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पर्यावरण (संरक्षण) कोष

Lokesh Pal January 22, 2026 03:15 7 0

संदर्भ

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) कोष के उपयोग, प्रशासन और लेखापरीक्षा को कवर करते हुए इसके लिए विस्तृत नियम अधिसूचित किए हैं।

पर्यावरण (संरक्षण) कोष की पृष्ठभूमि

  • प्रकृति: यह भारत सरकार का एक वैधानिक कोष है, जिसे पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन पर लगाए गए मौद्रिक दंडों के उपयोग हेतु बनाया गया है।
  • वैधानिक आधार: इस कोष की परिकल्पना जन विश्वास अधिनियम, 2023 के अंतर्गत की गई थी, जिसने मौद्रिक दंडों को बरकरार रखते हुए प्रदूषण से संबंधित कई छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया।
  • निधि का स्रोत: इसके अंतर्गत लगाए गए दंड
    • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
    • वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981
    • जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974
  • जुर्माने की सीमा: जुर्माने की राशि न्यूनतम ₹10,000 से अधिकतम ₹15 लाख तक हो सकती है।

पर्यावरण (संरक्षण) निधि नियम, 2026

  • उद्देश्य: ये नियम निधि के उपयोग के लिए गतिविधियों, प्रक्रियाओं, शासन संरचना और लेखापरीक्षा तंत्र का विस्तृत वर्णन करते हैं।
  • निधि बँटवारे की व्यवस्था
    • वसूले गए जुर्माने का 75% संबंधित राज्य के संचित कोष में जमा किया जाएगा।
    • 25% राशि राष्ट्रीय स्तर की पर्यावरण गतिविधियों के लिए केंद्र द्वारा रखी जाएगी।
  • प्रशासनिक प्राधिकारी: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) या केंद्र द्वारा अधिसूचित निकाय।
  • निर्दिष्ट उपयोग: नियमों में 11 चिह्नित पर्यावरणीय गतिविधियों के लिए निधि के उपयोग की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
  • प्रशासनिक ढाँचा: केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा परियोजनाओं के प्रबंधन और कार्यान्वयन के लिए समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाइयाँ (PMU) बनाई जाएँगी।
  • लेखापरीक्षा एवं निगरानी
    • लेखापरीक्षा प्राधिकरण: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) पर्यावरण (संरक्षण) कोष की लेखापरीक्षा करेंगे।
    • डिजिटल निगरानी: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) कोष के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित और अनुरक्षित करेगा।
    • पोर्टल का कार्य: पोर्टल शुरू होने के बाद यह पोर्टल अधिकारियों और हितधारकों के बीच एक विशेष डिजिटल इंटरफेस के रूप में कार्य करेगा।

चिह्नित गतिविधियों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • वायु गुणवत्ता मॉनिटर जैसे पर्यावरण निगरानी उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव।
  • पर्यावरण प्रशासन से संबंधित IT-आधारित प्रणालियों का विकास।
  • पर्यावरण प्रयोगशालाओं की स्थापना और उन्हें सुदृढ़ बनाना।
  • प्रदूषण नियंत्रण संस्थानों और संबंधित अधिकारियों की क्षमता निर्माण।
  • मौजूदा दूषित स्थलों सहित पर्यावरण क्षति का निवारण।
  • पर्यावरण संरक्षण और सुधार से संबंधित अनुसंधान।
  • परियोजना प्रबंधन इकाइयों में तैनात संविदा कर्मचारियों और सलाहकारों का वेतन और भत्ते।

महत्त्व

  • प्रदूषण फैलाने वाले से भुगतान लेने के सिद्धांत को सुदृढ़ बनाना: पर्यावरण पुनर्स्थापन में जुर्माने की राशि का पुनर्निवेश करके प्रदूषण फैलाने वाले से भुगतान लेने के सिद्धांत को सुदृढ़ बनाता है।
  • केंद्र-राज्य सहयोग में वृद्धि: राजस्व-साझाकरण तंत्र यह सुनिश्चित करके पर्यावरण शासन में केंद्र-राज्य सहयोग को मजबूत करता है कि दोनों स्तरों की सरकारों की प्रवर्तन तथा पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन में हिस्सेदारी हो।
  • अपराधीकरण का उन्मूलन: आपराधिक प्रवर्तन से अनुपालन-आधारित शासन की ओर बढ़ते हुए जन विश्वास सुधारों को क्रियान्वित करता है।
  • पर्यावरण शासन: पर्यावरण संरक्षण में संस्थागत क्षमता, निगरानी, ​​उपचार और जवाबदेही को बढ़ाता है।

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