100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

गोपनीयता और पारदर्शिता: RTI अधिनियम संशोधन पर याचिकाएँ

Lokesh Pal February 20, 2026 05:00 6 0

संदर्भ:

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(j) में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 द्वारा किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संवैधानिक रूप से संवेदनशील बताते हुए संविधान पीठ को संदर्भित किया है।

पृष्ठभूमि: पारदर्शिता के तंत्र के रूप में RTI

  • RTI अधिनियम, 2005 का उद्देश्य: इसे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने तथा नागरिकों और राज्य के बीच सूचना की असमानता को कम करने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था।
  • धारा 8(1)(j) के अंतर्गत जनहित सुरक्षा: व्यक्तिगत जानकारी को प्रकटीकरण से छूट दी गई थी।
    • हालाँकि, लोक अधिकारियों की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे संपत्ति के अभिलेख, तब सार्वजनिक की जा सकती थी जब वे भ्रष्टाचार या पद का दुरुपयोग करते है, क्योंकि ऐसी स्थिति में जनहित, निजता पर वरीयता रखता है।
    • इसने मामला-दर-मामला आधार पर अनुपातिकता (proportionality) के सिद्धांत को स्थापित किया।
  • धारा 8(1)(j) में संशोधन: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 ने इस धारा में संशोधन कर निजता और पारदर्शिता के बीच संतुलन को परिवर्तित कर दिया, जिससे RTI की जवाबदेही व्यवस्था के कमजोर होने की आशंकाएँ उत्पन्न हुईं।

संवैधानिक आयाम और न्यायिक उदाहरण

  • अनुच्छेद 19(1)(a): सूचना का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से व्युत्पन्न हुआ है। पारदर्शिता, सूचित सहभागिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही को सक्षम बनाती है।
  • अनुच्छेद 21: निजता के अधिकार को, पुट्टस्वामी (2017) मामले में एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त हुआ, जो सूचना संबंधी स्वायत्तता और गरिमा की रक्षा करता है।
  • न्यायिक उदाहरण: CPIO बनाम सुभाष चंद्र अग्रवाल (2019) मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि व्यापक जनहित इसे न्यायसंगत ठहराता है, तो व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा किया जा सकता है, जिससे अनुपातिकता और संतुलन के सिद्धांतों की संवैधानिक पुष्टि हुई।

RTI अधिनियम में DPDP संशोधन द्वारा किए गए परिवर्तन

  • जनहित अपवाद का हटाया जाना: पहले के जनहित अपवाद को बनाए रखे बिना, “व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित किसी भी सूचना” के प्रकटीकरण को प्रतिबंधित करता है।
    • लोक सूचना अधिकारियों (PIO) को निजता और व्यापक जनहित के बीच संतुलन स्थापित करने का विवेकाधिकार समाप्त कर दिया गया है।
    • व्यवहारिक रूप से यह एक व्यापक छूट प्रदान करता है, जिसका उपयोग निम्नलिखित सूचनाओं तक पहुँच को सीमित करता है: लोक अधिकारियों के अभिलेख; खरीद और अनुबंध प्रक्रियाएँ; लेखा परीक्षा रिपोर्ट और निष्कर्ष तथा सार्वजनिक व्यय से संबंधित विवरण।

राज्य और नागरिक के बीच विद्यमान शक्ति असमानता

  • नागरिकों को सूचना से वंचित करना: राज्य, निजता संरक्षण का हवाला देकर सूचना देने से इंकार कर सकता है।
  • राज्य की विस्तारित डेटा प्रसंस्करण अधिकार: DPDP अधिनियम की धारा 7 सरकार को “वैध उपयोगों” के लिए नागरिकों के डेटा को उनकी सहमति के बिना संसाधित करने की अनुमति प्रदान करता है।
  • लोकतांत्रिक असंतुलन: ऐसी असमानता उत्पन्न होती है जिसमें राज्य नागरिकों की निगरानी कर सकता है, जबकि नागरिकों की राज्य की जाँच करने की क्षमता कमजोर हो जाती है।

