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केंद्रीय बजट वित्त वर्ष 2026–27: पूँजीगत वस्तु क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण

Lokesh Pal February 06, 2026 03:31 8 0

संदर्भ

केंद्रीय बजट 2026–27 में पूँजीगत वस्तु क्षेत्र को भारत की निवेश-आधारित विकास रणनीति के एक मुख्य स्तंभ के रूप में पुनः विशेष महत्त्व दिया गया है।

पूँजीगत वस्तुएँ (Capital Goods)

  • अर्थ: पूँजीगत वस्तुओं में विनिर्माण, उत्पादन या सेवा-प्रदान के लिए आवश्यक संयंत्र, मशीनरी, उपकरण और सहायक सामग्री शामिल होती हैं, जिनमें प्रतिस्थापन, आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन और विस्तार के लिए प्रयुक्त उपकरण भी शामिल हैं।
  • क्षेत्रीय उपयोग: पूँजीगत वस्तुओं का उपयोग विनिर्माण, खनन, कृषि, अवसंरचना, ऊर्जा और सेवा क्षेत्रों में किया जाता है, जिससे यह क्षेत्र पूरी अर्थव्यवस्था के लिए आधारभूत बन जाता है।

औद्योगिक विकास में पूँजीगत वस्तुओं की भूमिका

  • गुणक प्रभाव
    • पूँजीगत वस्तु क्षेत्र में वृद्धि का उच्च अग्र और पश्च संबंध प्रभाव होता है, क्योंकि यह ऑटोमोबाइल, वस्त्र, विद्युत, सीमेंट, इस्पात और अवसंरचना जैसे उद्योगों को मशीनरी तथा उपकरणों की आपूर्ति करता है।
    • जब कंपनियाँ मशीनों और उपकरणों में निवेश करती हैं, तो इससे कच्चे माल (इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स), लॉजिस्टिक्स, रखरखाव सेवाओं तथा कुशल मानव संसाधन की द्वितीयक माँग उत्पन्न होती है।
  • उत्पादकता में वृद्धि
    • उन्नत मशीनरी, रोबोटिक्स और CNC उपकरणों को अपनाने से उत्पादन समय, अपव्यय और दोष दर में कमी आती है।
    • स्वचालन सटीकता, मानकीकरण और पैमाने में सुधार करता है, जिससे कंपनियाँ वैश्विक गुणवत्ता मानकों (ISO, BIS, निर्यात मानक) को पूरा कर पाती हैं।
  • प्रौद्योगिकीय उत्प्रेरक
    • पूँजीगत वस्तु क्षेत्र तकनीकी प्रसार का माध्यम बनता है, जो विभिन्न उद्योगों में नवाचार स्थानांतरित करता है।
    • यह उद्योग 4.0 की ओर संक्रमण को सक्षम बनाता है, जिसमें शामिल हैं: स्मार्ट फैक्ट्रियाँ, IoT सक्षम मशीनें, डेटा-आधारित पूर्वानुमानित रखरखाव।
    • स्वदेशी पूँजीगत वस्तु विकास घरेलू R&D पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करता है और आयातित स्वामित्व तकनीकों पर निर्भरता को कम करता है।
  • रोजगार सृजन
    • पूँजीगत वस्तु उद्योग कौशल-प्रधान हैं, जिससे निम्न के लिए माँग उत्पन्न होती है: अभियंता, टूल डिजाइनर, तकनीशियन, स्वचालन और मेकाट्रॉनिक्स विशेषज्ञ।
    • टूल रूम, मशीन टूल क्लस्टर और उपकरण विनिर्माण, MSME रोजगार, प्रशिक्षुता और कौशल भारत के अनुरूप तकनीकी प्रशिक्षण का समर्थन करते हैं।
  • रणनीतिक स्वतंत्रता
    • एक मजबूत घरेलू पूँजीगत वस्तु आधार उच्च-स्तरीय मशीनरी के आयात पर निर्भरता को कम करता है, विशेष रूप से कुछ आपूर्तिकर्ता देशों से।
    • यह निम्न के लिए आपूर्ति शृंखला लचीलापन बढ़ाता है: अवसंरचना परियोजनाएँ, रक्षा उत्पादन, ऊर्जा संक्रमण (नवीकरणीय ऊर्जा, EVs, बैटरियाँ)।
    • पूँजीगत वस्तुओं में रणनीतिक स्वायत्तता वैश्विक व्यवधानों, निर्यात नियंत्रण और मुद्रा अस्थिरता के प्रति जोखिम को कम करती है तथा दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करती है।

