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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal February 03, 2026 04:55 17 0

भारत के दो नए रामसर स्थल

विश्व आर्द्र भूमि दिवस के अवसर पर, उत्तर प्रदेश के पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के छारी-धंद को रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्र भूमि के रूप में आधिकारिक रूप से नामित किया गया।

भारत के रामसर स्थल

  • कुल रामसर स्थल: इन दो साइट्स के शामिल होने से देश में कुल रामसर स्थल 98 हो गई हैं (पूर्व में 96 थी)।
  • हस्ताक्षरित वर्ष: भारत ने वर्ष 1982 में रामसर कन्वेंशन की सदस्यता ली, और वैश्विक महत्त्व के आर्द्र भूमि की सुरक्षा का वचन दिया।
  • शीर्ष राज्य: तमिलनाडु 20 रामसर स्थल के साथ अग्रणी है, इसके बाद उत्तर प्रदेश ( अब 11) है।

पटना पक्षी अभ्यारण्य

  • स्थान: जलेसर, एटा जिला, उत्तर प्रदेश।
  • स्थापना: वर्ष 1991।
  • प्राकृतिक विशेषता: यह एक प्राकृतिक ताजे जल की उथली आर्द्र भूमि है, जो पक्षियों को आकर्षित करती है।
  • प्रकार: गंगी के मैदानों में वर्षा-आश्रित आर्द्र भूमि का उदाहरण।
  • जैव विविधता: झील 106 से अधिक प्रवासी पक्षी प्रजातियों का रेस्टिंग हब है।
  • वनस्पतियाँ: पूरे झील क्षेत्र में ‘हायसिंथ’ और ‘पोतामोगेटन’ की प्रचुर मात्रा में मैक्रोफाइटिक वनस्पति विस्तृत है।
  • महत्वपूर्ण जलपक्षी: लेसर व्हिस्लिंग-डक, ग्रे लाग गूस, कॉम्ब डक, रुडी शेलडक, गैडवाल, यूरेशियन विगन, इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक, नॉर्दर्न शोवेलर, नॉर्दर्न पिंटेल।

छारी-धंद आर्द्र भूमि रिजर्व (गुजरात)

  • स्थान: बन्नी ग्रासलैंड्स के पास, कच्छ जिला, गुजरात।
  • प्रकार: मौसमी खारी आर्द्र भूमि (मानसून-आश्रित), कच्छ की शुष्क-क्षेत्र पारिस्थितिकी से संबंधित है।
  • जैव विविधता हॉटस्पॉट: 250+ पक्षी प्रजातियों का समर्थन; प्रमुख शीतकालीन और प्रजनन स्थल।
  • महत्वपूर्ण पक्षी: ग्रेटर और लेसर फ्लेमिंगो, पेलिकन्स, क्रेन, डक, रैप्टर्स।

विश्व आर्द्र भूमि दिवस

  • प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है।
  • महत्व: 2 फरवरी, 1971 को ईरान के रामसर में आर्द्र भूमि कन्वेंशन को अपनाए जाने की वर्षगाँठ।
  • 2026 थीम: वेटलैंड्स एंड ट्रैडिशनल नॉलेज: सेलिब्रेटिंग कल्चरल हेरिटेज”

जल जीवन मिशन

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ग्रामीण भारत में हर घर जल (जल जीवन मिशन) संबंधी सार्वजनिक संतुष्टि पर किए गए आवधिक सर्वेक्षण से ज्ञात होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सार्वभौमिक नल कनेक्शन कवरेज हासिल होने के बावजूद, वास्तविक उपयोग, नियमितता और जल गुणवत्ता अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।

सर्वेक्षण के बारे में

  • सर्वेक्षण का नाम: हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन की कार्यक्षमता मूल्यांकन (Functionality Assessment of Household Tap Connections)।
  • कवरेज: लगभग 2.37 लाख घरों का सर्वेक्षण किया गया, जो 19,812 गाँवों तक विस्तृत है; यह उन 19.3 करोड़ ग्रामीण घरों में किया गया, जो योजना के अंतर्गत आते हैं।
  • गाँव का चयन: केवल ‘हर घर जल (HGJ)’ प्रमाणित गाँवों का मूल्यांकन किया गया, जहाँ राज्यों ने 100% टैप कवरेज की सूचना दी थी।
  • HGJ के अंतर्गत कवर किए गए गाँव: भारत में कुल 5.8 लाख गाँवों में से लगभग 2.72 लाख HGJ गाँव हैं।

