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ऑरेंज इकोनॉमी

Lokesh Pal February 04, 2026 03:06 9 0

संदर्भ

केंद्र सरकार का संघीय बजट (2026) डिजिटल कंटेंट, डिजाइन एजुकेशन और हेरिटेज टूरिज्म के लिए लक्षित समर्थन के माध्यम से ऑरेंज इकोनॉमी को प्राथमिकता देता है, जो इसके विशेष क्षेत्र से भारत की अर्थव्यवस्था के मुख्य विकास स्तंभ में संक्रमण का संकेत देता है।

ऑरेंज इकोनॉमी के बारे में

  • उत्पत्ति और प्रतीकात्मकता: ऑरेंज इकोनॉमी शब्द की मूल रूप से खोज इवान दुके मारकेज (कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति) और फेलिपे बुइत्रागो ने अपने वर्ष 2013 के आर्थिक लेख के प्रकाशन में किया था।
  • संकल्पना और आर्थिक क्षेत्र: यह मॉडल गतिविधियों की एक व्यापक शृंखला को संदर्भित करता है, जहाँ मूल विचारों को सांस्कृतिक वस्तुओं और सेवाओं में परिवर्तित किया जाता है।
    • इस क्षेत्र में मूल्य का मुख्य चालक बौद्धिक संपदा (IP) अधिकार हैं। इस क्षेत्र को दो भागों में विभाजित किया जाता है:-
      • सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था: इसमें विरासत स्थलों, दृश्य कलाओं और पारंपरिक त्योहारों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
      • रचनात्मक उद्योग: इसमें फैशन, वास्तुकला, डिजिटल विज्ञापन और गेमिंग जैसे अधिक वाणिज्यिक क्षेत्र शामिल हैं।
  • वृद्धि आधारित मॉडल और उद्भव: ऑरेंज इकोनॉमी एक विचार-आधारित विकास मॉडल का प्रतिनिधित्व करती है, जो नॉलेज इकोनॉमी और एक्सपीरियंस इकोनॉमी के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है।
    • इन ढाँचों में, अमूर्त संपत्तियों (विशेष रूप से रचनात्मकता, कहानी कहने की कला और बौद्धिक संपदा) का उपयोग आर्थिक मूल्य उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
    • हालाँकि सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था विरासत और कलाओं पर केंद्रित रहती है, व्यापक रचनात्मक अर्थव्यवस्था मूल्य सृजन को डिजाइन, डिजिटल मीडिया और अनुभव-आधारित सेवाओं तक विस्तारित करती है।
  • आधुनिक एकीकरण: इस रचनात्मक उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण और बढ़ता हुआ हिस्सा अब गिग-आधारित और प्लेटफॉर्म की मध्यस्था वाले कार्यों के माध्यम से उत्पादित होता है।
    • यह परिवर्तन ऑरेंज इकोनॉमी को डिजिटल गिग इकोनॉमी से प्रभावी रूप से जोड़ता है, जिससे रचनात्मक सेवाओं का वैश्विक वितरण संभव हो पाता है।

ऑरेंज इकोनॉमी के लिए बजट 2026 के मुख्य बिंदु

केंद्रीय बजट 2026 में इस रचनात्मक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए कई संरचनात्मक और डिजिटल आयाम प्रस्तुत किए गए:

  • AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स: सरकार मूलभूत स्तर पर प्रतिभाओं को पोषित करने के लिए 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) के लिए विशेष प्रयोगशालाएँ स्थापित करने के लिए प्रयासरत है।
    • अनुमान है कि वर्ष 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता होगी।
  • राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) का विस्तार: डिजाइन शिक्षा के विकेंद्रीकरण के लिए “चैलेंज रूट” के माध्यम से भारत के पूर्वी क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान स्थापित किया जाएगा।
  • रचनात्मक प्रौद्योगिकियों के लिए समर्थन: उच्च-तकनीकी रचनात्मक निर्यात में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए मुंबई स्थित भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) को वित्तीय और संरचनात्मक सहायता प्रदान की जाएगी।
  • विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन: लोथल, धोलावीरा और सारनाथ सहित पंद्रह प्रमुख पुरातात्त्विक स्थलों को जीवंत अनुभवात्मक सांस्कृतिक स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • रचनात्मक उद्योगों में AI का एकीकरण: बजट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को क्रिएटिव कंटेंट निर्माण के साथ एकीकृत करने पर जोर दिया गया है और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाने के लिए एनीमेशन, गेमिंग, दृश्य प्रभाव और आकर्षक कहानी कहने के लिए AI-आधारित उपकरणों के विकास का समर्थन किया गया है।
  • रचनात्मक अर्थव्यवस्था में युवा एवं नारी शक्ति: ऑरेंज इकोनॉमी ढाँचे के अंतर्गत लक्षित कौशल विकास, इनक्यूबेशन और उद्यमिता सहायता के माध्यम से रचनात्मक व्यवसायों में युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान।
  • WAVES–वैश्विक स्थिति निर्धारण: भारत को क्रिएटिव कंटेंट उत्पादन और निर्यात के प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (WAVES) को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है।

आधुनिक अर्थव्यवस्था का स्पेक्ट्रम

रंग  आर्थिक क्षेत्र / मुख्य फोकस-क्षेत्र महत्त्व एवं उद्देश्य
ग्रीन 

🌳

सतत् एवं निम्न-कार्बन ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और पर्यावरणीय जोखिमों तथा पारिस्थितिकी दुर्लभताओं को कम करने पर केंद्रित।
ब्लू 

🌊

समुद्री एवं महासागरीय संसाधन आर्थिक विकास, आजीविका में सुधार तथा महासागरीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण हेतु समुद्री संसाधनों के सतत् उपयोग पर केंद्रित।
व्हाइट 

🩺

स्वास्थ्य एवं सामाजिक देखभाल इसमें चिकित्सा क्षेत्र, औषधि (फार्मास्युटिकल) अनुसंधान तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए समर्पित कार्यबल सम्मिलित है।
सिल्वर  वृद्ध आबादी 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित उत्पाद एवं सेवाएँ, जिनमें वृद्ध देखभाल, स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी तथा विशेष आवास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
ऑरेंज  रचनात्मक एवं सांस्कृतिक उद्योग इसमें कला, डिजाइन, विरासत, सॉफ्टवेयर तथा विज्ञापन शामिल हैं; यह बौद्धिक संपदा और मानवीय सृजनात्मकता पर आधारित होता है।
पर्पल  देखभाल अर्थव्यवस्था यह ‘देखभाल के कार्य’ (सवेतन एवं अवैतनिक दोनों) पर केंद्रित है तथा लैंगिक समानता और घरेलू/सामुदायिक श्रम के महत्त्व पर बल देता है।
ब्राउन  संसाधन-गहन विकास यह जीवाश्म ईंधनों पर आधारित आर्थिक विकास को संदर्भित करता है, जिसमें पर्यावरणीय क्षरण के प्रति सीमित चिंता होती है।
येलो (Yellow)  सौर एवं स्वच्छ प्रौद्योगिकी यह प्रायः हरित अर्थव्यवस्था का एक उप-क्षेत्र होता है तथा विशेष रूप से सौर ऊर्जा उत्पादन एवं इस क्षेत्र में होने वाली तकनीकी प्रगति पर केंद्रित रहता है।
ग्रे (Grey)  असंगठित अर्थव्यवस्था ऐसी गतिविधियाँ जो कानूनी तो होती हैं, परंतु सरकार द्वारा विनियमित, कराधान या निगरानी के अंतर्गत नहीं होतीं (जैसे- सड़क किनारे विक्रय)।
ब्लैक   अवैध / छाया अर्थव्यवस्था ऐसी आर्थिक गतिविधियाँ, जिनमें बाजार के अवैध लेन-देन शामिल होते हैं, जैसे- तस्करी, धन शोधन (मनी लॉण्ड्रिंग) आदि।

