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आर्कटिक थॉ

Lokesh Pal January 09, 2026 04:30 23 0

संदर्भ

हाल ही में नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) द्वारा आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड 2025 जारी किया गया।

आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड के बारे में

  • आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड (ARC) वर्ष 2006 से प्रतिवर्ष जारी किया जा रहा है और वर्ष 2025 का  संस्करण इसकी 20वीं वर्षगाँठ को चिह्नित करता है।
  • ARC आर्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र की वर्तमान स्थिति पर विश्वसनीय, स्पष्ट और संक्षिप्त पर्यावरणीय आँकड़े प्रदान करता है तथा ऐतिहासिक अभिलेखों से तुलना प्रस्तुत करता है।
  • प्रकाशन: ARC को NOAA तकनीकी रिपोर्ट के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड के प्रमुख निष्कर्ष

वायुमंडल संबंधी

  • सतही वायु तापमान: अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 तक आर्कटिक में वर्ष 1900 के बाद से सर्वाधिक सतही वायु तापमान दर्ज किया गया।
  • तापमान प्रवृत्ति: पिछले 10 वर्ष आर्कटिक में अब तक के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं और वर्ष 2006 से वार्षिक तापमान वृद्धि वैश्विक दर से दोगुने से भी अधिक रही है।
  • वर्षा: रिकॉर्ड स्तर की वर्षा दर्ज की गई, जिसमें शीतकाल, वसंत और शरद ऋतु की कुल वर्षा 1950 के बाद से शीर्ष पाँच वर्षों में शामिल रही।

महासागर संबंधी

  • समुद्री बर्फ का विस्तार: मार्च 2025 में 47-वर्ष के दौरान एकत्रित उपग्रह आँकड़ों के अनुसार  सबसे कम वार्षिक अधिकतम समुद्री बर्फ विस्तार दर्ज किया गया।
  • बर्फ की मोटाई में कमी: सबसे पुरानी और अधिक मोटाई की आर्कटिक समुद्री बर्फ (>4 वर्ष पुरानी) 1980 के दशक से 95% से अधिक घट चुकी है और अब मुख्यतः ग्रीनलैंड तथा कनाडाई द्वीपसमूह के उत्तर में सीमित है।
  • फाइटोप्लैंकटन वृद्धि: वर्ष 2003 से 2025 के बीच यूरेशियन आर्कटिक में फाइटोप्लैंकटन उत्पादकता में 80% की वृद्धि हुई, जबकि बैरेंट्स सागर और हडसन खाड़ी जैसे क्षेत्रों में क्रमशः 34% और 27% की वृद्धि देखी गई।

स्थल संबंधी

  • हिमनद ह्रास: स्कैंडिनेविया, स्वालबर्ड और अलास्का के आर्कटिक हिमनदों में उल्लेखनीय रूप से बर्फ का ह्रास हुआ है, जिससे वैश्विक समुद्र-स्तर में वृद्धि में योगदान हुआ।
  • ग्रीनलैंड ‘आइस शीट’: वर्ष 2025 में अनुमानित 129 अरब टन हिम की हानि हुई, जो दीर्घकालिक बर्फ ह्रास प्रवृत्ति को जारी रखती है।
  • अलास्का के हिमनदों का संकुचन: 20वीं शताब्दी के मध्य से अलास्का के हिमनद औसतन 125 ऊर्ध्व फीट (38 मीटर) बर्फ खो चुके हैं।
  • विकृत नदियाँ: पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से अलास्का के 200 से अधिक आर्कटिक जलग्रहण क्षेत्रों में रस्टिंग रिवर्स’ की स्थिति उत्पन्न हुई है, जिससे जल लोहे, पारे और विषैले धातुओं की वृद्धि के कारण नारंगी रंग का हो गया है, जो जल गुणवत्ता और जलीय आवासों को प्रभावित करता है।
  • आर्कटिक का हरितीकरण: वर्ष 2025 में आर्कटिक टुंड्रा में तीसरे सबसे अधिक हरित स्तर दर्ज किए गए, जो 1990 के दशक के अंत से वनस्पति उत्पादकता में वृद्धि की प्रवृत्ति को दर्शाता है और यह आवासों तथा कार्बन चक्र को प्रभावित करता है।
  • विघटित पारिस्थितिक तंत्र: गर्म होता आर्कटिक अभूतपूर्व गति से पारिस्थितिक तंत्रों को पुनर्रचित कर रहा है। ध्रुवीय भालू, सील और आर्कटिक पक्षियों जैसी प्रजातियाँ आवास की हानि और खाद्य की कमी का सामना कर रही हैं।

