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Feb 21 2026

वैश्विक AI-फॉर-एनर्जी मिशन

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) ने इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 में 120 से अधिक देशों में AI-आधारित स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विस्तार के लिए एक वैश्विक AI-फॉर-एनर्जी मिशन का शुभारंभ किया।

वैश्विक AI-फॉर-एनर्जी मिशन के बारे में

  • यह एक ISA मिशन है, जिसका अनावरण नई दिल्ली में आयोजित भारत AI इंपैक्ट समिट में विद्युत मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) लिमिटेड के साथ साझेदारी में किया गया।
  • उद्देश्य: सदस्य देशों में नीति, डिजिटल अवसंरचना, वित्त तथा नागरिक-केंद्रित प्लेटफॉर्म को संरेखित कर स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों में AI के अंगीकरण को तीव्र गति प्रदान करना।
  • फोकस: यह पहल ग्रिड प्रणालियों को रूपांतरित करने, रूफटॉप सौर ऊर्जा को गति देने, विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा को सुदृढ़ करने तथा ऊर्जा शासन के लिए परस्पर क्रियाशील डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर केंद्रित है।

ऊर्जा क्षेत्र में AI की आवश्यकता

  • ऊर्जा बचत: AI ऊर्जा खपत और CO₂ उत्सर्जन को अनुकूलित तथा संभावित रूप से कम कर सकता है।
    • मौजूदा AI अनुप्रयोगों के व्यापक अंगीकरण से वर्ष 2035 तक उद्योग की ऊर्जा माँग में लगभग 8 EJ (एक्साजूल) की बचत संभव है।
      • लागत में कमी: AI-सक्षम प्लेटफॉर्म ने भारत में ऑफ-ग्रिड पायलट परियोजनाओं में परिचालन लागत में कमी प्रदर्शित की है।
  • लागत में कमी: AI-सक्षम प्लेटफॉर्म ने भारत में ऑफ-ग्रिड पायलट परियोजनाओं में परिचालन लागत में कमी प्रदर्शित की है।
  • ग्रिड अनुकूलन: AI उपकरण माँग का पूर्वानुमान लगाते हैं, विद्युत प्रवाह का सिमुलेशन करते हैं तथा संचरण हानियों को कम करते हैं।
  • पूर्वानुमानित अनुरक्षण (Predictive Maintenance): AI-आधारित ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियाँ ईवी चार्जिंग तथा वितरण नेटवर्क में विश्वसनीयता को सुदृढ़ करती हैं।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के बारे में

  • ISA एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना भारत और फ्राँस द्वारा COP21, पेरिस (2015) में की गई थी।
  • मुख्यालय: गुरुग्राम, भारत।
  • उद्देश्य: आईएसए का लक्ष्य वर्ष 2030 तक बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा तैनाती और जलवायु कार्रवाई के लिए 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक संसाधनों का संकलन करना है।
  • सदस्यता: यह गठबंधन 120 से अधिक सदस्य एवं हस्ताक्षरकर्ता देशों से मिलकर बना है (जनवरी 2026 में अमेरिका के अलग होने के बाद 125 सदस्य), जिनमें अधिकांश देश ग्लोबल साउथ से हैं।
  • मुख्य पहलें: प्रमुख पहलों में वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG), ग्लोबल सोलर फैसिलिटी (GSF) तथा प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए सोलर टेक्नोलॉजी एप्लिकेशन रिसोर्स सेंटर (STAR-C) शामिल हैं।

बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक

बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक वॉशिंगटन, डी.सी. में उस परिसर में आयोजित की गई, जिसे वर्तमान में डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टिट्यूट ऑफ पीस (पूर्ववर्ती नाम- यू.एस. इंस्टिट्यूट ऑफ पीस) के नाम से जाना जाता है। 

प्रथम बैठक की प्रमुख विशेषताएँ

  • पुनर्निर्माण रूपरेखा का शुभारंभ: बोर्ड ऑफ पीस के अंतर्गत गाजा पुनर्वास कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई।
  • उपस्थिति और सहभागिता: लगभग 50 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 27 पूर्ण सदस्य तथा पर्यवेक्षक (जैसे- यूरोपीय संघ, भारत और कुछ यूरोपीय राष्ट्र) शामिल थे।
  • गाजा के लिए प्रमुख वित्तीय प्रतिबद्धताएँ 
    • नौ देशों ने संयुक्त रूप से गाजा राहत और पुनर्निर्माण के लिए 7 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिज्ञा की।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका ने पृथक रूप से 10 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिज्ञा की, जिससे कुल वित्तीय प्रतिबद्धताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
  • अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल: सुरक्षा बनाए रखने तथा हमास के निरस्त्रीकरण की निगरानी हेतु एक सशस्त्र बल के गठन का प्रस्ताव रखा गया।
    • इंडोनेशिया ने 8,000 से अधिक सैनिकों की प्रतिज्ञा की, जबकि कजाखस्तान ने सैन्य एवं चिकित्सीय इकाइयों की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

बोर्ड ऑफ पीस के बारे में

  • यह एक नया अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शांति स्थापना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई, जिसकी शुरुआत, वर्षों के संघर्ष के बाद गाजा पट्टी में स्थिरता स्थापित करने से की गई है।
  • स्थापना: इस बोर्ड की औपचारिक स्थापना जनवरी 2026 में की गई तथा इसका चार्टर दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में हस्ताक्षरित किया गया।
  • उद्देश्य: संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण का समन्वय करना, शासन व्यवस्था को पुनर्स्थापित करना तथा स्थायी शांति सुनिश्चित करना। प्रारंभिक फोकस गाजा पर है, किंतु भविष्य में इसका विस्तार अन्य क्षेत्रों तक भी हो सकता है।
    • यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 से संबद्ध है, जिसमें गाजा के पुनर्निर्माण और स्थिरता ढाँचे के प्रशासन में सहायता हेतु इसके गठन का स्वागत किया गया। 
  • नेतृत्व: डोनाल्ड ट्रंप इसके अध्यक्ष हैं, जिनके लिए कोई कार्यकाल सीमा निर्धारित नहीं है तथा आमंत्रण एवं प्रमुख निर्णयों पर उनका विशिष्ट अधिकार है।
  • संरचना: बोर्ड में एक कार्यकारी बोर्ड तथा गाजा-केंद्रित विशिष्ट निकाय शामिल हैं, जैसे- गाजा कार्यकारी बोर्ड और एक तकनीकी विशेषज्ञों की टीम।
  • सदस्य: लगभग 27 देशों ने संस्थापक सदस्यों के रूप में इसमें सहभागिता की है, जिनमें खाड़ी देश तथा अन्य राष्ट्र शामिल हैं।
    • चार्टर में सदस्यता नियम के अनुसार, स्थायी सदस्यता जैसे विशेष लाभ प्राप्त करने के लिए देशों को निर्धारित वित्तीय योगदान (उदाहरणार्थ 1 अरब अमेरिकी डॉलर) देना अनिवार्य है।
  • चिंताएँ: कुछ आलोचकों का मत है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकता है या एक वैकल्पिक वैश्विक शांति संस्था के रूप में कार्य कर सकता है।
  • बोर्ड ऑफ पीस में भारत: भारत 27 संस्थापक/पूर्ण सदस्यों में शामिल नहीं है।
    • भारत ने इस नए संगठन की पहली बैठक में एक पर्यवेक्षक देश के रूप में भाग लिया।

अमेरिका-इंडिया कनेक्ट

इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 में, गूगल ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच AI-संचालित डिजिटल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने हेतु 15 अरब अमेरिकी डॉलर की ‘अमेरिका-इंडिया कनेक्ट’ समुद्री केबल पहल की घोषणा की।

  • एक समुद्री केबल/सबमरीन केबल एक फाइबर-ऑप्टिक केबल होती है, जिसे देशों और महाद्वीपों के बीच डेटा संचारित करने के लिए समुद्र तल पर बिछाया जाता है।

‘अमेरिका-इंडिया कनेक्ट’ के बारे में

  • ‘अमेरिका-इंडिया कनेक्ट’ गूगल के नेतृत्व में एक सहयोगात्मक अवसंरचना पहल है, जिसे पाँच वर्षों में 15 अरब अमेरिकी डॉलर के AI अवसंरचना निवेश द्वारा समर्थित किया गया है। इसका उद्देश्य विशाखापत्तनम (विजाग) में एक नए अंतरराष्ट्रीय समुद्री केबल गेटवे की स्थापना करना है।
    • वर्तमान में, भारत के अंतरराष्ट्रीय समुद्री केबल गेटवे मुख्यतः मुंबई और चेन्नई में केंद्रित हैं।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • पूर्वी तट कनेक्टिविटी कॉरिडोर: विज़ाग को चेन्नई, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से जोड़ने वाले प्रत्यक्ष फाइबर मार्ग।
      • दक्षिणी गोलार्द्ध के मार्गों के माध्यम से अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तटों को जोड़ना।
    • पश्चिमी तट लिंक: मुंबई और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रत्यक्ष फाइबर-ऑप्टिक संपर्क, जो हिंद-प्रशांत डिजिटल एकीकरण को सुदृढ़ करेगा।
    • मौजूदा केबलों के साथ एकीकरण: यह परियोजना Blue, Raman और Sol जैसी अन्य पनडुब्बी प्रणालियों के साथ पूरक रूप से कार्य करेगी, जिससे यूरोप और अमेरिका के पूर्वी तट से लाल सागर के मार्ग से होते हुए मुंबई तक एक सुदृढ़ एवं लचीला डेटा कॉरिडोर निर्मित होगा।
      • Blue: इटली–इजरायल–जॉर्डन–सऊदी अरब–ओमान–भारत को जोड़ता है।
      • Raman: जॉर्डन–सऊदी अरब–जिबूती–ओमान–भारत को जोड़ता है।
      • Sol: स्पेन–इटली–ग्रीस–इज़राइल–साइप्रस–मिस्र–सऊदी अरब–ओमान–भारत को जोड़ता है।
  • उद्देश्य
    • भारत, अमेरिका तथा दक्षिणी गोलार्द्ध के बीच AI-संचालित डेटा हस्तांतरण क्षमता को सुदृढ़ करना।
    • वैश्विक डिजिटल व्यापार और क्लाउड अवसंरचना में भारत की भूमिका को मजबूत करना।
    • AI, स्वास्थ्य सेवा, फिनटेक तथा शासन-संबंधी अनुप्रयोगों के लिए उच्च गति एवं निम्न विलंबता (Low-latency) कनेक्टिविटी का समर्थन करना।