भारत के रचनात्मक परिदृश्य की वर्तमान स्थिति

  • उद्योग मूल्यांकन: भारत में रचनात्मक अर्थव्यवस्था का वर्तमान मूल्य लगभग 25-35 अरब डॉलर (मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र) है, और वर्ष 2030-32 तक इसके 100 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
    • वैश्विक स्तर पर, रचनात्मक अर्थव्यवस्था से सालाना 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का राजस्व और लगभग 5 करोड़ रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
  • रोजगार: यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है, जिसमें रचनात्मक क्षेत्र के रोजगार का एक बड़ा हिस्सा शामिल है; व्यापक मीडिया और मनोरंजन उद्योग लगभग 5 करोड़ रोजगारों (अप्रत्यक्ष रोजगार सहित) का समर्थन करता है, जबकि प्रमुख रचनात्मक उद्योग कई करोड़ पेशेवरों को रोजगार प्रदान करते हैं।
  • क्षेत्र वृद्धि: FICCI-EY मीडिया और मनोरंजन रिपोर्ट, 2025 और आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र ने वर्ष 2024 में 232 अरब रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स और पोस्ट-प्रोडक्शन उद्योग 103 अरब रुपये तक पहुँच गया।
  • निर्यात क्षमता: रचनात्मक सेवाओं के निर्यात में वर्ष 2023-24 में 20% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जिससे भारत को 11 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई।
  • क्षेत्रीय, अनौपचारिक और पारंपरिक अर्थव्यवस्था आयाम: समावेशी विकास के लिए, ऑरेंज इकोनॉमी को भारत के अनौपचारिक और क्षेत्रीय रचनात्मक पारिस्थितिकी तंत्रों को एकीकृत करना होगा।
    • परंपरागत और लोक कलाकार: आदिवासी कला रूप, लोक कलाकार और शिल्पकार भारत की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं।
    • स्वयं सहायता समूह और लघु एवं मध्यम उद्यम: डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हस्तशिल्प, हथकरघा और जीआई-टैग वाले उत्पादों के लिए बाजार पहुँच को मजबूत करने से आजीविका को औपचारिक रूप दिया जा सकता है।
    • शहरी संकेंद्रण का जोखिम: लक्षित नीतिगत समर्थन के बिना, रचनात्मक विकास महानगर-केंद्रित रह सकता है, जिससे ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्र उपेक्षित रह सकते हैं।