आर्कटिक हिम की समाप्ति के भू-राजनीतिक निहितार्थ

  • प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता: आर्कटिक समुद्री बर्फ के पिघलने से तेल, गैस और महत्त्वपूर्ण खनिजों जैसे विशाल प्राकृतिक संसाधनों तक पहुँच मुक्त रही है, जिनका मूल्य लगातार बढ़ रहा है।
  • समुद्री व्यापार मार्ग: नॉर्दर्न सी रूट (NSR), जो पहले बर्फ के कारण दुर्गम था, अब खुल रहा है।
    • यह यूरोप और एशिया के बीच यात्रा समय को 40% तक कम करता है, जिससे यह एक अत्यंत सामरिक एवं आर्थिक मार्ग बन गया है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा: आर्कटिक के खुलने के साथ, भारत और चीन सहित गैर-आर्कटिक देश भी इस क्षेत्र में अधिक सक्रिय हो रहे हैं।
    • भारत ने यूरोप के साथ व्यापार बढ़ाने, शिपिंग समय घटाने और ऊर्जा संसाधन विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए NSR के उपयोग में रुचि दिखाई है।

भारत के आर्कटिक हित और नीति

  • आर्कटिक परिषद: भारत वर्ष 2013 में आर्कटिक परिषद का पर्यवेक्षक बना।
  • आर्कटिक नीति 2022: भारत ने वर्ष 2022 में अपनी आर्कटिक नीति जारी की, जिसमें छह प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं: वैज्ञानिक अनुसंधान, जलवायु संरक्षण, आर्थिक विकास, परिवहन, शासन और राष्ट्रीय क्षमता निर्माण
  • वैज्ञानिक अनुसंधान पर ध्यान: भारत की आर्कटिक में दीर्घकालिक उपस्थिति है, जिसमें वर्ष 2008 से स्वालबर्ड द्वीपसमूह में स्थित उसका अनुसंधान केंद्र हिमाद्री शामिल है।
    • भारत का उद्देश्य इस क्षेत्र में वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाना है ताकि आर्कटिक परिवर्तनों का भारत की मानसून प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
  • रूस के साथ सहयोग: भारत रूस के साथ नॉर्दर्न सी रूट’ के लिए अवसंरचना विकास में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है, जिसका उद्देश्य चेन्नई और व्लादिवोस्तोक के बीच संपर्क सुधारना और यूरोप के साथ व्यापार को सुदृढ़ करना है।]

आर्कटिक परिषद

  • वर्ष 1996 में स्थापित, इसमें 8 सदस्य देश (कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, रूस, स्वीडन, संयुक्त राज्य अमेरिका) शामिल हैं।
  • यह आर्कटिक में सहयोग को बढ़ावा देती है और स्वदेशी समुदायों के संरक्षण पर बल देती है।

आर्कटिक क्षेत्र के बारे में

  • आर्कटिक पृथ्वी का सबसे उत्तरी क्षेत्र है, जो उत्तरी ध्रुव के चारों ओर केंद्रित है और इसमें कनाडा, डेनमार्क (ग्रीनलैंड), फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, रूस, स्वीडन और संयुक्त राज्य अमेरिका (अलास्का) के भाग शामिल हैं।

  • महाद्वीपीय शेल्फ: आर्कटिक महासागर में विश्व का सबसे लंबा महाद्वीपीय शेल्फ पाया जाता है।
  • आर्कटिक महासागर: आर्कटिक महासागर पृथ्वी के पाँच प्रमुख महासागरों में सबसे छोटा और सबसे उथला है।
    • यह वर्ष भर आंशिक रूप से समुद्री बर्फ (जमी हुआ समुद्री जल) से ढका रहता है, विशेषकर शीतकाल में।
  • लवणता एवं तापमान: आर्कटिक महासागर की सतही तापमान और लवणता बर्फ के जमने और पिघलने के कारण मौसमी रूप से बदलती रहती है।
    • इसकी लवणता सभी प्रमुख महासागरों में सबसे कम है, जिसका कारण कम वाष्पीकरण, नदियों और धाराओं से ताजे जल का प्रवाह, तथा आसपास के महासागरों से सीमित संपर्क है।

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