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संयुक्त राष्ट्र ESCAP, 2025 एशिया-प्रशांत आपदा रिपोर्ट

Lokesh Pal November 29, 2025 02:47 4 0

संदर्भ 

संयुक्त राष्ट्र ESCAP, 2025 एशिया-प्रशांत आपदा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दिल्ली, कराची, ढाका, मनीला, सियोल और शंघाई जैसे एशियाई महानगरों में नगरीय ऊष्मन द्वीप प्रभाव के कारण 2-7 डिग्री सेल्सियस की अतिरिक्त तापमान वृद्धि हो सकती है।

संबंधित तथ्य 

  • इस रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के उन पाँच देशों में शामिल है, जहाँ कृषि को बढ़ते तापमान के कारण लगातार उच्च जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, जिससे फसल की पैदावार, श्रम उत्पादकता और ग्रामीण आजीविका को खतरा उत्पन्न हो रहा है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • नगरीय ऊष्मण द्वीप प्रभाव 
    • तापमान में वृद्धि: शहरी परिदृश्य, सघन निर्माण और सीमित हरित क्षेत्र वर्ष 2100 तक वैश्विक तापमान वृद्धि के स्तर में 2-7°C की वृद्धि कर सकते हैं, भले ही वैश्विक तापमान 1.5-2°C पर स्थिर हो जाए।
    • उच्च जोखिम वाले शहर: दिल्ली, कराची, ढाका, मनीला, शंघाई, सियोल जैसे शहरों में स्थानीयकृत गर्मी की तीव्रता का सामना करना पड़ रहा है।
  • हीट इंडेक्स एक्सपोजर
    • गर्म दिन: भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में वार्षिक रूप से 300 से अधिक दिन तापमान 35°C से अधिक रह सकता है।
    • तीव्र तनाव सीमा: कई क्षेत्रों में 41°C से अधिक तापमान 200 से अधिक दिन तक रह सकता है, जो अत्यधिक खतरे और संभावित हीटस्ट्रोक से जुड़ा है।
    • उच्चतम जोखिम श्रेणी: दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया, हीट इंडेक्स की श्रेणी 3 और 4 में आते हैं, इस क्षेत्र में सबसे अधिक तनाव और जोखिम का स्तर।
    • चूँकि हीट इंडेक्स में आर्द्रता भी शामिल होती है, इसलिए यह “महसूस किए गए तापमान” का अधिक सटीक माप प्रदान करता है।
  • चरम गर्मी की घटनाओं में तेजी से वृद्धि
    • क्षेत्रीय आपदा पैटर्न में बदलाव: परंपरागत रूप से चक्रवातों और सूखे से प्रभावित एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अब अत्यधिक गर्मी सबसे तेजी से बढ़ रही है।
    • रिकॉर्ड गर्मी: वर्ष 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा, जिसमें पूरे एशिया में लंबे समय तक ‘लू’ का प्रभाव रहा।
      • बांग्लादेश (अप्रैल-मई 2024) को सबसे भीषण गर्मी की आपदा का सामना करना पड़ा, जिससे 3.3 करोड़ लोग प्रभावित हुए।
      • भारत में वर्ष 2024 में ‘लू’ की घटनाएँ: दूसरी सबसे घातक घटना, जिसमें लगभग 700 लोगों की जान गई।
  • स्वास्थ्य और आजीविका पर प्रभाव
    • दीर्घकालिक जोखिम: दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया की 40% से अधिक आबादी मध्यम एवं दीर्घकालिक परिदृश्यों में 35°C तथा 41°C से ऊपर के हीट इंडेक्स स्तरों का सामना करेगी।
    • ताप-संबंधी मृत्यु दर: वर्ष 2050 तक ताप-संबंधी मौतें दोगुनी हो सकती हैं।
    • सबसे असुरक्षित समूह: शहरी गरीब, वृद्ध, बच्चे, बाहरी कामगार, कम हरियाली वाले क्षेत्र।
