100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

IIT मद्रास के शोधकर्ताओं द्वारा रक्त का थक्का निर्माण के समय (BCT) के लिए प्रकाशीय तकनीक

Lokesh Pal February 23, 2026 02:51 5 0

संदर्भ

आईआईटी-मद्रास (IIT-Madras) के शोधकर्ताओं एक प्रकाशिकी-आधारित तकनीक विकसित की है, जो चिकित्सीय प्रत्यारोपणों में प्रयुक्त सामग्रियों की सतह पर रक्त के थक्का बनने में लगने वाले समय की सटीक माप करने में सक्षम है।

रक्त के थक्का (ब्लड क्लोटिंग) बनने के बारे में

  • रक्त का थक्का बनना (कोएगुलेशन) एक संरक्षणात्मक शारीरिक प्रक्रिया है, जो रक्त वाहिका के क्षतिग्रस्त होने पर अत्यधिक रक्तस्राव को रोकती है।
    • यह चोटिल  स्थान पर द्रव रक्त को अर्द्ध-ठोस जेल (थक्का) में परिवर्तित कर देता है।
  • यह एक बहु-चरणीय श्रेणीबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें प्लेटलेट्स और कोएगुलेशन फैक्टर/कारक सम्मिलित होते हैं, जो फाइब्रिनोजेन प्रोटीन को फाइब्रिन में परिवर्तित करते हैं, जिससे एक जाल का निर्माण होता है, जो रक्त के थक्के को स्थिर करता है।
  • थक्का बनने से संबंधित विकार: हीमोफीलिया, वॉन विलेब्रांड रोग।

ब्लड क्लोटिंग में सम्मिलित घटक

  • प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइट्स)
    • अस्थि मज्जा में मेगाकारियोसाइट्स से उत्पन्न होते हैं।
    • अस्थायी प्लेटलेट प्लग का निर्माण करते हैं।
  • क्लोटिंग फैक्टर (I–XIII)
    • अधिकांशतः यकृत में संश्लेषित होते हैं।
    • इनमें से कई विटामिन K पर निर्भर होते हैं (II, VII, IX, X)।
  • फाइब्रिनोजेन (फैक्टर I)
    • घुलनशील प्लाज्मा प्रोटीन → फाइब्रिन में परिवर्तित होता है।
  • कैल्शियम आयन (फैक्टर IV)
    • थक्का बनने की श्रेणीबद्ध प्रक्रिया को सक्रिय करने हेतु  आवश्यक।

आरेखात्मक प्रस्तुति

चोट → प्लेटलेट प्लग → प्रोथ्रोम्बिन → थ्रोम्बिन → फाइब्रिनोजेन → फाइब्रिन → थक्का/क्लॉट → प्लास्मिन → थक्के का विघटन

संबंधित तथ्य

  • चिकित्सीय प्रत्यारोपण मेडिकल इंप्लांट (Medical Implants) ऐसे उपकरण या ऊतक होते हैं, जिन्हें जैविक कार्यों को प्रतिस्थापित करने, अवलंबन प्रदान करने या उन्नत करने के लिए शरीर के भीतर या उसकी सतह पर स्थापित किया जाता है। ये प्रत्यारोपण प्रतिरोपणों (जिनमें दाता ऊतक या डोनेट टिसू का उपयोग होता है) से भिन्न होते हैं, क्योंकि प्रत्यारोपण मानव-निर्मित होते हैं।
  • यह निर्माताओं को सामग्री की रक्त अनुकूलता या हेमोकम्पैटिबिलिटी (Haemocompatibility) का आकलन करने में सहायक है तथा जल शुद्धता परीक्षण जैसे संभावित अनुप्रयोग भी रखता है।

हेमोकम्पैटिबिलिटी (Haemocompatibility) के बारे में 

  • हेमोकम्पैटिबिलिटी से आशय किसी जैव-पदार्थ या चिकित्सीय उपकरण की उस क्षमता से है, जिसके माध्यम से वह रक्त के साथ सुरक्षित रूप से संपर्क स्थापित कर सके, बिना किसी प्रतिकूल प्रतिक्रिया जैसे थक्का निर्माण (थ्रोम्बोसिस), हीमोलाइसिस, प्लेटलेट सक्रियण या प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्पन्न किए।
  • जैव-चिकित्सीय उपकरणों में महत्त्व
    • रक्त-संपर्क करने वाले चिकित्सीय उपकरणों के अभिकल्पन और विकास में हेमोकम्पैटिबिलिटी एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानदंड है, जैसे:
      • स्टेंट
      • हृदय वाल्व
      • कैथेटर
    • कमजोर हेमोकम्पैटिबिलिटी से थक्का निर्माण, उपकरण विफलता, आघात (स्ट्रोक) या प्रणालीगत सूजन जैसी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

प्रकाशिकी-आधारित तकनीक कैसे कार्य करती है?

  • यह प्रणाली परावर्तित प्रकाश (प्रकाशीय परावर्तन) का उपयोग कर वास्तविक समय में थक्का निर्माण की निगरानी करती है।
  • परीक्षण सतह पर उपस्थित रक्त के जमने के साथ प्रकाश के परावर्तन के तरीके में परिवर्तन होता है; इस परिवर्तन का पता लगाया और मापा जाता है।
  • यह पारंपरिक विधियों की तुलना में, जो यांत्रिक या मानवीय अवलोकन पर निर्भर करती हैं, अधिक समय-सटीकता और वस्तुनिष्ठता प्रदान करती है।

विशेषता पारंपरिक विधियाँ IIT-M प्रकाशीय विधि
शुद्धता मध्यम उच्च (सटीक रियल-टाइम मापन)
स्वचालन मैनुअल अवलोकन स्वचालित प्रकाशीय पहचान
प्रत्यारोपण परीक्षण के लिए उपयुक्तता सीमित हेमोकम्पैटिबिलिटी के लिए अनुकूलित
त्रुटि की संभावना मानवीय/व्यक्तिपरक वस्तुनिष्ठ एवं संवेदनशील

अनुप्रयोग

  • थक्का परीक्षण में सुधार: यह विधि सतह परावर्तन में होने वाले परिवर्तनों की निगरानी कर थक्का निर्माण का अधिक तीव्र, अधिक सटीक तथा गैर-आक्रामक पता लगाने में सक्षम बनाती है।
    • उचित हेमोकम्पैटिबिलिटी, थक्का निर्माण के कारण होने वाली प्रत्यारोपण विफलता को कम करती है।
  • गुणवत्ता नियंत्रण: इसे प्रत्यारोपण निर्माताओं द्वारा जैव-पदार्थों की सतहों का मूल्यांकन एवं सुधार करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
  • पदार्थों की जाँच:यह निम्न के लिए पदार्थों की मात्रात्मक जाँच की अनुमति देता है:
    • हेमोकम्पैटिबिलिटी
    • थक्का निर्माण व्यवहार।
  • जल शुद्धता परीक्षण: आधार-सतह में उपयुक्त संशोधन के साथ, यही तकनीक:
    • जल में सूक्ष्म अशुद्धियों का पता लगा सकती है
    • तीव्र स्क्रीनिंग उपकरण के रूप में कार्य कर सकती है।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.