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भारत में AI स्टार्ट-अप

Lokesh Pal January 12, 2026 04:29 19 0

संदर्भ

प्रधानमंत्री ने इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 से पहले भारतीय AI स्टार्ट-अप्स के साथ एक गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता की।

संबंधित तथ्य

  • यह संवाद भारत के उस रणनीतिक उद्देश्य को उजागर करता है, जिसके तहत भारत को नैतिक, समावेशी और स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
  • भारत में अगले महीने होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित गोलमेज सम्मेलन में फाउंडेशन मॉडल पिलर के तहत अर्हता प्राप्त करने वाले कुल 12 भारतीय AI स्टार्ट-अप ने भाग लिया।
    • इंडियाAI मिशन का एक प्रमुख घटक, फाउंडेशन मॉडल पिलर का उद्देश्य स्वदेशी, बड़े पैमाने पर AI मॉडल विकसित करना है, जिन्हें भाषा, स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान, शासन और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में उपयोग किया जा सके।

भारत का AI स्टार्ट-अप इकोसिस्टम: भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्ट-अप हैं और पिछले वर्ष लॉन्च हुए नए स्टार्ट-अप्स में से लगभग 89% ने अपने उत्पादों या सेवाओं में AI का उपयोग किया।

गोलमेज सम्मेलन के प्रमुख परिणाम

  • AI स्टार्ट-अप्स द्वारा अवलोकन
    • वैश्विक AI केंद्र में बदलाव: स्टार्ट-अप्स के अनुसार, AI नवाचार और अनुप्रयोग का केंद्र भारत की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
    • क्षेत्रीय तीव्र वृद्धि: भारत में AI क्षेत्र में तीव्र वृद्धि देखी जा रही है और इसमें भविष्य की अपार संभावनाएँ हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण
    • सामाजिक परिवर्तन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): प्रधानमंत्री ने समाज के परिवर्तन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के महत्त्व पर जोर दिया और आगामी शिखर सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक प्रौद्योगिकी नेता के रूप में भारत की भूमिका को दोहराया।
    • राष्ट्र निर्माता के रूप में स्टार्ट-अप: उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्टार्ट-अप और AI उद्यमी भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं, जो नवाचार एवं व्यापक कार्यान्वयन के लिए भारत की क्षमता को दर्शाते हैं।
    • भारत में निर्मित, विश्व के लिए निर्मित: प्रधानमंत्री ने ‘भारत में निर्मित, विश्व के लिए निर्मित’ की भावना को समाहित करने वाले एक विशिष्ट भारतीय AI मॉडल के विकास का आग्रह किया।
    • नैतिकता और विश्वास: प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय AI मॉडल नैतिक, निष्पक्ष, पारदर्शी और डेटा गोपनीयता सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए।
    • समावेशी और किफायती AI: उन्होंने किफायती AI, समावेशी AI और मितव्ययी नवाचार में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया।
    • स्थानीय सामग्री का प्रोत्साहन: भारतीय AI मॉडल को भारत की सांस्कृतिक और भाषायी विविधता को प्रतिबिंबित करने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं सहित स्थानीय तथा स्वदेशी सामग्री को बढ़ावा देना चाहिए।
    • समर्थन का आश्वासन: प्रधानमंत्री ने भारतीय AI मॉडलों की सफलता और वैश्विक स्तर पर विस्तार के लिए पूर्ण सरकारी समर्थन का आश्वासन दिया।

इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 के बारे में

  • मेजबान: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
  • स्थान: नई दिल्ली, फरवरी 2026
  • विषय: AI का लोकतंत्रीकरण, AI विभाजन को पाटना।
  • AI इंपैक्ट समिट इस शृंखला का चौथा आयोजन होगा, इससे पहले:
    • ब्लेचली पार्क समिट (यू.के., 2023)
    • सियोल समिट (दक्षिण कोरिया, 2024)
    • AI एक्शन समिट (पेरिस, फ्रांस, 2025)
  • पेरिस AI एक्शन समिट 2025 के प्रमुख विषय: सार्वजनिक हित में AI, कार्य का भविष्य, नवाचार और संस्कृति, AI में विश्वास, वैश्विक AI शासन।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य वैश्विक दक्षिण पर विशेष जोर देते हुए, उत्तरदायी, समावेशी और विकास-केंद्रित AI सहयोग को बढ़ावा देना है।
    • यह G20 AI सिद्धांतों, संयुक्त राष्ट्र और GPAI प्रस्तावों, AI पर अफ्रीकी घोषणा और AI पर हैम्बर्ग घोषणा जैसे मौजूदा वैश्विक प्रयासों पर आधारित है।
  • वैचारिक ढाँचा
    • इंडिया AI इंपैक्ट समिट निम्नलिखित तीन प्रमुख सूत्रों’ पर आधारित है। ये स्तंभ दर्शाते हैं कि बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग वैश्विक स्तर पर साझा लाभ के लिए कैसे किया जा सकता है।
      • लोग: मानव-केंद्रित, समावेशी, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और भरोसेमंद AI को बढ़ावा देता है।
      • ग्रह: जलवायु परिवर्तन, स्थिरता और कम ऊर्जा खपत के अनुरूप जिम्मेदार AI का समर्थन करता है।
      • प्रगति: स्वास्थ्य, शिक्षा, शासन, कृषि और सार्वजनिक सेवाओं में AI-संचालित समान विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।

  • परिचालनात्मक ढाँचा: सात चक्र
    • सूत्रों को सात चक्रों के माध्यम से क्रिया में रूपांतरित किया जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मूर्त AI परिणामों के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत में AI स्टार्ट-अप्स की आवश्यकता क्यों है? / भारतीय AI स्टार्ट-अप्स की भूमिका

  • तकनीकी आत्मनिर्भरता
    • विदेशी AI प्लेटफॉर्म और मॉडलों पर भारत की निर्भरता को कम करके तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करने के लिए AI स्टार्ट-अप्स आवश्यक हैं।
    • स्वदेशी AI समाधान राष्ट्रीय डेटा, रणनीतिक स्वायत्तता और डिजिटल सुरक्षा की रक्षा में सहायक होते हैं।
  • भारत की जनसांख्यिकीय और डेटा संबंधी उपलब्धियों का लाभ उठाना
    • भारत की विशाल जनसंख्या से विशाल और विविध डेटासेट उत्पन्न होते हैं, जिनका घरेलू AI स्टार्ट-अप्स द्वारा प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है।
    • स्थानीय स्टार्ट-अप्स भारत की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप विशिष्ट AI समाधान विकसित करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।
  • भारतीय भाषाओं और संस्कृति का संवर्द्धन
    • बहुभाषी और भारतीय भाषा में AI मॉडल विकसित करने में भारतीय AI स्टार्ट-अप्स की प्रमुख भूमिका है।
    • भाषा-समावेशी AI डिजिटल समावेशन सुनिश्चित करता है और गैर-अंग्रेजी भाषी आबादी के बहिष्कार को रोकता है।
  • समावेशी और किफायती नवाचार
    • AI स्टार्ट-अप किफायती और लागत-प्रभावी नवाचार को बढ़ावा देते हैं, जिससे उन्नत तकनीक अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुँच सके।
    • स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए किफायती AI समाधान अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
  • आर्थिक विकास और रोजगार सृजन
    • AI स्टार्ट-अप डेटा साइंस, अनुसंधान और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में उच्च मूल्य वाले रोजगार सृजन में योगदान करते हैं।
    • वे वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाते हैं और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य का समर्थन करते हैं।
  • क्षेत्रीय परिवर्तन
    • स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, AI स्टार्ट-अप निदान, चिकित्सा अनुसंधान और रोग पूर्वानुमान में सुधार करते हैं।
    • उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र में, AI स्वचालन, पूर्वानुमानित रखरखाव और सिमुलेशन के माध्यम से दक्षता बढ़ाता है।
    • शासन में, AI डेटा-आधारित निर्णय लेने और सेवा वितरण में सहायता कर सकता है।

