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वर्ष 2026 में भारत की राजनयिक चुनौतियाँ और अवसर

Lokesh Pal December 30, 2025 05:30 29 0

संदर्भ:

2025 में भारतीय विदेश नीति की मूल भावना ‘आघात और आश्चर्य’ (shock and surprise) की रही, क्योंकि इस वर्ष सरकार को विभिन्न दिशाओं से कई अप्रत्याशित अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

ट्रम्प कारक: अमेरिकी संबंध और “अमेरिका फर्स्ट नीति” का प्रभाव

  • डोनाल्ड ट्रम्प की वापसी: जनवरी में डोनाल्ड ट्रम्प ने दूसरे कार्यकाल के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। यह घटना 2025 में भारत के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण विदेश नीति का विषय बन गई।
  • बहुपक्षीय व्यवस्था में व्यवधान: अमेरिका के ‘लिबरेशन डे टैरिफ’ (Liberation Day tariffs) ने बहुपक्षीय आर्थिक प्रणाली को व्यापक रूप से प्रभावित दिया। इन उपायों ने मौजूदा विश्व व्यवस्था को अस्थिर कर दिया।
  • रणनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव: श्री ट्रम्प ने रूस और चीन के प्रति अमेरिकी नीतियों में बदलाव किया, जिन्हें पहले अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता था। इसने यूरोप और इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) में अमेरिका के सबसे महत्त्वपूर्ण गठबंधनों को भी प्रभावित किया।
  • राजनयिक आचरण: ट्रम्प ने विश्व नेताओं के प्रति अपने मनमाने व्यवहार से वैश्विक विमर्श (global discourse) के स्तर को प्रभावित दिया, साथ ही नोबेल पुरस्कार जीतने के लिए आठ युद्धों को समाप्त करने का दावा किया।

भारत-अमेरिका संबंधों पर प्रभाव

  • टैरिफ (Tariffs): अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर 25% टैरिफ और अतिरिक्त 25% अधिभार (surcharge) आरोपित किया।
  • आव्रजन और वीज़ा नीतियाँ: आव्रजन पर अमेरिकी कार्रवाई में H-1B वीज़ा, छात्र वीज़ा और भारतीय अवैध अप्रवासियों का निर्वासन शामिल था।
  • पाकिस्तान-संबंधित प्रयास: ट्रम्प ने बार-बार दावा किया, कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के युद्धविराम में मध्यस्थता की। उन्होंने व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी नेतृत्व की मेजबानी की और पाकिस्तान को F-16 की डिलीवरी को मंजूरी दी।
  • राजनयिक दुष्प्रभाव: इन कार्यों ने पाकिस्तान से होने वाले सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के अभियान को नुकसान पहुँचाया।
    • परिणामस्वरूप तुर्किये, अज़रबैजान और मलेशिया के साथ भी तनाव उत्पन्न हुआ, जिन्हें पाकिस्तान का समर्थन करते हुए देखा गया था।

वैश्विक रुझान: दक्षिणपंथी राजनीति और तेल विरोधाभास

  • अति-दक्षिणपंथ का उदय: यूरोपीय संसद के चुनावों, जापान और चिली सहित विश्व स्तर पर अति-दक्षिणपंथी (Ultra-right) राजनेताओं ने अपनी पकड़ मजबूत की। इसने एक बढ़ती हुई रूढ़िवादी और ज़ेनोफोबिक (xenophobic) प्रवृत्ति का संकेत दिया।
  • तेल की कीमतों में गिरावट: OPEC देशों द्वारा उत्पादन की अधिकता के बीच तेल की कीमतों में कमी आई। इसने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) को बढ़ावा देने संबंधी प्रयासों पर चिंता व्यक्त की।
  • वैश्विक विकास परिदृश्य: वैश्विक विकास दर 2024 में 3.3% से घटकर 2025 में 3.2% और 2026 में 3.1% होने का अनुमान लगाया गया था। इससे भारत के निर्यात की माँग कम हो सकती है।
  • रूस-यूक्रेन युद्ध: रूस-यूक्रेन युद्ध अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर गया।
  • भारत पर आर्थिक प्रभाव: पहली बार, भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ा।
    • यूरोपीय संघ (EU) और यूके (UK) ने भारत-रूसी संयुक्त उद्यम ‘नायरा एनर्जी’ (Nayara Energy) पर प्रतिबंध लगा दिए।
    • अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए, जिससे सस्ता तेल खरीदना अधिक कठिन हो गया।

पश्चिम एशिया संकट

  • गाजा संघर्ष: पूरे वर्ष गाजा पर इज़राइली हमले जारी रहे। 20,000 बच्चों सहित 70,000 से अधिक लोग मारे गए।
  • युद्ध-विराम घटनाक्रम: वर्ष के अंत में अमेरिका समर्थित युद्धविराम समझौते ने कुछ उम्मीद उत्पन्न की।
  • आर्थिक हानि: भारत-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारा (IMEC) की भारत की योजनाएँ ठप हो गईं।
  • राजनयिक चुनौतियाँ: जून में ईरान पर हमलों के लिए इज़राइल की आलोचना करने से भारत के इनकार ने SCO (शंघाई सहयोग संगठन) और BRICS में असहज स्थिति उत्पन्न कर दी।
    • ईरान इन दोनों समूहों का सदस्य है।

पड़ोस में संकट: “रिंग ऑफ फायर”