महत्त्व

यह पहल विशाखापत्तनम (विजाग) को एक रणनीतिक वैश्विक डिजिटल गेटवे के रूप में स्थापित करती है, जिससे पारंपरिक समुद्री व्यापार मार्ग उच्च क्षमता वाले एआई-सक्षम डेटा कॉरिडोर में परिवर्तित हो रहे हैं।

संदर्भ

हाल ही में भारत ने इंडिया AI इंपैक्ट शिखर सम्मेलन 2026 में भारत-प्रथम कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं को उन्नत करने हेतु तीन सॉवरन AI मॉडल (Sovereign AI Models) प्रस्तुत किए।

सॉवरन AI मॉडल के बारे में

  • सॉवरन AI मॉडल से अभिप्राय ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता तंत्रों से है, जिन्हें किसी देश के अधिकार क्षेत्र के भीतर विकसित, प्रशिक्षित, तैनात और शासित किया जाता है, जिससे डेटा, अवसंरचना तथा नियामकीय ढाँचों पर राष्ट्रीय नियंत्रण सुनिश्चित होता है।
  • इंडिया सॉवरन AI मॉडल: ये ₹10,000 करोड़ के इंडियाAI मिशन के अंतर्गत संचालित होते हैं, जिसे मार्च 2024 में स्वीकृत किया गया था ताकि घरेलू आधारभूत मॉडल, कंप्यूट अवसंरचना तथा सार्वजनिक AI अनुप्रयोगों का निर्माण किया जा सके।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • घरेलू डेटा नियंत्रण: प्रशिक्षण डेटासेट राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर स्रोतित, संगृहीत और संसाधित किए जाते हैं।
    • स्थानीय कंप्यूट अवसंरचना: संप्रभु क्लाउड सर्वरों तथा सरकार-समर्थित GPU क्लस्टरों का उपयोग।
    • नियामकीय पर्यवेक्षण: राष्ट्रीय AI नीतियों, साइबर सुरक्षा मानकों तथा डेटा संरक्षण कानूनों के अंतर्गत शासित।
    • रणनीतिक स्वायत्तता: विदेशी बिग टेक प्लेटफॉर्मों और बाह्य प्रौद्योगिकीय पारिस्थितिक तंत्रों पर निर्भरता में कमी।

मॉडल मुख्य विशेषताएँ अनुप्रयोग
सर्वम् AI
  • दो ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs)
    • एक 30-बिलियन-पैरामीटर मॉडल और एक 105-बिलियन-पैरामीटर मॉडल, दोनों भारत में शून्य से प्रशिक्षित।
  • भारतीय भाषाओं और शासन आवश्यकताओं पर केंद्रित
सार्वजनिक सेवा प्रदायगी, एंटरप्राइज AI,

सरकारी चैटबॉट, बहुभाषी डिजिटल प्लेटफॉर्म

Gnani.ai
  • वॉयस-फर्स्ट AI मॉडल
  • वाक् पहचान और संवादात्मक AI;
  • भारतीय उच्चारणों और बोलियों के लिए अनुकूलित।
  • उच्च-सटीकता वाक्-से-पाठ (ASR) (<5% WER भारतीय भाषाओं में),
  • रियल-टाइम वॉयस बायोमेट्रिक्स/एंटी-स्पूफिंग, शून्य-शॉट वॉयस क्लोनिंग, तथा मानव-इन-द-लूप एस्केलेशन
ग्राहक समर्थन स्वचालन, बैंकिंग, दूरसंचार, ई-शासन वॉयस इंटरफेस
भारतजेन बहुभाषी जनरेटिव AI

  • यह सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है, वर्तमान क्षमताएँ 15 से अधिक भाषाओं (हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगु आदि सहित) में पाठ, वाक् और विजन के अंतर्गत उपलब्ध हैं।
  • कंसोर्टियम-नेतृत्वित आधारभूत मॉडल
  • भारतीय डेटासेट पर प्रशिक्षित
शिक्षा, अनुसंधान, भाषा अनुवाद, समावेशी डिजिटल सेवाएँ

सॉवरन AI मॉडलों का महत्त्व

  • प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता: घरेलू आधारभूत मॉडलों और कंप्यूटिंग क्षमता के निर्माण के माध्यम से वैश्विक बिग टेक AI प्रणालियों पर निर्भरता को कम करता है।
  • डेटा संप्रभुता एवं शासन: सुनिश्चित करता है कि AI प्रणालियाँ भारत के भीतर प्रशिक्षित, तैनात और विनियमित हों, जिससे वे राष्ट्रीय डेटा संरक्षण तथा रणनीतिक हितों के अनुरूप रहें।
  • समावेशी डिजिटल विकास: भारत की विविध भाषायी और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप बहुभाषी तथा वॉयस-आधारित AI समाधान को प्रोत्साहित करता है।

इंडियाAI मिशन

नोडल मंत्रालय / कार्यान्वयन निकाय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा प्रारंभ, इसका कार्यान्वयन डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) के अंतर्गत इंडियाAI स्वतंत्र व्यवसाय प्रभाग द्वारा किया जाता है।

बजटीय प्रावधान: इस मिशन के लिए वर्ष 2024–2030 की अवधि हेतु लगभग ₹10,372 करोड़ का वित्तीय आवंटन निर्धारित है।

प्रमुख उद्देश्य

  • AI कंप्यूट अवसंरचना: बड़े पैमाने पर GPU-आधारित कंप्यूट क्षमता का विकास तथा स्टार्ट-अप्स और शोधकर्ताओं को अनुदानित पहुँच प्रदान करना।
  • स्वदेशी AI मॉडल एवं नवाचार: महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में संप्रभु आधारभूत और बहु-मोडल AI मॉडलों के विकास का समर्थन।
  • डेटा एवं अनुप्रयोग पारिस्थितिकी तंत्र: AIKosh डेटासेट मंच का सृजन तथा स्वास्थ्य, कृषि, शासन और MSMEs में AI अनुप्रयोगों को प्रोत्साहन।
  • कौशल विकास एवं उत्तरदायी AI: AI शिक्षा का विस्तार, टियर 2/3 शहरों में डेटा लैब्स की स्थापना, तथा सुरक्षित और विश्वसनीय AI रूपरेखाओं को प्रोत्साहित करना।

संदर्भ

18 फरवरी 2026, 1946 के शाही नौसेना विद्रोह की 80वीं वर्षगाँठ है, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम चरण के दौरान एक महत्त्वपूर्ण औपनिवेशिक-विरोधी विद्रोह था।

शाही नौसेना विद्रोह

  • शाही नौसेना विद्रोह (18–23 फरवरी, 1946) ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध नौसैनिक रेटिंग्स द्वारा किया गया पाँच दिवसीय सशस्त्र विद्रोह था, जिसकी शुरुआत बंबई से हुई और जो देशभर में फैल गया।
    • ‘रेटिंग्स’ वे कनिष्ठ सूचीबद्ध नाविक होते हैं, जो वारंट अधिकारी के सैन्य पद से नीचे के पद पर होते हैं।

विद्रोह के कारण

  • दुर्बल सेवा परिस्थितियाँ: भारतीय ‘रेटिंग्स’ को निम्नस्तरीय भोजन, कम वेतन, भीड़भाड़ तथा ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भेदभावपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ता था।
    • द्वितीय विश्वयुद्ध तथा ब्रिटिश क्राउन के लिए अन्य युद्धों का हिस्सा होने के बावजूद, भारतीय ‘रेटिंग्स’ को कभी भी उचित पारिश्रमिक नहीं दिया गया।

  • तात्कालिक कारण: ‘HMIS तलवार’ में कमांडर आर्थर फ्रेडरिक किंग की नियुक्ति तथा अपमानजनक टिप्पणियों ने असंतोष को तीव्र किया, जिससे भूख हड़ताल प्रारंभ हुई।
  • राष्ट्रवादी प्रभाव: वर्ष 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन तथा वर्ष 1945 में भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के मुकदमों ने नाविकों के बीच औपनिवेशिक-विरोधी भावना को प्रेरित किया।
  • युद्धोत्तर आर्थिक कठिनाई: बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी तथा युद्धकालीन असंतोष ने साधारण पृष्ठभूमि से आए भर्ती सैनिकों के बीच असंतोष को गहरा किया।

