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इंडिया-AI इंपैक्ट समिट, 2026

Lokesh Pal February 24, 2026 03:10 5 0

संदर्भ

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-AI इंपैक्ट समिट, 2026 ने पश्चिम के “सुरक्षा-प्रथम” नियामक मॉडल से ‘प्रभाव-प्रथम’ विकासात्मक प्रतिमान की ओर एक ऐतिहासिक परिवर्तन को चिह्नित किया।

संबंधित तथ्य

  • पाँच लाख आगंतुकों को आकर्षित करने वाले इस शिखर सम्मेलन ने ग्लोबल साउथ के लिए तकनीकी मानक स्थापित करने वाले देश के रूप में भारत के उदय का संकेत दिया।
  • हाल ही में भारत द्वारा ग्लोबल AI समिट (16-20 फरवरी, 2026) की मेजबानी से पूर्व, स्विट्जरलैंड ने वर्ष 2027 में जिनेवा में अगले संस्करण की मेजबानी करने के अपने उद्देश्य की घोषणा की, जो AI शासन और विनियमन पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते संस्थागतकरण को दर्शाता है।

नई दिल्ली घोषणा

  • AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण
    • पहुँच और अवसंरचना: इस बात पर जोर दिया गया है कि किफायती कनेक्टिविटी और मजबूत डिजिटल अवसंरचना AI के उपयोग के लिए आवश्यक शर्तें हैं।
    • वैश्विक समानता: “वसुधैव कुटुंबकम्” से प्रेरित होकर, इसका लक्ष्य AI संसाधनों को सभी देशों के लिए सुलभ बनाना है ताकि उनके नागरिकों को लाभ मिल सके।
    • प्रमुख पहल: AI के लोकतांत्रिक प्रसार के लिए चार्टर, एक स्वैच्छिक ढाँचा है, जो मूलभूत संसाधनों और स्थानीय नवाचार को बढ़ावा देता है।
  • आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण
    • विस्तारशीलता: यह व्यापक स्तर पर अपनाने और विभिन्न क्षेत्रों में अनुकूलनशीलता को बढ़ावा देने के लिए ओपन-सोर्स अनुप्रयोगों और सुलभ दृष्टिकोणों पर प्रकाश डालता है।
    • व्यावहारिक प्लेटफॉर्म: यह विकास को गति देने के लिए सफल AI उपयोग मामलों के दोहराव पर केंद्रित है।
    • प्रमुख पहल: ग्लोबल AI इंपैक्ट कॉमन्स, एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो विभिन्न क्षेत्रों में सफल AI तैनाती को साझा करने और विस्तारित करने के लिए है।
  • सुरक्षित और विश्वसनीय AI
    • विश्वास के आधार: सामाजिक लाभ को अधिकतम करने के लिए AI जीवनचक्र के दौरान सुरक्षा और मजबूती को प्राथमिकता देता है।
    • नीति एवं तकनीकी मानक: जनहित की रक्षा के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले स्वैच्छिक उपायों और तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करता है।
    • प्रमुख पहल: ट्रस्टेड AI कॉमन्स, बेंचमार्क, उपकरण और सर्वोत्तम प्रथाओं का एक सहयोगात्मक भंडार।
  • विज्ञान में AI
    • अनुसंधान अवसंरचना: वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपलब्धता बढ़ाने हेतु संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने पर केंद्रित।
    • सीमा पार सहयोग: वैज्ञानिक खोजों को गति देने हेतु विशेषज्ञता और संसाधनों का एकीकरण करना।
    • प्रमुख पहल: विज्ञान संस्थानों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, जो प्रभावी उपयोग को गति देने हेतु वैज्ञानिक समुदायों को जोड़ता है।
  • सामाजिक सशक्तीकरण के लिए पहुँच
    • समावेशन: यह मंच कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके समाज के सभी वर्गों को ज्ञान, सेवाएँ और अवसर प्रदान करता है।
    • ज्ञान का आदान-प्रदान: सामाजिक उत्थान के उद्देश्य से विशेष रूप से तैयार किए गए ज्ञान और व्यावहारिक पद्धतियों को साझा करने में सहायता करना।
    • प्रमुख पहल: सामाजिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने वाली व्यावहारिक पद्धतियों के आदान-प्रदान के लिए एक सहयोगात्मक मंच।
  • मानव पूँजी
    • कौशल विकास: इसका उद्देश्य AI साक्षरता, कार्यबल प्रशिक्षण और AI-संचालित अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने हेतु सार्वजनिक अधिकारियों की शिक्षा प्रदान करना है।
    • भविष्य की तैयारी: व्यावसायिक उन्नयन और अंतरराष्ट्रीय कौशल विकास पहलों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
    • प्रमुख पहल: कौशल विकास के लिए स्वैच्छिक मार्गदर्शक सिद्धांत और AI कार्यबल विकास पर एक मार्गदर्शिका।
  • लचीलापन, नवाचार और दक्षता
    • सतत् विकास: ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों की बढ़ती माँग को ध्यान में रखते हुए, ऊर्जा-कुशल प्रणालियों के विकास की वकालत करता है।
    • स्थानीय नवाचार: स्थानीय विकास और साझा लक्ष्यों को गति देने के लिए AI प्रणालियों को किफायती बनाए रखने का लक्ष्य रखता है।
    • प्रमुख पहल: दक्षता के लिए स्वैच्छिक मार्गदर्शक सिद्धांत और लचीले AI अवसंरचना को आगे बढ़ाने के लिए एक कार्यप्रणाली पुस्तिका।