  • पाकिस्तान: अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बड़े आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ किया। इस हमले में नागरिकों को निशाना बनाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप अत्यधिक लोग हताहत हुए।
  • नेपाल: जेन-जी (Gen-Z) के विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को गिरा दिया, जिससे सीमा पार अस्थिरता उत्पन्न हो गई।
  • बांग्लादेश: एक दक्षिणपंथी नेता की हत्या के बाद हिंसा भड़क उठी। यह हिंसा प्रकृति में भारत-विरोधी हो गई।
  • ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पर प्रश्नचिह्न: इन घटनाक्रमों ने भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” (पड़ोसी प्रथम) नीति की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।
    • भारत को “दो-मोर्चों” (two-front) की राजनयिक चुनौती का सामना करना पड़ा, क्योंकि पड़ोस में अस्थिरता ने आंतरिक सुरक्षा लागत को बढ़ा दिया।

भारत की रणनीतिक विजय:

  • कनाडा के साथ संबंधों में सुधार: 2023 से चले आ रहे तनाव के बाद भारत ने कनाडा के साथ संबंधों में वापसी की। यह तनाव उन आरोपों को लेकर उत्पन्न हुआ था, कि एक खालिस्तानी अलगाववादी की हत्या की निगरानी भारत ने की थी।
    • प्रधानमंत्री मोदी ने G-7 सम्मेलन में भाग लेने के लिए कनाडा का दौरा किया और कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ अपने मतभेदों को कम करने पर सहमति व्यक्त की।
  • तालिबान के साथ संबंध: भारत ने तालिबान के साथ संबंधों में वृद्धि की, जिसने 2021 में बलपूर्वक काबुल पर कब्जा कर लिया था।
    • भारतीय विदेश सचिव और तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के बीच एक बैठक के बाद संबंधों में सुधार हुआ।
    • बिगड़ते अफगान-पाकिस्तान संबंधों और उनके संघर्ष ने भारत के पक्ष में कार्य किया, क्योंकि पाकिस्तान को “दो-मोर्चों” (two-front) की समस्या से निपटना पड़ा—ऐसी स्थिति जिसका सामना आमतौर पर भारत चीन और पाकिस्तान के साथ करता है।
  • चीन के साथ संबंध: भारत ने अक्तूबर 2024 में मोदी-शी बैठक के बाद शुरू हुई बेहतर संबंधों की प्रक्रिया को जारी रखा।
    • इन प्रयासों में कैलाश-मानसरोवर तीर्थयात्रा को पुनः आरंभ करना, वीज़ा और हवाई उड़ानों को बहाल करना तथा जल डेटा साझाकरण को शुरू करना शामिल था।
  • बहुपक्षीय संबंध: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को चीन के समर्थन के बावजूद, भारतीय नेताओं ने चीन में SCO बैठकों में भाग लिया।
  • पड़ोसी देशों के साथ जुड़ाव: भारत ने भूटान, श्रीलंका और मालदीव के साथ संबंध मजबूत किए। प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 में तीनों देशों का दौरा किया।
  • मानवीय सहायता: चक्रवात ‘दितवाह’ के बाद भारत ने श्रीलंका को $450 मिलियन की वित्तीय सहायता प्रदान की। इस चक्रवात में 600 से अधिक लोग मारे गए और भारत के समर्थन की व्यापक रूप से सराहना की गई।

रोडमैप-2026: आगामी शिखर सम्मेलन और समझौते

  • व्यापार वार्ता: भारत ने यूके (U.K.), ओमान और न्यूजीलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते संपन्न किए।
  • लंबित व्यापार समझौते: अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU), ऑस्ट्रेलिया, EAEU, GCC और ASEAN के साथ व्यापार समझौते अभी भी लंबित हैं। हालाँकि, 2026 की शुरुआत में बड़ी सफलताओं की उम्मीद है।
  • भारत-यूरोपीय संघ जुड़ाव: गणतंत्र दिवस के लिए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के आने की उम्मीद है। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (free trade agreement) को अंतिम रूप दिए जाने की संभवना है।
  • क्षेत्रीय चुनाव: भारत म्याँमार, बांग्लादेश और नेपाल में होने वाले चुनावों पर कठोर निगरानी रखेगा, क्योंकि प्रत्येक के भारत के लिए व्यापक निहितार्थ हैं।
  • बहुपक्षीय संबंध: भारत फरवरी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मार्च में भारत आने की उम्मीद है।
  • क्वाड और एपेक (Quad and APEC): इस बात पर ध्यान है, कि क्या ट्रम्प क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा करेंगे। APEC शिखर सम्मेलन के लिए उनकी संभावित चीन यात्रा की भी निगरानी की जा रही है।
  • BRICS और G-20: व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग सहित अन्य नेताओं को BRICS और G-20 शिखर सम्मेलनों में आमंत्रित किया जाएगा।
    • भारतीय प्रधानमंत्री को दिसंबर में अमेरिका में महत्त्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों के ठीक बाद मियामी में ट्रम्प की संपत्ति पर G-20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा।

निष्कर्ष

एक वर्ष के भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, भारतीय विदेश नीति निर्माताओं को व्यापक विकास की उम्मीद है। भारत के राजनयिक विकल्पों का अधिक यथार्थवादी और संयमित आकलन आवश्यक माना जा रहा है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: 2025 में भारत की विदेश नीति अप्रत्याशित वैश्विक घटनाओं और विस्तारित भू-राजनीतिक अनिश्चितता से प्रभावित हुई थी। इस वर्ष भारत के सामने आई प्रमुख बाह्य चुनौतियों की चर्चा कीजिए तथा उन अवसरों का आकलन कीजिए, जो 2026 में भारतीय कूटनीति को दिशा प्रदान करेंगे।

(10 अंक, 150 शब्द)

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