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कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) संबंधी पाठ्यक्रम

Lokesh Pal April 03, 2026 02:30 42 0

संदर्भ

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में कक्षा III से VIII के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित CBSE पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया है।

संबंधित तथ्य 

  • यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विजन के अनुरूप है।

कंप्यूटेशनल थिंकिंग के बारे में

  • कंप्यूटेशनल थिंकिंग एक समस्या-समाधान दृष्टिकोण है, जिसमें विभाजन , पैटर्न पहचान, अमूर्तन (Abstraction), एल्गोरिद्म डिजाइन, डेटा विश्लेषण और समस्या निवारण शामिल हैं।
  • यह जटिल समस्याओं को हल करने में सहायक होता है और आलोचनात्मक एवं सृजनात्मक सोच, अमूर्तन, पैटर्न पहचान और एल्गोरिद्मिक सोच जैसे कौशलों को बढ़ावा देता है।

कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (CT & AI) पर पाठ्यक्रम के बारे में

  • यह एक शैक्षिक रूपरेखा को संदर्भित करता है, जिसे छात्रों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) के मूलभूत सिद्धांतों से संरचित और आयु-उपयुक्त तरीके से परिचित कराने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • उद्देश्य: कंप्यूटेशनल थिंकिंग संबंधी कौशल पर ध्यान केंद्रित करते हुए AI-तैयार शिक्षार्थियों का विकास करना।
  • NCF,2023 के साथ संरेखण: यह पाठ्यक्रम स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के साथ संरेखित है और निम्नलिखित को बढ़ावा देता है:
    • कंप्यूटेशनल थिंकिंग संबंधी मजबूत आधार
    • डिजिटल साक्षरता
    • प्रौद्योगिकी का नैतिक और जिम्मेदार उपयोग
    • रचनात्मकता और नवाचार
    • आलोचनात्मक सोच और निर्णय-निर्माण
  • संबद्ध संस्थान
    • केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE)
    • राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT)
    • केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS)
    • नवोदय विद्यालय समिति (NVS)
    • राज्य और संघ राज्य क्षेत्र (State/UT) शिक्षा बोर्ड।
  • मूल्यांकन: मूल्यांकन को अधिगम-आधारित पद्धति से हटाकर सतत् और दक्षता-आधारित पद्धतियों की ओर स्थानांतरित किया गया है:
  • इंटरएक्टिव उपकरण: विधियों में CT पहेलियों के साथ लिखित परीक्षण, इंटरएक्टिव समूह गतिविधियाँ और प्रगति की निगरानी करने के लिए शिक्षक अवलोकन पत्रिका का उपयोग शामिल है।
  • गुणात्मक फोकस: उद्देश्य छात्र की ज्ञान को लागू करने और रचनात्मक रूप से सोचने की क्षमता का आकलन करना है।
  • कार्यान्वयन: यह रूपरेखा चरणबद्ध और आयु-उपयुक्त दृष्टिकोण को अपनाती है:
    • कक्षा 3 से 5: प्रारंभिक चरण (Foundation Stage)
      • CT अवधारणाओं को गणित और ‘द वर्ल्ड अराउंड अस’ (TWAU) जैसे विषयों में एकीकृत किया जाएगा।
      • अध्ययन गतिविधि-आधारित होगा, जिसमें वर्कबुक और संरचित अभ्यासों का उपयोग किया जाएगा।
      • लगभग 50 घंटे के अध्ययन समय की अनुशंसा की गई है।
    • कक्षा 6 से 8: विस्तार चरण (Expansion Stage)
      • छात्र परियोजना-आधारित और अंतःविषय अध्ययन में संलग्न होंगे।
      • AI की बुनियादी अवधारणाओं और AI साक्षरता का परिचय कराया जाएगा।
      • लगभग 100 घंटे के पाठ्यक्रम समय का सुझाव दिया गया है।
      • यह प्रगति सुनिश्चित करती है कि छात्र पहले मजबूत तर्कशक्ति कौशल विकसित करें और उसके बाद AI अनुप्रयोगों की समझ की ओर कदम बढ़ाएँ।
    • शिक्षण और मूल्यांकन दृष्टिकोण
      • यह पाठ्यक्रम व्यावहारिक और वास्तविक दुनिया आधारित अधिगम पर बल देता है। शिक्षण विधियों में शामिल होंगे:
        • पहेलियाँ और संरचित समस्या-समाधान
        • समूह और व्यक्तिगत परियोजनाएँ
        • चर्चाएँ, वाद-विवाद और चिंतनशील अभ्यास
    • नैतिकता और जिम्मेदार AI उपयोग पर फोकस
      • AI प्रणालियों में पक्षपात की पहचान करना
      • प्रौद्योगिकी द्वारा उत्पन्न जानकारी का सत्यापन करना
      • AI के जिम्मेदार और निष्पक्ष उपयोग को समझना
    • विद्यालयों के लिए संसाधन और प्रत्यास्थता
      • CBSE कार्यान्वयन के समर्थन के लिए शिक्षक मार्गदर्शिका और संसाधन सामग्री प्रदान करेगा।
      • विद्यालयों को प्लेटफॉर्म और उपकरणों के चयन में लचीलापन भी प्रदान किया जाएगा, जिसमें ‘फ्री’ और ‘ओपन-सोर्स’ तकनीकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि सुलभता सुनिश्चित की जा सके।