इंडिया-AI इंपैक्ट समिट, 2026 की प्रमुख बिंदु

  • लोकतांत्रिक विस्तार हेतु नई दिल्ली घोषणा और चार्टर: 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों (बांग्लादेश अंतिम हस्ताक्षरकर्ता के रूप में) द्वारा समर्थित यह दस्तावेज कृत्रिम बुद्धिमत्ता के ‘लोकतांत्रिक विस्तार’ की दिशा में एक औपचारिक परिवर्तन को स्थापित करता है।
    • यह अनिवार्य करता है कि मूलभूत संसाधन (विशेष रूप से उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग-HPC) और सत्यापित डेटासेट) को वैश्विक सार्वजनिक हित के रूप में माना जाए ताकि ‘तकनीकी निर्भरता’ को रोका जा सके।
    • ‘सर्वजन हिताय’ दर्शन: यह घोषणा स्पष्ट रूप से ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय(सभी का कल्याण, सभी की खुशी) के भारतीय लोकाचार को समाहित करती है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को UPI तथा आधार की डिजिटल संरचना के समान एक वैश्विक सार्वजनिक हित के रूप में स्थापित करती है।
  • क्रिया के सात चक्र: शिखर सम्मेलन की चर्चा सात विषयगत स्तंभों (चक्रों) के दायरे में आयोजित की गई थी, जिनमें मानव पूँजी विकास से लेकर ऊर्जा-कुशल कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक शामिल थे, जिससे तकनीकी विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण सुनिश्चित हुआ (चित्र देखें)।

चक्र मुख्य क्षेत्र
मानव पूँजी AI-सक्षम भविष्य के कार्य के लिए समान कौशल विकास और समावेशी कार्यबल परिवर्तन को बढ़ावा देना।
सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन ऐसे AI सिस्टम विकसित करना जो डिजाइन में ही समावेशी हों, विविध समुदायों को सशक्त बनाएँ और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करें।
सुरक्षित और विश्वसनीय AI पारदर्शिता, जवाबदेही और नवाचार के लिए साझा सुरक्षा उपायों पर आधारित वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय AI सिस्टम का निर्माण करना।
विज्ञान अग्रणी विज्ञान को गति देने, वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण खोजों को साझा वैश्विक प्रगति में बदलने के लिए AI का उपयोग करना।
लचीलापन, नवाचार और दक्षता जलवायु लचीलापन और स्थिरता को मजबूत करने वाले टिकाऊ, संसाधन-कुशल AI सिस्टम को बढ़ावा देना।
AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण समावेशी नवाचार और सतत विकास के लिए वैश्विक स्तर पर मूलभूत AI संसाधनों तक समान पहुँच को बढ़ावा देना।
आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के लिए AI अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में उत्पादकता, नवाचार और समावेशी विकास को बढ़ाने के लिए AI का लाभ उठाना।