भारत के लिए ऑरेंज इकोनॉमी का महत्त्व

  • आर्थिक विकास के कारक और गुणक प्रभाव
    • रोजगार की अपार संभावनाएँ: एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) क्षेत्र विकास का प्रमुख इंजन है, जिसके वर्ष 2030 तक दो मिलियन प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता होने का अनुमान है।
    • गुणक प्रभाव: AVGC में प्रत्येक प्रत्यक्ष रोजगार प्रौद्योगिकी, डिजिटल मार्केटिंग और इवेंट मैनेजमेंट जैसे संबंधित क्षेत्रों में 2-3 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करता है।
    • कॉन्सर्ट इकोनॉमी और इसके प्रभाव: जयपुर साहित्य महोत्सव (स्थानीय स्तर पर ₹100 करोड़ का योगदान) से लेकर “दिल-लुमिनाती” जैसे टूर तक, बड़े पैमाने के आयोजन विमानन, आतिथ्य और खुदरा क्षेत्रों के लिए राजस्व के बड़े स्रोत के रूप में कार्य करते हैं।
    • निर्यात नेतृत्व: रचनात्मक सेवाएँ भारत के सेवा निर्यात बास्केट में विविधता ला रही हैं, जिससे IT और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग पर पारंपरिक निर्भरता कम हो रही है।
  • रणनीतिक विकास – सेवा से स्वामित्व की ओर
    • मूल्य प्रतिधारण: हॉलीवुड वीएफएक्स के लिए “बैक-ऑफिस” की भूमिका से बाहर निकलकर भारतीय रचनाकारों को दीर्घकालिक रॉयल्टी और वैश्विक ब्रांडिंग अधिकार बनाए रखने का अवसर मिलता है।
    • नवाचार और स्मार्ट पॉवर: यह क्षेत्र व्यापक नवाचार क्षेत्र की नींव के रूप में कार्य करता है, जो “स्मार्ट पॉवर” और सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से भारत के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाता है।
    • पर्यटन एकीकरण: सांस्कृतिक उत्सवों और विरासत स्थलों को उजागर करने से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के ठहरने की अवधि और खर्च में वृद्धि होती है।
  • लोकतांत्रीकरण और ग्रामीण सशक्तीकरण
    • शहरी-ग्रामीण विभाजन को पाटना: डिजिटल रचनाकार अर्थव्यवस्था, टियर-II और टियर-III शहरों में मौजूद प्रतिभाओं को प्रवास की आवश्यकता के बिना, स्थानीय भाषाओं और परंपराओं को वैश्विक स्तर पर भुनाने का अवसर प्रदान करती है।
    • हस्तनिर्मित वस्तुओं का निर्यात: भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग वाले उत्पादों (जैसे, चन्नापटना के खिलौने या मधुबनी कला) को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में एकीकृत करके, पारंपरिक शिल्पों को उच्च-मूल्य वाले “सांस्कृतिक निर्यात” में परिवर्तित किया जा सकता है।
    • भाषायी लाभ: भारत की मोबाइल-प्रधान आबादी और भाषायी विविधता, बहुभाषी स्थानीय कंटेंट के निर्माण में एक अद्वितीय प्रतिस्पर्द्धी लाभ प्रदान करती है।
  • नीति और संवैधानिक ढाँचा
    • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद-29 और 30 सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करते हैं और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए राज्य के समर्थन हेतु एक मानक आधार प्रदान करते हैं।
    • भविष्य की शिक्षा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)- 2020 रचनात्मक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने हेतु डिजाइन थिंकिंग और व्यावसायिक अनुभव पर जोर देती है।
    • राष्ट्रीय समन्वय: यह क्षेत्र डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया के एकीकरण पर तेजी से बढ़ रहा है और विकास के लिए एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करता है।