विद्रोह की घटनाएँ

  • HMIS तलवार (बंबई) में प्रारंभ: विद्रोह 18 फरवरी, 1946 को भोजन की गुणवत्ता और भेदभाव के विरोध में भूख हड़ताल के साथ प्रारंभ हुआ।
    • रेटिंग्स ने “नो फूड, नो वर्क” का नारा अपनाया।
  • नौसैनिक केंद्रीय हड़ताल समिति का गठन: एम. एस. खान, बी. सी. दत्त, मदन सिंह तथा अन्य नेताओं ने एक केंद्रीय समिति के माध्यम से माँगों का समन्वय किया।
  • राष्ट्रव्यापी प्रसार और जन समर्थन: यह विद्रोह 78 जहाजों और 20 प्रतिष्ठानों तक विस्तृत हो गया, जिसमें लगभग 20,000 ‘रेटिंग्स’ सम्मिलित हुए तथा कराची, कलकत्ता एवं कोचीन सहित अन्य स्थानों पर श्रमिकों और छात्रों ने भी विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया।
  • सशस्त्र टकराव और दमन: बंबई के मिल क्षेत्रों में सड़क संघर्ष भड़क उठे, जहाँ ब्रिटिश बलों ने भारी शक्ति का प्रयोग किया, जिससे लगभग 200 नागरिकों की मृत्यु हुई।
  • विद्रोह का अंत: महात्मा गांधी ने इस विद्रोह को असमय और अनुशासित राजनीतिक मार्गदर्शन के अभाव वाला बताते हुए इसकी निंदा की, जबकि कांग्रेस और मुस्लिम लीग के नेताओं ने संवैधानिक वार्ताओं की रक्षा हेतु संयम बरतने का आग्रह किया।
    • सीमित राजनीतिक समर्थन और बढ़ते सैन्य दबाव के बीच, नौसैनिक रेटिंग्स ने 23 फरवरी, 1946 को आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे विद्रोह का अंत हो गया।

विद्रोह के प्रभाव

  • ब्रिटिश सैन्य विश्वास का क्षरण: इस विद्रोह ने संकेत दिया कि औपनिवेशिक प्राधिकरण अब भारतीय सशस्त्र बलों पर पूर्णतः निर्भर नहीं रह सकते थे।
  • उपनिवेश-उन्मूलन की प्रक्रिया में तीव्रता: इसने वर्ष 1947 में सत्ता के शीघ्र हस्तांतरण के ब्रिटेन के निर्णय में योगदान दिया।
  • सांप्रदायिक एकता का क्षण: हिंदू–मुस्लिम एकजुटता दृष्टिगोचर हुई, क्योंकि इंडियन नेशनल कांग्रेस, ऑल-इंडिया मुस्लिम लीग तथा कम्युनिस्ट ध्वज संयुक्त रूप से प्रदर्शित किए गए।

निष्कर्ष

वर्ष 1946 का शाही नौसेना विद्रोह अपनी अल्पावधि के उपरांत उग्र औपनिवेशिक-विरोधी एकजुटता तथा भारत की स्वतंत्रता को तीव्र करने में उसकी भूमिका का एक सशक्त स्मरण बना हुआ है।

संदर्भ

18वीं लोकसभा के कार्यकाल के लगभग दो वर्ष बीत जाने के बाद भी आचार समिति का गठन नहीं किया गया है।

संबंधित तथ्य

  • संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता के विरुद्ध प्रस्ताव को, अध्यक्ष के निर्णय के अधीन, आचार समिति (Ethics Committee) को संदर्भित किया जा सकता है।

लोकसभा की आचार समिति के बारे में

  • संरचना एवं कार्यकाल: आचार समिति में 15 सदस्य होते हैं, जिन्हें लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है तथा प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल एक वर्ष की अवधि के लिए होता है।
  • कार्य: समिति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा संदर्भित लोकसभा सदस्यों के अनैतिक आचरण से संबंधित शिकायतों की जाँच करती है और अपने निष्कर्षों के आधार पर उपयुक्त सिफारिशें प्रस्तुत करती है।
  • उद्भव
    • सर्वप्रथम वर्ष 1996 में दिल्ली में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में दोनों सदनों अर्थात् लोकसभा और राज्यसभा के लिए आचार समितियों की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया था।
    • 4 मार्च, 1997 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति तथा राज्यसभा के सभापति के. आर. नारायणन ने उच्च सदन की आचार समिति का गठन किया, ताकि सदस्यों के नैतिक और आचरण संबंधी व्यवहार की निगरानी की जा सके तथा उनसे संबंधित संदर्भित कदाचार के मामलों की जाँच की जा सके।
      • लोकसभा में, विशेषाधिकार समिति के एक अध्ययन समूह ने वर्ष 1997 में आचार समिति के गठन की अनुशंसा की थी; तथापि, उस समय इस प्रस्ताव पर कार्यवाही नहीं की गई।
    • विशेषाधिकार समिति द्वारा अंततः 13वीं लोकसभा के दौरान आचार समिति की स्थापना की अनुशंसा की।
    • वर्ष 2000 में दिवंगत लोकसभा अध्यक्ष जी. एम. सी. बालयोगी ने एक तदर्थ आचार समिति का गठन किया, जिसे वर्ष 2015 में लोकसभा की स्थायी समिति बना दिया गया।
  • शिकायतों की प्रक्रिया
    • कोई भी व्यक्ति किसी लोकसभा सदस्य के विरुद्ध, कथित कदाचार के साक्ष्यों सहित तथा यह शपथ-पत्र देते हुए कि शिकायत “झूठी, तुच्छ या दुर्भावनापूर्ण” नहीं है, किसी अन्य लोकसभा सांसद के माध्यम से शिकायत कर सकता है। यदि सदस्य स्वयं शिकायत करता है, तो शपथ-पत्र की आवश्यकता नहीं होती है।
    • अध्यक्ष किसी सांसद के विरुद्ध प्राप्त किसी भी शिकायत को समिति के पास संदर्भित कर सकते हैं।
    • समिति केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर या न्यायालय में लंबित (सब ज्यूडिस) मामलों पर आधारित शिकायतों पर विचार नहीं करती है।
    • समिति किसी शिकायत की जाँच करने का निर्णय लेने से पूर्व प्रथमदृष्टया (Prima facie) जाँच करती है। साथ ही शिकायत का मूल्यांकन करने के बाद वह अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करती है।
    • समिति अपनी रिपोर्ट अध्यक्ष को प्रस्तुत करती है, जो सदन से पूछते हैं कि क्या रिपोर्ट पर विचार किया जाए। रिपोर्ट पर आधे घंटे की चर्चा का भी प्रावधान है।

राज्यसभा की आचार समिति 

  • भारत की किसी भी विधायिका द्वारा गठित इस प्रकार की पहली समिति का गठन 4 मार्च, 1997 को राज्यसभा के सभापति द्वारा किया गया था, ताकि सदस्यों के नैतिक और आचरण संबंधी व्यवहार की निगरानी की जा सके।
  • संरचना: राज्यसभा के सभापति द्वारा नियुक्त 10 सदस्य।
  • कार्यकाल: समिति तब तक बनी रहती है, जब तक नई समिति का गठन नहीं किया जाता; बीच में उत्पन्न आकस्मिक रिक्तियों को सभापति समय-समय पर भरते हैं।

विशेषाधिकार समिति के साथ अतिव्यापन

  • आचार समिति और विशेषाधिकार समिति के अधिकार-क्षेत्र कभी-कभी परस्पर आच्छादित होते हैं, विशेषकर सांसदों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों जैसे मामलों में; तथापि, अधिक गंभीर आरोप सामान्यतः विशेषाधिकार समिति को संदर्भित किए जाते हैं।
  • विशेषाधिकार समिति का दायित्व संसद की स्वतंत्रता, अधिकारिता और गरिमा की रक्षा करना है, जिसमें व्यक्तिगत सदस्यों तथा सदन को सामूहिक रूप से शामिल किया जाता है।
  • विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही किसी सांसद या यहाँ तक कि सामान्य व्यक्ति के विरुद्ध भी प्रारंभ की जा सकती है, यदि उनके कृत्य सदन की अधिकारिता को कमजोर करते हों।
  • इसके विपरीत, आचार समिति केवल संसद सदस्यों से संबंधित कदाचार के मामलों से ही विशिष्ट रूप से निपटती है।

संदर्भ

इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 में, भारत ने रेखांकित किया कि AI-संचालित डेटा सेंटर, आधुनिक ग्रिड पर बड़े, जटिल और गतिशील ‘लोड’ के रूप में उभर रहे हैं, जो भारत की विद्युत प्रणाली को महत्त्वपूर्ण रूप से पुनर्गठित कर सकते हैं।

संबंधित तथ्य

  • भारत की कुल स्थापित डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.2 गीगावाट (GW) है और AI-संचालित संगणन माँग में वृद्धि के कारण वर्ष 2030 तक इसके चार गुना बढ़ने का अनुमान है।
    • अनुमान दर्शाते हैं कि इसकी पहुँच 8–10 गीगावाट तक हो सकती है, जिससे डेटा सेंटर महत्त्वपूर्ण ग्रिड लोड बन जाएँगे।
  • प्रमुख विद्युत लोड के रूप में डेटा सेंटर: पारंपरिक लोड के विपरीत, डेटा सेंटर उच्च-तीव्रता, गतिशील और परिवर्तनीय विद्युत लोड होते हैं।
    • इनकी माँग कम पूर्वानुमेय होती है, विशेषकर AI कार्यभार के कारण, जो उपयोग में तीव्र वृद्धि या गिरावट (रैंप-अप/रैंप-डाउन) उत्पन्न कर सकते हैं।