  • MANAV विजन (प्रधानमंत्री मोदी की मानव-केंद्रित योजना)
    • M–नैतिक प्रणालियाँ: एल्गोरिदम में सामाजिक-सांस्कृतिक पूर्वाग्रहों को कम करने के लिए वैश्विक नैतिक सुरक्षा उपायों की स्थापना।
    • A–जवाबदेह शासन: एल्गोरिदम ऑडिट और पारदर्शी निगरानी के माध्यम से सत्यापन योग्य पारदर्शिता लागू करना।
    • N–राष्ट्रीय संप्रभुता: डेटा संप्रभुता का दावा करना, यह सुनिश्चित करना कि नागरिकों द्वारा उत्पन्न डेटा राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत रहे।
    • A–सुलभ और समावेशी: ‘डिजिटल इंटेलिजेंस डिवाइड’ को रोकने के लिए सभी 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं का समर्थन करके ‘भाषायी न्याय’ को प्राथमिकता देना।
    • V–वैध और कानूनी: आउटपुट की कानूनी वैधता और पता लगाने योग्य होने को सुनिश्चित करने के लिए AI सामग्री के लिए मूल प्रमाण और वॉटरमार्किंग अनिवार्य करना।
  • अग्रणी AI प्रभाव प्रतिबद्धताएँ: प्रमुख वैश्विक और घरेलू प्रौद्योगिकी कंपनियों ने वैश्विक संदर्भों में AI प्रणालियों के मूल्यांकन के लिए स्वैच्छिक ढाँचों पर हस्ताक्षर किए, विशेष रूप से विकासशील देशों को AI के आर्थिक प्रभाव का पता लगाने में मदद करने के लिए गुमनाम उपयोग संबंधी डेटा प्रकाशित करने का वादा किया।
  • आर्थिक और अनुसंधान संबंधी अप्रत्याशित लाभ
    • इसके अतिरिक्त, अत्याधुनिक गहन प्रौद्योगिकी अनुसंधान के लिए विशेष रूप से 20 अरब डॉलर की राशि आवंटित की गई, जिससे भारत सेवा-उन्मुख अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर अनुसंधान-आधारित महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हुआ।
    • अवसंरचना निवेश का विवरण: 250 अरब डॉलर की यह प्रतिबद्धता विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भौतिकता को लक्षित करती है।
      • इसमें 1 गीगावॉट AI-तैयार डेटा सेंटर के निर्माण के लिए अमेजन से 2.9 लाख करोड़ रुपये और माइक्रोसॉफ्ट से 1.5 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं।
    • सर्वम-105B और भारतजेन: सर्वम-105B – ए मल्टी-बिलियन पैरामीटर मिक्सचर ऑफ एक्सपर्ट्स (MoE) मॉडल के शुभारंभ ने भारतीय भाषाओं में ध्वनि-प्रधान अंतःक्रियाओं के लिए अनुकूलित संप्रभु आधारभूत मॉडल बनाने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया, जो स्थानीय सांस्कृतिक मानकों पर पश्चिमी मॉडलों से बेहतर प्रदर्शन करता है।
    • इंडियाAI मिशन 2.0: सरकार ने मिशन 2.0 की ओर अग्रसर होने की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य 38,000 स्वतंत्र GPU को राष्ट्रीय कंप्यूट पोर्टल में एकीकृत करना है, जिससे भारत ‘कंप्यूट ऑटोनॉमी’ के निकट पहुँच सके।
  • स्वदेशी तकनीकी उपलब्धियाँ: सर्वम् AI के मल्टी बिलियन पैरामीटर LLMs के शुभारंभ ने कुशल, ओपन-सोर्स मॉडल बनाने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया, जो स्थानीय मानकों पर पश्चिमी समकक्षों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बारे में

  • परिचय: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंप्यूटर विज्ञान की एक शाखा है, जिसका उद्देश्य तर्क (नियमों का उपयोग करके निष्कर्ष निकालना), अधिगम (जानकारी और उसके उपयोग के नियम प्राप्त करना) और स्व-सुधार करने में सक्षम प्रणालियाँ बनाना है।
  • उद्देश्य: आर्थिक विकास, उत्पादकता वृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देना, जो इस दृष्टिकोण को दर्शाता है कि AI नेतृत्व भू-राजनीतिक शक्ति, आर्थिक प्रतिस्पर्द्धा और रणनीतिक स्वायत्तता का निर्धारक है।
  • प्रौद्योगिकी फोकस: AI प्रौद्योगिकी विभिन्न बुद्धिमान व्यवहार प्रदर्शित करने वाली प्रणालियों के निर्माण पर केंद्रित है, जिनमें शामिल हैं:
    • मशीन लर्निंग (ML): AI का एक उपसमूह, ML प्रणालियों को स्पष्ट रूप से प्रोग्राम किए बिना डेटा से सीखने और समय के साथ सुधार करने में सक्षम बनाता है।
    • नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP): इसका उद्देश्य मशीनों को मानव भाषा को समझने, उसकी व्याख्या करने और उस पर प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाना है।
    • कंप्यूटर विजन: छवियों या वीडियो जैसे दृश्य इनपुट के आधार पर निर्णय लेने और उनकी व्याख्या करने की मशीनों की क्षमता।
    • रोबोटिक्स: यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को सेंसर और एक्चुएटर्स के साथ जोड़कर मशीनों को भौतिक जगत के साथ परस्पर क्रिया करने तथा कार्य करने में सक्षम बनाता है।
    • डीप लर्निंग: यह मशीन लर्निंग का एक विशेष क्षेत्र है, जो बड़ी मात्रा में डेटा को संसाधित करने के लिए कई परतों वाले न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करता है, जिससे अक्सर वाक् और छवि पहचान जैसे क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण खोजें होती हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का वर्गीकरण

