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भारत की बाघ संरक्षण नीति

Lokesh Pal February 10, 2026 05:07 8 0

संदर्भ

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने भारत में बाघ संरक्षण के 50 वर्ष पूर्ण होने पर बाघ संरक्षण नीतियों की व्यापक समीक्षा का आह्वान किया।

सम्मेलन के प्रमुख बिंदु

  • NTCA बैठकों की समीक्षा: मंत्री ने सभी नीतिगत निर्णयों की समीक्षा करने का आग्रह किया ताकि यह पहचाना जा सके कि कौन-से निर्णय पुराने, अप्रवर्तित, या पूर्ण रूप से लागू हो चुके हैं।
  • औपचारिक नीति समेकन: उन्होंने पाँच दशकों के नीतिगत निर्णयों को एक औपचारिक नीति वक्तव्य में समेकित करने का सुझाव दिया और इस विषय को अगली NTCA बैठक के प्रथम एजेंडा के रूप में रखने की बात कही।
  • प्रमुख प्राथमिकता क्षेत्र
    • बाघ आबादी आकलन: मंत्री ने बाघों की आबादी अनुमान संबंधी अभ्यासों में सुधार पर केंद्रित विचार-विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया।
    • रेस्क्यू और पुनर्वास अवसंरचना: बाघ अभयारण्यों के आसपास रेस्क्यू, पुनर्वास और ट्रांजिट उपचार केंद्रों को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।
    • मानव–वन्यजीव संघर्ष: मानव–वन्यजीव अंतःक्रियाओं के सक्रिय प्रबंधन को एक प्रमुख उभरती आवश्यकता के रूप में चिह्नित किया गया है।
    • टाइगर रिजर्व फंड का उपयोग: टाइगर रिजर्व फंड और प्रोजेक्ट टाइगर संबंधी संसाधनों के बेहतर उपयोग पर बल दिया गया।
    • संरक्षण आधारों को सुदृढ़ करना: दीर्घकालिक स्थिरता के लिए टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशनों को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
  • कार्य समूहों का गठन
    • चार क्षेत्र-विशिष्ट कार्य समूह: मंत्री ने क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों, जिनमें बाघ आबादी में परिवर्तन शामिल हैं, की समीक्षा हेतु चार कार्य समूह गठित करने का प्रस्ताव रखा है।
    • ये समूह बाघ अभयारण्यों में केंद्र प्रायोजित संरक्षण योजनाओं के क्रियान्वयन का भी आकलन करेंगे।

बाघ संरक्षण ढाँचा

  • प्रोजेक्ट टाइगर
    • शुरुआत: प्रोजेक्ट टाइगर वर्ष 1973 में एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किया गया, ताकि व्यवहार्य बाघ आबादी सुनिश्चित की जा सके और महत्त्वपूर्ण आवासों की रक्षा की जा सके।
    • सर्वप्रथम जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में लागू किया गया।
    • प्रकार: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत एक केंद्रीय प्रायोजित योजना।
    • सर्वाधिक बाघ आबादी वाला राज्य: मध्य प्रदेश।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)
    • स्थापना: वर्ष 2005
    • स्थिति: NTCA वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (2006 संशोधन) के अंतर्गत गठित एक वैधानिक निकाय है।
    • दायित्व: यह बाघ संरक्षण योजनाओं को स्वीकृति देता है, बाघ अभयारण्यों की निगरानी करता है, और प्रोजेक्ट टाइगर दिशा-निर्देशों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है।
  • बाघ अभयारण्यों का नेटवर्क
    • ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के अंतर्गत सुरक्षित प्रजनन आवास प्रदान करने हेतु बाघ अभयारण्यों का निर्माण किया गया।
    • NTCA द्वारा प्रशासित।
    • बाघ अभयारण्यों की संख्या: 58 (मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 9 अभयारण्य हैं)।
    • सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य: नागार्जुनसागर–श्रीशैलम् बाघ अभयारण्य (आंध्र प्रदेश–तेलंगाना) भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है।

