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रासायनिक पार्क योजना

Lokesh Pal February 07, 2026 03:22 10 0

संदर्भ 

केंद्रीय बजट 2026–27 में चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है।

रासायनिक पार्क क्या हैं?

  • परिभाषा: रासायनिक पार्क ऐसे नियोजित औद्योगिक क्लस्टर होते हैं, जिन्हें विशेष रूप से रसायन और पेट्रोकेमिकल विनिर्माण के लिए विकसित किया जाता है, जहाँ अनेक औद्योगिक इकाइयाँ एक साथ संचालित होती हैं।
  • मुख्य विशेषता: इन पार्कों में एक ही स्थान पर विश्वस्तरीय साझा अवसंरचना, सामान्य उपयोगिताएँ, लॉजिस्टिक्स सहायता तथा समन्वित नियामक सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
  • अवसंरचना: रासायनिक पार्कों में सामान्यतः पर्यावरण एवं सुरक्षा से संबंधित साझा सुविधाएँ शामिल होती हैं, जैसे—
    • केंद्रीय अपशिष्ट शोधन संयंत्र
    • खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाएँ
    • रसायनों के सुरक्षित प्रबंधन और भंडारण के लिए साझा उपयोगिताएँ।

भारत में रासायनिक क्षेत्र

  • वैश्विक स्थिति: भारत विश्व का छठा सबसे बड़ा रासायनिक उत्पादक देश है और एशिया में तीसरे स्थान पर है।
  • आर्थिक योगदान: रासायनिक क्षेत्र का राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 7 प्रतिशत तथा विनिर्माण सकल मूल्य वर्द्धन में 8.1 प्रतिशत योगदान है (वित्त वर्ष 2023–24)।
  • उत्पादन प्रवृत्तियाँ: प्रमुख रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स का उत्पादन वित्त वर्ष 2015–16 में 4.56 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2024–25 में 5.86 करोड़ मीट्रिक टन हो गया है, जिसमें 2.8 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर दर्ज की गई।
  • क्षेत्रीय मजबूती: भारत 80,000 से अधिक प्रकार के रासायनिक उत्पादों का निर्माण करता है, जिनमें थोक रसायन, विशिष्ट रसायन, कृषि रसायन, पेट्रोकेमिकल्स, पॉलिमर और उर्वरक शामिल हैं। इनमें विशिष्ट रसायन एक स्थायी मजबूत क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं।
  • वर्तमान बाजार आकार: भारत का रासायनिक उद्योग वर्ष 2024 में लगभग 21.5 लाख करोड़ रुपये का आँका गया।
  • रणनीतिक बढ़त: कृषि रसायनों के क्षेत्र में भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है तथा रंग एवं डाई उद्योग में एक वैश्विक केंद्र के रूप में इसकी स्थिति उच्च मूल्य वाले रासायनिक विनिर्माण केंद्र के रूप में संभावनाओं को सशक्त करती है।
  • निवेश वृद्धि: वित्त वर्ष 2024–25 तक उर्वरकों को छोड़कर रासायनिक क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 1.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जबकि वर्ष 2025 तक कुल औद्योगिक निवेश लगभग 8 लाख करोड़ रुपये तक आकलित किया गया है।

केंद्रीय बजट 2026–27 की प्रमुख घोषणाएँ

  • रासायनिक पार्क योजना: राज्यों को तीन रासायनिक पार्क स्थापित करने में सहायता देने के लिए एक नई योजना शुरू की गई है, जिसमें चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
  • बजटीय समर्थन: वित्त वर्ष 2026–27 के बजट अनुमान में 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह रासायनिक पार्क अवसंरचना के लिए पहली बार समर्पित बजटीय सहायता का उदाहरण है।
  • उद्देश्य: घरेलू रासायनिक विनिर्माण को सुदृढ़ करना, आपूर्ति शृंखला के एकीकरण को बढ़ावा देना तथा आयात पर निर्भरता को कम करना।