सर्वेक्षण से प्रमुख निष्कर्ष

  • नल तक पहुँच: लगभग 98% घरों ने बताया कि उनके पास नल कनेक्शन है।
  • वास्तविक जल प्रवाह: केवल 83% घरों ने कहा कि सर्वेक्षण से सात दिन पूर्व कम-से-कम एक बार जल आपूर्ति सुनिश्चित हुई।
  • राज्यवार भिन्नता
    • शीर्ष रैंकिंग: गोवा, गुजरात, आंध्र प्रदेश और कई केंद्रशासित प्रदेशों में 97% से अधिक उपलब्धता।
    • निम्न रैंकिंग: बिहार (61%), उत्तर प्रदेश (72%), और नागालैंड (74%) ने सबसे कम उपलब्धता दर्ज की।
  • जल आपूर्ति की पर्याप्तता
    • न्यूनतम आपूर्ति मानक: केवल 80% घरों ने प्रतिदिन 55 लीटर प्रति व्यक्ति जल आपूर्ति की सूचना दी।
    • सबसे कम रिपोर्टिंग राज्य: सिक्किम (24%) और गुजरात (58%)।
  • जल गुणवत्ता संबंधी चिंताएँ
    • जाँच किए गए मानदंड: ई. कोलाई, कुल कॉलिफॉर्म और pH स्तर।
    • अनुपालन: केवल 76% घरों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार, जल की आपूर्ति सुनिश्चित हुई।

संपूर्ण कार्यक्षमता

  • उपलब्धता, नियमितता और जल गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए, केवल 76% घर योजना के उद्देश्यों के अनुसार लाभान्वित हो रहे हैं।
  • जल गुणवत्ता संतोष: त्रिपुरा (43%) को छोड़कर अधिकांश राज्यों ने जल गुणवत्ता पर 85% से अधिक संतुष्टि दर्ज की गई, जबकि प्रयोगशाला परीक्षणों में अनुपालन कम था।

हर घर जल योजना के बारे में

  • परिचय: हर घर जल, जल जीवन मिशन (JJM) का ग्रामीण पेयजल आपूर्ति घटक है।
  • उद्देश्य: प्रत्येक ग्रामीण घर में 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल, कार्यात्मक घरेलू टैप कनेक्शन के माध्यम से उपलब्ध कराना।
  • कवरेज: योजना वर्ष 2020 में प्रभावी रूप से शुरू हुई और भारत के 19.3 करोड़ ग्रामीण घरों को शामिल करती है।
  • समय सीमा: मूल लक्ष्य वर्ष 2024 तक 100% कवरेज और कार्यक्षमता था, जिसे अब वर्ष 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
  • संस्थागत कवरेज: घरों के अलावा, योजना गाँव के स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सामुदायिक/सार्वजनिक संस्थाओं को भी जल कनेक्शन प्रदान करती है।
  • नोडल एजेंसी: जल शक्ति मंत्रालय के तहत पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा कार्यान्वित।
  • फंडिंग पैटर्न
    • केंद्र और राज्यों के बीच 50:50 लागत साझा।
    • हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10।
    • केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 100% केंद्रीय वित्तपोषण।

चक्र – ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE)

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने सनराइज सेक्टर (Sunrise Sectors) के वित्तपोषण के लिए चक्र – ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE)’ लॉन्च किया।

सनराइज सेक्टर क्या हैं?

  • सनराइज सेक्टर वे नए और तेजी से बढ़ती उद्योग हैं, जिनमें निवेश, नवाचार, रोजगार सृजन, निर्यात और आर्थिक विकास की उच्च भविष्य की संभावनाएँ हैं, मुख्यतः इसलिए कि ये उभरती तकनीकों, नई उपभोक्ता माँगों और बदलते वैश्विक रुझानों से संचालित होते हैं।

चक्र – ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) के बारे में

  • स्थापना: यह अर्थव्यवस्था के उभरते और रणनीतिक क्षेत्रों के वित्तपोषण के लिए समर्पित संस्थागत प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित किया गया है।
  • मुख्य उद्देश्य: अगली पीढ़ी की तकनीकी-गहन और स्थिरता-उन्मुख उद्योगों के लिए संरचित, ज्ञान-आधारित वित्तपोषण को सुगम बनाना, जो भारत के आर्थिक रूपांतरण को आगे बढ़ाएँगे।
  • भूमिका: ‘चक्र’ एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में कार्य करेगा, SBI की प्रोजेक्ट फाइनेंस और संरचनात्मक टीमों का समर्थन करेगा और व्यापक भारतीय वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए परामर्श केंद्र के रूप में काम करेगा।
  • लक्षित क्षेत्र: ‘चक्र’ आठ रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित है – नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत सेल केमिस्ट्री और बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर्स, डीकार्बोनाइजेशन, स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर।
  • निवेश संभावनाएँ: इन 8 क्षेत्रों में वर्ष 2030 तक 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक पूँजीगत व्यय की संभावना है।
  • संस्थागत सहयोग: SBI ने लगभग 21 वित्तीय संस्थाओं के साथ MoU हस्ताक्षरित किए हैं।
    • प्रमुख सहयोगी: विकास वित्त संस्थाएँ, बहुपक्षीय एजेंसियाँ, बैंक और NBFCs, उद्योग निकाय, कॉरपोरेट, स्टार्ट-अप और अकादमिक एवं नीति थिंक-टैंक।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: जापानी बैंक ‘MUFG’ और सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन (SMBC) के साथ विदेशी पूँजी और विशेषज्ञता आकर्षित करने हेतु।

