100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal February 14, 2026 04:00 10 0

‘कौशल रथ’ के बारे में

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने युवाओं में आधारभूत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए ‘सभी के लिए युवा AI’ पहल के अंतर्गत ‘कौशल रथ’ का शुभारंभ किया है।

‘कौशल रथ’ के बारे में

  • यह राष्ट्रीय AI साक्षरता कार्यक्रम ‘सभी के लिए युवा AI’ के तहत एक मोबाइल कृत्रिम बुद्धिमत्ता जागरूकता इकाई है।
  • इसे एक पूर्णतः सुसज्जित कंप्यूटर लैब के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें इंटरनेट-सक्षम प्रणालियाँ, ऑडियो-विजुअल उपकरण तथा संरचित प्रशिक्षण मॉड्यूल उपलब्ध हैं।
  • यह विद्यालयों, महाविद्यालयों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) तथा सामुदायिक स्थलों पर जाकर AI और जेनरेटिव AI उपकरणों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगा। प्रशिक्षित प्रशिक्षकों तथा भारत-विशिष्ट उपयोग मामलों के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाएगा।
  • उद्देश्य
    • भारत भर में आधारभूत AI शिक्षा तक पहुँच का लोकतंत्रीकरण करना।
    • अर्द्ध-शहरी एवं वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों, युवाओं, शिक्षकों एवं शिक्षार्थियों तक पहुँचना।
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं जनरेटिव AI उपकरणों की समझ विकसित कर AI-तैयार युवा कार्यबल का निर्माण करना।
  • यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर प्रौद्योगिकी सोसायटी (AISECT) के सहयोग से शुरू की गई एक मोबाइल AI जागरूकता और साक्षरता इकाई है।

“युवा AI फॉर ऑल” के बारे में

  • सभी के लिए युवा AI कोर्स चार घंटे का तथा स्व-गति से सीखने वाला कार्यक्रम है, जिसमें छह मॉड्यूल शामिल हैं।
  • इसके लिए कोडिंग के पूर्व ज्ञान की आवश्यकता नहीं है।
  • मुख्य क्षेत्र: AI के मूल सिद्धांत, नैतिकता, वास्तविक दुनिया में अनुप्रयोग
  • उद्देश्य: भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करना।
  • यह कार्यक्रम फ्यूचर स्किल्स प्राइम, iGOT कर्मयोगी, कोर्सेरा और TCS iON जैसे भागीदारों के सहयोग से शुरू किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध समिति 

 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 निगरानी रिपोर्ट में पाकिस्तान स्थित संगठन जैश-ए-मोहम्मद को दिल्ली लाल किला आतंकी हमले से जोड़ा गया है तथा उसके द्वारा महिलाओं के लिए एक विशेष इकाई गठित करने की योजना का उल्लेख किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध समिति के बारे में

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति की स्थापना वर्ष 1999 में की गई थी।
    • 9/11 आतंकी हमलों के पश्चात् इसे सुदृढ़ किया गया तथा वर्ष 2011 और 2015 में इसमें महत्त्वपूर्ण अद्यतन किए गए।
  • आधिकारिक नाम: इसे औपचारिक रूप से ‘दाएश और अल-कायदा प्रतिबंध समिति’ (Da’esh and Al-Qaida Sanctions Committee) कहा जाता है।
  • संरचना: इसमें सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी एवं अस्थायी सदस्य शामिल होते हैं।
    • UNSC के सभी 15 सदस्य 1267 समिति के सदस्य होते हैं।
  • निर्णय प्रक्रिया: किसी व्यक्ति, संगठन या इकाई को सूचीबद्ध करने अथवा सूची से हटाने संबंधी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
  • प्रक्रिया: कोई भी सदस्य देश किसी व्यक्ति, समूह या संस्था को प्रतिबंध सूची में शामिल करने का प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है।
  • भूमेिका
    • यह समिति अल-कायदा एवं इस्लामिक स्टेट (IS) से संबद्ध आतंकवादियों और संगठनों की वैश्विक सूची का संधारण करती है।
    • आतंकवाद पर अंकुश लगाने हेतु यह यात्रा प्रतिबंध , संपत्ति जब्ती तथा हथियार प्रतिबंध जैसे उपाय लागू करती है।

