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कानून प्रवर्तन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)

Lokesh Pal January 21, 2026 03:30 18 0

संदर्भ

भारतीय पुलिस बल अपने अभियानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को तेजी से एकीकृत कर रहे हैं, उदाहरण के लिए दिल्ली पुलिस की सेफ सिटी परियोजना।

  • AI निगरानी, ​​जाँच, प्रीडिक्टिव पुलिसिंग और फोरेंसिक एनालिसिस को नया रूप दे रहा है।

कानून प्रवर्तन में AI के प्रमुख अनुप्रयोग

  • फेसियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (Facial Recognition Technology-FRT)
    • CCTV फुटेज और इमेज डेटाबेस से अपराधियों, लापता व्यक्तियों और संदिग्धों की पहचान करने के लिए उपयोग किया जाता है।
    • यह बड़ी मात्रा में उपस्थित लोगों (जैसे- स्टेडियम, सार्वजनिक कार्यक्रम) के मध्य वांछितों की पहचान करने में सक्षम है।
  • AI-सक्षम निगरानी प्रणालियाँ
    • संदिग्ध गतिविधियों, हथियारों, यातायात नियमों के उल्लंघन और दुर्घटनाओं का पता लगाने के लिए लाइव और रिकॉर्ड किए गए CCTV फुटेज का विश्लेषण करना।
    • ऑब्जेक्ट रिकग्निशन कानून प्रवर्तन एजेंसियों को विभिन्न स्थानों पर वाहनों या व्यक्तियों को ट्रैक करने की अनुमति देता है।
    • ड्रोन निगरानी से भीड़ प्रबंधन और खोज एवं बचाव अभियान बेहतर होते हैं।
  • प्रीडिक्टिव पुलिसिंग (Predictive Policing) 
    • ऐतिहासिक अपराध आँकड़ों का उपयोग करके अपराध के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करना, अपराध के प्रकार, संभावित अपराधियों और संभावित पीड़ितों का अनुमान लगाना।
    • बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार जैसे उभरते क्षेत्रों सहित अपराध रोकथाम में इसकी संभावित उपयोगिता है।
  • पुलिस व्यवस्था में रोबोट का उपयोग
    • रोबोट निगरानी और गश्त में सहायता करते हैं, साथ ही बम निरोधक और खतरनाक क्षेत्रों में प्रवेश जैसे उच्च जोखिम वाले अभियानों में भी सहायक सिद्ध होते हैं।
      • उदाहरण के लिए, दुबई के स्ट्रीट रोबोट वास्तविक समय में डेटा भेजते रहते हैं।
  • अहिंसक अपराधों का पता लगाना
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता वित्तीय धोखाधड़ी, धन शोधन, नकली मुद्रा और वस्तुओं की पहचान करने में सहायता करती है।
  • मुकदमे से पूर्व रिहाई और पैरोल संबंधी निर्णय
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग आपराधिक न्याय प्रणाली में मुकदमे से पूर्व की प्रक्रिया में और अपराधी की पैरोल की शर्तों को निर्धारित करने में किया जाता है।
      • उदाहरण के लिए, अमेरिका अपराधियों के जोखिम का आकलन करने के लिए वैकल्पिक दंडों के लिए सुधारात्मक अपराधी प्रबंधन प्रोफाइलिंग (Correctional Offender Management Profiling for Alternative Sanctions- COMPAS) का उपयोग करता है।

कानून प्रवर्तन में AI के उपयोग के प्रेरक कारक

  • अपराध की बढ़ती जटिलता: साइबर अपराध, आतंकवाद, वित्तीय अपराध और संगठित अपराध के लिए डेटा-आधारित उपकरणों की आवश्यकता होती है।
  • संसाधन संबंधी बाधाएँ: भारत में पुलिस-जनसंख्या अनुपात (प्रति 1,00,000 पर 153) संयुक्त राष्ट्र के मानक (222) से काफी कम है, जिसके कारण दक्षता बढ़ाने वाली प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता है।
  • शहरीकरण और भीड़ प्रबंधन: बड़े शहरी क्षेत्रों की आबादी, जनसभाएँ और बड़े आयोजन निगरानी और सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को बढ़ाते हैं।
  • बाजार विस्तार: ग्लोबल प्रीडिक्टिव पुलिसिंग बाजार के वर्ष 2034 तक 157 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जो AI-आधारित कानून प्रवर्तन उपकरणों पर सरकारी निर्भरता में वृद्धि को दर्शाता है।