पत्रकारिता के लिए खतरा

  • डेटा फिड्यूशियरी के रूप में वर्गीकरण का जोखिम: भ्रष्टाचार की जाँच करने वाले पत्रकारों को DPDP अधिनियम के तहत “डेटा फिड्यूशियरी” माना जा सकता है।
  • भारी दंड का जोखिम: रिपोर्टिंग के दौरान कथित निजता उल्लंघन पर ₹250 करोड़ तक का दंड लगाया जा सकता है, जिससे भारत में पत्रकारिता खतरे में पड़ सकती है।
  • मीडिया की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव: नियामक कार्रवाई के भय से पत्रकारिता हतोत्साहित हो सकती है, जिससे लोकतांत्रिक जवाबदेही कमजोर हो सकता है।

वैश्विक मानकों की तुलना में संतुलन का अभाव

  • सामान्य डेटा संरक्षण विनियमन (GDPR) के तहत स्थिति: यूरोपीय संघ का सामान्य डेटा संरक्षण विनियमन (GDPR) एक मजबूत निजता सुरक्षा प्रदान करता है, साथ ही पत्रकारिता स्वतंत्रता और जनहित प्रकटीकरण के लिए सुरक्षा उपाय भी बनाए रखता है।
  • भारतीय विनियमन में विद्यमान समस्याएँ: GDPR के विपरीत, जो डेटा सुरक्षा और पत्रकारिता स्वतंत्रता के बीच स्पष्ट संतुलन स्थापित करता है, भारतीय विनियमन खोजी रिपोर्टिंग को सीमित कर सकता है और अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रेस की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है।

आगे की राह

  • ‘व्यक्तिगत जानकारी’ की व्याख्या: संविधान पीठ को शासन के संदर्भ में “व्यक्तिगत जानकारी” को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना चाहिए, ताकि अत्यधिक व्यापक छूट से बचा जा सके।
  • जनहित अपवाद की पुनर्स्थापना: न्यायालय व्यक्तिगत जानकारी के प्रकटीकरण की अनुमति देने वाले नियम को पुनर्स्थापित कर सकता है, विशेषकर भ्रष्टाचार या शक्ति के दुरुपयोग के मामलों में।
  • अनुपातिकता परीक्षण: प्रकटीकरण पर कोई भी प्रतिबंध संवैधानिक अनुपातिकता परीक्षण को पूरा करना चाहिए, अर्थात् यह तर्कसंगत, आवश्यक और पारदर्शिता की आवश्यकता के साथ संतुलित होना चाहिए।
  • पत्रकारिता की सुरक्षा: लोकतांत्रिक निगरानी पर प्रतिकूल प्रभाव से बचाने के लिए विनियमन में पत्रकारिता से संबंधित स्पष्ट सुरक्षा संबंधी प्रावधान शामिल होने चाहिए।
  • मौलिक अधिकारों का समन्वय: संविधान पीठ को अनुच्छेद 19(1)(a) और अनुच्छेद 21 के बीच ऐसा संतुलन स्थापित करना चाहिए, जिससे पारदर्शिता और निजता दोनों की रक्षा हो और कोई भी अधिकार पूर्णतः दूसरे पर हावी न हो।

निष्कर्ष

RTI ने नागरिकों को राज्य से प्रश्न पूछने का अधिकार देकर लोकतंत्र को सशक्त बनाया है। लेकिन न्यायालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि निजता की रक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को कमजोर न करे।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: चर्चा कीजिए कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(j) में संशोधन किस प्रकार नागरिकों के जानने के अधिकार और राज्य के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के दायित्व के बीच संतुलन को प्रभावित करता है। इसका लोकतांत्रिक जवाबदेही पर क्या प्रभाव पड़ सकता हैं?

 (10 अंक, 150 शब्द)

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.