डेटा सेंटर के बारे में

  • डेटा सेंटर समर्पित सुविधाएँ हैं, जहाँ कंप्यूटर प्रणालियाँ, सर्वर, नेटवर्किंग उपकरण और स्टोरेज प्रणालियाँ स्थापित होती हैं, ताकि विशाल मात्रा में डिजिटल डेटा का प्रबंधन, भंडारण और प्रसंस्करण किया जा सके।
  • अनुप्रयोग: ये क्लाउड सेवाओं को शक्ति प्रदान करते हैं, वेबसाइट होस्ट करते हैं, एंटरप्राइज आईटी संचालन का प्रबंधन करते हैं, वित्तीय लेन-देन का समर्थन करते हैं तथा वास्तविक-समय संचार, AI प्रसंस्करण एवं बिग डेटा विश्लेषण को सक्षम बनाते हैं।

विद्युत ग्रिड के लिए चुनौतियाँ

  • ग्रिड नियोजन एवं अवसंरचना: डेटा सेंटर बड़े, जटिल ट्रांसमिशन-स्तरीय लोड की तरह कार्य करते हैं, जिनके लिए सामान्य वितरण प्रणालियों की तुलना में अधिक सुदृढ़ ग्रिड नियोजन की आवश्यकता होती है।
  • साइलेंट एग्जिट: इन्वर्टर-आधारित प्रणालियों वाले डेटा सेंटर अचानक स्वयं को अलग (“साइलेंट एग्जिट”) कर सकते हैं, जिससे यदि बड़े पैमाने पर विद्युत गिरावट हो तो ग्रिड संतुलन प्रभावित हो सकता है।
  • पूर्वानुमान संबंधी कठिनाइयाँ: AI और डेटा सेंटर की गतिशील लोड प्रोफाइल के कारण पारंपरिक ऊर्जा पूर्वानुमान प्रणालियाँ सटीक आकलन करने में कठिनाई अनुभव करती हैं।
  • ट्रांसमिशन अवसंरचना पर दबाव: हाइपरस्केल डेटा सेंटर प्रति सुविधा लगभग 1 गीगावाट तक की आवश्यकता रख सकते हैं।

आगे की राह

  • अवसंरचना एवं नीतिगत निहितार्थ: भारत की ग्रिड योजना को बड़े AI डेटा सेंटरों की उच्च-लोड, निरंतर ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु विकसित करना होगा।
    • उदाहरण: विश्वसनीयता और स्थिरता दोनों सुनिश्चित करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के साथ एकीकरण, ऊर्जा भंडारण तथा नियामकीय समन्वय की आवश्यक है।
  • ग्रिड नियोजन और संसाधन पर्याप्तता को सुदृढ़ करना: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा निर्मित राष्ट्रीय विद्युत योजना (NEP) के अंतर्गत राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय विद्युत नियोजन में डेटा सेंटर माँग के प्रक्षेपणों को सम्मिलित किया जाना चाहिए।
  • एकीकृत अवसंरचना के साथ डेटा सेंटर पार्कों का सृजन: पूर्व-अनुमोदित उच्च-क्षमता ट्रांसमिशन लाइनों के साथ प्लग-एंड-प्ले डेटा सेंटर क्षेत्रों का विकास किया जाना चाहिए।
    • उदाहरण: महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने अवसंरचना प्रोत्साहनों को बढ़ावा देने वाली समर्पित डेटा सेंटर नीतियों की घोषणा की है।
  • जल एवं पर्यावरणीय स्थिरता:  जल-दक्ष शीतलन प्रौद्योगिकियों (द्रव शीतलन, वायु शीतलन) को अनिवार्य बनाया जाए।
    • उदाहरणार्थ: पर्याप्त जल उपलब्धता एवं सुदृढ़ प्रसारण अवसंरचना वाले क्षेत्रों में डेटा केंद्रों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाए।

निषकर्ष:

भारत में डेटा केंद्रों की तीव्र वृद्धि एक ओर चुनौती है तो दूसरी ओर अवसर भी प्रस्तुत करती है। यदि यह वृद्धि अव्यवस्थित रहे, तो इससे ग्रिड अस्थिरता, टैरिफ भार  और अवसंरचनात्मक अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

  • हालाँकि, यदि इसे रणनीतिक रूप से एकीकृत किया जाए, तो यह नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने में तेजी ला सकता है, ऊर्जा भंडारण में नवाचार को प्रोत्साहित कर सकता है, ट्रांसमिशन नियोजन को सुदृढ़ कर सकता है, तथा AI के क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को मजबूत कर सकता है।

संदर्भ

एनविडिया कॉरपोरेशन (Nvidia Corporation), जिसने वर्ष 1999 में प्रथम ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) विकसित किया था, वर्तमान में वैश्विक डिजिटल तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अर्थव्यवस्था के प्रमुख प्रेरक तत्त्व के रूप में पुनः चर्चा के केंद्र में है।

संबंधित तथ्य

  • यद्यपि NVIDIA विधिक दृष्टि से एकाधिकार की धारक नहीं है, तथापि विशिष्ट GPU खंडों—विशेषकर AI संगणना में इसका लगभग प्रभुत्वशाली बाजार प्रभाव परिलक्षित होता है।
    • डिस्क्रीट पर्सनल कंप्यूटर GPUs में इसकी लगभग 90% बाजार हिस्सेदारी है तथा डेटा सेंटर GPUs के क्षेत्र में भी यह सुदृढ़ स्थिति में है।

 न्यूरल नेटवर्क (Neural Networks) क्या हैं?

  • न्यूरल नेटवर्क ऐसे कंप्यूटर आधारित एल्गोरिदम हैं, जो मानव मस्तिष्क की संरचना एवं क्रियाविधि से प्रेरित होकर विकसित किए गए हैं। इनका उद्देश्य प्रतिरूपों की पहचान करना, डेटा से अधिगम करना तथा निर्णय-निर्माण करना है।
  • ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं मशीन लर्निंग (ML) प्रणालियों की आधारभूत संरचना का निर्माण करते हैं।

न्यूरल नेटवर्क GPUs का उपयोग क्यों करते हैं?

  • यद्यपि न्यूरल नेटवर्क CPU अथवा GPU दोनों पर संचालित किए जा सकते हैं, तथापि इंजीनियर GPUs को वरीयता प्रदान करते हैं, क्योंकि ये बहुसंख्यक कार्यों को समानांतर रूप से निष्पादित करने तथा विशाल डेटा प्रवाह को तीव्र गति से संसाधित करने में सक्षम होते हैं।

ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) के संबंध में

  • ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) एक विशिष्टीकृत संगणकीय प्रोसेसर है, जिसे बहुसंख्यक सरल गणनाओं को एक साथ (समानांतर प्रसंस्करण) संपादित करने के लिए अभिकल्पित किया गया है।
  • CPU प्रणाली के विपरीत, जो जटिल एवं क्रमिक कार्यों के निष्पादन में दक्ष होती है, GPU विशाल पैमाने पर आवृत्तिमूलक गणनात्मक कार्यों के लिए अनुकूलित होता है।
  • प्रारंभ में वीडियो गेम ग्राफिक्स हेतु विकसित, GPUs वर्तमान में AI, डेटा सेंटर, सिमुलेशन तथा उच्च-प्रदर्शन संगणना (HPC) के केंद्रीय अवसंरचनात्मक घटक बन चुके हैं।
  • प्रमुख निर्माता: NVIDIA, AMD तथा इंटेल।

उद्गम एवं विकास

  • वर्ष 1999 में NVIDIA द्वारा GeForce 256 का शुभारंभ किया गया, जिसे विश्व के प्रथम GPU के रूप में अभिहित किया गया था और जिसका प्रारंभिक उपयोग वीडियो गेम ग्राफिक्स तक सीमित था।
  • पिछले 25 वर्षों में GPUs ग्राफिक्स रेंडरिंग (Rendering) से विकसित होकर डिजिटल अर्थव्यवस्था की मूलभूत अधोसंरचना में रूपांतरित हो चुके हैं।
  • वर्तमान में, AI, मशीन लर्निंग, सिमुलेशन तथा उच्च-प्रदर्शन संगणना के लिए GPUs अपरिहार्य माने जाते हैं।

GPU के अनुप्रयोग

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं गहन अधिगम: GPUs का उपयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडलों के प्रशिक्षण तथा परिनियोजन में किया जाता है, क्योंकि वे विशाल समानांतर संगणनाओं का दक्षतापूर्वक निष्पादन करने में सक्षम होती हैं।
    • उदाहरणार्थ: OpenAI द्वारा विकसित मॉडल ग्राफिक्स प्रसंस्करण इकाई क्लस्टरों की सहायता से प्रशिक्षित किए जाते हैं।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान एवं सुपरकंप्यूटिंग: GPUs जटिल वैज्ञानिक सिमुलेशन—जैसे जलवायु प्रतिरूपण, जीनोमिक्स तथा आणविक गतिकी—को तीव्र गति प्रदान करती हैं; अनेक सुपरकंप्यूटर NVIDIA द्वारा विकसित GPUs का उपयोग करते हैं।
  • गेमिंग एवं ग्राफिक्स प्रतिपादन: GPUs का प्रारंभिक अभिकल्प उच्च-गुणवत्ता त्रि-आयामी ग्राफिक्स के प्रतिपादन हेतु किया गया था, जिससे वास्तविक-समय गेमिंग, आभासी वास्तविकता तथा ‘रे-ट्रेसिंग’ प्रौद्योगिकियाँ संभव हुईं।
  • स्व-चालित वाहन: GPUs स्व-चालित वाहनों में वास्तविक-समय सेंसर एवं कैमरा डेटा का संसाधन करती हैं, जिससे वस्तु-पहचान, पथ-योजना तथा निर्णय-निर्माण प्रणालियाँ क्रियाशील होती हैं।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग एवं विशाल डेटा विश्लेषण: GPUs ‘AI-एज-ए-सर्विस’ प्लेटफॉर्म तथा डेटा विश्लेषण प्रणालियों को शक्ति प्रदान करती हैं, जहाँ क्लाउड कंप्यूटिंग प्रदाता मशीन अधिगम कार्यभार को तीव्र करने हेतु GPUs सक्षम सर्वरों का परिनियोजन करते हैं।

