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रक्षा के लिए अधिक धन, अब प्रक्रिया में सुधार आवश्यक

Lokesh Pal February 06, 2026 05:15 13 0

संदर्भ:

केंद्रीय बजट 2026 में रक्षा व्यय में 15% की वृद्धि की गई है, जो 2017 के बाद पहली दोहरे अंक की बढ़ोत्तरी है, जिससे यह जीडीपी के लगभग 2% के करीब पहुँच गया है।

बजट में आवंटन के रुझान

  • पूंजीगत व्यय का वर्चस्व: रक्षा आवंटन में पूंजीगत व्यय का हिस्सा 27.295% है और इसमें 22% से अधिक की वृद्धि हुई है, जिससे इसने राजस्व व्यय को पीछे छोड़ दिया है और दीर्घकालिक आधुनिकीकरण की दिशा में स्पष्ट बदलाव का संकेत देता है।
  • सेवा-वार आवंटन पैटर्न: भारतीय वायुसेना को 32% और भारतीय थल सेना को 30% की वृद्धि प्राप्त हुई है, जो विमान, भारी वाहन और हथियारों पर ज़ोर को दर्शाता है। इसके विपरीत, भारतीय नौसेना को केवल 3% की वृद्धि प्राप्त हुई है।
  • घरेलू खरीद को बढ़ावा: पूंजीगत अधिग्रहण बजट का लगभग 75% घरेलू उद्योग के लिए निर्धारित है, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी शामिल है।

संरचनात्मक और राजकोषीय बाधाएँ

  • विनिमय दर का दबाव: डॉलर के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन से राफेल जैसे आयातित प्लेटफॉर्म की लागत बढ़ जाती है, जिससे उच्च आवंटन का वास्तविक मूल्य कम हो जाता है।
  • पेंशन का बोझ: 1987-88 से रक्षा पेंशन (कुल आवश्यकताओं का लगभग 21.84%) को रक्षा बजट के बजाय केंद्र सरकार के अंतर्गत दिखाया जा रहा है।
    • यदि इसे शामिल किया जाए, तो कुल रक्षा व्यय वास्तव में जीडीपी का लगभग 3.31% होगा।
  • असमान आवंटन: नौसेना की सीमित वृद्धि उसके बढ़ते हिंद महासागर दायित्वों के विपरीत है, जो रणनीतिक प्राथमिकता से अधिक अवशोषण क्षमता को दर्शाती है।

रक्षा खरीद में नौकरशाही संबंधी बाधाएँ

  • खरीद का नियम: वर्तमान प्रणाली “न्यूनतम लागत” (L1) नियम पर आधारित है, जो अक्सर नवोन्मेषी स्टार्टअप्स की बजाय बड़े स्थापित उद्योगों के पक्ष में जाती है, भले ही नई तकनीक में अधिक संभावनाएँ विद्यमान हों।
  • कार्यक्रम-संबंधी देरी: पनडुब्बियों और लड़ाकू विमानों जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स में लगातार देरी प्रणालीगत अक्षमताओं को उजागर करती है।
    • उदाहरण: प्रोजेक्ट-75 पनडुब्बियों को 1997 में मंज़ूरी मिली थी, लेकिन इनकी डिलीवरी 2030 के दशक में होने का अनुमान है, जबकि राफेल वार्ता 1990 में शुरू हुई थी, लेकिन विमान को 2019 में सेना में शामिल किया गया, जो लगातार खरीद में हो रही देरी को उजागर करता है।
  • धन का अपर्याप्त उपयोग: वित्त वर्ष 2024-25 में, रक्षा मंत्रालय ₹12,500 करोड़ बिना खर्च किए लौटाने को मजबूर हुआ, क्योंकि इसे समयसीमा के भीतर उपयोग नहीं किया जा सका।
  • धन-लैप्स की समस्या का समाधान: विभिन्न सिफ़ारिशों के बावजूद, प्रस्तावित गैर-लैप्सेबल रक्षा आधुनिकीकरण कोष, जिसका उद्देश्य लंबी अवधि वाली रक्षा परियोजनाओं के लिए अप्रयुक्त पूंजी आवंटनों को समाप्त होने से रोकना है, अभी तक कार्यान्वित नहीं किया गया है।

अनुसंधान, विकास और स्थानीय विनिर्माण

  • अव्यवस्थित/बिखरा हुआ अनुसंधान: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और संबद्ध संस्थानों को बढ़ाए गए आवंटन के बावजूद, अनुसंधान अलग-थलग है और उत्पादन से उसका जुड़ाव कम है।
  • अनुसंधान और विकास का अंतर: भारत जीडीपी का केवल 0.66% अनुसंधान एवं विकास पर खर्च करता है, जो जापान (3.7%) जैसे देशों की तुलना में काफी कम है।
  • द्वि-उपयोग क्षमता का अभाव: नागरिक और सैन्य अनुसंधान का एकीकरण सीमित बना हुआ है।
  • स्वदेशीकरण की सफलता: 2014-15 के बाद से स्थानीय उत्पादन में 174% की वृद्धि हुई है, और ब्रह्मोस, आकाश, और पिनाका जैसी प्रणालियाँ स्वदेशी सफलता के प्रमुख उदाहरण हैं।
  • निर्यात में वृद्धि: रक्षा निर्यात 2014 में ₹1,000 करोड़ से बढ़कर आज ₹23,000 करोड़ हो गया है, जो निर्यात-उन्मुख अर्थव्यवस्था की ओर बड़े बदलाव को दर्शाता है।

रक्षा व्यय और आर्थिक विकास

  • वैश्विक तुलना: जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने कम प्रत्यक्ष खतरे के बावजूद अपने रक्षा खर्च को बढ़ाया है। यूरोप भी उच्च आवंटन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
  • ‘गन्स बनाम बटर’ से आगे: रक्षा बजट को ‘गन्स बनाम बटर’ के द्वंद्व से आगे बढ़कर ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण से जोड़ना चाहिए, जहाँ रक्षा व्यय को कल्याण के विकल्प के बजाय राष्ट्रीय विकास के प्रेरक के रूप में देखा जाए।
    • रक्षा खर्च अवसंरचना विकास, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और स्थानीय आर्थिक वृद्धि के लिए उत्प्रेरक का कार्य करता है, जैसा कि ‘वाइब्रेंट विलेजेज’ कार्यक्रम के अंतर्गत सीमा सड़क संगठन की भूमिका से स्पष्ट है।
  • औद्योगिक गुणक प्रभाव: रणनीतिक निवेश, विशेष रूप से जहाज़ निर्माण में, महत्वपूर्ण गुणक प्रभाव डालते हैं, जिससे अन्य क्षेत्रों की तुलना में 6.5 गुना अधिक रोजगार सृजित होता है।

निष्कर्ष

30 ट्रिलियन डॉलर की ‘विकसित भारत’ अर्थव्यवस्था रक्षा आत्मनिर्भरता पर निर्भर करती है। प्रक्रियागत सुधार और आर्थिक एकीकरण के बिना, बढ़ा हुआ रक्षा व्यय वास्तविक सैन्य क्षमता में परिवर्तित नहीं हो पाएगा।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: खरीद और निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं में सुधार के बिना बढ़ा हुआ रक्षा व्यय रणनीतिक परिणामों को सीमित कर देता है। चर्चा कीजिए कि रक्षा बजट आर्थिक विकास और प्रौद्योगिकीय उन्नति के उत्प्रेरक के रूप में किस प्रकार कार्य कर सकते हैं।

 (10 अंक, 150 शब्द)

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