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Lokesh Pal
February 14, 2026 03:13
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हाल ही में नीति आयोग ने विकसित भारत 2047 और नेट जीरो 2070 को प्राप्त करने के माध्यमों को रेखांकित करने वाली रिपोर्ट जारी कीं। इस कृषि अध्ययन में यह उल्लेख किया गया है कि जहाँ कृषि अपशिष्ट उत्सर्जन अधिक है, वहीं सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील क्षेत्र भी है, जो मानव-केंद्रित परिवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।












यह क्षेत्र केवल कैलोरी का प्रदाता होने से आगे बढ़कर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का “आधार स्तंभ” और वैश्विक व्यापार का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है।

वर्तमान में यह क्षेत्र विखंडित संरचनात्मक समस्याओं का सामना कर रहा है, जहाँ व्यक्तिगत समस्याएँ छोटी होती हैं, लेकिन उनका सामूहिक प्रभाव राष्ट्रीय विकास के लिए बड़े अवरोध उत्पन्न करता है।

विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, कृषि क्षेत्र को “उत्पादन-केंद्रित” मॉडल से “सतत् आय-केंद्रित” पारिस्थितिकी तंत्र की ओर स्थानांतरित होना होगा। इसके लिए इनपुट सब्सिडी से हटकर दीर्घकालिक निवेश-आधारित अवसंरचना की ओर एक मौलिक परिवर्तन आवश्यक है।
नीति आयोग की वर्ष 2026 की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत की नेट जीरो यात्रा विकास के साथ समझौता नहीं, बल्कि उसकी पूर्व शर्त है। कृषि क्षेत्र के लिए लक्ष्य केवल “कार्बन न्यूनीकरण” नहीं, बल्कि “हरित विकास” है, जहाँ उत्सर्जन में कमी, बेहतर उत्पादन, अधिक किसान आय और एक सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सह-लाभ के रूप में प्राप्त होती है।
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