CHAKRA में SBI की भूमिका

  • पूँजी जुटाना: क्षेत्रों के विस्तार के साथ घरेलू और विदेशी ऋण पूँजी को सुगम बनाना।
  • जोखिम मूल्यांकन: क्षेत्र-विशेष मूल्यांकन और जोखिम प्रबंधन ढाँचे को सुदृढ़ करना।
  • नवोन्मेषी वित्त: व्यवसाय मॉडल और नीति प्राथमिकताओं के अनुसार वित्तीय संरचनाओं का विकास।

रणनीतिक महत्त्व

  • वैश्विक मूल्य शृंखला: भारत की वैश्विक तकनीकी और विनिर्माण नेटवर्क में एकीकरण को बढ़ाना।
  • स्थिरता: वित्त को जलवायु और डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप बनाना।
  • तकनीक और AI सक्षम करना: परियोजना मूल्यांकन और जोखिम आकलन में AI और उन्नत विश्लेषिकी का उपयोग कर तकनीकी-आधारित वित्त मॉडल को बढ़ावा देना।

गुरु रविदास जयंती

1 फरवरी, 2026 को गुरु रविदास जयंती के अवसर पर, राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने संत रविदास के समानता, सामाजिक सद्भाव और मानव गरिमा के संदेश को उजागर करते हुए शुभकामनाएँ दीं।

गुरु रविदास जयंती के बारे में

  • यह संत गुरु रविदास के जन्मदिन की वर्षगाँठ के अवसर पर मनाई जाती है।
  • इसका उद्देश्य उनकी शिक्षाओं – समानता, भक्ति, करुणा और सामाजिक न्याय – का सम्मान करना है, जिन्होंने जातिवाद और धार्मिक रूढ़िवादिता को चुनौती दी।
  • यह दिन भारत की आध्यात्मिक आंदोलनों के माध्यम से सामाजिक सुधार की लंबी परंपरा और समावेशी मूल्यों को याद दिलाता है।

संत रविदास के बारे में

  • 15वीं–16वीं सदी के भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत, जिन्होंने निर्गुण ईश्वर की भक्ति और समानता पर आधारित समाज का समर्थन किया।
  • प्रारंभिक जीवन: सामाजिक रूप से पिछड़ी जाति में जन्म।
  • गुरु: जगतगुरु रामानंद के शिष्य।
  • समानकालीन: संत कबीर और मीरा बाई के आध्यात्मिक मार्गदर्शक।

मुख्य योगदान

  • आध्यात्मिक दर्शन: निर्गुण भक्ति पर जोर, निर्गुण ईश्वर की पूजा और सहज की अवधारणा।
  • सामाजिक सुधार: जाति भेदभाव और अस्पृश्यता के खिलाफ सशक्त विरोध, लिंग समानता और मानव गरिमा को बढ़ावा।
  • साहित्यिक विरासत: उनके पद गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं, जो धार्मिक परंपराओं में प्रभाव दर्शाते हैं।
  • धार्मिक प्रभाव: रविदासिया धर्म के संस्थापक माने जाते हैं, जो समानता और भक्ति पर केंद्रित है।

महत्त्व

  • संत रविदास की शिक्षाएँ आज भी समानता, करुणा और नैतिक मूल्यों पर आधारित समावेशी, न्यायसंगत और सामंजस्यपूर्ण समाज निर्माण के लिए प्रासंगिक हैं।

पैमाना’ (PAIMANA) पोर्टल

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय नेपैमाना’ (PAIMANA) पोर्टल को प्रारंभ किया है, जो ₹150 करोड़ और उससे अधिक मूल्य की केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के लिए एक नया वेब-आधारित पोर्टल है।

पैमाना’ पोर्टल के बारे में

  • पैमाना’ का अर्थ है- परियोजना मूल्यांकन, अवसंरचना निगरानी और राष्ट्र निर्माण के लिए विश्लेषण’
  • प्रकृति: प्रमुख केंद्रीय अवसंरचना परियोजनाओं की अनिवार्य निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म।
  • प्रतिस्थापन: यह पुराने ऑनलाइन कंप्यूटरीकृत निगरानी प्रणाली (OCMS-2006) को विस्थापित करता है।
  • नोडल मंत्रालय: यह सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की प्रमुख डिजिटल पहल है।
  • उद्देश्य: तकनीकी-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और विश्लेषण को सशक्त बनाना।
  • वन डेटा, वन एंट्री सिद्धांत: अन्य प्रोजेक्ट निगरानी पोर्टलों के साथ एकीकृत हैं, जिससे डेटा साझा करना आसान होता है और प्रतिलिपि की समस्या नहीं रहती है।
  • अंतर-मंत्रालय समन्वय: 20 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, आर्थिक मामलों के विभाग और अन्य प्राधिकृत निकायों के समन्वय में पोर्टल संचालित।