नाटो का आर्कटिक सेंट्री मिशन 

नाटो ने ‘आर्कटिक सेंट्री (Arctic Sentry)’ नामक एक नई आर्कटिक सुरक्षा पहल शुरू की है, जो सुदूर उत्तर में सहयोगी सैन्य गतिविधियों को एक ही परिचालन ढाँचे के तहत समन्वित करती है।

आर्कटिक सेंट्री मिशन के बारे में

  • यह एक एकीकृत तथा बहु-क्षेत्रीय (multi-domain) पहल है जिसका उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना, सहयोगी देशों के मध्य समन्वय बढ़ाना तथा सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण आर्कटिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है।
  • उद्देश्य: नाटो की संयुक्त क्षमताओं का उपयोग करके अपने क्षेत्रों की रक्षा करना और आर्कटिक और सुदूर उत्तर क्षेत्र में सुरक्षा तथा स्थिरता सुनिश्चित करना।
    • बाल्टिक सेंट्री और ईस्टर्न सेंट्री जैसे मौजूदा नाटो अभियानों से प्रेरणा लेते हुए, क्षेत्र में निगरानी और रक्षात्मक उपायों को सुदृढ़ करना।
  • सैन्य अभ्यास और अवसंरचना संरक्षण: इस मिशन में आर्कटिक अभियानों के लिए बलों को प्रशिक्षित करने, महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा करने और नॉर्वे, आइसलैंड तथा डेनिश जलडमरूमध्य में तोड़फोड़ के खतरों का मुकाबला करने के लिए एक्सरसाइज कोल्ड रिस्पांस (Exercise Cold Response) और यू. के. के नेतृत्व वाला लायन प्रोटेक्टर (Lion Protector) जैसे प्रमुख अभ्यास शामिल हैं।

आर्कटिक

  • आर्कटिक उत्तरी ध्रुव के चारों ओर स्थित ध्रुवीय क्षेत्र को संदर्भित करता है, जिसमें आर्कटिक महासागर तथा रूस, कनाडा, नॉर्वे, डेनमार्क (ग्रीनलैंड के माध्यम से) और संयुक्त राज्य अमेरिका (अलास्का) के उत्तरी भाग सम्मिलित हैं। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, समुद्री मार्गों और सामरिक स्थिति के कारण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

हाई नॉर्थ

  • ‘हाई नॉर्थ’ एक व्यापक सामरिक अवधारणा है, जिसका प्रयोग विशेषकर यूरोपीय सुरक्षा विमर्श में किया जाता है। यह मुख्यतः उत्तरी यूरोप, विशेषकर उत्तरी नॉर्वे एवं उससे सटे समुद्री क्षेत्रों को संदर्भित करता है और उनके भू-राजनीतिक तथा सैन्य महत्त्व को रेखांकित करता है।

सशस्त्र बलों के कर्मियों द्वारा प्रकाशन के लिए प्रस्तावित दिशा-निर्देश

सेवानिवृत्त जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच, रक्षा मंत्रालय (MoD) उन सेवारत और सेवानिवृत्त सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, जो भविष्य में पुस्तकें प्रकाशित करना चाहते हैं।

प्रस्तावित दिशा-निर्देश

  • इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य एक स्पष्ट एवं मानकीकृत पूर्व-प्रकाशन स्वीकृति (Pre-publication clearance) प्रक्रिया स्थापित करना है, जो सेवारत तथा सेवानिवृत्त दोनों प्रकार के कर्मियों पर लागू होगी।
  • इनमें वर्तमान सेवा विनियमों तथा शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 (Official Secrets Act, 1923) के प्रमुख प्रावधानों को सम्मिलित किया जाएगा।
  • मुख्य उद्देश्य “प्रक्रियात्मक अंतरालों” को समाप्त करना, वर्गीकृत या संवेदनशील सूचनाओं के अनधिकृत प्रकटीकरण को रोकना तथा ऐसे मामलों में पूर्व रक्षा मंत्रालय की अनुमति को अनिवार्य बनाना है।
  • वर्तमान में ये नियम प्रारूपण/विचाराधीन अवस्था में हैं; अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना, राजपत्र प्रकाशन या कार्यान्वयन नहीं हुआ है।

