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चीनी पर कराधान: एक स्वस्थ भारत का निर्माण (Sugar taxation could spell a healthier India)

Samsul Ansari December 16, 2023 11:48 186 0

भारतीय अर्थव्यवस्था 

संदर्भ 

अंतरराष्ट्रीय मधुमेह महासंघ ने ‘भारत मधुमेह रिपोर्ट 2000-2045’ में भारत को ‘विश्व की मधुमेह राजधानी’ कहा है, जिसमें वैश्विक मधुमेह आबादी का 17% शामिल है।

मधुमेह (Diabetes)

यह एक दीर्घकालिक बीमारी है जो तब होती है जब अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या जब शरीर अपने द्वारा उत्पादित इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता है।

  • इंसुलिन एक हार्मोन है जो रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है।
  • मधुमेह के प्रकार: मधुमेह दो प्रकार का होता है।
    • टाइप 1  मधुमेह: यह इंसुलिन उत्पादन में कमी की विशेषता है और इंसुलिन के दैनिक प्रशासन की आवश्यकता होती है। न तो इसका कारण ज्ञात है और न ही इसे रोकने के उपाय ज्ञात हैं।
    • टाइप 2 मधुमेह: यह शरीर को इंसुलिन का ठीक से उपयोग करने से रोकता है, जिसका इलाज न करने पर रक्त शर्करा का स्तर उच्च हो सकता है। इसे प्रायः रोका जा सकता है।
      • इसमें योगदान देने वाले कारकों में अधिक वज़न होना, पर्याप्त व्यायाम न करना और आनुवांशिकी रूप से शामिल हैं।

संबंधित तथ्य

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) किसी के कुल ऊर्जा सेवन के 10% से कम तक मुफ्त शर्करा का सेवन कम करने की सिफारिश करता है।
  • उच्च प्रभविता के प्रमुख कारण: दैनिक आहार के हिस्से के रूप में चीनी का अधिक सेवन और ‘शुगर स्वीटनड बीवरेज’ (SSBs) जैसे उत्पादों में इसकी उच्च सामग्री।
    • इसमें कार्बोनेटेड या गैर-कार्बोनेटेड शीतल पेय, फल या सब्जी के रस और पेय, तरल और पाउडर सांद्र, फ्लेवर्ड वाटर, ऊर्जा और खेल पेय, रेडी-टू-ड्रिंक चाय, रेडी-टू-ड्रिंक कॉफी और स्वादयुक्त दूध आधारित पेय उत्पाद शामिल हैं।
  • शुगर लेवी/कर:  चीनी पर कर से चीनी युक्त उत्पाद महंगे हो सकते हैं, जिससे उनकी खपत कम हो सकती है और कंपनियों को अपने उत्पादों में चीनी सामग्री में कटौती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

शुगर लेवी/कर

शुगर टैक्स (जिसे सोडा टैक्स भी कहा जाता है) ‘शुगर स्वीटनड बीवरेज’ (SSBs) और कभी-कभी अन्य मीठे स्नैक्स पर एक अधिभार के रूप में आरोपित किया जाता है।

‘शुगर स्वीटनड बीवरेज’ पर वैश्विक कराधान

122 देशों की कर व्यवस्थाओं का विश्लेषण करने पर किए गए एक अध्ययन के आधार पर विश्व बैंक द्वारा दी गई  जानकारी के अनुसार-

  • SSB कराधान में चीनी सामग्री और पेय पदार्थों की मात्रा दोनों के आधार पर स्लैब होतेहैं।
  • पेय पदार्थों के बीच अंतर निम्न प्रकार किया जाता है,
    • हाई शुगर (कार्बोनेटेड और ऊर्जा पेय) सामग्री
    • लो शुगर (कम कैलोरी वाले मीठे पेय पदार्थ, मीठे दूध आधारित पेय, सांद्रित) सामग्री
    • नो शुगर (शुद्ध फलों का रस और बिना स्वाद वाला दूध) सामग्री नहीं
  • लाभ: इससे कर राजस्व में वृद्धि, बेहतर स्वास्थ्य परिणाम, तेजी से उत्पाद सुधार और बढ़े हुए निर्यात अवसर प्राप्त होते हैं।

भारतीय परिदृश्य

  • GST व्यवस्था लागू है, लेकिन SSBs पर स्तरित शुगर टैक्स आरोपित करने को लेकर देश में अभी भी प्रणालीगत मुद्दे  विद्यमान हैं।
  • व्युत्क्रमित शुल्क संरचना: बोतलबंद पानी पर कर (18%) बनाम उच्च चीनी वाले जूस पर 12% कर और उच्च चीनी वाले दूध आधारित पेय पर केवल 5% कर।
    • इसके परिणामस्वरूप चीनी आधारित पेय की तुलना में पानी अधिक महंगा हो जाता है, जिससे यह बड़ी आबादी की पहुँच से बाहर हो जाता है।
    • ऐसा आभास होता है कि जब कराधान नीतियों का निर्धारण करने की बात आती है तो स्वास्थ्य पर विचार नहीं किया जाता है।
    • इससे एक बड़े नकली बाज़ार का विकास हुआ, जो कर का भुगतान नहीं करता।
  • सभी कार्बोनेटेड पेय पदार्थ: इन पर चीनी की मात्रा के बावजूद 40% का उच्च कराधान उद्योग में स्टार्टअप्स के प्रवेश को हतोत्साहित करेगा और नए उत्पाद नवाचारों को रोक देगा और निर्यात वृद्धि को भी रोक देगा।

शुगर आधारित कराधान

  • बीवरेज उद्योग
    • निवेश कम है क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर सबसे ऊँची जीएसटी दरों में से एक का सामना करता है।
    • दूध, फल और सब्जियों के शीर्ष उत्पादकों में से एक होने के बावजूद, पेय पदार्थ क्षेत्र से उत्पन्न राजस्व के मामले में भारत पिछले साल 15वें स्थान पर था।
  • स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ: भारत को अल्पपोषण और कुपोषण की दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप भारत SDG-3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) की प्रगति में पीछे है।
    • मधुमेह पर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक अध्ययन में पाया गया कि वर्ष 2021 में भारत में अनुमानित 101 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित थे, जबकि अनुमानित 136 मिलियन लोग प्री-डायबिटिक थे।

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