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Lokesh Pal
February 11, 2026 05:00
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भारत में बंधुआ मज़दूरी को कानूनी रूप से समाप्त हुए 50 वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी यह प्रथा विभिन्न रूपों में आज भी जारी है। जिसकी जड़ें आर्थिक मजबूरी और तंत्रगत विफलताओं में गहराई से निहित हैं।
सामाजिक परिवर्तन और संवेदनशील शासन के बिना केवल कानूनी सुधार बंधुआ मज़दूरी के साये को समाप्त नहीं कर सकता।
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