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Lokesh Pal
February 27, 2026 04:26
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भारत सरकार औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और जलवायु लक्ष्यों पर कार्रवाई को तेज कर रही है, जिसमें कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइजेशन (CCU) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

| आधार | कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (CCS) | कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइजेशन (CCU) |
| अर्थ | निष्कासित CO₂ को वातावरण में इसके उत्सर्जन को रोकने हेतु स्थायी रूप से भूमिगत संगृहीत किया जाता है। | निष्कासित CO₂ को संगृहीत करने के स्थान पर उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है। |
| उद्देश्य | भू-वैज्ञानिक पृथक्करण के माध्यम से दीर्घकालिक उत्सर्जन न्यूनीकरण। | CO₂ के पुनः उपयोग के माध्यम से उत्सर्जन न्यूनीकरण के साथ मूल्य सृजन। |
| CO₂ का अंतिम उपयोग | गहरे लवणीय जलभृतों तथा समाप्त तेल एवं गैस क्षेत्रों में इंजेक्ट किया जाता है। | ईंधन, रसायन, निर्माण सामग्री तथा पॉलिमर में परिवर्तित किया जाता है। |
| आर्थिक उत्पादन | प्रत्यक्ष राजस्व सीमित (उन्नत तेल पुनर्प्राप्ति को छोड़कर)। | वाणिज्यिक उत्पादों तथा नई मूल्य शृंखलाओं का सृजन। |
| उदाहरण – भारत | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मसौदा, 2030 CCUS रोडमैप के अंतर्गत समाप्त तेल क्षेत्रों में CO₂ भंडारण का प्रस्ताव। | अंबुजा सीमेंट्स की पायलट परियोजना, जिसमें IIT बॉम्बे के साथ मिलकर निष्कासित CO₂ को ईंधन और सामग्रियों में परिवर्तित किया जा रहा है। |
| वैश्विक उदाहरण | नॉर्वे का Sleipner CCS प्रोजेक्ट, जो उत्तरी सागर के समुद्रतल के नीचे CO₂ का भंडारण करता है। | बेल्जियम में आर्सेलरमित्तल द्वारा निष्कासित CO₂ को इस्पात उत्पादन हेतु कार्बन मोनोऑक्साइड में परिवर्तित किया जा रहा है। |
| दीर्घकालिक प्रभाव | केवल जलवायु शमन पर केंद्रित। | जलवायु शमन के साथ परिपत्र अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों का संयोजन। |
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