पैमाना’ पोर्टल की प्रमुख विशेषताएँ

  • केंद्रीकृत भंडार: मंत्रालयों, विभागों और कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए परियोजना-संबंधित जानकारी अपलोड, ट्रैक और समीक्षा करने हेतु एकल प्लेटफॉर्म।
  • उन्नत डेटा विश्लेषण: इंटरएक्टिव डैशबोर्ड, रिपोर्टिंग, क्वेरी मॉड्यूल और समीक्षा के माध्यम से देरी और डेटा अंतराल की पहचान।
  • भूमिका-आधारित पहुँच: विभिन्न हितधारकों के लिए डेटा सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भूमिका-आधारित उपयोगकर्ता पहुँच।
  • रियल टाइम डैशबोर्ड: परियोजना की प्रगति की निगरानी के लिए ‘ड्रिल-डाउन’ क्षमता सहित वास्तविक समय में डैशबोर्ड।
  • स्वचालन: लगभग 60% परियोजना डेटा स्वतः अपडेट होता है, जिससे मैनुअल डेटा एंट्री और रिपोर्टिंग का बोझ कम होता है।

वर्तमान स्थिति और प्रगति

  • परियोजनाएँ शामिल: वर्तमान में पोर्टल पर 1,392 संचालित अवसंरचना परियोजनाएँ शामिल हैं।
  • डेटा संशोधन: डेटाबेस का व्यापक संशोधन हो रहा है।
  • भविष्य का विस्तार: अतिरिक्त हितधारकों और नई स्वीकृत परियोजनाओं को शामिल करने के प्रयास लगातार जारी हैं।

दलाई लामा को ग्रैमी पुरस्कार

वर्ष 2026 में दलाई लामा को उनकी पुस्तकमेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शन्स ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा” के लिए सर्वश्रेष्ठ ऑडियो पुस्तक, कथन और कहानी वाचन रिकॉर्डिंग” श्रेणी में पहला ग्रैमी पुरस्कार प्रदान किया गया है।

दलाई लामा के बारे में

  • पूरा नाम: 14वें दलाई लामा, तेनजिन ग्यात्सो।
  • भूमिका: तिब्बती बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक नेता और शांति, करुणा तथा अहिंसा के समर्थक।
  • मुख्य योगदान
    • वैश्विक शांति प्रवक्ता: संघर्षों के अहिंसात्मक समाधान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार (1989)।
    • अंतरधार्मिक और नैतिक संवाद: धर्मों के बीच सद्भाव, मानसिक जागरूकता और नैतिक जीवन को प्रोत्साहित करना।
    • पर्यावरणीय जागरूकता: प्रकृति के प्रति पारिस्थितिकी उत्तरदायित्व और करुणा।
    • सांस्कृतिक पहुँच: आधुनिक मंचों के माध्यम से बौद्ध दर्शन, मानसिक कल्याण और सार्वभौमिक मानव मूल्यों का प्रचार।
  • वर्तमान निवास: वर्ष 1959 से धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में निर्वासित तिब्बती सरकार का मुख्यालय।

ग्रैमी पुरस्कार के बारे में

  • प्रकृति: वैश्विक संगीत और ऑडियो रिकॉर्डिंग उद्योग में उत्कृष्टता के लिए वार्षिक प्रतिष्ठित पुरस्कार।
  • पुरस्कार प्राधिकरण: अमेरिका की राष्ट्रीय रिकॉर्डिंग कला और विज्ञान अकादमी (NARAS)।
  • लैटिन ग्रैमी पुरस्कार: स्पैनिश और पुर्तगाली रिकॉर्डिंग के लिए लैटिन अकादमी (LARAS)।
  • श्रेणियाँ: संगीत प्रदर्शन, रचना और उत्पादन; वाचिक शब्द, कथन, ऑडियोबुक और वैश्विक संगीत श्रेणियाँ।
  • प्रमुख भारतीय पुरस्कार विजेता
    • पंडित रवि शंकर: ग्रैमी पुरस्कार।
    • ए. आर. रहमान: दो ग्रैमी पुरस्कार (वर्ष 2009)।
    • जाकिर हुसैन: ग्रैमी पुरस्कार।
    • शक्ति (बैंड): वैश्विक संगीत संबंधी सहयोग के लिए ग्रैमी विजेता।

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