  • नैरो AI (कमजोर AI): स्पष्ट कार्यों को करने के लिए डिजाइन किए गए विशिष्ट कार्य-आधारित सिस्टम, जैसे– चेहरे की पहचान, वाक् प्रसंस्करण, अनुशंसा इंजन या भाषा अनुवाद (उदाहरण के लिए भाषिणी)।
    • वास्तविक दुनिया में उपयोग में आने वाला AI का वर्तमान और प्रमुख रूप यही है।
  • जनरल AI (मजबूत AI): AI का एक सैद्धांतिक रूप, जो किसी भी क्षेत्र में बुद्धिमत्ता को समझने, सीखने और लागू करने में सक्षम है, जो तर्क, अमूर्तता तथा सामान्य ज्ञान जैसी मानवीय संज्ञानात्मक क्षमताओं के तुलनीय है।
    • अभी तक अस्तित्व में नहीं है; यह गहन नैतिक और शासन संबंधी प्रश्न उठाता है।
  • जेनरेटिव AI: AI का एक विशेष उपसमूह (मुख्य रूप से नैरो AI के अंतर्गत), जो बड़े डेटासेट से सांख्यिकीय पैटर्न सीखकर पाठ, चित्र, ऑडियो, वीडियो और कोड सहित नई सामग्री उत्पन्न कर सकता है (उदाहरण के लिए ChatGPT, Gemini, DALL·E)
    • रचनात्मकता, उत्पादकता और श्रम बाजारों पर इसके प्रभाव के कारण यह आर्थिक रूप से विघटनकारी है।

इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 का महत्त्व

  • ‘तकनीकी प्रतिस्पर्द्धा’ में रणनीतिक स्वायत्तता: ‘अमेरिकी AI स्टैक’ पर पूरी तरह निर्भर रहने के अमेरिकी प्रस्ताव को अस्वीकार करके, भारत ने एक संप्रभु ऊर्ध्वाधर प्रौद्योगिकी स्टैक विकसित करने के अपने अधिकार पर बल दिया, जिससे यह सुनिश्चित हो गया कि वह स्थायी रूप से किसी ‘रणनीतिक निर्भरता’ का शिकार न बने।
  • पैक्स सिलिका का औपचारीकरण: अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल होकर, भारत ने ‘सिलिकॉन स्टैक’ में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर ली है।
    • यह कच्चे खनिजों से लेकर 2 nm चिप डिजाइन तक, सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं के लिए एक ‘विश्वसनीय कॉरिडोर’ सुनिश्चित करता है, जो भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के ‘प्रतिस्पर्द्धी सेमीकंडक्टर समूहों” का सीधा मुकाबला करता है।
  • ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व: शिखर सम्मेलन ने AI को सावधानीपूर्ण नियामक दृष्टिकोण(पश्चिमी दृष्टिकोण) से सफलतापूर्वक पुनर्परिभाषित करके ‘विकास को बढ़ावा देने वाले(भारतीय दृष्टिकोण) के रूप में स्थापित किया, जिससे AI को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के रूप में स्थापित किया गया।
  • विकास का त्रिकोण: इस आयोजन में भारत के अद्वितीय त्रिपक्षीय संयोजन को प्रदर्शित किया गया, जिसमें प्रतिभाओं का विशाल भंडार, विशाल घरेलू पूँजी और ओपनAI तथा गूगल जैसी वैश्विक तकनीकी दिग्गजों के साथ गहन रणनीतिक साझेदारी शामिल है।
  • जनमानस की वैधता और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: उच्च स्तरीय नीति से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर समर्थन सुनिश्चित करने के लिए, शिखर सम्मेलन ने ‘24 घंटों में AI जिम्मेदारी अभियान के लिए सबसे अधिक प्रतिज्ञाएँ प्राप्त करने’ का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल किया।
    • 25 लाख से अधिक नागरिकों (मुख्य रूप से छात्रों) द्वारा AI का नैतिक और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से उपयोग करने की प्रतिज्ञा के साथ, भारत ने MANAV विजन के प्रति एक अद्वितीय जमीनी स्तर की प्रतिबद्धता प्रदर्शित की, जिससे यह सिद्ध हुआ कि डिजिटल परिवर्तन केवल एक शीर्ष-स्तरीय आदेश नहीं बल्कि एक साझा राष्ट्रीय मिशन है।