CPU और  GPU के बीच अंतर

पहलू CPU GPU
प्राथमिक कार्य सामान्य प्रयोजन संगणना एवं नियंत्रण ग्राफिक्स प्रतिपादन एवं समानांतर संगणना
कोर संरचना कम संख्या में शक्तिशाली कोर (4–32) हजारों छोटे कोर
कार्यों का प्रकार क्रमिक एवं तर्क-प्रधान कार्य व्यापक स्तर पर समानांतर कार्य
प्रोसेसिंग का प्रकार निम्न विलंबता, जटिल निर्देश उच्च, सरल पुनरावृत्तिमूलक क्रियाएँ
मेमोरी प्रबंधन कम मात्रा के डेटा तक तीव्र अभिगम हेतु अनुकूलित उच्च स्मृति बैंडविड्थ हेतु अनुकूलित
लचीलापन अत्यधिक बहुउद्देश्यीय विशिष्ट कार्य-उन्मुख (समानांतर कार्यभार)
ऊर्जा दक्षता सामान्य कार्यों हेतु दक्ष संगणन-गहन कार्यभार हेतु दक्ष
प्रोग्रामिंग फोकस नियंत्रण प्रवाह एवं शाखाकरण डेटा-समानांतर संगणना
सामान्य उदाहरण प्रचालन तंत्र, ब्राउजर, डेटाबेस का संचालन कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण, गेमिंग, सिमुलेशन।

GPU बनाम ग्राफिक्स कार्ड के बीच अंतर

पहलू GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) ग्राफिक्स कार्ड (वीडियो कार्ड)
परिभाषा समानांतर गणना और ग्राफिक्स प्रोसेसिंग के लिए डिजाइन किया गया एक विशिष्ट प्रोसेसर है। एक हार्डवेयर उपकरण है, जो GPU को समाहित करता है और ग्राफिक्स आउटपुट सक्षम करता है।
प्रकृति एक एकल प्रोसेसिंग चिप कंप्यूटर में स्थापित एक पूर्ण हार्डवेयर इकाई
मुख्य कार्य रेंडरिंग, AI और समानांतर कार्यों के लिए गणितीय गणनाएँ करता है। डिस्प्ले आउटपुट प्रदान करता है और GPU-त्वरित कार्यों का समर्थन करता है।
स्वतंत्रता स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर सकता; किसी प्रणाली में एकीकरण की आवश्यकता होती है। डेस्कटॉप/सर्वर में ‘प्लग-एंड-प्ले’ उपकरण के रूप में कार्य करता है।
उपयोग का क्षेत्र AI, गेमिंग और सिमुलेशन के लिए मुख्य गणना इंजन गेमिंग, पेशेवर ग्राफिक्स और AI कार्यभार के लिए कंप्यूटरों में उपयोग किया जाता है।
उदाहरण NVIDIA जैसे उन्नत प्रोसेसरों के भीतर स्थित GPU चिप। PC में स्थापित RTX या Radeon शृंखला जैसे ग्राफिक्स कार्ड।

संदर्भ

प्रधानमंत्री ने वर्ष 2026 के इंडिया AI इंपैक्ट शिखर सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए भारत के व्यापक “मानव विजन” का अनावरण किया।

संबंधित तथ्य

  • वर्ष 2026 के इंडिया AI इंपैक्ट शिखर सम्मेलन में, भारत ने 2.5 लाख से अधिक AI उत्तरदायित्व प्रतिज्ञाओं के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्राप्त कर अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया, जिससे नैतिक AI को एक जन-आंदोलन में परिवर्तित किया गया।
  • अगला AI इंपैक्ट शिखर सम्मेलन वर्ष 2027 में जेनेवा, स्विट्जरलैंड में आयोजित किया जाएगा।

AI युग में भारत का जनसांख्यिकीय एवं प्रौद्योगिकीय लाभ

  •  वैश्विक जनसंख्या के छठे भाग का निवास स्थान।
  • विश्व का सबसे बड़ा युवा समूह।
  • तीव्र गति से विस्तारित होता प्रौद्योगिकी प्रतिभा आधार
  • उभरती प्रौद्योगिकियों का सृजक तथा तीव्र अंगीकारकर्ता, दोनों के रूप में कार्य करता है।
  • वैश्विक AI मानदंडों के निर्माण में पैमाने-आधारित उत्तरदायित्व वहन करता है।

मानव (MANAV) विजन के बारे में

  • यह नैतिक, उत्तरदायी और समावेशी AI शासन के लिए मानव-केंद्रित रूपरेखा प्रस्तुत करता है। यह निम्नलिखित पाँच स्तंभों पर आधारित है:
    • स्तंभ 1: ‘M’ का अर्थ है- Moral and Ethical systems (नैतिक एवं आचार-आधारित प्रणाली):
      • AI को निष्पक्षता, पारदर्शिता और मानवीय पर्यवेक्षण पर आधारित होना चाहिए।
      • नीतिगत समर्थन: भारत राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा से ही नैतिक AI को संस्थागत रूप दे रहा है, जो विभिन्न स्तरों पर डिजिटल और AI साक्षरता को एकीकृत करती है।
    • स्तंभ 2: ‘A’ का अर्थ है-Accountable Governance (उत्तरदायी शासन)
      • यह AI में विश्वास निर्माण हेतु पारदर्शिता, सुदृढ़ निगरानी और स्पष्ट संस्थागत उत्तरदायित्व पर बल देता है।
      • नीतिगत समर्थन 
        • इंडियाAI मिशन, ₹10,300 करोड़ से अधिक के व्यय प्रावधान के साथ, कंप्यूट, डेटा, कौशल-विकास और नवाचार क्षमता को सुदृढ़ करता है।
        • भारत के AI शासन संबंधी दिशा-निर्देश, जो विश्वास, समानता, उत्तरदायित्व और निष्पक्षता पर आधारित जन-केंद्रित रूपरेखा स्थापित करते हैं।
    • स्तंभ 3: ‘N’ का अर्थ है National sovereignty – whose data, his right (राष्ट्रीय संप्रभुता – जिसका डेटा, उसका अधिकार) ‘
      • AI-प्रेरित विश्व में संप्रभुता डेटा, एल्गोरिदम और डिजिटल अवसंरचना तक विस्तारित होती है। भारत का उद्देश्य महत्त्वपूर्ण डेटासेट को सुरक्षित करना, घरेलू कंप्यूट क्षमता का निर्माण करना तथा स्वदेशी AI मॉडलों को प्रोत्साहित करना है।
      • नीतिगत समर्थन: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और विश्वसनीय डेटा शासन ढाँचे जैसी पहलें, रणनीतिक स्वायत्तता के साथ वैश्विक सहयोग सुनिश्चित करते हुए तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती हैं।
    • स्तंभ 4: ‘A’ का अर्थ है-Accessible and inclusive (सुलभ एवं समावेशी)
      • यह पुष्टि करता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाज के लिए गुणक के रूप में कार्य करे, न कि कुछ विशेषाधिकार प्राप्त लोगों का एकाधिकार बने।
      • नीतिगत समर्थन: मेघराज GI क्लाउड, इंडियाAI कंप्यूट पोर्टल, इंडियाAI कोश तथा राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन जैसे प्लेटफॉर्म कंप्यूट, डेटा और उच्च-प्रदर्शन अवसंरचना तक पहुँच का लोकतंत्रीकरण करते हैं, जिससे भारत में AI नवाचार व्यापक, सुलभ और समावेशी बना रहे।
    • स्तंभ 5: ‘V’ का अर्थ है-Valid and legitimate (वैध एवं विधिसम्मत)
      • यह AI के उपयोग में विश्वास, सुरक्षा और वैधता को केंद्र में रखता है।
        • AI प्रणालियाँ सत्यापन योग्य, विधिसम्मत और पारदर्शी होनी चाहिए, विशेषकर ऐसे समय में जब डीपफेक और ‘सिंथेटिक मीडिया’ लोकतांत्रिक विमर्श और सामाजिक विश्वास के लिए जोखिम उत्पन्न कर रहे हैं।
      • नीतिगत समर्थन: सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026, कृत्रिम रूप से निर्मित सामग्री को विनियमित करते हैं, जबकि इंडियाAI मिशन AI के सुरक्षित प्रयोग, पक्षपात का न्यूनीकरण, गोपनीयता सुरक्षा उपायों और एल्गोरिदमिक ऑडिट को प्रोत्साहित करता है, जिससे उत्तरदायी और जिम्मेदार AI का प्रयोग सुनिश्चित होता है।

महत्त्व

  • वैश्विक AI पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मार्गदर्शक रूपरेखा: MANAV विजन 21वीं सदी के AI युग में मानवता के कल्याण के लिए भारत को एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करते हुए वैश्विक AI पारिस्थितिकी तंत्र का मार्गदर्शन करेगा।
  • रूपरेखा से कार्यान्वयन तक: भारत का MANAV विजन वैचारिक रूपरेखा से आगे बढ़ते हुए, सतत् नीति प्रतिबद्धता के माध्यम से शिक्षा, डिजिटल अवसंरचना, शासन और नवाचार के क्षेत्र में अपने सिद्धांतों को समन्वित कार्रवाई में रूपांतरित करता है।

