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बिम्सटेक शिखर सम्मेलन और बंगाल की खाड़ी में भारत की भूमिका

Lokesh Pal April 03, 2025 05:00 21 0

संदर्भ:

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कूटनीतिक प्रयास म्याँमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उन्हें राहत प्रदान करने पर केंद्रित रहे, जिसका प्रभाव थाईलैंड पर भी पड़ा है।

अन्य बिंदु:

  • अन्य बिम्सटेक सदस्य – भूटान, बांग्लादेश, भारत और श्रीलंका – भी आपदा के प्रभावों को कम करने के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।

बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल (बिम्सटेक- BIMSTEC):

  • चार्टर: 1997 में स्थापित बिम्सटेक को 2022 में अपना चार्टर प्राप्त हुआ, जिससे अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में इसकी भूमिका मज़बूत हुई। 
  • विज़न दस्तावेज़: बैंकॉक में 2024 के शिखर सम्मेलन में, एक विज़न दस्तावेज़ समुद्री संपर्क सहित नई पहलों की रूपरेखा तैयार करेगा, जो बिम्सटेक की पूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के लिए एक महत्त्वपूर्ण क्षण होगा।
  • बिम्सटेक को पुनर्जीवित करना: 2014 में सार्क की विफलता के बाद बिम्सटेक पर ध्यान केन्द्रित किया गया, जिसका आंशिक कारण भारत के साथ क्षेत्रीय सहयोग के विरोध के कारण पाकिस्तान का पीछे हटना था। 
    • भारत सरकार ने बिम्सटेक की ओर रुख किया, जिससे बेहतर ढंग से कार्यशील क्षेत्रीय ढाँचा निर्मित हुआ।

बंगाल की खाड़ी का भू-राजनीतिक परिदृश्य:

  • ऐतिहासिक संदर्भ: ब्रिटिश साम्राज्य ने बंगाल की खाड़ी के तटीय क्षेत्र को एकीकृत किया, जिससे बर्मा, सिंगापुर और मलक्का जलडमरूमध्य तक इसके प्रभाव का विस्तार हुआ। 20वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटेन के पतन और जापान के उदय के साथ यह प्रभुत्व कम हो गया, जिससे इसका भू-राजनीतिक महत्त्व प्रभावित हुआ।
  • भू-राजनीतिक पतन: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, बंगाल की खाड़ी में ब्रिटेन की रणनीतिक भूमिका कम हो गई तथा अमेरिका और रूस-चीन गुट के बीच प्रतिस्पर्धा प्रशांत क्षेत्र में स्थानांतरित हो गई। 
  • बंगाल का विभाजन: बंगाल के विभाजन और आंतरिक क्षेत्रीय संघर्षों ने महाशक्ति की राजनीति में बंगाल की खाड़ी के महत्त्व को और कम कर दिया।
  • चीन का बढ़ता प्रभाव: चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति के साथ, बंगाल की खाड़ी एक बार पुनः विवादित क्षेत्र बन गई है। यह घटनाक्रम वैश्विक भू-राजनीति में इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्त्व को उजागर करता है।
  • आर्थिक नीतियाँभारत और म्याँमार दोनों ने स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र आधारित भीतर की ओर नीतियाँ अपनाईं, जिससे बंगाल की खाड़ी वैश्विक व्यापारिक प्रवाह से दूर हो गई। 
    • हालाँकि, 1990 के दशक में भारत के आर्थिक सुधारों और म्याँमार के आर्थिक अलगाव की समाप्ति ने क्षेत्रीय एकीकरण की आशा उत्पन्न की, जो वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों के कारण अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।

बिम्सटेक क्षेत्रवाद संबंधी चुनौतियाँ:

