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स्टार्ट(START) का अंत एक अवसर के रूप में

Lokesh Pal February 11, 2026 05:15 9 0

संदर्भ:

5 फरवरी 2026 को न्यू स्टार्ट (New START) संधि का समाप्त होना अमेरिका–रूस के द्विपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते के अंत को दर्शाता है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

  • हथियारों की दौड़ का दौर: 1970 और 80 के दशक में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तीव्र हथियारों की दौड़ चली। 1980 तक दोनों देशों के पास 10,000 से अधिक रणनीतिक परमाणु वारहेड्स थे।
  • SALT बनाम START: प्रारंभिक प्रयास SALT (स्ट्रैटेजिक आर्म्स लिमिटेशन टॉक्स) के रूप में शुरू हुए, जिसका उद्देश्य आगे के परीक्षणों को सीमित कर हथियारों की दौड़ को नियंत्रित करना था।
    • START-I संधि (1991) द्वारा मौजूदा भंडार को कम करने तथा नष्ट करने का प्रावधान किया गया, जिसका उद्देश्य प्रत्येक पक्ष के वारहेड्स की संख्या को लगभग 30% कम कर 6,000 तक लाना था।
  • न्यू स्टार्ट(New START): वर्ष 2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव द्वारा हस्ताक्षरित न्यू स्टार्ट संधि ने तैनात रणनीतिक वारहेड्स की संख्या 1,550 तक सीमित की तथा अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पारस्परिक ऑन-साइट निरीक्षण की व्यवस्था प्रदान की।

हथियार नियंत्रण ढाँचे के विघटन के कारण

  • भू-राजनीतिक परिवर्तन: न्यू स्टार्ट संधि का बिना नवीनीकरण या प्रतिस्थापन के समाप्त होना वैश्विक स्तर पर नव-साम्राज्यवादी प्रवृत्तियों की ओर वापसी को दर्शाता है, जिसमें व्यापारिक संरक्षणवाद, शुल्क व्यवस्था और बाजारों व क्षेत्रों के लिए रणनीतिक प्रतिस्पर्धा शामिल है।
  • विश्वास का क्षरण: ऐसे वातावरण में, जहाँ राष्ट्र क्षेत्र और व्यापार के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं (उदाहरण: ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि या आक्रामक शुल्क नीतियाँ), हथियार नियंत्रण के लिए आवश्यक आपसी विश्वास समाप्त हो गया है।
  • “चीन कारक”: विघटन का एक प्रमुख कारण चीन का एक प्रमुख परमाणु शक्ति के रूप में उदय है।
    • अमेरिका का तर्क है कि चीन के तेज़ी से परमाणु शक्ति बढ़ाने और तीव्र परीक्षणों के बीच रूस के साथ 1,550 वारहेड की सीमा का लगातार पालन रणनीतिक रूप से असंभव हो गया।

स्टार्ट के अंत में अवसर

  • द्विध्रुवीय वर्चस्व का अंत: स्टार्ट संधि का अंत परमाणु मानदंड निर्धारण पर अमेरिका–रूस के विशिष्ट नियंत्रण को कमजोर करता है, जिससे अधिक प्रतिनिधि वैश्विक ढाँचे के निर्माण के लिए अवसर निर्मित होते है।
  • समावेशी हथियार नियंत्रण की ओर: एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में, नई वार्ताओं में अन्य परमाणु शक्तियों, विशेषकर चीन को शामिल किया जा सकता है, जिससे अधिक व्यापक और संतुलित निरस्त्रीकरण संरचना विकसित की जा सके।
  • पुरानी व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार: NPT (परमाणु अप्रसार संधि) और CTBT (व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि) जैसी पुरानी और “भेदभावपूर्ण” मानी जाने वाली संधियों का क्षरण अंतरराष्ट्रीय परमाणु कानून की संरचनात्मक पुनर्रचना के लिए प्रेरित कर सकता है, ताकि वह समकालीन शक्ति संतुलन और वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करे।

निष्कर्ष

न्यू स्टार्ट संधि का अंत भारत के लिए एक अवसर प्रस्तुत करता है ताकि वह अपनी सामरिक स्वायत्तता को मजबूत करे और अधिक समावेशी वैश्विक हथियार नियंत्रण ढांचे के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: न्यू स्टार्ट संधि की समाप्ति उत्तर–शीत युद्ध काल में बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन को किस प्रकार प्रतिबिंबित करती है? न्यू स्टार्ट संधि के अंत से वर्तमान वैश्विक परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण ढाँचे के समक्ष कौन-सी चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं?

(15 अंक, 250 शब्द)

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