वर्तमान लागू नियम

  • वर्तमान में सशस्त्र बल कर्मियों (विशेषकर सेवानिवृत्त अधिकारियों) द्वारा पुस्तक लेखन के लिए कोई एकल समेकित कानून उपलब्ध नहीं है।

सेवारत कर्मियों के लिए

  • किसी भी साहित्यिक, पारिश्रमिक या बाह्य गतिविधि (जिसमें पुस्तक प्रकाशन भी शामिल है) हेतु पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है।
  • यह प्रावधान रक्षा सेवा विनियम, सेना अधिनियम, 1950 (Army Act, 1950) तथा सेना नियम, 1954 (Army Rules, 1954) के अंतर्गत सख्त एवं अनिवार्य है।
  • विषयवस्तु संबंधी प्रतिबंध: गोपनीय जानकारी, परिचालन विवरण, आंतरिक प्रक्रियाएँ, उपकरण क्षमताएँ, खुफिया जानकारी या राष्ट्रीय सुरक्षा/विदेशी संबंधों के लिए हानिकारक किसी भी चीज का खुलासा प्रतिबंधित है।

सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों के लिए प्रावधान

  • सेवानिवृत्ति के बाद प्रकाशन पर कोई विशिष्ट सेवा नियम (जैसे, सेना अधिनियम/नियम) प्रतिबंध नहीं लगाते; उन्हें सामान्यत: नागरिक माना जाता है।
  • शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923 (Official Secrets Act, 1923) स्थायी रूप से (जीवन भर के लिए) लागू होता है: वर्गीकृत जानकारी, संवेदनशील परिचालन विवरण या भारत की संप्रभुता/सुरक्षा के लिए हानिकारक सामग्री का खुलासा/संचार करना आपराधिक अपराध है।
  • लेखकों से अपेक्षा की जाती है कि वे परिचालन/संवेदनशील विवरण वाली पांडुलिपियों को स्वैच्छिक मंजूरी/सत्यापन के लिए रक्षा मंत्रालय को प्रस्तुत करें।

दवा प्रतिरोधी टीबी के लिए संक्षिप्त पूर्णतः मौखिक उपचार

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय क्षय रोग अनुसंधान संस्थान (ICMR–NIRT) के एक हालिया अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला है कि बहु-दवा प्रतिरोधी एवं रिफाम्पिसिन-प्रतिरोधी क्षय रोग (MDR/RR-TB) के विरुद्ध छह माह की पूर्णतः मौखिक उपचार पद्धतियाँ अधिक लागत-प्रभावी हैं तथा बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्रदान करती हैं।

बहु-दवा प्रतिरोधी/रिफाम्पिसिन-प्रतिरोधी क्षय रोग (MDR/RR-TB) के बारे में:

  • MDR/RR-TB, क्षय रोग (TB) के सबसे गंभीर रूपों में से एक है और भारत जैसे उच्च-भार (high-burden) वाले देशों के लिए एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है।
  • MDR-TB: माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के कारण होने वाला क्षय रोग, जो कम-से-कम आइसोनियाज़िड और रिफैम्पिसिन (दो सबसे प्रभावी प्राथमिक उपचार दवाएँ) के प्रति प्रतिरोधी होता है।
  • RR-TB: रिफाम्पिसिन के प्रति प्रतिरोध (चाहे अन्य दवाओं के प्रति प्रतिरोध हो या न हो)। इसे प्रायः MDR-TB के साथ समूहित कर MDR/RR-TB कहा जाता है।
  • यह समस्या मुख्यतः मानव-निर्मित (human-made) है, जो अनुचित TB प्रबंधन, अपूर्ण उपचार या दवाओं के गलत उपयोग के कारण उत्पन्न होती है।
  • एमडीआर/आरआर-टीबी का इलाज मुश्किल होता है क्योंकि उपचार की अवधि लंबी होती है (कम अवधि के उपचार के लिए 9-11 महीने या लंबी अवधि के उपचार के लिए 18-20 महीने)।