संदर्भ

केंद्रीय बजट 2026-27 में, जेंडर बजट विवरण (GBS) रिकॉर्ड ₹5.01 लाख करोड़ (पिछले वर्ष की तुलना में 11.55% की वृद्धि) तक पहुँच गया, जिससे कुल व्यय का हिस्सा बढ़कर 9.37% (8.86% से) हो गया, 53 मंत्रालयों और पाँच केंद्रशासित प्रदेशों ने आवंटन की रिपोर्ट की, जो नारी शक्ति के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

2026-27 जेंडर बजट की राजकोषीय संरचना

  • भाग A – प्रत्यक्ष सशक्तीकरण (100% महिला-विशिष्ट):  यह श्रेणी, जो जेंडर बजट का लगभग 21.49% (₹1.07 लाख करोड़ से अधिक) है, विशेष रूप से महिलाओं को समर्पित है। 
    • इसमें मिशन शक्ति और लखपति दीदी योजना जैसी प्रमुख सुरक्षा और सशक्तीकरण पहल शामिल हैं। 
    • विशेष रूप से, LPG योजना में वर्ष 2025 में कोई विशिष्ट आवंटन नहीं होने के बाद इस वर्ष ₹9,200 करोड़ की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
  • भाग B- बहुसंख्यक प्रभाव (30-99% महिला-विशिष्ट):  72.56% (₹3.63 लाख करोड़ से अधिक) की सबसे बड़ी हिस्सेदारी लेते हुए, यह खंड बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे और सामाजिक योजनाओं को कवर करता है, जहाँ महिलाएँ प्राथमिक लाभार्थी हैं। 
    • जल जीवन मिशन जैसे उच्च प्रभाव वाले कार्यक्रम, जिसके बजट में ₹12,500 करोड़ की वृद्धि देखी गई, और PMAY-G (ग्रामीण आवास) इस श्रेणी में आते हैं।
  • भाग C- अनुषंगी लाभ (30% से कम महिला-विशिष्ट):  यह नई श्रेणी मुख्यधारा की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के द्वितीयक लाभों को ट्रैक करती है। 
    • यह सुनिश्चित करता है कि ग्रामीण सड़क निर्माण जैसे सामान्य निवेश का मूल्यांकन महिला गतिशीलता और सुरक्षा के नजरिए से किया जाए।

वित्त वर्ष 2026-27 बजट के प्रमुख रणनीतिक स्तंभ

  • ऋण निर्भरता से व्यवसाय स्वामित्व की ओर: इस बजट की आधारशिला SHE-Marts (स्वयं-सहायता उद्यमी मार्ट) का शुभारंभ है। 
    • इस पहल का उद्देश्य वर्तमान में स्व-सहायता समूहों (SHGs) में संगठित 10 करोड़ महिलाओं को बुनियादी माइक्रो-क्रेडिट उपयोगकर्ताओं से पेशेवर व्यवसाय मालिकों में परिवर्तित करना है। 
    • डिजिटल बाजार और नवीन वित्तीय उपकरण प्रदान करके, सरकार का लक्ष्य “अंतिम-मील” विपणन अंतर को पाटना है, जो अक्सर ग्रामीण महिलाओं को अपने उद्यमों को बढ़ाने से रोकता है।
  • देखभाल अर्थव्यवस्था और ‘टाइम पाॅवर्टी’ को कम करना:  यह स्वीकार करते हुए कि अवैतनिक घरेलू श्रम कार्यबल भागीदारी में एक बड़ी बाधा है, बजट “देखभाल अर्थव्यवस्था” ढाँचे का परिचय देता है। 
    • क्रेच योजना के विस्तार और वृद्धावस्था सेवाओं के लिए 1.5 लाख देखभालकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण धनराशि निर्देशित की गई है। 
    • इसका उद्देश्य महिलाओं की “समय की अल्पता” को कम करना है, जिससे उन्हें आर्थिक अवसरों को आगे बढ़ाने की अधिक स्वतंत्रता मिल सके।
  • STEM समावेशन और डिजिटल समानता:  लैंगिक आधारित डिजिटल विभाजन को समाप्त  करने के लिए, वित्त वर्ष 2026-27 का बजट विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में महिलाओं को प्राथमिकता देता है। 
    • विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों को लक्षित करते हुए, सरकार हर जिले में लड़कियों के लिए छात्रावास स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। 
    • इस बुनियादी ढाँचे को आवागमन की बाधाओं को कम करने और एसटीईएम क्षेत्रों में आवश्यक गहन प्रयोगशाला और अध्ययन घंटों के लिए आवश्यक सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • ग्रामीण लचीलापन और संपत्ति स्वामित्व:  प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) महिलाओं द्वारा घरों के एकल या संयुक्त स्वामित्व को प्रोत्साहित करके सामाजिक सुरक्षा के माध्यम के रूप में काम करना जारी रखती है। 
    • “लाभार्थी” से “मालिक” की ओर यह परिवर्तन ग्रामीण महिलाओं को आवश्यक संपार्श्विक और स्थायी वित्तीय सुरक्षा की भावना प्रदान करता है। 
    • इसके अतिरिक्त, बजट मत्स्यपालन क्षेत्र में महिला नेतृत्व वाले समूहों को बढ़ावा देकर और 500 जलाशयों के विकास द्वारा महिलाओं को “ब्लू इकोनॉमी” से जोड़ता है।

जेंडर बजटिंग के बारे में

  • यह महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का एक उपकरण है, जो संपूर्ण नीति प्रक्रिया में जेंडर लेंस लागू करने के लिए प्रवेश बिंदु के रूप में बजट का उपयोग करता है। 
  • जेंडर बजट कोई अलग बजट नहीं है इस में सरकार की विभिन्न आर्थिक नीतियों का जेंडर परिप्रेक्ष्य से विश्लेषण शामिल है।   
  • समारोह: यह केंद्रीय बजट का एक अलग विवरण (अलग बजट नहीं) है, यह महिलाओं और लड़कियों के लिए लक्षित बजटीय आवंटन तथा व्यय का अनुमान प्रदान करता है।
    • इसमें लैंगिक दृष्टिकोण से सरकार की विभिन्न आर्थिक नीतियों का विश्लेषण शामिल है।
  • जेंडर बजटिंग (GB) के पीछे तर्क
    • समानता और दक्षता:  नागरिकों के बीच समानता को बढ़ावा देने के मूल सिद्धांत के अलावा, जेंडर बजटिंग दक्षता लाभ के माध्यम से अर्थव्यवस्था को लाभ पहुँचा सकता है। 
    • लैंगिक के आधार पर प्रणालीगत अंतर को ध्यान में रखें:  बजटीय नीतियों के लिए पुरुषों और महिलाओं की अक्सर अलग-अलग प्राथमिकताएँ होती हैं और लैंगिक के दृष्टिकोण से महिलाओं की चिंताओं को दूर करने में एक लैंगिक उत्तरदायी बजट बहुत सहायक हो सकता है।
  • अपेक्षाएँ:  जब प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो जेंडर बजटिंग यह उजागर करने में मदद करती है कि कैसे लैंगिक असमानताएँ अनजाने में सार्वजनिक नीतियों में अंतर्निहित हो गई हैं ताकि संसाधनों को अधिक समान रूप से आवंटित किया जा सके। 
    • यह उन बजट उपायों को प्राथमिकता देने में भी मदद करता है, जो प्रमुख लैंगिक उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायता करेंगे। 
  • संयुक्त राष्ट्र महिला द्वारा जेंडर बजटिंग के लिए पाँच-चरणीय रूपरेखा (चित्र देखें)

महिला-नेतृत्व वाले विकास और महिला-केंद्रित विकास के बीच अंतर

महिला-नेतृत्व वाला विकास और महिला-केंद्रित विकास दोनों ही विकास के दृष्टिकोण हैं, जो महिलाओं पर केंद्रित हैं, लेकिन उनके फोकस और दृष्टिकोण में भिन्नता है:

  • महिला नेतृत्व वाला विकास:  यह महिलाओं को अग्रणी भूमिका निभाने और किसी समुदाय या समाज की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रगति को आकार देने में सक्रिय रूप से भाग लेने पर केंद्रित है। 
    • इसके कुछ लक्ष्यों में शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना तथा लैंगिक डिजिटल विभाजन को पाटना शामिल है। 
  • महिला केंद्रित विकास:  यह महिलाओं को समाज में एक महत्त्वपूर्ण शक्ति के रूप में स्वीकार करने और उन्हें विकास कार्यक्रमों में एकीकृत करने पर केंद्रित है। 
    • इसके कुछ लक्ष्यों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार, कठिनाई कम करना और क्षमता निर्माण शामिल हैं।

जेंडर बजटिंग का विकास

  • महिलाओं पर राष्ट्रीय बजट के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए इसे पहली बार वर्ष 1984 में ऑस्ट्रेलिया में पेश किया गया था और इस दृष्टिकोण को कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और फिलीपींस आदि सहित अन्य देशों द्वारा अपनाया गया था। 
  • कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र बीजिंग मंच: वर्ष 1995 में, इसने सरकारी बजट प्रक्रियाओं में लैंगिक परिप्रेक्ष्य को एकीकृत करने का आह्वान किया।
  • संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास लक्ष्य (SDG):  वर्ष 2015 में, इसने लैंगिक समानता (SDG 5) के लिए बजट आवंटन को ट्रैक करने के लिए पर्याप्त संसाधनों और उपकरणों की माँग की। 
  • विकास के लिए अदीस अबाबा एक्शन एजेंडा:  वर्ष 2015 में, इसने लैंगिक समानता के लिए संसाधन आवंटन पर नजर रखने और जेंडर बजटिंग की क्षमता को मजबूत करने के महत्त्व को रेखांकित किया।
  • वुमेन 20 (W20) (G20 का एक आधिकारिक जुड़ाव समूह):  वर्ष 2014 में ऑस्ट्रेलिया में स्थापित, और इसने आधिकारिक तौर पर वर्ष 2015 में तुर्की में परिचालन शुरू किया।
    • वर्ष 2020 में, इसने यह सुनिश्चित करने के लिए जेंडर बजटिंग में अधिक निवेश का आह्वान किया कि राजकोषीय नीतियाँ COVID-19 महामारी से उबरने में लैंगिक समानता को आगे बढ़ाएँ।
  • सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (MDG):  भारत सरकार जिन आठ MDG पर हस्ताक्षरकर्ता है, उनमें “लक्ष्य 3: लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और महिलाओं को सशक्त बनाना” शामिल है।

