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“बायो-वॉरियर्स” प्रजातियाँ

Lokesh Pal February 10, 2026 05:10 8 0

संदर्भ

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के शोधकर्ताओं ने उत्तरी बंगाल की खाड़ी में पश्चिम बंगाल तट पर दो नई नेरिडिड पॉलीकीट (समुद्री) कृमि प्रजातियों की खोज की है।

  • इन कृमियों को “बायो-वॉरियर्स” के रूप में वर्णित किया जा रहा है क्योंकि ये प्रदूषित और चरम वातावरण में भी जीवित रह सकते हैं, जहाँ अधिकांश प्रजातियाँ जीवित नहीं रह पाती हैं।

पॉलीकीट कृमि (Polychaete Worms)

  • पॉलीकीट कृमि फाइलम ऐनेलिडा (Annelida) से संबंधित समुद्री खंडित कृमि होते हैं, और इन्हें “पॉलीकीट” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके शरीर के खंडों पर अनेक ब्रिसल्स (सेटी/काँटेनुमा संरचनाएँ) पाई जाती हैं।
  • पारिस्थितिकी महत्त्व
    • पॉलीकीट कृमि आवास निर्माण की क्रिया के माध्यम से अवसाद को वायुरहित करते हैं, जिससे पोषक तत्त्व चक्र को समर्थन मिलता है और समुद्री तल की गुणवत्ता सुधरती है।
    • ये समुद्री खाद्य जाल का समर्थन करते हैं क्योंकि ये मछलियों, केकड़ों और समुद्री पक्षियों के लिए भोजन का स्रोत होते हैं।

खोजी गई प्रजातियों के बारे में

  • नैमालिकैस्टिस सोलेनोटोनेथा (Namalycastis solenotognatha)
    • नामोत्पत्ति और विशिष्ट विशेषता: इसका नाम ग्रीक शब्दों से लिया गया है, जिसका अर्थ “नलिकायुक्त जबड़ा” है, जो इसकी कई नलिकाओं वाले असामान्य जबड़े की संरचना को दर्शाता है।

    • आवास वरीयता: यह सल्फाइड-समृद्ध, दुर्गंधयुक्त कीचड़ वाले क्षेत्रों जैसे चरम वातावरण में पनपता है।
    • पारिस्थितिकी नीस: यह सामान्यतः सड़ती हुई मैंग्रोव काष्ठ और कठोर मृदा की सतहों पर पाया जाता है।
    • अनुकूलन और सहनशीलता: विषैले आवासों में इसका जीवित रहना कठोर पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति इसकी उच्च सहनशीलता को दर्शाता है।
  • नेराइस धृतिये (Nereis dhritiae)
    • नामोत्पत्ति: इस प्रजाति का नाम ZSI की प्रथम महिला निदेशक डॉ. धृति बनर्जी के नाम पर रखा गया है।
    • आवास और व्यवहार: यह रेतीले समुद्र तटों पर लकड़ी के स्तंभों के भीतर पाया जाता है, जो उच्च ज्वार के समय जलमग्न हो जाते हैं।
    • तटीय अनुकूलन: यह प्रजाति मानव-परिवर्तित तटीय क्षेत्रों में जीवित रहने की विशेषीकृत रणनीतियाँ प्रदर्शित करती है।

प्रजातियों का महत्त्व

  • नेरिडिड कृमियों की पारिस्थितिकी भूमिका
    • पोषक तत्त्व चक्रण: ये कृमि तटीय पारिस्थितिकी तंत्र में जैविक पदार्थ के पुनर्चक्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    • अवसाद वायवीयता (Sediment Aeration): इनकी बिल बनाने की गतिविधि ऑक्सीजन प्रवाह और तलछट की गुणवत्ता में सुधार करती है।
    • तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण: ये दलदली मैदानों और निकट-तटीय आवासों की उत्पादकता बनाए रखने में योगदान देते हैं।
  • प्रदूषण सहनशीलता का संकेतक
    • प्रदूषित क्षेत्रों में जीवित रहना: दोनों प्रजातियाँ ऐसे आवासों में पाई गईं, जो औद्योगिक प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों से अत्यधिक प्रभावित हैं।
    • जैव-संकेतक क्षमता (Bioindicator Potential): इनकी उपस्थिति तटीय स्वास्थ्य और प्रदूषण स्तर की निगरानी के लिए एक पारिस्थितिकी संकेतक के रूप में कार्य कर सकती है।
    • अनुसंधान निहितार्थ: पर्यावरणीय आकलन के लिए पॉलीकीट कृमियों को तेजी से उपयोगी उपकरण के रूप में देखा जा रहा है।
  • संरक्षण और नीतिगत प्रासंगिकता: यह खोज क्षरण के बावजूद संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों की सुरक्षा के महत्त्व को सुदृढ़ करती है।

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