भारतीय कानून प्रवर्तन में AI के अनुप्रयोग

  • दिल्ली सेफ सिटी प्रोजेक्ट: आपातकालीन स्थिति से संबंधित ध्वनियों और चेहरे के हाव-भाव की पहचान करने के लिए चेहरे की पहचान प्रणाली और डिस्ट्रेस डिटेक्शन टेक्नोलॉजी से लैस 10,000 AI-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
  • महाक्राइम ओएस AI (MahaCrime OS AI) (महाराष्ट्र): यह AI-संचालित जाँच मंच शिकायतों के त्वरित निपटान, जटिल डेटा विश्लेषण और जाँच प्रक्रियाओं के कुशल पालन के लिए बनाया गया है।
  • आपराधिक फोरेंसिक: AI प्रणालियों को आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम से दशकों पुराने आपराधिक डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है, जिससे पैटर्न पहचान और पूर्वानुमान विश्लेषण संभव हो पाता है।
    • उदाहरण के लिए, उँगलियों के निशान का डिजिटलीकरण और उच्च सटीकता के साथ संरक्षण।
  • साइबर और डार्क वेब निगरानी: पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) द्वारा विकसित उपकरण, खुफिया जानकारी जुटाने के लिए डीप और डार्क वेब डेटा का विश्लेषण करते हैं।
  • वित्तीय अपराध का पता लगाना: प्रवर्तन निदेशालय संदिग्ध लेन-देन, अवैध खातों और आभासी डिजिटल संपत्ति की हेरा-फेरी का पता लगाने के लिए FIU के AI/ML उपकरणों का उपयोग करता है।
  • राज्य पुलिस की अन्य तैनाती
    • उत्तर प्रदेश: अपराधियों की निगरानी के लिए त्रिनेत्र ऐप (Trinetra App)
    • दिल्ली: हॉटस्पॉट की पहचान के लिए क्राइम मैपिंग, एनालिटिक्स और प्रेडिक्टिव सिस्टम (CMAPS)

पुलिस व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सीमाएँ और जोखिम

  • एल्गोरिदम आधारित पूर्वाग्रह और भेदभाव: AI सिस्टम ऐतिहासिक अपराध डेटा पर प्रशिक्षित होते हैं, जो अक्सर मौजूदा सामाजिक और संस्थागत पूर्वाग्रहों को दर्शाता है।
  • समानता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारों का हनन: पक्षपातपूर्ण AI परिणाम, कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत और निर्दोषता की धारणा को कमजोर करते हैं।
    • स्वामित्व वाले “ब्लैक-बॉक्स” एल्गोरिदम का उपयोग आरोपियों को AI-आधारित निर्णयों को समझने या चुनौती देने से रोकता है, जिससे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन होता है।
  • निगरानी और निजता का हनन: AI-आधारित चेहरे की पहचान बड़े पैमाने पर निगरानी, ​​निरंतर ट्रैकिंग और व्यक्तियों की सहमति के बिना उनकी प्रोफाइलिंग को सक्षम बनाती है।
  • स्वचालन पर अत्यधिक निर्भरता: जनरेटिव AI-आधारित पुलिस रिपोर्ट कानूनी बारीकियों, प्रासंगिक कारकों और मूल वास्तविकताओं की अनदेखी कर सकती हैं।
    • तकनीकी नियतिवाद का खतरा, जहाँ एल्गोरिदम आउटपुट को वस्तुनिष्ठ सत्य माना जाता है।
  • जवाबदेही और शासन में कमियाँ: पारंपरिक पुलिस नियमावली के विपरीत, AI के उपयोग को नियंत्रित करने वाली कोई वैधानिक AI नियमावली या पुलिसिंग नियमावली नहीं है।
    • अपारदर्शी AI सिस्टम,  पारदर्शिता और जवाबदेही को कम करते हैं।