भारत द्वारा की गई पहल

  • इंडियाAI मिशन
    • इंडियाAI मिशन एक राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम है, जिसे भारत के AI नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मार्च 2024 में अनुमोदित किया गया था।
    • इसका उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, कंप्यूटिंग अवसंरचना और कौशल विकास को बढ़ावा देकर भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करना है।
    • कार्यान्वयनकर्ता: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC)।
    • फाउंडेशन मॉडल विकास
      • इस मिशन के तहत, लार्ज लैंग्वेज मॉडल और बहुआयामी AI प्रणालियों सहित मूलभूत मॉडलों के विकास के लिए सहायता प्रदान की जा रही है।
      • इस पहल का उद्देश्य विदेशी AI प्लेटफार्मों पर निर्भरता कम करना और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए राष्ट्रीय रणनीति
    • नीति आयोग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए राष्ट्रीय रणनीति जारी की है, जिसमें ‘AI फॉर ऑल’ की परिकल्पना प्रस्तुत की गई है।
    • इस रणनीति का मूल उद्देश्य सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने और नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए AI का उपयोग करना है।
    • रणनीति में स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट शहरों और परिवहन जैसे क्षेत्रों में AI अनुप्रयोगों को प्राथमिकता दी गई है।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना AI प्रवर्तक के रूप में
    • डेटा-आधारित शासन: भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), जिसमें आधार, UPI और डिजिलॉकर शामिल हैं, AI-आधारित नवाचार के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
    • DPI बड़े पैमाने पर डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित करता है, साथ ही दक्षता और समावेशिता को बढ़ावा देता है।
  • केरल: केरल AI फ्यूचर कॉन
    • इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 से पूर्व, केरल सरकार जनवरी में ‘केरल AI फ्यूचर कॉन‘ नामक एक दिवसीय शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रही है।
    • यह शिखर सम्मेलन इंडिया AI मिशन, MeitY के तत्त्वावधान में और केरल IT, स्टार्ट-अप मिशन और डिजिटल यूनिवर्सिटी जैसे विभिन्न स्थानीय भागीदारों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
  • तमिलनाडु: डीप-टेक स्टार्ट-अप नीति
    • तमिलनाडु सरकार ने ‘उमैगिन तमिलनाडु प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन’ के दौरान 100 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक गहन प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप नीति का अनावरण किया है।
      • इसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और अनुसंधान को व्यावसायिक परियोजनाओं में परिवर्तित करना है।
    • इस नीति का लक्ष्य AI सहित गहन प्रौद्योगिकी नवाचार को प्रोत्साहित करना और तमिलनाडु को आईटी सेवाओं के केंद्र से प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र में बदलने में सहयोग करना है।