ऑरेंज इकोनॉमी के विकास में चुनौतियाँ

  • वित्तीय और संरचनात्मक बाधाएँ: रचनात्मक क्षेत्र अक्सर पारंपरिक औद्योगिक ढाँचे में स्थापित होने के लिए संघर्ष करता है, जिसके कारण उसे ‘वित्तीय सहायता’ मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
    • प्रोत्साहन असमानता: विनिर्माण या IT क्षेत्र के विपरीत, रचनात्मक क्षेत्र को ऐतिहासिक रूप से कम वित्तीय प्रोत्साहन और कर छूट प्राप्त हुई है।
    • वित्तपोषण में अंतराल: एनिमेशन और गेमिंग परियोजनाओं के विकास चक्र लंबे होते हैं और इनमें भौतिक संपार्श्विक की कमी होती है, जिससे पारंपरिक बैंक ऋण प्राप्त करना लगभग असंभव हो जाता है।
    • उच्च GST बोझ: वास्तविक धन वाली गेमिंग पर 28% GST ने लेन-देन की मात्रा को काफी कम कर दिया है और गेमिंग उप-क्षेत्र में निवेशकों के उत्साह को कम कर दिया है।
    • नियामक जटिलता: आयोजनों और फिल्म निर्माण के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणाली की अनुपस्थिति नौकरशाही विलंब का कारण बनती है, जो बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय निर्माणों को हतोत्साहित करती है।
  • बाजार की अस्थिरता और “प्लेटफॉर्म का जाल”: डिजिटल प्लेटफॉर्म पहुँच तो प्रदान करते हैं, लेकिन साथ ही रचनाकारों के लिए एक नए प्रकार की असुरक्षा भी उत्पन्न करते हैं।
    • बाजार का केंद्रीकरण और असमान मूल्य वितरण: राजस्व का अधिकांश हिस्सा शीर्ष पर केंद्रित है। कुछ रचनाकार ही लाभ का बड़ा हिस्सा अर्जित कर पाते हैं, जिससे “रचनात्मक मध्यम वर्ग” आर्थिक असुरक्षा की स्थिति में रहता है।
    • प्लेटफॉर्म पर निर्भरता: रचनाकार वैश्विक एल्गोरिदम के भरोसे हैं। एक छोटी-सी नीति में परिवर्तन या “शैडो बैन” भी उनकी आजीविका को पल भर में अस्त-व्यस्त कर सकता है।
    • एल्गोरिदम का दृश्यता पूर्वाग्रह: एल्गोरिदम अक्सर मुख्यधारा के कंटेंट को प्राथमिकता देते हैं, जिससे क्षेत्रीय और स्थानीय रचनाकारों को अक्सर नुकसान होता है।
  • प्रतिभा और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा: भारत अपने कार्यबल में ‘मात्रा’ और ‘गुणवत्ता’ के बीच के अंतर को पाटने के लिए समय के साथ होड़ कर रहा है।
    • प्रतिभा की कमी: वैश्विक स्टूडियो द्वारा अपेक्षित उच्च गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में सक्षम पेशेवर रूप से प्रशिक्षित डिजाइनरों और तकनीकी कलाकारों की लगातार कमी बनी हुई है।
    • क्षेत्रीय और लैंगिक असंतुलन: उच्च गुणवत्ता वाली रचनात्मक शिक्षा महानगरों में केंद्रित है और AVGC क्षेत्र में तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी कम है।
    • वैश्विक आउटसोर्सिंग प्रतिस्पर्द्धा: फिलीपींस, कनाडा और चीन जैसे देश स्थापित स्टूडियो प्रणालियों और आक्रामक लागत लाभों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्द्धा पेश करते हैं।
  • बौद्धिक संपदा संरक्षण और डेटा संबंधी कमियाँ: सुरक्षा और मापन के अभाव में, यह क्षेत्र राष्ट्रीय लेखांकन में “अदृश्य” बना रहता है।
    • कमजोर पायरेसी प्रवर्तन: कॉपीराइट प्रवर्तन की अपर्याप्तता और व्यापक डिजिटल पायरेसी भारतीय स्टूडियो की राजस्व क्षमता को लगातार कम कर रही है।
    • मापन और डेटा की कमी: भारत में ‘क्रिएटिव इकॉनमी सैटलाइट अकाउंट’ नहीं है। समर्पित डेटा के अभाव में, GDP में इस क्षेत्र के योगदान को लगातार कम करके आँका जाता है।
    • खंडित निगरानी: रचनात्मक अर्थव्यवस्था की जिम्मेदारी कई मंत्रालयों में बँटी हुई है, जिससे नीतिगत समन्वय का अभाव है।

भारत द्वारा उठाए गए कदम

  • संस्थागत एवं शैक्षिक परिवर्तन
    • अखिल भारतीय रचनात्मक अर्थव्यवस्था पहल (AIICE): वर्ष 2024 में शुरू की गई यह पहल भारत के 30 अरब डॉलर के रचनात्मक उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत मंच के रूप में कार्य करती है, जिसका मुख्य उद्देश्य कार्यबल को औपचारिक रूप देना और भारत को एक वैश्विक रचनात्मक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
    • AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स: बजट 2026 के तहत, सरकार ने 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में इन प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए 250 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
      • मुंबई स्थित भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) के नेतृत्व में, यह पहल व्यावहारिक उपकरणों को विद्यालय के पाठ्यक्रम में एकीकृत करती है।
    • राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) का विस्तार: प्रतिभा की कमी को दूर करने के लिए, पूर्वी भारत में एक नया NID स्थापित किया जा रहा है, जो डिजाइन शिक्षा के माध्यम से क्षेत्रीय विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • डिजिटल और वित्तीय अवसंरचना
    • राष्ट्रीय रचनात्मक कोष (NCF): यह एक विशेष कोष है, जिसे “उच्च जोखिम, उच्च रचनात्मकता” वाले स्टार्ट-अप्स को प्रारंभिक पूँजी प्रदान करने के लिए बनाया गया है, जो पारंपरिक वेंचर कैपिटल द्वारा उत्पन्न किए गए अंतराल को पाटता है।
    • इमर्सिव हेरिटेज टूरिज्म: 15 पुरातात्त्विक स्थलों (जैसे- लोथल, राखीगढ़ी और लेह पैलेस) को इमर्सिव स्टोरीटेलिंग टेक्नोलॉजी और विशेष संरक्षण प्रयोगशालाओं का उपयोग करके “अनुभवात्मक स्थलों” में विकसित करना।
    • राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल नॉलेज ग्रिड: सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों का दस्तावेजीकरण करने के लिए बनाया गया एक नया डिजिटल इकोसिस्टम, जो स्थानीय इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए रोजगार सृजित करता है।

वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ

देश रणनीति आर्थिक प्रभाव
दक्षिण कोरिया K-कंटेंट रणनीति: संगीत, गेमिंग और फिल्म के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी सहायता। सांस्कृतिक निर्यात अब सॉफ्ट पॉवर मूल्य के मामले में पारंपरिक विनिर्माण के बराबर पहुँच गया है।
यूनाइटेड किंगडम क्रिएटिव क्लस्टर्स: डिजाइन और विज्ञापन के लिए उच्च घनत्व वाले हब। रचनात्मक उद्योग राष्ट्रीय GDP में लगभग 6% का योगदान करते हैं।
कोलंबिया ऑरेंज लॉ’: रचनात्मक स्टार्ट-अप्स को कर छूट प्रदान करने वाला विशिष्ट कानून (कानून 1834)। उन्होंने ‘7 I’ (सूचना, संस्थान, अवसंरचना आदि) ढाँचे का आविष्कार किया।
नाइजीरिया नॉलीवुड इकोसिस्टम: तीव्र, कम लागत वाला डिजिटल वितरण मॉडल। मात्रा के हिसाब से यह दुनिया के सबसे बड़े फिल्म उद्योगों में से एक है, जो बड़े पैमाने पर स्थानीय रोजगार का सृजन करता है।
बहुपक्षीय समर्थन यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) और यूएनसीटीएडी (संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन) जैसे संगठन रचनात्मक अर्थव्यवस्था को सतत् विकास के एक स्तंभ के रूप में बढ़ावा देते हैं।

