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फ्रंटियर नागालैंड क्षेत्रीय प्राधिकरण

Lokesh Pal February 07, 2026 03:26 7 0

संदर्भ 

पूर्वी नागालैंड के लिए फ्रंटियर नागालैंड क्षेत्रीय प्राधिकरण’ (Frontier Nagaland Territorial Authority- FNTA)  के गठन का मार्ग प्रशस्त करने हेतु गृह मंत्रालय, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (Eastern Nagaland People’s Organisation- ENPO) के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

समझौते की प्रमुख विशेषताएँ

  • शामिल जिले: FNTA के अंतर्गत छह जिले शामिल होंगे, जिनमें तुएनसांग, मोन, किफिरे, लोंगलेंग, नोकलाक और शेमाटोर सम्मिलित हैं।
  • शक्तियों का हस्तांतरण: इस समझौते के तहत FNTA को 46 विषयों पर शक्तियों का हस्तांतरण प्रदान किया गया है।
  • स्वरूप: FNTA नागालैंड राज्य के भीतर एक क्षेत्रीय प्राधिकरण है और यह छठी अनुसूची के अंतर्गत गठित स्वायत्त जिला परिषदों से भिन्न है।
    •  नागालैंड संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत नहीं आता है।
  • वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रावधान
    • मिनी सचिवालय: समझौते के अंतर्गतफ्रंटियर नागालैंड क्षेत्रीय प्राधिकरण’ के लिए एक मिनी सचिवालय की व्यवस्था की गई है, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव स्तर का अधिकारी करेगा।
    • विकास परिव्यय: पूर्वी नागालैंड के लिए विकास निधि का आवंटन जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुपात में साझा किया जाएगा।
    • प्रारंभिक सहायता: प्राधिकरण की स्थापना के लिए प्रारंभिक व्यय गृह मंत्रालय द्वारा वहन किया जाएगा तथा इसके लिए एक निश्चित वार्षिक राशि निर्धारित की जाएगी।
  • संवैधानिक संरक्षण: समझौते में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद-371(A) के प्रावधानों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करता है।

व्यवस्था का महत्त्व

  • विशिष्ट विकास मॉडल: यह व्यवस्था निम्नलिखित माध्यमों से समग्र विकास की परिकल्पना करती है—
    • वित्तीय स्वायत्तता
    • निर्णय-निर्माण में सशक्तता
    • अवसंरचना विकास में तेजी
    • आर्थिक सशक्तीकरण
    • संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग
  • क्षेत्रीय आकांक्षाओं का समाधान: पूर्वी नागालैंड की जनजातियाँ लंबे समय से क्षेत्र-विशिष्ट शक्तियों को प्रदान करने की माँग कर रही थीं, जिन पर वर्ष 2015 से बातचीत प्रारंभ हुई।
  • रणनीतिक महत्व: पूर्वी नागालैंड की म्याँमार सीमा से निकटता इसे सीमा क्षेत्र के विकास तथा भारत की एक्ट ईस्ट’ नीति के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाती है।

अनुच्छेद-371(A)

  • संसदीय कानून: अनुच्छेद-371(A) के अनुसार, कुछ संवेदनशील विषयों पर संसद द्वारा निर्मित कोई भी कानून तब तक नागालैंड पर लागू नहीं होगा, जब तक कि नागालैंड विधान सभा उसे स्वीकृति देने वाला प्रस्ताव पारित न कर दे।
  • अनुच्छेद 371(A) को भारतीय संघ में नागालैंड को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के समय, वर्ष 1962 के तेरहवें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान के भाग XXI में सम्मिलित किया गया था।
  • संरक्षित विषय
    • धार्मिक एवं सामाजिक प्रथाएँ: राज्य विधानसभा की अनुमति के बिना संसद इनमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
    • प्रथागत कानून एवं प्रक्रियाएँ: नागालैंड के प्रथागत कानून और पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाएँ संरक्षित हैं।
    • न्याय का प्रशासन: नागा प्रथागत कानून पर आधारित दीवानी और आपराधिक न्याय से संबंधित निर्णय राज्य के अधिकार क्षेत्र में रहते हैं।
    • भूमि एवं संसाधन अधिकार: भूमि तथा उससे संबंधित प्राकृतिक संसाधनों के स्वामित्व और हस्तांतरण से संबंधित प्रावधान, राज्य की स्वीकृति के बिना केंद्रीय कानूनों द्वारा परिवर्तित नहीं किए जा सकते हैं।
  • नागालैंड विधानसभा की भूमिका: इन विषयों पर बनाया गया कोई भी केंद्रीय कानून, तभी लागू होगा, जब नागालैंड विधानसभा उसके कार्यान्वयन के लिए सहमति संबंधी प्रस्ताव पारित करेगी।
  • राज्यपाल का विशेष उत्तरदायित्त्व: अनुच्छेद-371(A) नागालैंड के राज्यपाल को पूर्व नागा हिल्स–तुएनसांग क्षेत्र में आंतरिक अशांति जारी रहने तक कानून और व्यवस्था बनाए रखने की विशेष जिम्मेदारी प्रदान करता है।
  • वित्तीय संरक्षण: राज्यपाल को यह सुनिश्चित करना होता है कि भारत सरकार द्वारा किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए प्रदान की गई धनराशि केवल उसी सेवा से संबंधित अनुदान मांग में सम्मिलित की जाए।
  • तुएनसांग क्षेत्रीय परिषद की स्थापना
    • अनुच्छेद-371(A) के अंतर्गत तुएनसांग जिले के लिए 35 सदस्यों वाली एक क्षेत्रीय परिषद के गठन का प्रावधान किया गया है।
    • तुएनसांग जिले का उपायुक्त इस क्षेत्रीय परिषद का पदेन अध्यक्ष होता है।
    • राज्यपाल को परिषद की संरचना, योग्यता, कार्यकाल, कार्यविधि, कर्मचारी व्यवस्था तथा कार्यप्रणाली से संबंधित नियम बनाने का अधिकार प्राप्त है।
  • तुएनसांग में नागालैंड राज्य के कानूनों का सीमित अनुप्रयोग
    • नागालैंड विधानसभा द्वारा पारित कोई भी कानून तुएनसांग जिले में तब तक लागू नहीं होता, जब तक कि क्षेत्रीय परिषद की सिफारिश के आधार पर राज्यपाल उसकी स्वीकृति न दें।
    • राज्यपाल ऐसे कानूनों को आवश्यक संशोधनों के साथ अथवा पूर्व प्रभाव से भी तुएनसांग जिले में लागू कर सकते हैं।
  • राज्यपाल की नियामक शक्तियाँ
    • राज्यपाल तुएनसांग जिले में शांति, प्रगति और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए विनियम बना सकते हैं।
    • ऐसे विनियम तुएनसांग जिले पर लागू संसदीय कानूनों में भी संशोधन या उन्हें निरस्त कर सकते हैं।

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