वैश्विक पहल

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वैश्विक साझेदारी (GPAI): GPAI एक बहु-हितधारक पहल है, जिसमें सरकारें, उद्योग, शिक्षाविद और नागरिक समाज शामिल हैं, जिसका उद्देश्य AI नवाचार को बढ़ावा देना है।
    • यह अनुसंधान सहयोग, नीतिगत मार्गदर्शन और सर्वोत्तम प्रथाओं के माध्यम से AI स्टार्ट-अप्स को सहायता प्रदान करता है।
    • भारत इसका संस्थापक सदस्य है, जिससे वैश्विक AI शासन को आकार देने में इसकी भूमिका और मजबूत होती है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर संयुक्त राष्ट्र की पहल
    • संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप पहलों के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नवाचार को बढ़ावा देता है।
    • संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ ​​AI स्टार्ट-अप्स को स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और गरीबी उन्मूलन के लिए समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
  • यूरोपीय संघ AI रणनीति
    • यूरोपीय संघ अनुसंधान निधि, AI सैंडबॉक्स और नवाचार केंद्रों के माध्यम से AI स्टार्ट-अप्स को समर्थन देता है।
    • EU AI फ्रेमवर्क का उद्देश्य नवाचार, उपभोक्ता संरक्षण और नैतिक सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
  • तकनीकी दिग्गजों के नेतृत्व वाले एक्सेलरेटर
    • गूगल फॉर स्टार्ट-अप्स एक्सेलरेटर: AI-फर्स्ट (AI-First): तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन आधारित वैश्विक समूह आधारित एक्सेलरेटर।
    • AWS जनरेटिव AI एक्सेलरेटर: जनरेटिव AI स्टार्ट-अप्स को महत्त्वपूर्ण AWS क्रेडिट और 8-सप्ताह के गहन कार्यक्रम के साथ सहायता प्रदान करता है।
    • Google.org एक्सेलरेटर: जनरेटिव AI: प्रभाव-केंद्रित AI समाधानों के लिए मुक्त आमंत्रण, जिसमें फंडिंग (जैसे- $30 मिलियन का हिस्सा), निःशुल्क सहायता, प्रशिक्षण और क्लाउड क्रेडिट शामिल हैं।
    • इग्निशन AI एक्सेलरेटर: NVIDIA और Tribe का सहयोग, विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में AI स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
    • Intel® लिफ्टऑफ  फॉर स्टार्ट-अप्स: यह कार्यक्रम तकनीकी मार्गदर्शन, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर संसाधन और इंटेल के बाजार पारिस्थितिकी तंत्र तक पहुँच प्रदान करता है।

AI स्टार्ट-अप्स के लिए चुनौतियाँ

  • डेटा संबंधी चुनौतियाँ
    • उच्च गुणवत्ता वाले डेटा तक पहुँच: AI मॉडल को बड़े, विविध और ‘लेबल्ड डेटासेट’ की आवश्यकता होती है, जो महँगे होते हैं।
      • भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग के एक अध्ययन में पाया गया है कि 68% AI स्टार्ट-अप बड़े, उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट तक पहुँच को एक बड़ी बाधा मानते हैं।
    • गोपनीयता और अनुपालन: डेटा सुरक्षा कानूनों (GDPR, DPDP अधिनियम आदि) का पालन करने से अनुपालन का बोझ बढ़ जाता है।
  • प्रौद्योगिकी और अवसंरचना की उच्च लागत
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के लिए उच्च कंप्यूटिंग क्षमता, GPU, क्लाउड सेवाओं और निरंतर मॉडल प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