अध्ययन में उपचार की तुलना

  • अध्ययन में मौजूदा उपचार पद्धतियों की तुलना दो नई बेडाक्विलिन-आधारित (bedaquiline-based), पूर्णतः मौखिक उपचार योजनाओं से की गई:
    • BPaL: बेडाक्विलिन + प्रेटोमैनिड + लाइनज़ोलिड (6 माह)
    • BPaLM: BPaL + मोक्सीफ्लॉक्सासिन (6 माह)
  • ये अल्पावधि उपचार योजनाएँ पूर्णतः मौखिक (बिना इंजेक्शन) होने के कारण उपचार को सरल बनाती हैं तथा अवधि को उल्लेखनीय रूप से कम करती हैं।

ICMR–NIRT अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

  • छह माह की पूर्णतः मौखिक दवाइयाँ किफायती हैं: BPaL एवं BPaLM (6 माह) उपचार योजनाएँ राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अंतर्गत प्रचलित 9–11 माह तथा 18–20 माह की योजनाओं की तुलना में अधिक किफायती पाई गईं।
  • बेहतर रोगी परिणाम: उपचार अनुपालन में सुधार, रुग्णता एवं दुष्प्रभावों में कमी, सामान्य जीवन में शीघ्र वापसी की संभावना।
  • क्षय उन्मूलन लक्ष्यों को समर्थन: कम अवधि (6 महीने बनाम 9-20 महीने) राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के उद्देश्यों के अनुरूप है।

महर्षि दयानंद सरस्वती 

 

भारत के राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति ने महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

महर्षि दयानंद सरस्वती (1824–1883) के बारे में

  • महर्षि दयानंद सरस्वती 19वीं शताब्दी के प्रमुख हिंदू समाज-सुधारक तथा आर्य समाज के संस्थापक थे। उन्होंने वैदिक सिद्धांतों की पुनर्स्थापना और सामाजिक सुधार का आह्वान किया।
  • प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 12 फरवरी, 1824 को गुजरात के टंकारा में हुआ। उनका बचपन का नाम मूलशंकर था।
    • उन्होंने किशोरावस्था में ही मूर्ति पूजा पर सवाल उठाए, 22 वर्ष की आयु में गृहस्थी त्याग दिया और बाद में स्वामी विरजानंद के अधीन अध्ययन किया, जिससे उनके वैदिक दर्शन को आकार मिला।
  • दर्शन: उन्होंने “वेदों की ओर लौटो” का नारा प्रचारित किया, जिसमें एकेश्वरवाद, शास्त्रों की तर्कसंगत व्याख्या, मूर्ति पूजा का त्याग और स्वराज (स्वशासन) की प्राप्ति पर जोर दिया गया।
  • प्रमुख योगदान
    • धार्मिक सुधार: उन्होंने अंधविश्वास, कर्मकांड और सामाजिक बुराइयों को दूर करके हिंदू धर्म को शुद्ध करने के लिए 1875 में आर्य समाज की स्थापना की।
    • सामाजिक समानता: उन्होंने जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता का विरोध किया और जन्म के बजाय योग्यता और व्यवसाय पर आधारित वर्ण व्यवस्था की वकालत की।
    • महिला सशक्तीकरण: उन्होंने महिलाओं की शिक्षा का समर्थन किया और बाल विवाह और सती प्रथा का विरोध किया।
    • साहित्यिक रचनाएँ: उनकी महत्वपूर्ण रचना सत्यार्थ प्रकाश में वैदिक शिक्षाओं का प्रतिपादन किया गया है और सामाजिक और धार्मिक रूढ़िवादिता की आलोचना की गई है।
  • मृत्यु: उनका निधन 30 अक्टूबर, 1883 को अजमेर (राजस्थान) में हुआ।
  • विरासत: वर्ष 1886 में दयानंद एंग्लो-वैदिक (DAV) आंदोलन की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य स्वामी दयानंद सरस्वती की शैक्षिक एवं सामाजिक दृष्टि को साकार करना था।
    • वर्तमान में, DAV कॉलेज मैनेजिंग कमेटी (DAVCMC) भारत एवं विदेशों में 900 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों- सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों, पब्लिक स्कूलों एवं महाविद्यालयों का संचालन कर रही है।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.