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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal February 07, 2026 03:35 12 0

क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्ट्रियल (Critical Minerals Ministerial)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वाशिंगटन डी.सी. में ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्ट्रियल’ के उद्घाटन समारोह में भागीदारी की।

  • यह एक उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय मंच है, जो वैश्विक रूप से महत्त्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित, विविध और स्थिर करने के लिए नीतियों के समन्वय हेतु मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों को एक साथ लाता है।
  • मेजबान राष्ट्र: संयुक्त राज्य अमेरिका, वाशिंगटन डी.सी.।
  • मुख्य उद्देश्य
    • कुछ देशों पर अत्यधिक निर्भरता कम करके आपूर्ति शृंखलाओं के जोखिम को कम करना।
    • खनन, प्रसंस्करण और शोधन में विविधीकरण को बढ़ावा देना।
    • विश्वसनीय भागीदारों के मध्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना
    • खनिज आपूर्ति की सामर्थ्य, स्थिरता और लचीलापन सुनिश्चित करना।

महत्त्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) के बारे में

  • अर्थ: आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक खनिज, जिनकी आपूर्ति में प्रयास या सीमित विकल्पों के कारण उच्च जोखिम होता है।
  • उदाहरण: लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्त्व (REEs), ताँबा, गैलियम, जर्मेनियम।
  • रणनीतिक महत्त्व: ऊर्जा संक्रमण (EV, बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा), रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए आवश्यक।
  • वैश्विक प्रयास: खनन और प्रसंस्करण उद्योगों पर कुछ देशों का प्रभुत्व है, जैसे- लीथियम (चिली, ऑस्ट्रेलिया), कोबाल्ट (कॉन्गो), REEs प्रसंस्करण (चीन)।

ऑपरेशन ‘किया’ (Operation Kiya)

भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा उधमपुर के वनीय बसंतगढ़ क्षेत्र में एक संयुक्त अभियान में दो पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराने के बाद यह चर्चा में आया।

परिभाषा: यह जम्मू-कश्मीर के वन और पर्वतीय क्षेत्रों में घुसपैठिए आतंकवादियों को समाप्त करने के लिए, भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा शुरू किया गया एक संयुक्त, खुफिया-आधारित आतंकवाद विरोधी अभियान है।

उद्देश्य

  • दुर्गम क्षेत्रों में छिपे आतंकवादियों को ट्रैक करना और उन्हें मारना।
  • आतंकवादियों की आवाजाही को रोकना तथा नागरिक बस्तियों की रक्षा करना।
  • घुसपैठ के चरण में ही सक्रिय मॉड्यूल को नष्ट करके सीमा पार आतंकी नेटवर्क को बाधित करना।

लक्षित क्षेत्र और पद्धति

  • मुख्य रूप से बसंतगढ़ (उधमपुर) जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में संचालित।
  • विशिष्ट और विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित।
  • घेराबंदी और तलाशी (Cordon-and-search) रणनीति, निकास मार्गों को बंद करना।
  • सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स (डेल्टा), जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF का संयुक्त सुरक्षा ग्रिड।

महत्त्व

  • आतंकवादी संगठनों के पुनः एकत्रण को रोककर आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।
  • जम्मू और कश्मीर में संवेदनशील घुसपैठ वाले रास्तों पर क्षेत्र प्रभाव बढ़ाता है।
  • लंबी अवधि के और उच्च जोखिम वाले ऑपरेशनों में विभिन्न एजेंसियों के मध्य समन्वय तथा परिचालन संबंधी तैयारी को प्रदर्शित करता है।
  • चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के आतंकवाद विरोधी प्रयासों को और मजबूत करता है।

टर्टल ट्रेल्स (Turtle Trails)

बजट 2026-27 में प्रस्तावित, ओडिशा, कर्नाटक और केरल में विनियमित इको-टूरिज्म सर्किट स्थापित करना, जिसका उद्देश्य समुद्री संरक्षण को स्थानीय आजीविका के साथ जोड़ना है।

