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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त

Lokesh Pal February 06, 2026 03:34 8 0

संदर्भ 

लगभग एक वर्ष के राष्ट्रपति शासन के पश्चात्, युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

पृष्ठभूमि

  • पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 3 मई, 2023 से शुरू हुई लंबी अशांति के बीच 9 फरवरी, 2025 को इस्तीफा दे दिया था।
  • निरसन : 13 फरवरी, 2025 को लागू किए गए राष्ट्रपति शासन को हटा लिया गया, जिससे एक निर्वाचित सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ।

राष्ट्रपति शासन: एक विस्तृत विवरण

पहलू  विवरण 
राष्ट्रपति शासन का अर्थ
  • राज्य सरकार को निलंबित कर दिया जाता है और राज्य का प्रशासन सीधे केंद्र सरकार सँभालती है।
  • राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं, जबकि प्रशासन राष्ट्रपति की ओर से चलाया जाता है।
  • राज्य विधानसभा को भंग किया जा सकता है या ‘निलंबित अवस्था’ में रखा जा सकता है।
संवैधानिक आधार (घोषणा के आधार)
  • अनुच्छेद-356: राज्यपाल की रिपोर्ट या अन्य सूचना के आधार पर राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने की स्थिति में राष्ट्रपति को राष्ट्रपति शासन लगाने की शक्ति प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद-355: संघ को यह संवैधानिक दायित्व सौंपता है कि वह राज्यों की बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से रक्षा करे तथा संवैधानिक शासन सुनिश्चित करे।
  • अनुच्छेद-365: इसके अनुसार, यदि राज्य केंद्र के निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो इसे संवैधानिक तंत्र की विफलता माना जा सकता है, जिससे अनुच्छेद-356 के तहत कार्रवाई संभव है।
अन्य आधार
  • जब राष्ट्रपति संतुष्ट हों कि संवैधानिक शासन विफल हो गया है, जैसे
    • कोई भी दल या नेता राज्यपाल द्वारा दिए गए समय के भीतर सरकार बनाने में सक्षम न हो।
    • गठबंधन सरकार गिर जाए और मुख्यमंत्री सदन में बहुमत सिद्ध करने में विफल रहे।
    • अविश्वास प्रस्ताव के बाद बहुमत खो देना।
    • असाधारण स्थितियों (युद्ध, कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति आदि) के कारण चुनाव संभव न हों।
संसदीय अनुमोदन (प्रक्रिया)
  • राष्ट्रपति संतुष्टि होने पर (अक्सर राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर) अनुच्छेद-356 के तहत उद्घोषणा जारी करते हैं।
  • उद्घोषणा को 2 महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों द्वारा साधारण बहुमत से अनुमोदित किया जाना चाहिए।
  • यदि लोकसभा भंग है, तो राज्यसभा की मंजूरी से यह तब तक मान्य होता है, जब तक कि नई लोकसभा की बैठक के 30 दिनों के भीतर इसे मंजूरी न मिल जाए।
अवधि
  • प्रारंभ में 6 महीने के लिए मान्य।
विस्तार 
  • प्रत्येक 6 माह में संसदीय अनुमोदन के साथ अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
  • 44वाँ संविधान संशोधन: 1 वर्ष से अधिक विस्तार तभी संभव है यदि:
    • पूरे भारत या उसके किसी हिस्से में राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो, और
    • निर्वाचन आयोग प्रमाणित करे कि राज्य में चुनाव कराना संभव नहीं है।
न्यायिक समीक्षा
  • अनुच्छेद-356 के तहत उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
  • न्यायालय जाँच कर सकते हैं कि क्या राष्ट्रपति की संतुष्टि दुर्भावनापूर्ण थी या अप्रासंगिक आधारों पर आधारित थी।
निरसन (वापसी)
  • राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय राष्ट्रपति शासन वापस लिया जा सकता है।
  • इसकी वापसी के लिए संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती।
प्रमुख वाद 
  • एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)
    • अनुच्छेद-356 न्यायिक समीक्षा के अधीन है;
    • बहुमत का परीक्षण सामान्यतः सदन के पटल पर किया जाना चाहिए;
    • अनुच्छेद-356 का राजनीतिक दुरुपयोग असंवैधानिक है।
  • सर्बानंद सोनोवाल बनाम भारत संघ (2005)
    • आंतरिक अशांति और बाह्य आक्रमण से राज्यों की रक्षा करने के लिए अनुच्छेद-355 के तहत संघ के कर्तव्य की पुष्टि की गई।
  • रामेश्वर प्रसाद बनाम भारत संघ (2006) 
    • फ्लोर टेस्ट का अवसर दिए बिना विधानसभा भंग करने की आलोचना की गई;
    • अनुच्छेद-356 के दुरुपयोग पर सीमाओं को सुदृढ़ किया गया।

राष्ट्रपति शासन के प्रभाव

राज्य की कार्यपालिका
  • मंत्री परिषद की बर्खास्तगी: राष्ट्रपति मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्री परिषद को बर्खास्त कर सकते हैं।
  • राष्ट्रपति की ओर से राज्य का प्रशासन राज्यपाल द्वारा मुख्य सचिव की सहायता से चलाया जाता है।
  • चूँकि राज्य की कार्यपालिका शक्ति संघ द्वारा ग्रहण कर ली जाती है, इसलिए इस स्थिति को सामान्यतः राज्य में ‘राष्ट्रपति शासन’ कहा जाता है।
राज्य की विधायी शक्तियाँ
  • विधानसभा का निलंबन या विघटन: राष्ट्रपति विधानसभा को या तो निलंबित (निलंबित अवस्था) कर सकते हैं अथवा उसे भंग कर सकते हैं।
  • संसद की शक्तियाँ और कार्य
    • अनुच्छेद-357 के तहत संसद राज्य के लिए विधायी शक्ति ग्रहण करती है।
    • संसद राज्य के लिए कानून बनाने की शक्ति राष्ट्रपति या उनके द्वारा निर्दिष्ट किसी अन्य अधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकती है।
    • संसद (या प्रत्यायोजित अधिकारी) राज्य के संबंध में संघ सरकार और उसके अधिकारियों को शक्तियाँ और कर्तव्य प्रदान करने वाले कानून बना सकती है।
    • राज्य के विधेयक और बजट संसद द्वारा पारित किए जाते हैं।
    • राष्ट्रपति शासन के दौरान बनाए गए कानून शासन समाप्त होने के बाद भी प्रभावी रहते हैं, जब तक कि राज्य विधायिका उन्हें निरस्त या संशोधित न कर दे।
    • जब लोकसभा सत्र में न हो, तो राष्ट्रपति राज्य की संचित निधि से व्यय को अधिकृत कर सकते हैं (बाद में संसद की मंजूरी के अधीन)।
    • जब संसद सत्र में न हो, तो राष्ट्रपति राज्य के शासन के लिए अध्यादेश जारी कर सकते हैं।
राज्य की न्यायपालिका
  • उच्च न्यायालय की स्थिति: राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य उच्च न्यायालय की संवैधानिक स्थिति, दर्जा, शक्तियाँ और कार्य अपरिवर्तित रहते हैं।
  • राष्ट्रपति शासन न्यायपालिका की स्वतंत्रता या उसके अधिकार क्षेत्र को प्रभावित नहीं करता है।

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