में कक्षा 2 के स्तर की पाठ्य-सामग्री को धाराप्रवाह नहीं पढ़ सकते थे।
    • इस आयु वर्ग के 40% विद्यार्थियों  को अंग्रेज़ी वाक्य पढ़ने में कठिनाई होती है।
    • बुनियादी संख्यात्मक कौशल (घटाना और भाग) कमजोर बने हुए हैं।
  • वित्तपोषण में असमानता: 2019-20 में, प्राथमिक शिक्षा पर ₹3.03 लाख करोड़ खर्च किए गए, जिसमें से 15% केंद्र द्वारा और 85% राज्यों द्वारा वित्तपोषित किया गया।
  • अपर्याप्त वित्तपोषण: प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर और तकनीकी शिक्षा सहित कुल शिक्षा व्यय सकल घरेलू उत्पाद का 4-4.5% बना हुआ है, जो NEP, 2020 द्वारा निर्धारित 6% लक्ष्य से कम है।
    • वित्तपोषण का यह अंतर शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार में बाधा डालता है।
  • विलंब: राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और असहमति के कारण वित्तपोषण में देरी होती है।

आगे की राह

  • प्राथमिकता: अंग्रेज़ी भाषा की दक्षता ने सेवा उद्योगों में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया है, जबकि अधिक भारतीय भाषाएँ सीखना लाभदायक है, साथ ही सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता देना भी आवश्यक है|
  • दक्षता में वृद्धि: निजी स्कूल, जो आठवीं कक्षा तक तीसरी भाषा पढ़ाते हैं, प्रायः उस भाषा में सीमित दक्षता देखते हैं।
  • अतिरिक्त भाषा सीखना: तेजी से बढ़ते शहरीकरण और श्रम प्रवास से अगली जनगणना में बहुभाषावाद बढ़ने की संभावना है। लोग नीतिगत आदेशों के बजाय व्यावहारिक जरूरतों के आधार पर अतिरिक्त भाषाएँ सीखते हैं।

निष्कर्ष: 

विवादों को सुलझाने के लिए सक्रिय केंद्र-राज्य संवाद की आवश्यकता है। क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान करने के लिए स्कूली शिक्षा नीतियों में राज्यों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करना भी एक उपाय हो सकता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

नई शिक्षा नीति, 2020 के तहत त्रिभाषा नीति का उद्देश्य बहुभाषावाद को बढ़ावा देना है, लेकिन इसका कार्यान्वयन, मुख्य रूप से गैर-हिंदी भाषी राज्यों में, विवादास्पद बना हुआ है। इसे अपनाने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए तथा भाषाई चिंताओं को दूर करने के उपाय सुझाइए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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