बजट 2026-27 के मुख्य बिंदु

एक ‘टर्टल ट्रेल’ केवल एक मार्ग नहीं, एक प्रबंधित पारिस्थितिकी गलियारा है। ये नेस्टिंग स्थलों (Nesting sites) के पास निर्धारित क्षेत्र हैं, जहाँ समुद्री जीवन के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए आगंतुकों की गतिविधियों की कठोर निगरानी की जाती है।

  • विनियमित इको-टूरिज्म: समुद्री जीवन पर मानवजनित दबाव को कम करने के लिए अव्यवस्थित ‘मास टूरिज्म’ से हटकर प्रजनन स्थलों के पास निर्देशित तथा कम प्रभाव वाले मार्गों की ओर परिवर्तन।
  • रणनीतिक भौगोलिक अवस्थिति: ओडिशा में गहिरमाथा और ऋषिकुल्या रूकरी, और केरल व कर्नाटक में अरब सागर के प्रमुख हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करना।
  • “डार्क-स्काई” अवसंरचना: अहस्तक्षेपकारी, अस्थायी अवलोकन क्षेत्रों और ऐसी प्रकाश प्रणालियों के लिए वित्तपोषण, जिन्हें कछुओं को दिशाभ्रमित होने से रोकने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • सामुदायिक प्रबंधन: “टर्टल गार्जियंस” को बढ़ावा देना—स्थानीय मछुआरा समुदायों और युवाओं को पेशेवर प्रकृतिवादियों के रूप में संरक्षण प्रयासों का नेतृत्व करने हेतु प्रोत्साहित करना।
  • तकनीकी-संचालित निगरानी: प्रवासी प्रतिरूप की निगरानी करने और मौसमी “नो-गो” (वर्जित) विंडोज को लागू करने के लिए सैटेलाइट टेलीमेट्री और AI-सक्षम निगरानी में निवेश।

ओलिव रिडले कछुए (Olive Ridley Turtle) के बारे में:

  • वैज्ञानिक नाम: लेपिडोकेलिस ओलिवेसिया (Lepidochelys olivacea), यह विश्व में पाए जाने वाले सभी समुद्री कछुओं में सबसे छोटा तथा सबसे अधिक पाया जाने वाला कछुआ है।
  • अरिबाडा: अपने अद्वितीय सामूहिक नेस्टिंग व्यवहार के लिए प्रसिद्ध, जहाँ हजारों मादाएँ अंडे देने के लिए एक ही समुद्र तट पर एकत्र होती हैं।
  • संरक्षण स्थिति
    • IUCN रेड लिस्ट: सुभेद्य
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम (1972): अनुसूची I (भारत में सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है)।
    • CITES: परिशिष्ट I।
  • पारिस्थितिकी भूमिका: ये समुद्री रक्षक के रूप में कार्य करते हैं, समुद्री घास के स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं और समुद्र तट के पारिस्थितिकी तंत्र को महत्त्वपूर्ण पोषक तत्त्व प्रदान करते हैं।
  • प्रमुख खतरे: ट्रॉलर जाल में फँसना , तटीय कटाव, अंडों का अवैध शिकार और समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण।

स्टार्ट-अप मान्यता फ्रेमवर्क (Startup Recognition Framework)

हाल ही में सरकार ने स्टार्ट-अप इंडिया एक्शन प्लान को मजबूत करने के लिए स्टार्ट-अप मान्यता फ्रेमवर्क में संशोधन किया है, क्योंकि यह पहल अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर चुकी है।

स्टार्टअप मान्यता फ्रेमवर्क में परिवर्तन (2026)