आगे की राह

  • संरचनात्मक सुधार और व्यापार में सुगमता: रचनात्मक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए, भारत उन नौकरशाही बाधाओं को दूर करने का प्रयास कर रहा है, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से लाइव इवेंट्स और डिजिटल प्रस्तुतियों को बाधित कियाहै।
    • सिंगल-विंडो क्लीयरेंस: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय लाइव मनोरंजन अनुमतियों के लिए एक एकीकृत पोर्टल शुरू कर रहा है।
      • इसका उद्देश्य आयोजनों के लिए वर्तमान में आवश्यक 10-15 अलग-अलग अनुमतियों को एक सरल प्रक्रिया में बदलना है।
    • क्रिएटिव SEZ और क्लस्टर: मुंबई, बंगलूरू, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में विशेषीकृत AVGC-XR क्लस्टरों को मजबूत किया जा रहा है।
      • ये केंद्र उच्च-स्तरीय रेंडरिंग हार्डवेयर तक साझा पहुँच प्रदान करते हैं, जिससे छोटे स्टूडियो के लिए पूँजीगत व्यय कम हो जाता है।
    • क्रिएट इन इंडिया’ का संचालन: “मेक इन इंडिया” मॉडल का अनुसरण करते हुए, भारतीय सांस्कृतिक उत्सवों और डिजिटल कंटेंट को प्रीमियम वैश्विक सेवाओं के रूप में स्थापित करने के लिए एक समर्पित निर्यात ब्रांडिंग रणनीति का उपयोग किया जा रहा है।
  • वित्तीय नवाचार और बौद्धिक संपदा अधिकार: अब ध्यान “कार्य के बदले कार्य” (आउटसोर्सिंग) से हटकर बौद्धिक संपदा (IP) के निर्माण और स्वामित्व पर केंद्रित हो रहा है।
    • बौद्धिक संपदा समर्थित वित्तपोषण: सरकार बौद्धिक संपदा समर्थित ऋण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय संस्थानों के साथ सहयोग कर रही है।
      • इससे रचनात्मक लघु एवं मध्यम उद्यमों को ऋण के लिए अमूर्त संपत्तियों (पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क) को गिरवी रखने की सुविधा मिलती है, जिससे “भौतिक संपत्तियों की कमी” की समस्या का समाधान होता है।
    • राष्ट्रीय रचनात्मक कोष (NCF): यह विशेष कोष उच्च जोखिम वाले रचनात्मक उद्यमों के लिए प्रारंभिक पूँजी प्रदान करता है, जिन्हें पारंपरिक वेंचर कैपिटल अक्सर अनदेखा कर देते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि मौलिक भारतीय कहानियों और गेम्स को प्रारंभिक चरण का समर्थन मिले।
    • बौद्धिक संपदा अधिकार शिक्षा: बौद्धिक संपदा सुविधा केंद्रों (IPFCs) के माध्यम से, रचनाकारों को अपने कार्य को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे एकमुश्त शुल्क से आगे बढ़कर दीर्घकालिक रॉयल्टी मॉडल को अपनाया जा सके।
  • रचनात्मक कार्यबल का औपचारीकरण: रचनात्मक कार्यों की “गिग” प्रकृति को स्थिरता प्रदान करने के लिए औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाया जा रहा है।
    • फ्रीलांसर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा: रचनात्मक कार्य करने वाले गिग वर्कर्स को ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत किया जा रहा है, जिससे उन्हें आयुष्मान भारत (AB-PMJAY) स्वास्थ्य सेवा और दुर्घटना बीमा का लाभ मिल रहा है।
    • प्रतिभा विकास कार्यक्रम (IICT और AVGC Labs): बजट 2026 की घोषणा के अनुसार, भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान ने (IICT) 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने की योजना बनाई है। इससे डिजाइन और एनिमेशन को मुख्यधारा की शिक्षा में एकीकृत किया जा रहा है।
  • रणनीतिक निर्यात और “स्मार्ट पॉवर”: भारत अब अपनी संस्कृति को अपनी IT क्रांति की तरह ही एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रहा है।
    • रचनात्मक निर्यात नीति: संगीत, सिनेमा और गेमिंग को रणनीतिक सेवा निर्यात के रूप में मान्यता देने के लिए एक समर्पित ढाँचा तैयार किया जा रहा है।
    • कॉन्सर्ट अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: भारत को वैश्विक “कॉन्सर्ट डेस्टिनेशन” बनाने के लिए सरकार चुनिंदा ऐतिहासिक स्थलों को लाइव सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए खोल रही है और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के लिए वीजा/विदेशी मुद्रा अनुमतियों में ढील दे रही है।
    • निगरानी एवं परिणाम ढाँचा: जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, सरकार कुल सेवाओं के प्रतिशत के रूप में रचनात्मक निर्यात और वैश्विक AVGC-XR परिदृश्य में भारत की बढ़ती बाजार हिस्सेदारी पर नजर रखने के लिए मानदंड स्थापित कर रही है।

सतत् विकास और संघीय आयाम

  • सतत् विकास लक्ष्यों के अनुरूपता: ऑरेंज इकोनॉमी SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा), SDG 8 (सभ्य रोजगार और आर्थिक विकास) और SDG 11 (सतत् शहर और सांस्कृतिक विरासत) में योगदान देती है।
  • राज्यों की भूमिका: पर्यटन प्रोत्साहन, आयोजनों की अनुमति, शहरी सांस्कृतिक अवसंरचना और क्षेत्रीय भाषा कंटेंट नीतियों के माध्यम से राज्य सरकारें केंद्रीय भूमिका निभाती हैं।

निष्कर्ष

केंद्रीय बजट 2026 में ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ पर किया गया फोकस भारत की सांस्कृतिक धरोहरों के महत्त्व को समझने के दृष्टिकोण में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है। प्रौद्योगिकी, डिजाइन और विरासत को एकीकृत करके, यह बजट भारत को एक वैश्विक रचनात्मक केंद्र के रूप में स्थापित करता है, जिससे वर्ष 2030 तक विनिर्माण और सेवाओं के समान ही विचार-आधारित मूल्य सृजन GDP वृद्धि के लिए महत्त्वपूर्ण हो जाता है।

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