  • आबादी प्रवृत्तियाँ
    • नवीनतम बाघों की गणना (2022) के अनुसार, बाघों की अनुमानित आबादी 3,682 (औसत संख्या) है।
    • अग्रणी राज्य: मध्य प्रदेश 785 के साथ अग्रणी है, इसके बाद कर्नाटक (563), उत्तराखंड (560), और महाराष्ट्र (444) हैं।
    • दीर्घकालिक वृद्धि प्रवृत्ति: वर्ष 2006 से भारत की बाघ आबादी लगभग 6% वार्षिक दर से बढ़ी है।
    • घनत्व: टाइगर रिजर्व के भीतर बाघों की सर्वाधिक प्रचुरता कॉर्बेट (260) में है, इसके बाद बाँदीपुर (150), नागरहोल (141)।
    • भारत वर्तमान में विश्व की लगभग 75% वन्य बाघ आबादी का आश्रयस्थल है।

  • बाघ कॉरिडोर संरक्षण
    • कॉरिडोर संरक्षित क्षेत्रों को जोड़ते हैं और बाघों के सुरक्षित आवागमन की अनुमति देते हैं।
    • परिदृश्य-स्तरीय संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण; बाघ कॉरिडोर आनुवंशिक अलगाव को रोकते हैं और दीर्घकालिक प्रजाति अस्तित्व का समर्थन करते हैं।
    • देश भर में 32 प्रमुख कॉरिडोर।
    • उदाहरण
      • शिवालिक पहाड़ियाँ एवं गंगा के मैदान: राजाजी–कॉर्बेट
      • मध्य भारत एवं पूर्वी घाट: रणथंभौर–कूनो–माधव
      • पश्चिमी घाट: नागरहोल–बाँदीपुर–मुदुमलाई–वायनाड
      • उत्तर-पूर्व: काजीरंगा–कार्बी आंगलोंग
  • अखिल भारतीय बाघ आकलन (टाइगर गणना)
    • प्रत्येक 4 वर्ष में आयोजित।
    • क्रियान्वयनकर्ता: NTCA, राज्य वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII)।
  • बाघों के लिए निगरानी प्रणाली: इंटेंसिव प्रोटेक्शन एंड इकोलॉजिकल स्टेटस प्रोग्राम (MSTrIPES)
    • एक प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी प्रणाली।
    • रियल-टाइम , डेटाबेस निर्माण, पारिस्थितिक आकलन और बेहतर रिजर्व प्रबंधन में सहायक।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
    • बाघ संरक्षण के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।
    • बाघों को अनुसूची I (सर्वोच्च संरक्षण) के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है।
  • ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF)
    • एक अंतरराष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन।
    • मुख्यालय: नई दिल्ली, भारत।
    • बाघ संरक्षण हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने का उद्देश्य।
  • ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव (GTI)
    • वर्ष 2008 में सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र की वैश्विक साझेदारी के रूप में शुरू।
    • समन्वित वैश्विक कार्रवाई के माध्यम से बाघों के विलुप्त होने को रोकने का लक्ष्य।
    • वर्ष 2013 में इसके दायरे का विस्तार ‘स्नो लेपर्ड’ संरक्षण तक किया गया।

इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA)

  • अवलोकन
    • इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है, जो सहयोग, क्षमता निर्माण और वित्तीय सहायता के माध्यम से प्रमुख बिग कैट्स प्रजातियों के वैश्विक संरक्षण को बढ़ावा देता है।
    • इसे अप्रैल 2023 में प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया और वर्ष 2024 में एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी इकाई के रूप में औपचारिक रूप दिया गया।
  • मुख्यालय और सचिवालय: नई दिल्ली, भारत।
  • मुख्य फोकस प्रजातियाँ: IBCA सात प्रमुख ‘बिग कैट’ प्रजातियों के संरक्षण के लिए कार्य करता है: बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जैगुआर, प्यूमा।
  • ग्लोबल बिग कैट समिट: केंद्रीय बजट 2026–27 में घोषणा की गई है कि पहला ग्लोबल बिग कैट समिट भारत में आयोजित किया जाएगा।

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