रासायनिक पार्कों की आवश्यकता

  • क्लस्टर-आधारित विकास: यह भारत के प्लास्टिक पार्क, बल्क ड्रग पार्क तथा पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्रों से प्राप्त अनुभव पर आधारित है, जिन्होंने साझा अवसंरचना और समन्वित योजना के लाभों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है।
  • मूल्य शृंखला का समग्र कवरेज: इस परिकल्पना के अंतर्गत थोक रसायन, विशिष्ट रसायन तथा ‘डाउनस्ट्रीम’ खंडों को शामिल किया गया है, जिससे रासायनिक मूल्य शृंखला में अधिक एकीकृत दृष्टिकोण संभव होगा।
  • लागत एवं दक्षता में वृद्धि: साझा लॉजिस्टिक्स, उपयोगिताएँ और परीक्षण सुविधाएँ पूँजीगत लागत को कम करने तथा परिचालन दक्षता में सुधार लाने में सहायक होंगी।
  • निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता: एकीकृत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र वैश्विक रासायनिक मूल्य शृंखलाओं में, विशेष रूप से विशिष्ट रसायनों के क्षेत्र में, भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।

मौजूदा क्लस्टर-आधारित योजनाएँ

  • प्लास्टिक पार्क योजना: वर्ष 2013–14 में प्रारंभ की गई इस योजना का उद्देश्य प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग को संगठित और सुदृढ़ करना है। इसके अंतर्गत परियोजना लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत तक केंद्रीय अनुदान प्रदान किया जाता है, जिसकी सीमा प्रति पार्क 40 करोड़ रुपये निर्धारित है।
    • असम, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में कुल दस प्लास्टिक पार्कों को स्वीकृति दी गई है।
  • बल्क ड्रग पार्क योजना: वर्ष 2020 में 3,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ यह योजना शुरू की गई, जिसका उद्देश्य गुजरात, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश में तीन बल्क ड्रग पार्क स्थापित करना है।
    • इस योजना में साझा अवसंरचना पर विशेष ध्यान दिया गया है, जैसे- केंद्रीय अपशिष्ट शोधन संयंत्र, विलायक पुनर्प्राप्ति प्रणाली, विद्युत एवं जल उपयोगिताएँ तथा उन्नत परीक्षण सुविधाएँ।
  • पेट्रोलियम, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र: ये बड़े और एकीकृत निवेश क्षेत्र हैं, जो आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम, गुजरात के दाहेज और ओडिशा के पारादीप में स्थित हैं।

रासायनिक क्षेत्र के लिए नीतिगत समर्थन एवं संस्थागत ढाँचा

  • अवसंरचना विस्तार: पारादीप बंदरगाह आधारित रासायनिक अवसंरचना तथा बड़ी तेल और रसायन परियोजनाओं जैसे प्रमुख निवेश औद्योगिक क्षमता को सुदृढ़ कर रहे हैं और रोजगार सृजन को बढ़ावा दे रहे हैं।
  • नीति एवं प्रोत्साहन समर्थन: राष्ट्रीय रासायनिक नीति, हरित रसायन कार्यक्रम, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजनाएँ तथा केंद्रीय प्लास्टिक अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के विकास, जैसे प्रयास नवाचार, कौशल विकास और सततता को समर्थन प्रदान करते हैं।
  • नीति आयोग के प्रस्ताव: नीति आयोग ने विश्वस्तरीय रासायनिक हब, बंदरगाह आधारित क्लस्टर, पर्यावरणीय स्वीकृतियों में तेजी, लक्षित मुक्त व्यापार समझौते तथा अनुसंधान एवं विकास के लिए अधिक वित्तपोषण की सिफारिश की है।
  • हरित हाइड्रोजन मिशन: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन रासायनिक क्षेत्र के वि-कार्बनीकरण को समर्थन करता है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक उत्पादन क्षमता प्राप्त करना है। इससे जीवाश्म ईंधन आयात में बचत होगी और उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश उदारीकरण: रासायनिक क्षेत्र में, खतरनाक रसायनों को छोड़कर, स्वचालित मार्ग के अंतर्गत 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है।
  • गुणवत्ता नियंत्रण एवं आयात विनियमन: सरकार ने घरेलू बाजार में सस्ते, निम्न गुणवत्ता वाले और असुरक्षित रासायनिक उत्पादों की डंपिंग को रोकने के लिए आयातित रसायनों पर अनिवार्य प्रमाणन व्यवस्था लागू की है।

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