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भारत का अवसंरचना परिवर्तन

Lokesh Pal January 31, 2026 03:08 28 0

संदर्भ

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 भारत की विकास रणनीति के केंद्रीय स्तंभ के रूप में अवसंरचना को रेखांकित करता है।

  • यह परिवर्तन सार्वजनिक व्यय में बड़े पैमाने पर वृद्धि, पीएम गति शक्ति के माध्यम से एकीकृत योजना, तथा प्रमुख नीतिगत सुधारों द्वारा संचालित है।

भारत में अवसंरचना वित्तपोषण

  • सार्वजनिक निवेश: सरकारी पूँजीगत व्यय वित्त वर्ष 2018 में ₹2.63 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 (बजट अनुमान) में ₹11.21 लाख करोड़ हो गया है, अर्थात् 4.2 गुना वृद्धि।
    • यह महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक निवेश उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है, क्योंकि अवसंरचना का व्यापक अर्थव्यवस्था पर मजबूत गुणक प्रभाव होता है।
  • विविधीकृत वित्तपोषण: अवसंरचना वित्तपोषण पारंपरिक बैंक ऋणों से आगे बढ़ रहा है।
    • अब वृद्धि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, अवसंरचना निवेश ट्रस्टों और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्टों द्वारा संचालित हो रही है, जो दीर्घकालिक संस्थागत पूँजी को एकत्र करते हैं।
  • सार्वजनिक–निजी भागीदारी: विश्व बैंक भारत को अवसंरचना में निजी निवेश के लिए निम्न और मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में शीर्ष पाँच में स्थान देता है।
    • भारत दक्षिण एशिया में निजी अवसंरचना निवेश का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता है, जो क्षेत्र के कुल निवेश का 90 प्रतिशत से अधिक है।

मुख्य भौतिक अवसंरचना

राष्ट्रीय राजमार्ग

  • नेटवर्क विस्तार: राजमार्ग नेटवर्क वित्त वर्ष 2014 में 91,287 किलोमीटर से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर तक) में 1,46,572 किलोमीटर हो गया है, अर्थात् 60 प्रतिशत वृद्धि।
  • उच्च-गति गलियारे: परिचालन उच्च-गति गलियारों की लंबाई दस गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2014 में 550 किलोमीटर से वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर तक) में 5,364 किलोमीटर हो गई है।
  • मुख्य फोकस: आर्थिक गलियारों का विकास, प्रमुख नोड्स को जोड़ना तथा रिंग रोड और बाईपास के लिए नई नीतियों के माध्यम से शहरों में भीड़भाड़ कम करना।

रेलवे अवसंरचना

  • रिकॉर्ड निवेश: नए रेल मार्गों, डबल लाइन और सुरक्षा उन्नयन पर अभूतपूर्व पूँजीगत व्यय केंद्रित किया गया है।
  • विद्युतीकरण: ब्रॉड-गेज नेटवर्क का 99.1 प्रतिशत भाग अब विद्युतीकृत हो चुका है (अक्टूबर 2025 तक)।
  • प्रमुख परियोजनाएँ
    • तीन प्रमुख आर्थिक गलियारों का विकास (ऊर्जा/खनिज, बंदरगाह संपर्क, उच्च-घनत्व मार्ग),
    • मुंबई–अहमदाबाद उच्च-गति रेल,
    • पूर्वी और पश्चिमी समर्पित माल गलियारे,
    • अमृत भारत योजना के अंतर्गत 1,337 स्टेशनों का पुनर्विकास।
    • ट्रैक उन्नयन: 78 प्रतिशत से अधिक मार्गों पर 110 किमी. प्रति घंटा या उससे अधिक गति संभव।
    • सुरक्षा: स्वदेशी ‘कवच’ ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन।

नागरिक उड्डयन

  • बाजार आकार: भारत अब विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है।
  • हवाई अड्डा विस्तार: हवाई अड्डों की संख्या वर्ष 2014 में 74 से बढ़कर वर्ष 2025 में 164 हो गई है।
  • यात्री यातायात वृद्धि: वित्त वर्ष 2025 में हवाई अड्डों ने 412 मिलियन यात्रियों का प्रबंधन किया, जो वर्ष 2031 तक 665 मिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
  • मुख्य कारक: क्षेत्रीय संपर्क के लिए उड़ान योजना की सफलता, हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण और नए विधायी ढाँचे।

बंदरगाह और नौवहन

  • वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता: बेहतर टर्नअराउंड समय के कारण, 7 भारतीय बंदरगाह विश्व बैंक के कंटेनर पोर्ट प्रदर्शन सूचकांक,  2024 में शीर्ष 100 बंदरगाहों में शामिल हैं।
  • विधायी सुधार: मर्चेंट शिपिंग, कोस्टल शिपिंग, भारतीय बंदरगाह आदि जैसे नए अधिनियमों की श्रृंखला ने नियामक ढाँचे का आधुनिकीकरण किया है।
  • आंतरिक जलमार्ग: राष्ट्रीय जलमार्गों पर कार्गो परिवहन 2013–14 में 18 MMT से बढ़कर वर्ष 2024–25 में 146 MMT हो गया है।
  • पोत निर्माण: पोत निर्माण और समुद्री पारितंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए वर्ष 2025 में ₹69,725 करोड़ का व्यापक पैकेज स्वीकृत किया गया।

ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तन

विद्युत क्षेत्र सुधार

  • क्षमता और पहुँच: स्थापित विद्युत क्षमता नवंबर 2025 में 509.74 गीगावाट तक पहुँच गई। सौभाग्य जैसी ऐतिहासिक योजनाओं के माध्यम से 2.86 करोड़ घरों का विद्युतीकरण किया गया।
  • वित्तीय सुधार: पहली बार वितरण कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में ₹2,701 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया।
  • दक्षता लाभ: माँग–आपूर्ति अंतर वित्त वर्ष 2014 में 4.2 प्रतिशत से घटकर नवंबर 2025 तक शून्य हो गया। समग्र तकनीकी और वाणिज्यिक हानियाँ 22.62 प्रतिशत से घटकर 15.04 प्रतिशत रह गईं।

नवीकरणीय ऊर्जा

  • कुल नवीकरणीय ऊर्जा और स्थापित सौर क्षमता में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर तथा पवन उर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा अब भारत की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है (नवंबर 2025 तक)।
  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता एक दशक में तीन गुना से अधिक बढ़कर मार्च 2014 में 76.38 गीगावाट से नवंबर 2025 में 253.96 गीगावाट हो गई है।

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