  • परस्पर विश्वास का अभाव: किसी भी सदस्य के पास वीटो शक्ति न होने के बावजूद, बिम्सटेक को आसियान में देखे गए परस्पर विश्वास के स्तर तक पहुँचने के लिए संघर्ष करना पड़ा है। 
  • द्विपक्षीय विवाद: बांग्लादेश और म्याँमार के बीच द्विपक्षीय विवादों तथा शेख हसीना को पद से हटाने के बाद भारत-बांग्लादेश तनाव के कारण क्षेत्रीय सहयोग में बाधा उत्पन्न हो रही है।
  • म्याँमार का कमजोर क्षेत्रीय नियंत्रण: म्याँमार का अपने क्षेत्र पर कमजोर नियंत्रण बिम्सटेक के एक प्रमुख उद्देश्य – दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु के रूप में म्याँमार की क्षमता को साकार करना, जिससे गहन क्षेत्रीय एकीकरण में बाधा उत्पन्न होती है – को प्रभावित करता है।

बिम्सटेक को पुनर्जीवित करने के लिए भारत का रणनीतिक दृष्टिकोण:

  • संस्थागत निर्माण: वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बीच आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए भारत को बिम्सटेक संस्थानों के विकास का समर्थन जारी रखना चाहिए।
  • क्षेत्रीय व्यापारिक संबंध: चूँकि भारत क्षेत्रीय व्यापारिक संबंधों को मज़बूत करना चाहता है, इसलिए बिम्सटेक सहयोग को बनाए रखना और बढ़ाना, क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
  • विभिन्न राष्ट्रों के साथ सहभागिता: भारत को बिम्सटेक सदस्यों के साथ द्विपक्षीय व्यापार और संपर्क बढ़ाकर क्षेत्रीय प्रयासों को पूरक बनाना चाहिए
    • कार्यों में गति बनाए रखने के लिए दो प्रमुख सदस्यों- थाईलैंड और श्रीलंका के साथ सहयोग करना महत्त्वपूर्ण होगा।
  • बांग्लादेश-भारत तनाव को कम करना: बांग्लादेश के साथ संबंधों को बेहतर करने के प्रयास किए जाने चाहिए, विशेष रूप से मुहम्मद यूनुस शासन के नेतृत्व में।
  • एकतरफा पहल: भारतीय यात्रियों के लिए वीजा-मुक्त प्रवेश की पेशकश करने के थाईलैंड के निर्णय ने एकतरफा कार्रवाई की शक्ति को प्रदर्शित किया है। 
    • ऐसी स्वतंत्र नीतियाँ द्विपक्षीय भागीदारी को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती हैं, जिन्हें बहुपक्षीय प्रयासों के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
  • आर्थिक लाभ: $4 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था वाले भारत को बिम्सटेक राष्ट्रों के साथ अपने विषम संबंधों का लाभ उठाकर एकतरफा नीतियाँ शुरू करनी चाहिए, जिससे गहरे आर्थिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा।
  • अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का विकास: अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को एक प्रमुख क्षेत्रीय आर्थिक एवं समुद्री सुरक्षा केंद्र के रूप में विकसित करना बंगाल की खाड़ी में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ करने हेतु महत्त्वपूर्ण है।
  • समुद्री अवसंरचना का आधुनिकीकरण: पूर्वी समुद्र तट पर बंदरगाहों और संबंधित अवसंरचना को मज़बूत करने तथा समुद्री यातायात के नियमों में सुधार करने से क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित होगी, साथ ही समुद्री व्यापार में सुलभता होगी, जिससे यह बंगाल की खाड़ी क्षेत्रवाद का केन्द्र बिन्दु बन जाएगा।

निष्कर्ष

भारत को व्यावहारिकता और क्षेत्रीय नेतृत्व के मध्य संतुलन बनाना चाहिए, जिससे बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच एक स्थिर और एकीकृत क्षेत्र सुनिश्चित हो सके। क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और एकतरफा शक्ति का लाभ उठाने की यह रणनीति बंगाल की खाड़ी के तटीय क्षेत्र को सभी देशों के लिए अधिक सुरक्षित और समृद्ध क्षेत्र में बदलने की कुंजी है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

आगामी बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के संदर्भ में, बिम्सटेक के हालिया पुनः प्रवर्तन के आलोक में बंगाल की खाड़ी के उभरते भू-राजनीतिक और आर्थिक महत्त्व की जाँच कीजिए। बाह्य चुनौतियों के बीच क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में भारत किस प्रकार अग्रणी भूमिका निभा सकता है?

(15 अंक, 250 शब्द)

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