जिन चुनौतियों और चिंताओं का समाधान करना आवश्यक है

  • स्वैच्छिक विरोधाभास: चूँकि नई दिल्ली घोषणा और सीमा प्रतिबद्धताएँ बाध्यकारी नहीं हैं, इसलिए यह एक महत्त्वपूर्ण जोखिम है कि तकनीकी महाशक्तियाँ लोकतांत्रिक प्रसार के वादे के बजाय व्यावसायिक गोपनीयता को प्राथमिकता दे सकती हैं।
  • बुनियादी ढाँचे की कमी: जैसा कि सैम ऑल्टमैन (ओपनAI के CEO) ने उजागर किया है, भारत को पूरी तरह से AI-प्रधान समाज बनने के लिए आवश्यक विशाल कंप्यूटिंग शक्ति की वर्तमान में दुनिया में कमी है, और ऑर्बिटल डेटा सेंटर अभी भी एक दशक दूर हैं।
  • सामाजिक अस्थिरता: डीपफेक और फेक सामग्री का प्रसार प्रगतिशील समाजों और चुनावों को अस्थिर करने की क्षमता रखता है, जिससे डिजिटल प्रामाणिकता के लिए एक मजबूत तंत्र की आवश्यकता होती है।
  • श्रम व्यवधान: भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 8% IT क्षेत्र से आता है, इसलिए नौकरी छूटने की संभावना सामूहिक चिंता का विषय बनी हुई है, जिसके लिए अभूतपूर्व पैमाने पर मानव पूँजी के पुनर्कौशल की आवश्यकता है।
  • सामाजिक अस्थिरता और नियामक प्रतिक्रिया: डीपफेक का प्रसार एक खतरा बना हुआ है, लेकिन सरकार ने शिखर सम्मेलन का उपयोग IT संशोधन नियम, 2026 को अधिसूचित करने के लिए किया।
    • यह महत्त्वपूर्ण ढाँचा औपचारिक रूप से ‘कृत्रिम रूप से उत्पन्न सूचना’ (Synthetically Generated Information-SGI) को परिभाषित करता है और अवैध सामग्री के लिए तीन घंटे की संक्षिप्त समय सीमा निर्धारित करता है।
    • इसके अलावा, यह अनिवार्य वॉटरमार्किंग और तकनीकी मेटाडेटा ट्रैसेबिलिटी को लागू करता है, जिससे AI-जनित मीडिया को उसके स्रोत तक पता लगाया जा सके और इस प्रकार एक प्रगतिशील समाज में डिजिटल प्रामाणिकता को संरक्षित किया जा सके।

आगे की राह

  • सामग्री लेबलिंग मानक: भारत को ‘डिजिटल पोषण मानक’ के विकास में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, जिसमें वास्तविक और AI-जनित मीडिया के बीच अंतर करने के लिए अनिवार्य वॉटरमार्किंग और स्रोत-ट्रैकिंग का उपयोग किया जाए।
  • बाल-सुरक्षित AI पारिस्थितिकी तंत्र: ‘परिवार-निर्देशित’ AI स्पेस विकसित करना, यह सुनिश्चित करना कि शिक्षा के लिए AI उपकरण स्कूल के पाठ्यक्रम की तरह ही सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हों।
  • ऊर्जा-अवसंरचना तालमेल: नेट जीरो लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए AI की अधिक विद्युत माँगों को पूरा करने के लिए, भारत को परमाणु और हरित ऊर्जा संचालित डेटा केंद्रों को गति देनी चाहिए।
  • जिम्मेदारी का संस्थागतकरण: वर्तमान ‘जिम्मेदारी सौंपने’ के मॉडल से आगे बढ़कर वैश्विक तकनीकी शासन में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए AI शिखर सम्मेलनों के लिए एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय सचिवालय की स्थापना करना।

निष्कर्ष

इंडिया-AI इंपैक्ट समिट, 2026 एक निर्णायक क्षण था, जब भारत प्रौद्योगिकी का निष्क्रिय प्राप्तकर्ता होने से वैश्विक डिजिटल व्यवस्था का सक्रिय निर्माता बन गया। MANAV विजन को बढ़ावा देकर, भारत ने भू-राजनीतिक शक्ति संघर्ष और मानव-केंद्रित विकास प्रतिबद्धता के बीच सफलतापूर्वक संतुलन स्थापित किया है। यह शिखर सम्मेलन सिद्ध करता है कि भारत के लिए AI केवल भाग्य का साधन नहीं है, बल्कि एक संप्रभु, समावेशी और भरोसेमंद भविष्य की आधारशिला है।

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