आगे की राह

  • कानूनी और संस्थागत सुरक्षा उपाय
    • पुलिस व्यवस्था में AI सिस्टम की खरीद या तैनाती से पूर्व, सरकारों को मानवाधिकारों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन अनिवार्य करना होगा।
    • बायोमेट्रिक डेटा के संग्रह, भंडारण और उपयोग को विनियमित करने के लिए एक मजबूत डेटा संरक्षण कानून आवश्यक है।
    • AI की तैनाती को वैधता, आवश्यकता और आनुपातिकता को मजबूत करना होगा।
  • मानव पर्यवेक्षण और जवाबदेही
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणालियों को केवल निर्णय लेने में सहायता करने वाले उपकरणों के रूप में ही कार्य करना चाहिए, न कि पुलिसिंग या न्यायिक प्रक्रियाओं में मानवीय निर्णय का स्थान लेना चाहिए।
    • स्पष्ट जवाबदेही तंत्रों के माध्यम से AI प्रणालियों द्वारा उत्पन्न त्रुटियों, दुरुपयोग या मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए।
  • पारदर्शिता और स्पष्टता
    • कानून प्रवर्तन एजेंसियों को AI द्वारा लिए गए निर्णयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि प्रभावित व्यक्ति परिणामों को समझ सकें और उन पर आपत्ति जता सकें।
    • पक्षपात और त्रुटियों की पहचान करने के लिए नियमित रूप से स्वतंत्र ऑडिट और एल्गोरिदम परीक्षण किए जाने चाहिए।
  • क्षमता निर्माण और AI साक्षरता
    • पुलिस कर्मियों और न्यायिक अधिकारियों को AI के नैतिक उपयोग, सीमाओं और संभावित हानियों के संबंध में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
    • पुलिस व्यवस्था में AI के उपयोग के बारे में जन जागरूकता, विश्वास और लोकतांत्रिक जवाबदेही स्थापित करने के लिए आवश्यक है।
  • एडॉप्टिव और संदर्भ-विशिष्ट तैनाती
    • बड़े पैमाने पर अपनाने से पूर्व पायलट आधारित तैनाती और संदर्भ-विशिष्ट परीक्षण।
    • AI से संबंधित हानि को दर्ज करने और अनुकूल जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों को सक्षम करने के लिए एक घटना डेटाबेस का निर्माण।

PW OnlyIAS विशेष

वैश्विक पहल

विश्वभर में कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ ​​(LEP) दक्षता बढ़ाने के लिए, विशेष रूप से पूर्वानुमानित पुलिसिंग, निगरानी और अपराध रोकथाम में, AI-संचालित उपकरणों को तेजी से तैनात कर रही हैं।

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: NYPD अपराध पैटर्न विश्लेषण और तैनाती निर्णयों के लिए पैटर्नइजर का उपयोग करता है; क्लियरव्यू AI जैसे AI उपकरण, बाल संरक्षण में सहायता करते हैं।
  • चीन: वास्तविक समय में पुलिसिंग और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए रोबोट, ड्रोन, डिटेंशन कैमरों का व्यापक उपयोग और शंघाई के वर्चुअल रियलिटी मॉडल का विकास।
  • दक्षिण कोरिया: वाइस रिकॉग्निशन, वीडियो एनालिसिस और वास्तविक समय डेटा प्रसंस्करण को एकीकृत करने वाले AI-संचालित गश्ती वाहनों की शुरुआत।
  • ऑस्ट्रेलिया: बाल शोषण का मुकाबला करने के लिए AI-सक्षम प्लेटफॉर्म का प्रयोग किया जा रहा है।

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