    • गंभीर स्वास्थ्य जोखिम: चरम गर्मी शरीर की तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता को बाधित करती है, जिससे हृदय संबंधी तनाव, गुर्दे की विफलता, श्वसन संबंधी परेशानी, संज्ञानात्मक प्रभाव और हीटस्ट्रोक हो सकता है।
    • बढ़ती असमानताएँ: शहरी गरीब समुदायों को अपेक्षाकृत अधिक तापीय जोखिम का सामना करना पड़ता है, जबकि संपन्न क्षेत्रों में हरियाली, बेहतर अवसंरचना और शीतल पर्यावरण अपेक्षाकृत सुरक्षित परिस्थितियाँ सुनिश्चित करते हैं।
      • उदाहरण: इंडोनेशिया के बांडुंग में सबसे धनी और सबसे गरीब क्षेत्रों के बीच लगभग 7°C का तापमान अंतराल दर्ज किया गया।
  • ऊष्मा–वायु गुणवत्ता प्रतिपुष्टि चक्र
    • प्रदूषण में वृद्धि: गर्मी से सूखे और वनाग्नि की घटनाएँ बढ़ती हैं, जिससे PM10, PM2.5, CO2, CO, NOx, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs), जिनमें एक्रोलिन और फॉर्मेल्डिहाइड शामिल हैं, उत्सर्जित होते हैं।
    • यौगिक निर्माण: चरम गर्मी और प्रदूषण एक खतरनाक प्रतिक्रिया चक्र का निर्माण करते हैं, जिससे जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।
  • आर्थिक हानि 
    • उत्पादकता हानि: ऊष्मा जनित कारणों से कार्य घंटों की हानि वर्ष 1995 से 2030 के बीच 3.75 मिलियन से बढ़कर लगभग 8.1 मिलियन होने का अनुमान है।
    • उच्च उत्सर्जन परिदृश्यों में जलवायु-जनित वार्षिक आर्थिक हानि लगभग 498 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकती है।
    • सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र: कृषि, निर्माण, विनिर्माण, विशेष रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में।
  • कृषि पर चरम गर्मी का प्रभाव
    • फसल की पैदावार में गिरावट: अत्यधिक गर्मी फसलों को गंभीर संकट में डाल रही है;
      • उदाहरणस्वरूप, मार्च 2022 में अत्यधिक ‘लू’ के कारण भारत की गेहूँ की फसल, विकास के एक निर्णायक चरण में ही झुलस गई, जिससे उत्पादन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
    • पशुधन उत्पादकता में गिरावट: बढ़ते तापमान से पशुधन की प्रजनन क्षमता, चारे का सेवन और दूध एवं मांस की पैदावार कम हो जाती है।
    • श्रम हानि: उच्च तापमान शारीरिक क्षमता को कम करता है, निर्जलीकरण को बढ़ाता है और कृषि श्रमिकों की उत्पादकता को 27% तक कम करता है।
    • ग्रामीण गरीबी में वृद्धि: गर्मी के कारण फसल और श्रम की हानि ग्रामीण समुदायों को गरीबी के जाल में धकेल सकती है, विशेषतः उन क्षेत्रों में जहाँ अनुकूलन क्षमता सीमित है।
  • सीमित ताप चेतावनी प्रणाली
    • सीमा: केवल 54% वैश्विक मौसम विज्ञान सेवाएँ अत्यधिक गर्मी की चेतावनी जारी करती हैं।
    • संभावित जीवन जो बचाए जा सकते हैं: 57 देशों में गर्मी संबंधी स्वास्थ्य चेतावनी प्रणालियों का विस्तार करने से वार्षिक रूप से लगभग 1,00,000 लोगों की जान बच सकती है।

एशिया-प्रशांत आपदा रिपोर्ट (APDR) के बारे में

  • प्रकाशक: APDR संयुक्त राष्ट्र ESCAP के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रभाग की एक प्रमुख रिपोर्ट के रूप में प्रत्येक दो वर्ष में प्रकाशित होती है।
  • उद्देश्य और क्षेत्र: इसका प्राथमिक उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आपदा जोखिमों, मौजूदा कमजोरियों और सतत् विकास पर उनके व्यापक प्रभावों की समझ को बढ़ाना है।

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