व्यापार और उत्पादन प्रवृत्तियाँ

  • IIP प्रवृत्तियाँ: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के अंतर्गत पूँजीगत वस्तुओं में दिसंबर 2025 में 8.1% (वर्ष-दर-वर्ष) की वृद्धि हुई।
  • निर्यात: वित्त वर्ष 2024 में ₹31,621 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में ₹33,356 करोड़।
  • उत्पादन: वित्त वर्ष 2024 में ₹1,85,858 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में ₹2,05,194 करोड़।
  • आयात: वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 6.6% और दूसरी तिमाही में 9.2% वृद्धि, जो मजबूत निवेश माँग और उन्नत मशीनरी पर निर्भरता को दर्शाती है।
  • सरकारी पूँजीगत व्यय में वृद्धि: वित्त वर्ष 2018 से वित्त वर्ष 2026 (BE) तक लगभग 4.2 गुना वृद्धि होकर ₹11.21 लाख करोड़।

केंद्रीय बजट 2026–27 में पूँजीगत वस्तुओं से संबंधित प्रमुख हस्तक्षेप

  • सार्वजनिक पूँजीगत व्यय: वित्त वर्ष 2027 में सार्वजनिक पूँजीगत व्यय लगभग 9% बढ़कर ₹12.2 लाख करोड़ प्रस्तावित।
  • हाई-टेक टूल रूम: CPSE द्वारा दो हाई-टेक टूल रूम की स्थापना का प्रस्ताव, जो डिजिटली सक्षम और स्वचालित सेवा केंद्र के रूप में डिजाइन, परीक्षण तथा सटीक विनिर्माण के लिए कार्य करेंगे।
  • निर्माण और अवसंरचना उपकरण संवर्द्धन (CIE) योजना: निर्माण और अवसंरचना उपकरण संवर्द्धन योजना का उद्देश्य लिफ्ट, अग्निशमन प्रणाली, टनल-बोरिंग मशीन और उच्च-ऊँचाई निर्माण उपकरण जैसे उन्नत उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना है।
  • कंटेनर विनिर्माण: पाँच वर्षों में ₹10,000 करोड़ के परिव्यय के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्द्धी कंटेनर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए नई योजना।
  • कर प्रोत्साहन: बॉन्डेड जोन में कार्यरत टोल निर्माताओं को पूँजीगत वस्तुएँ, उपकरण या टूलिंग की आपूर्ति करने वाली अनिवासी संस्थाओं को पाँच वर्ष की आयकर छूट का प्रस्ताव।
  • शुल्क छूट
    • लीथियम-आयन सेल के निर्माण के लिए पूँजीगत वस्तुओं पर मूल सीमा शुल्क छूट को बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों तक बढ़ाया गया।
    • महत्त्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए आयातित पूँजीगत वस्तुओं को मूल सीमा शुल्क से मुक्त करने का प्रस्ताव।

पूँजीगत वस्तु क्षेत्र के लिए हालिया नीतिगत समर्थन

  • उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ: PLI योजनाएँ पैमाने, तकनीक अपनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देती हैं, जिनसे ₹2 लाख करोड़ से अधिक का निवेश और ₹18.7 लाख करोड़ का अतिरिक्त उत्पादन हुआ है।
  • PLI–उन्नत रसायन सेल (ACC) योजना: 40 GWh क्षमता आवंटित, जिससे भारत के EVs पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिली।
  • प्रतिस्पर्द्धात्मकता संवर्द्धन योजना: चरण II के अंतर्गत उत्कृष्टता केंद्र, परीक्षण अवसंरचना और R&D सहयोग को ₹714 करोड़ की सरकारी सहायता।
    • विकसित तकनीकों को फ्राँस, बेल्जियम और कतर में बाजार प्राप्त हुआ, जो बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा को दर्शाता है।

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