    • बड़ी तकनीकी कंपनियों पर निर्भरता स्वायत्तता को कम कर सकती है।
    • किफायती कंप्यूटिंग अवसंरचना तक सीमित पहुँच परिचालन लागत बढ़ाती है और नवाचार को बाधित करती है।
      • AI चिप्स और क्लाउड क्रेडिट की बढ़ती लागत प्रारंभिक चरण के स्टार्ट-अप्स पर दबाव डालती है।
  • प्रतिभा की कमी
    • AI स्टार्ट-अप्स को डेटा साइंटिस्ट और AI शोधकर्ताओं जैसे कुशल पेशेवरों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ता है।
      • वर्ष 2027 तक, भारत में AI से संबंधित नौकरियों की संख्या 23 लाख से अधिक हो सकती है, जबकि प्रतिभा पूल बढ़कर लगभग 12 लाख होने की उम्मीद है।
    • शीर्ष प्रतिभाओं का वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों में पलायन प्रतिभा पलायन का कारण बनता है और भर्ती लागत को बढ़ाता है।
  • नियामक और अनुपालन अनिश्चितता
    • डेटा सुरक्षा, AI नैतिकता और सीमा पार डेटा प्रवाह से संबंधित बदलते नियम स्टार्ट-अप्स के लिए अनिश्चितता उत्पन्न करते हैं।
    • अनुपालन लागत का बोझ छोटे और शुरुआती चरण के AI उद्यमों पर असमान रूप से पड़ सकता है।
  • नैतिक और विश्वास की कमी
    • डेटा पूर्वाग्रह और प्रतिनिधित्व संबंधी चिंताएँ: एल्गोरिदम पूर्वाग्रह, पारदर्शिता की कमी और AI के दुरुपयोग से संबंधित चिंताओं के कारण जनता का विश्वास कम होता है।
    • स्टार्ट-अप्स को नैतिक व्याख्या योग्य AI सिस्टम सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों का निवेश करना होगा।
  • बाजार पहुँच और विस्तार संबंधी मुद्दे
    • स्वीकृति में बाधाएँ: AI स्टार्ट-अप्स को अक्सर पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
    • पारंपरिक उद्योगों और सरकारों द्वारा स्वीकृति के प्रति प्रतिरोध बाजार के विस्तार को धीमा कर देता है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा और बाजार प्रभुत्व
    • प्रतिस्पर्द्धा का असमान माहौल: AI स्टार्ट-अप्स को उन वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गजों से प्रतिस्पर्द्धा करनी पड़ती है, जिनके पास बेहतर डेटा, पूँजी और बाजार तक व्यापक पहुँच है।
      • उदाहरण के लिए, ओपनAI, एंथ्रोपिक और परप्लैक्सिटी जैसी AI-टेक दिग्गज कंपनियाँ भारत में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं।
    • बड़ी कंपनियों का प्रभुत्व नवाचार को कम कर सकता है और छोटे हितधारकों के लिए अवसरों को कम कर सकता है।
  • साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से जुड़े जोखिम
    • सुरक्षा संबंधी कमजोरियाँ: AI सिस्टम साइबर हमलों, डेटा लीक और मॉडल में हस्तक्षेप के प्रति संवेदनशील हैं।
    • अपर्याप्त साइबर सुरक्षा उपाय उपयोगकर्ताओं के भरोसे और नियामक अनुपालन को कमजोर कर सकते हैं।
  • वित्तपोषण संबंधी बाधाएँ
    • आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ती ब्याज दरों के बीच, AI स्टार्ट-अप्स के लिए फंडिंग जुटाना एक लगातार चुनौती बनी हुई है।
    • वेंचर कैपिटलिस्ट अधिक सतर्क हो रहे हैं और ऐसे व्यवसायों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनके मॉडल सिद्ध हो चुके हैं और लाभप्रदता के स्पष्ट संकेत मौजूद हैं।