  • टर्नओवर सीमा में वृद्धि: इसे ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹200 करोड़ कर दिया गया है, जिससे बढ़ते स्टार्ट-अप्स के लिए पात्रता का दायरा बढ़ गया है।
  • समर्पित ‘डीप टेक स्टार्ट-अप’ श्रेणी: लंबी अवधि और उच्च अनुसंधान एवं विकास (R&D) तीव्रता को देखते हुए, डीप टेक स्टार्ट-अप्स के लिए आयु सीमा बढ़ाकर 20 वर्ष और टर्नओवर कैप ₹300 करोड़ कर दिया गया है।
    • इससे पहले कोई अलग श्रेणी नहीं थी और सामान्य आयु सीमा 10 वर्ष थी।
  • सहकारी समितियाँ पात्र बनीं: अब बहु-राज्यीय और राज्य-पंजीकृत सहकारी समितियों को भी इसमें शामिल किया गया है, जो कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी नवाचार को बढ़ावा देंगी।
    • इससे पहले केवल निजी संस्थाएँ (कंपनियाँ, LLPs, पार्टनरशिप) ही पात्र थी।
  • नीतिगत उद्देश्य: दीर्घकालिक पूँजी (Patient Capital) की सुविधा देना, नवाचार विस्तार और भारत के उच्च-प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम को मजबूत करना।

मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप (भारत) के बारे में

  • एक मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप वह इकाई है, जिसे अधिसूचित पात्रता मानदंडों के आधार पर उद्योग संवर्द्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई है।
  • श्रेणियाँ
    • सामान्य स्टार्ट-अप: निगमन (Incorporation) से 10 वर्ष तक; वार्षिक टर्नओवर ≤ ₹200 करोड़।
    • डीप टेक स्टार्ट-अप: निगमन से 20 वर्ष तक; टर्नओवर कैप ₹300 करोड़। 
    • पात्र संस्थाएँ: प्राइवेट लिमिटेड कंपनियाँ, LLPs, पार्टनरशिप फर्म और सहकारी समितियाँ।
  • मान्यता के लाभ
    • कर प्रोत्साहन: आयकर अधिनियम, 1961 के तहत लगातार तीन वर्षों तक लाभ पर 100% आयकर छूट।
    • नियामक राहत: ‘कैश फ्लो स्टेटमेंट’ तैयार करने से छूट।
    • इकोसिस्टम समर्थन: स्टार्ट-अप इंडिया, AIM (अटल इनोवेशन मिशन), GENESIS (जेन-नेक्स्ट सपोर्ट फॉर इनोवेटिव स्टार्ट-अप्स), और नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशन (NIDHI) जैसी योजनाओं तक पहुँच।

स्टार्ट-अप इंडिया

  • यह सभी क्षेत्रों और प्रकार्यों में एक मजबूत और नवाचार-संचालित स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बनाने की एक प्रमुख पहल है।
  • लॉन्च: 16 जनवरी, 2016।
  • नोडल निकाय: उद्योग संवर्द्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT)।
  • उद्देश्य 
    • प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से परे उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देना: स्टार्ट-अप संस्कृति को केवल IT या टेक तक सीमित न रखकर अन्य विभिन्न क्षेत्रों में प्रोत्साहित करना।
    • टियर-I शहरों से टियर-II, टियर-III, ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों तक स्टार्ट-अप्स का विस्तार: नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को बड़े महानगरों से बाहर निकाल कर देश के कोने-कोने तक पहुँचाना।
    • रोजगार सृजन, विनिर्माण और उभरती प्रौद्योगिकियों का समर्थन करना: विनिर्माण को गति देना और नई तकनीकों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करना।
  • मुख्य स्तंभ 
    • सरलीकरण और हैंडहोल्डिंग: स्व-प्रमाणीकरण, स्टार्ट-अप पोर्टल और आसान निकास की सुविधा।
    • फंडिंग सहायता और प्रोत्साहन: ₹10,000 करोड़ का ‘फंड ऑफ फंड्स’ और विभिन्न कर लाभ
  • उद्योग-अकादमिक भागीदारी: इन्क्यूबेशन सहायता, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना।

सभागार पहल (SabhaSaar Initiative)

जनवरी 2026 तक, विभिन्न राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की 1.11 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों (GP) ने AI-आधारित ग्राम सभा बैठक सारांश उपकरण, ‘सभासार’ को अपना लिया है।