भारत में जेंडर बजटिंग

  • केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) ने वर्ष 2004 में महिला सशक्तीकरण के लिए जेंडर बजटिंग को एक उपकरण के रूप में मान्यता दी। 
  • वित्त मंत्रालय ने जनवरी 2005 तक सभी मंत्रालयों में जेंडर बजटिंग सेल की स्थापना अनिवार्य कर दी। 
    • जेंडर बजटिंग सेल पर चार्टर वर्ष 2007 में जारी किया गया था। 
  • CEDAW अनुसमर्थन: भारत ने वर्ष 1993 में महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर कन्वेंशन (CEDAW) की पुष्टि की।
    • पहला जेंडर बजट स्टेटमेंट (GBS) 2005-06 के केंद्रीय बजट में प्रकाशित किया गया था। 
  • विभिन्न हितधारक:  ऐसे कई अलग-अलग हितधारक हैं, जो जेंडर बजटिंग में शामिल हो सकते हैं।
    • केंद्रीय स्तर:  महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD)।
    • राज्य स्तर:  महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, वित्त और योजना विभाग।
    • जिला स्तर:  हब फॉर एंपॉवरमेंट ऑफ वूमेन (HEW) कम-से-कम एक लैंगिक विशेषज्ञ के साथ जेंडर बजटिंग का समन्वय करता है।
  • भूमिका: जेंडर बजटिंग ढाँचे ने तथाकथित जेंडर-तटस्थ मंत्रालयों को भी महिलाओं के लिए नई योजनाएँ और कार्यक्रम तैयार करने में सहायता प्रदान की है।
    • विकासशील ढाँचा: पिछले दो दशकों में भारत का जेंडर बजट वक्तव्य एक व्यापक दस्तावेज़ के रूप में विकसित हुआ है, जो मदवार आवंटन और व्यय का विवरण स्पष्ट, सुव्यवस्थित और पूर्वानुमेय स्वरूप में प्रस्तुत करता है।

जेंडर बजटिंग का महत्त्व

  • लैंगिक समानता को बढ़ावा: जेंडर बजटिंग यह सुनिश्चित करती है कि वित्तीय आवंटन लैंगिक असमानताओं को दूर करने पर केंद्रित हों, जिससे महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता को बल मिलता है।
  • सूचित नीतिगत निर्णय: जेंडर बजटिंग नीति-निर्माताओं को यह समझने में सहायता करती है कि नीतियों का महिलाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा, ताकि वित्तीय नियोजन में महिलाओं की चिंताओं को समुचित रूप से शामिल किया जा सके।
  • संसाधनों का बेहतर उपयोग: एक सुदृढ़ जेंडर बजटिंग ढाँचा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लैंगिक अंतर को पाटने के लिए संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग को संभव बनाता है।
  • कानूनी ढाँचे को सुदृढ़ करना: यह आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 2013 तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, 2013 जैसे महिला-विशेष कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक वित्तीय समर्थन सुनिश्चित करता है।
  • व्यापक सामाजिक प्रभाव: विभिन्न अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि जेंडर बजटिंग से जेंडर-संवेदनशील कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति पर पड़ता है।
  • जेंडर-तटस्थ बजटिंग की कमियों का समाधान: पारंपरिक बजटिंग अक्सर नीतियों के लैंगिक प्रभावों की अनदेखी करती है। जेंडर बजटिंग यह सुनिश्चित करती है कि सभी प्रमुख बजटीय आवंटनों में महिलाओं की विशिष्ट भूमिकाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: जेंडर बजटिंग महिलाओं-केंद्रित योजनाओं में धन के आवंटन को अधिक पारदर्शी बनाती है और उनके क्रियान्वयन तथा प्रभाव के आकलन में जवाबदेही सुनिश्चित करती है।

भारत में जेंडर बजटिंग से जुड़ी चुनौतियाँ

रिकॉर्ड तोड़ आँकड़े एक ओर नीति के प्रति सुदृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, वहीं इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के मार्ग में अब भी कई संरचनात्मक चुनौतियाँ बनी हुई हैं: 

  • संरचनात्मक और रिपोर्टिंग संबंधी खामियाँ: 5.01 लाख करोड़ रुपये का आवंटन एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है, किंतु मौजूदा ढाँचा “परिवर्तनकारी” के बजाय अधिकतर “नाममात्र” लेखांकन पर आधारित है।
    • “लेखांकन अभ्यास” का जाल: बजट का एक बड़ा हिस्सा अब भी भाग–B में केंद्रित है (वे योजनाएँ, जिनमें 30–99 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ होती हैं)।
      • आलोचनात्मक दृष्टिकोण: आलोचक तर्क देते हैं कि यह अक्सर तथ्य के बाद की रिपोर्टिंग का अभ्यास है जहाँ मंत्रालय स्पष्ट प्रतिशत (जैसे- 30% ‘महिला समर्थक’ टैग) लागू करते हैं, बिना किसी अनुभवजन्य प्रमाण के कि लाभ वास्तव में महिलाओं तक पहुँचते हैं।
    • क्षेत्रीय संकेंद्रण: जेंडर बजट का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा केवल पाँच–छह मंत्रालयों (जैसे- ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा) में केंद्रित है।
      • इसके परिणामस्वरूप बिजली, परिवहन और वाणिज्य जैसे तथाकथित ‘लैंगिक-तटस्थ’ क्षेत्रों में जवाबदेही बहुत सीमित रह जाती है, जबकि महिला सुरक्षा और आर्थिक गतिशीलता में उनकी भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
    • भाग–B में प्रभाव का क्षरण: भाग–B के अंतर्गत महिलाओं की विशिष्ट आवश्यकताएँ अक्सर सामान्य घरेलू लाभों में समाहित हो जाती हैं, जिससे लक्षित और केंद्रित हस्तक्षेपों का अभाव बना रहता है।
  • ‘हार्डवेयर बनाम सॉफ्टवेयर’ दुविधा: भौतिक परिसंपत्तियों के निर्माण (व्यय आवंटन) और उनकी वास्तविक कार्यात्मक उपयोगिता (परिणाम) सुनिश्चित करने के बीच एक गहरा अंतर बना हुआ है।
    • समन्वय का अभाव: आवास जैसी योजनाएँ भौतिक संरचना अर्थात् घर तो उपलब्ध कराती हैं, लेकिन यदि उसके साथ विश्वसनीय जल आपूर्ति या किफायती रसोई ईंधन जैसी सहायक सुविधाएँ उपलब्ध न हों, तो घरेलू श्रम का बोझ पुनः महिलाओं पर आ जाता है।
    • रखरखाव और पूर्णता का अंतर: जब अवसंरचना असफल रहती है या अधूरी होती है, तो महिलाओं को “समय की अल्पता” का सामना करना पड़ता है—उन्हें जल या ईंधन लाने में घंटों खर्च करने पड़ते हैं, जिससे वे औपचारिक कार्यबल में भागीदारी नहीं कर पातीं हैं।
  • देखभाल अर्थव्यवस्था और शहरी उपेक्षा: वर्तमान नीतियाँ मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित हैं, जिसके परिणामस्वरूप बढ़ती हुई शहरी महिला श्रमशक्ति की आवश्यकताएँ पर्याप्त रूप से पूरी नहीं हो पा रही हैं।
    • शहरी अवसंरचना का अभाव: अधिकांश प्रमुख सरकारी योजनाएँ ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। शहरी क्षेत्रों में किफायती शिशु देखभाल, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन तथा केवल महिलाओं के लिए आवास जैसी आवश्यक सुविधाओं हेतु विशिष्ट बजटीय प्रावधानों का अभाव है, जो शहरी महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
    • अपर्याप्त रूप से कार्यरत देखभाल सेवाएँ: पालना (शिशु देखभाल) योजना क्रियान्वयन की विफलता का एक प्रमुख उदाहरण है। स्वीकृत लगभग 14,600 केंद्रों में से केवल लगभग 3,000 केंद्र ही कार्यरत हैं, जिसका मुख्य कारण कर्मियों का कम पारिश्रमिक और कमजोर अवसंरचना है।
  • डेटा की कमी और संस्थागत कमजोरी: सूक्ष्म और विस्तृत आँकड़ों के अभाव में जेंडर बजटिंग एक अप्रभावी वित्तीय उपकरण बनकर रह जाती है।
    • लाभार्थियों की अदृश्यता: प्रखंड स्तर पर वास्तविक समय के लैंगिक-विभाजित आँकड़ों की अनुपस्थिति के कारण जेंडर प्रभाव आकलन करना या यह मापना असंभव हो जाता है कि किसी महिला के दैनिक श्रम में वास्तव में कमी आई है अथवा नहीं।
    • कमजोर संस्थागत ढाँचा: मंत्रालयों के भीतर जेंडर बजटिंग प्रकोष्ठों में अक्सर तकनीकी विशेषज्ञता और समर्पित मानव संसाधन का अभाव होता है, जिसके कारण वे केवल खर्च की निगरानी तक सीमित रह जाते हैं और जीवन में आए वास्तविक परिवर्तनों को माप नहीं पाते हैं।
    • सुरक्षा से जुड़े वित्तपोषण में ठहराव: कार्य और सुरक्षा के बीच स्पष्ट संबंध होने के बावजूद, मिशन संबल (एकल सहायता केंद्र) जैसी प्रमुख सुरक्षा पहलों के बजट में केवल मामूली वृद्धि हुई है, जो बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है।