आगे की राह

  • नीति और नियामक ढाँचे को मजबूत बनाना
    • पूर्वानुमानित शासन: भारत को एक स्पष्ट, स्थिर और अनुकूलनीय नियामक ढाँचा विकसित करना होगा, जो नवाचार और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखे।
    • नियामक सैंडबॉक्स AI स्टार्ट-अप्स को नैतिक और कानूनी मानदंडों के अनुपालन को सुनिश्चित करते हुए नवाचारों का परीक्षण करने की अनुमति दे सकते हैं।
  • कंप्यूटिंग और बुनियादी ढाँचे तक पहुँच का विस्तार
    • सरकार द्वारा समर्थित उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और क्लाउड अवसंरचना तक पहुँच, AI स्टार्ट-अप्स के लिए प्रवेश बाधाओं को कम कर सकती है।
    • सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत साझा कंप्यूटिंग सुविधाएँ AI अनुसंधान और विकास को गति दे सकती हैं।
  • डेटा तक पहुँच और उसकी गुणवत्ता में सुधार
    • विश्वसनीय डेटा पारिस्थितिकी तंत्र: सुरक्षित, गोपनीय और उच्च गुणवत्ता वाले सार्वजनिक डेटासेट का निर्माण उत्तरदायी AI नवाचार को बढ़ावा दे सकता है।
    • डेटा साझाकरण ढाँचे को गोपनीयता, सहमति और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहिए।
  • कुशल मानव पूँजी का निर्माण
    • प्रतिभा की कमी को दूर करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश करना आवश्यक है।
    • शिक्षा जगत, उद्योग और स्टार्ट-अप्स के बीच सहयोग से व्यावहारिक AI अनुसंधान को मजबूती मिल सकती है।
  • नैतिक और जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुनिश्चित करना
    • AI स्टार्ट-अप्स को डिजाइन चरण में ही नैतिक सिद्धांतों, पारदर्शिता और पूर्वाग्रह निवारण को शामिल करना चाहिए।
    • अनिवार्य पूर्वाग्रह ऑडिट और व्याख्या योग्य AI सिस्टम से जनता का विश्वास बढ़ सकता है।
  • वित्त तक पहुँच बढ़ाना
    • अनुसंधान-प्रधान AI स्टार्ट-अप्स के लिए सरकारी निधियों और वेंचर फाइनेंसिंग के माध्यम से दीर्घकालिक जोखिम पूँजी आवश्यक है।
    • गहन प्रौद्योगिकी निवेश के लिए प्रोत्साहन निवेशकों के वित्तीय जोखिमों को कम कर सकते हैं।
    • स्वदेशी और समावेशी AI को बढ़ावा देना: AI स्टार्ट-अप्स को भारतीय भाषाओं, क्षेत्रीय आवश्यकताओं और स्थानीय संदर्भों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • समावेशी AI डिजिटल विभाजन को पाट सकता है और प्रौद्योगिकी के लाभों को वंचित आबादी तक पहुँचा सकता है।
  • अन्य
    • नवाचारी व्यापार मॉडल: AI स्टार्ट-अप्स को परिचालन लागत कम करने के लिए, विशेष रूप से प्रारंभिक चरणों में, फेडरेटेड लर्निंग, ओपन-सोर्स टूल्स और विकेंद्रीकृत AI आर्किटेक्चर जैसे लागत-प्रभावी समाधानों का पता लगाना चाहिए।
    • नीतिगत समर्थन: AI स्टार्ट-अप्स के लिए नीति निर्माताओं के साथ जुड़कर ऐसे नियम बनाना आवश्यक है, जो उत्तरदायी AI विकास को बढ़ावा दें और साथ ही यह सुनिश्चित करना कि नवाचार बाधित न हो।
    • प्रतिभा विकास में निवेश
      • आंतरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी करना, प्रतिभा की कमी को दूर करने और AI क्षेत्र के लिए कुशल पेशेवरों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
      • मार्गदर्शन और विशेषज्ञ नेटवर्क के माध्यम से उद्यमशीलता प्रतिभा को बढ़ावा देना, स्टार्ट-अप्स के विकास को और अधिक गति प्रदान करेगा।
  • राज्यों की भूमिका
    • राज्य सरकारें राज्य नवाचार नीतियों, AI हब और क्षेत्र-विशिष्ट पायलट परियोजनाओं के माध्यम से AI स्टार्ट-अप को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • सहकारी संघवाद स्वास्थ्य, कृषि और शहरी नियोजन जैसी स्थानीय शासन संबंधी चुनौतियों के अनुरूप AI समाधानों को सक्षम बना सकता है।

राज्यों की भूमिका

  • राज्य सरकारें राज्य नवाचार नीतियों, AI हब और क्षेत्र-विशिष्ट पायलट परियोजनाओं के माध्यम से AI स्टार्ट-अप को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • सहकारी संघवाद स्वास्थ्य, कृषि और शहरी नियोजन जैसी स्थानीय शासन संबंधी चुनौतियों के अनुरूप AI समाधान प्रदान कर सकता है।

निष्कर्ष

AI स्टार्ट-अप्स की सतत् वृद्धि एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करती है, जो नवाचार, नैतिकता और समावेशिता को एकीकृत करता है। संस्थागत क्षमता को मजबूत करके, जिम्मेदार AI को बढ़ावा देकर और अपनी जनसांख्यिकीय तथा डिजिटल शक्तियों का लाभ उठाकर, भारत AI स्टार्ट-अप्स को तकनीकी नेतृत्व, सुशासन एवं समावेशी राष्ट्रीय विकास के प्रमुख कारक बनने में सक्षम बना सकता है।

अभ्यास प्रश्न 

भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 जैसे शिखर सम्मेलनों की भूमिका का गहन विश्लेषण कीजिए। सरकार और स्टार्ट-अप के बीच सहयोग, AI अनुसंधान और अनुप्रयोग में भारत के दीर्घकालिक नेतृत्व को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है?

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