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कोकिंग कोयला

Lokesh Pal February 02, 2026 02:45 16 0

संदर्भ

भारत सरकार ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कोकिंग कोयले को एक महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज के रूप में अधिसूचित किया है।

कोकिंग कोयले के बारे में

  • कोकिंग कोयले पृथ्वी की भूपर्पटी में पाया जाने वाला प्राकृतिक अवसादी शैल है और इसके महत्त्वपूर्ण औद्योगिक उपयोगों के कारण इसे धातुकर्मीय कोयला (Metallurgical Coal) भी कहा जाता है।
  • गुणधर्म
    • कोकिंग कोयले में वायु की अनुपस्थिति में गर्म करने पर कोमल होने, फूलने तथा आपस में चिपकने का विशिष्ट गुण होता है, जिससे हल्का एवं छिद्रयुक्त कोक निर्मित होता है।
    • तापीय कोयले (Thermal Coal) की तुलना में इसमें कार्बन की मात्रा अधिक तथा राख और नमी की मात्रा कम होती है।
  • वर्गीकरण: राख की मात्रा, वाष्पशीलता तथा कोकिंग गुणों के आधार पर कोकिंग कोक को तीन प्रमुख उप-प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
    • प्राथमिक कोकिंग कोयला: कम राख, कम वाष्पशील पदार्थ और उच्च कोकिंग शक्ति।
    • मध्यम कोकिंग कोयला: कम राख, मध्यम वाष्पशील पदार्थ और तुलनात्मक रूप से कम कोकिंग सूचकांक।
    • अर्द्ध/कमजोर कोकिंग कोयला: कम राख, उच्च वाष्पशील पदार्थ और अत्यंत कम कोकिंग सूचकांक; सामान्यतः इसे उच्च श्रेणी के कोयले के साथ मिश्रित किया जाता है।
  • कोकिंग कोयले का महत्त्व
    • इस्पात उत्पादन में भूमिका: ब्लास्ट फर्नेस के माध्यम से इस्पात उत्पादन हेतु कोकिंग कोयला एक आवश्यक कच्चा माल है तथा यह अवसंरचना, विनिर्माण, रक्षा और निर्माण क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
    • रणनीतिक महत्त्व: कोकिंग कोयले की उपलब्धता सीधे इस्पात क्षेत्र की क्षमता, लागत प्रतिस्पर्द्धात्मकता तथा आपूर्ति शृंखला की स्थिरता को प्रभावित करती है।
  • वैश्विक उत्पादन: कोकिंग कोयले के प्रमुख उत्पादक देशों में चीन, ऑस्ट्रेलिया, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा शामिल हैं।
  • घरेलू उपलब्धता
    • भारत में कोकिंग कोयले के अनुमानित 37.37 अरब टन संसाधन हैं, जो मुख्यतः झारखंड में स्थित हैं; इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी भंडार पाए जाते हैं।
    • वित्त वर्ष 2020–21 में आयात 51.20 मिलियन टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2024–25 में 57.58 मिलियन टन हो गया।
    • वर्तमान में इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोयले की लगभग 95 प्रतिशत आवश्यकता आयात से पूरी की जाती है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव और आपूर्ति संबंधी जोखिम उत्पन्न होते हैं।

MMDR अधिनियम, 1957 के बारे में

  • विनियामक ढाँचा: खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 केंद्र सरकार को खानों के विनियमन तथा देश में खनिज संसाधनों के विकास की निगरानी का अधिकार देता है।
  • संस्थागत तंत्र: यह अधिनियम निम्नलिखित की स्थापना का प्रावधान करता है –
    • जिला खनिज फाउंडेशन (DMF): खनन से प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण को बढ़ावा देने हेतु।
    • राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास (NMET): खनिज अन्वेषण को सुदृढ़ करने और अवैध खनन पर अंकुश लगाने हेतु।
  • महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की सूची: MMDR अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग–D में निर्दिष्ट है, जिसमें 24 खनिज शामिल हैं, जैसे— बेरिल एवं अन्य बेरिलियम-युक्त खनिज, कैडमियम-युक्त खनिज, पोटाश, फॉस्फेट (यूरेनियम रहित), ग्रेफाइट आदि।

महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं तथा आयात निर्भरता या वैश्विक उत्पादन के संकेंद्रण के कारण उच्च आपूर्ति-शृंखला जोखिम का सामना करते हैं।

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