सभासार पहल 

  • सभासार एक AI-सक्षम वॉइस-टू-टेक्स्ट बैठक सारांश प्लेटफॉर्म है, जिसे 14 अगस्त, 2025 को पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ग्राम सभा तथा पंचायत की कार्यवाही को डिजिटल और मानकीकृत करने के लिए लॉन्च किया गया था।
  • नोडल मंत्रालय: पंचायती राज मंत्रालय।
  • AI और क्लाउड अवसंरचना: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के IndiaAI मिशन के तहत IndiaAI कंप्यूट पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराया गया।
  • डेटा गवर्नेंस: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के ढाँचे के तहत विनियमित; डेटा पूरी तरह से सरकारी प्रणालियों के भीतर संसाधित होता है।
  • उद्देश्य
    • बैठक के कार्यवृत्त (Minutes of Meetings – MoM) की स्वचालित और सटीक तैयारी सक्षम बनाना।
    • स्थानीय शासन में पारदर्शिता, रिकॉर्ड-कीपिंग और जवाबदेही में सुधार।
    • ग्राम सभा की बैठक, भागीदारी और अनुवर्ती कार्रवाइयों की निगरानी में सहायता करना।
  • महत्त्व
    • जमीनी स्तर पर ई-गवर्नेंस को मजबूत करता है।
    • पंचायत दस्तावेजीकरण में मानवीय कार्यभार और त्रुटियों को कम करता है।
    • पंचायत के कार्यों और प्रस्तावों के अनुपालन की साक्ष्य-आधारित निगरानी की सुविधा प्रदान करता है।
  • स्वीकृति वाले शीर्ष राज्य (GP की संख्या): उत्तर प्रदेश (31,477)तमिलनाडु (12,451), आंध्र प्रदेश (9,285), छत्तीसगढ़ (8,834),  ओडिशा (6,720)।

सभासार सहभागी लोकतंत्र का विस्तार करने के लिए, पंचायती राज संस्थाओं के साथ AI को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

प्लास्टइंडिया (PLASTINDIA),  2026

विश्व की सबसे बड़ी प्लास्टिक प्रदर्शनी, PLASTINDIA-2026, 5 फरवरी,  2026 को भारत मंडपम्, नई दिल्ली में शुरू हुई।

प्लास्टइंडिया (PLASTINDIA) के बारे में

  • यह प्लास्टिक उद्योग की एक त्रिवार्षिक वैश्विक प्रदर्शनी है, जो रसायन और उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग (DCPC) के सहयोग से आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक मूल्य शृंखला में नवाचारों का प्रदर्शन करना है।
  • PLASTINDIA-2026 का विषय (थीम): “भारत नेक्स्ट” (Bharat Next)
    • यह आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो उन्नत विनिर्माण और चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं पर जोर देता है।
  • उद्देश्य
    • व्यापार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सतत् प्लास्टिक विनिर्माण को बढ़ावा देना।
    • उन्नत मशीनरी, सामग्री और रीसाइक्लिंग समाधानों में भारत की क्षमताओं का प्रदर्शन करना।
    • कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक संबंधों को मजबूत करना।
  • यह पाँच स्तंभों पर आधारित है: व्यापार, प्रौद्योगिकी, प्रतिभा, परंपरा, और पर्यटन।
  • प्रतिभागी 
    • 2,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू प्रदर्शक।
    • कौशल विकास, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और प्रौद्योगिकी प्रसार में CIPET (केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान) की सक्रिय भागीदारी।
    • उद्योग जगत के नेतृत्त्वकर्त्ताओं, स्टार्ट-अप्स, छात्रों और नीति निर्माताओं की सहभागिता।
  • महत्त्व: इसे ‘जीरो वेस्ट’ (Zero Waste) प्रदर्शनी के रूप में आयोजित किया गया है, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को सुदृढ़ करता है।
  • प्लास्टिक विनिर्माण और रोजगार सृजन में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करता है।

भारत में प्लास्टिक अर्थव्यवस्था की स्थिति

  • भारतीय प्लास्टिक उद्योग का मूल्य ₹3–3.5 लाख करोड़ है, जो बुनियादी ढाँचे, उपभोक्ता वस्तुओं और निर्यात का आधार है।
  • जैसे-जैसे भारत $10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, यह वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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