जेंडर बजटिंग को बढ़ावा देने हेतु भारत की पहलें

  1. सामर्थ्य ढाँचा – सार्वभौमिक कवरेज: जेंडर बजटिंग अब मिशन शक्ति के अंतर्गत ‘सामर्थ्य’ उप-योजना का एक क्रियाशील स्तंभ बन चुकी है।
    • शत-प्रतिशत का लक्ष्य: इस योजना के माध्यम से सभी केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों में, साथ ही शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगरपालिकाओं) में जेंडर बजटिंग को सार्वभौमिक रूप से अपनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
    • वित्तीय सहायता: इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा विभागों और प्रशिक्षण संस्थानों को विशेष कार्यशालाओं तथा क्षमता-विकास कार्यक्रमों के आयोजन के लिए शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  2. डिजिटल रूपांतरण – ज्ञान केंद्र (2025): वर्ष 2025 के मध्य में प्रारंभ किया गया जेंडर बजटिंग ज्ञान केंद्र, जेंडर-संवेदनशील शासन के लिए भारत का प्रमुख डिजिटल भंडार के रूप में कार्य करता है।
    • केंद्रीकृत बौद्धिक केंद्र: इसमें नीतिगत संक्षेप, लैंगिक-विभाजित आँकड़े तथा क्षेत्र-विशेष उपकरण उपलब्ध हैं, जो बजट की प्रारंभिक योजना चरण में नीति-निर्माताओं को जेंडर दृष्टिकोण अपनाने में सहायता करते हैं।
    • मानकीकृत प्रशिक्षण: इस पोर्टल पर एक प्रशिक्षण मार्गदर्शिका भी उपलब्ध है, जो अधिकारियों को केवल व्यय आवंटन पर नजर रखने से आगे बढ़कर वास्तविक प्रभाव के आकलन तक पहुँचने के लिए चरणबद्ध और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है।
  3. उप-राष्ट्रीय नेतृत्व – श्रेष्ठ प्रथाएँ जहाँ एक ओर केंद्र सरकार जेंडर बजटिंग का ढाँचा निर्धारित करती है, वहीं भारतीय राज्यों ने जेंडर बजटिंग को और अधिक गहराई देने के लिए विशिष्ट और नवोन्मेषी मॉडल विकसित किए हैं।
    • ओडिशा (प्रारंभिक अंगीकार करने वाला राज्य): ओडिशा अग्रणी राज्यों में रहा है, जिसने वर्ष 2004–05 में महिला घटक योजना के माध्यम से जेंडर-संवेदनशील बजटिंग को अपनाया।
      • महिला घटक योजना की विशेषता: इस योजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों में बजट का एक निश्चित भाग स्पष्ट रूप से महिलाओं के कल्याण के लिए निर्धारित करना अनिवार्य किया गया, जिससे क्षेत्रवार उत्तरदायित्व और जवाबदेही सुनिश्चित हुई।
    • कर्नाटक (लेखा परीक्षण में विशेषज्ञ): कर्नाटक ने बजट चक्र के अंतिम चरण में जवाबदेही पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। इसके लिए राज्य ने एक व्यापक जेंडर लेखा परीक्षण मार्गदर्शिका विकसित की है।
      • यह उपकरण यह निगरानी करने में सहायक है कि आवंटित धन वास्तव में लक्षित लाभार्थियों तक पहुँचा या नहीं तथा उससे अपेक्षित सामाजिक परिवर्तन हुए या नहीं।
    • केरल (स्थानीय शासन मॉडल): केरल स्थानीय बजटों में जेंडर दृष्टिकोण को सशक्त रूप से शामिल करने में अग्रणी रहा है। यहाँ पंचायत स्तर पर योजना निधि का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा विशेष रूप से महिला-नेतृत्व वाली परियोजनाओं के लिए आरक्षित किया जाता है।

आगे की राह 

  • लेखा ढाँचे का परिष्करण: वर्तमान में “भाग–B” (जहाँ 30–99 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ होती हैं) का वर्चस्व अक्सर अस्पष्ट और अनुमान-आधारित आकलनों की ओर ले जाता है।
    • भाग–B रिपोर्टिंग का मानकीकरण: सामान्य योजनाओं पर एक समान 30 प्रतिशत का अनुप्रयोग करने के बजाय, मंत्रालयों को वास्तविक लाभार्थी आँकड़ों के आधार पर अनुभवजन्य औचित्य प्रस्तुत करना अनिवार्य किया जाए।
    • भाग–A के विस्तार को प्रोत्साहन: मंत्रालयों को 100 प्रतिशत महिला-विशिष्ट उप-योजनाएँ (जिन्हें भाग–ए में स्थानांतरित किया जा सके) तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि संसाधन सामान्य घरेलू आवश्यकताओं में समाहित न हो जाएँ।
    • अनिवार्य जेंडर प्रभाव आकलन: किसी विभाग के लिए भविष्य के बजटीय वृद्धि को उसकी मौजूदा जेंडर-चिह्नित योजनाओं के सफल जेंडर प्रभाव आकलन से जोड़ा जाए।
  • शहरीकरण और देखभाल अंतर को पाटना: जैसे-जैसे भारत का शहरीकरण बढ़ रहा है, बजट को शहरी महिला श्रमिकों की विशिष्ट बाधाओं और सीमाओं के समर्थन की दिशा में पुनः उन्मुख किया जाना चाहिए।
    • शहरी अवसंरचना का ‘सॉफ्टवेयर’: अंतिम-मील संपर्क (ई-रिक्शा, बेहतर प्रकाश व्यवस्था) और श्रेणी-2 और श्रेणी-3 शहरों में शहरी कामकाजी महिलाओं के छात्रावासों के लिए धन उपलब्ध कराकर ‘सुरक्षित गतिशीलता’ पर ध्यान केंद्रित करना।
    • देखभाल अर्थव्यवस्था का पुनरोद्धार: देखभाल अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पालना योजना का विस्तार, कर्मियों के बेहतर पारिश्रमिक और शिशु देखभाल केंद्रों के सार्वजनिक अवसंरचना में एकीकरण के माध्यम से किया जाना चाहिए।
    • जेंडर-समावेशी शहरी नियोजन: यह अनिवार्य किया जाए कि शहरी नियोजन समितियों में कम-से-कम 30 प्रतिशत सदस्य महिलाएँ हों, ताकि नगरों की रूपरेखा में महिला सुरक्षा और सुगम्यता की आवश्यकताएँ प्रतिबिंबित हों।
  • संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ करना: जेंडर बजटिंग का “मस्तिष्क”—जेंडर बजटिंग सेल (GBCs)—केवल नामपट्टिका से नहीं, बल्कि वास्तविक क्षमता से सशक्त होना चाहिए।
    • GBCs का पेशेवरकरण: GBCs में अत्यधिक कार्यभार वाले सामान्य प्रशासकों के बजाय तकनीकी जेंडर विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की नियुक्ति की जाए।
    • रियल-टाइम डेटा एकीकरण: सखी डैशबोर्ड और अन्य डिजिटल टूल्स का उपयोग कर ब्लॉक स्तर पर लैंगिक-विभाजित डेटा एकत्र किया जाए। यह डेटा अगले वर्ष के बजट कॉल सर्कुलर को सूचित/आधारित करे।
    • परिणाम-आधारित निगरानी: व्यय को ट्रैक करने से आगे बढ़कर प्रभाव संकेतकों को ट्रैक करने की ओर संक्रमण किया जाए, जैसे कि:
      • अवैतनिक घरेलू श्रम में घंटों की बचत।
      • किसी विशिष्ट जिले में महिला श्रम बल की भागीदारी में वृद्धि।
      • वन स्टॉप सेंटर (OCS) पर प्रतीक्षा समय में कमी।
  • नए क्षेत्रों में “जेंडर लेंस” का विस्तार: जेंडर बजटिंग को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे “पारंपरिक” मंत्रालयों से आगे बढ़ना चाहिए।
    • तटस्थ” क्षेत्रों को प्रस्तुत करना: बिजली, पेट्रोलियम और परिवहन जैसे मंत्रालयों को इस बात पर रिपोर्ट देनी चाहिए कि उनका बुनियादी ढाँचा (जैसे- स्ट्रीट लाइटिंग या LPG उपलब्धता) विशेष रूप से एक महिला की “समय की गरीबी” को कैसे कम करता है।
    • डिजिटल सुरक्षा कोष: AI-संचालित साइबर अपराध और उत्पीड़न से निपटने के लिए मिशन शक्ति के तहत एक समर्पित कोष की स्थापना करें, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी में उभरती बाधाएँ हैं।

निष्कर्ष 

₹5.01 लाख करोड़ का आवंटन एक साहसिक मील का पत्थर है, फिर भी सफलता काल्पनिक परिव्यय से मूर्त परिणामों की ओर बढ़ने पर निर्भर करती है। जैसा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने कहा, “मैं किसी समुदाय की प्रगति को महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति की डिग्री से मापता हूँ।” वास्तविक विकास के लिए शहरी-ग्रामीण विभाजन को पाटने और “समय की गरीबी” की संरचनात्मक बाधाओं को समाप्त करने की आवश्यकता है।


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