चुनौतियाँ

  • AI और कोडिंग में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी: AI एवं CT पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन में पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों की सीमित उपलब्धता, विशेषकर सरकारी विद्यालयों में, एक प्रमुख बाधा है।
    • उदाहरण: कोई विद्यालय AI विषय प्रारंभ कर सकता है, परंतु विशेषज्ञता के अभाव में शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक-आधारित व्याख्या तक सीमित रहते हैं, जबकि कोडिंग या AI टूल के व्यावहारिक उपयोग का अनुभव नहीं दे पाते हैं।
  • डिजिटल विभाजन और अवसंरचना तक असमान पहुँच: कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्ट कक्षाओं जैसी डिजिटल अवसंरचना के असमान वितरण के कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच अधिगम परिणामों में असमानता उत्पन्न होती है।
    • उदाहरण: जहाँ शहरी विद्यालय लैपटॉप और सॉफ्टवेयर के माध्यम से AI पर आधारित व्यावहारिक परियोजनाएँ संचालित कर सकते हैं, वहीं ग्रामीण विद्यालय मूलभूत इंटरनेट सुविधा के लिए संघर्ष करते हैं, जिससे छात्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रह जाते हैं।
  • निरंतर पाठ्यक्रम अद्यतन की आवश्यकता: AI में तीव्र तकनीकी प्रगति के कारण पाठ्यक्रम को निरंतर अद्यतन की आवश्यकता होती है, ताकि उसकी प्रासंगिकता बनी रहे।
    • हालाँकि, संस्थागत कमजोरी और प्रशासनिक विलंब के कारण प्रायः पुरानी सामग्री ही पढ़ाई जाती रहती है।
  • डेटा गोपनीयता और AI के नैतिक उपयोग से संबंधित चिंताएँ: शिक्षा में AI के एकीकरण से डेटा सुरक्षा, एल्गोरिद्मिक पक्षपात और नैतिक उपयोग से जुड़े गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं।
    • उदाहरण: विद्यालयों में AI-आधारित ‘फेसियल रिकग्निशन’ आधारित उपस्थिति प्रणाली, संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा एकत्र कर सकती है, जिसके लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों के अभाव में गोपनीयता संबंधी चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।

आगे की राह

  • चरणबद्ध और समावेशी क्रियान्वयन: AI एवं CT को क्रमिक रूप से लागू किया जाना चाहिए, जिसमें प्राथमिक स्तर पर कंप्यूटेशनल थिंकिंग की आधारभूत समझ से शुरुआत कर उच्च कक्षाओं में AI अनुप्रयोगों तक की प्रगति की जाए तथा शहरी और ग्रामीण विद्यालयों में समावेशन सुनिश्चित किया जाए।
  • क्षमता निर्माण के साथ अवसंरचना समर्थन: संतुलित दृष्टिकोण हेतु शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल अवसंरचना में समानांतर निवेश आवश्यक है, ताकि असमान क्रियान्वयन से बचा जा सके।
    • उदाहरण: शिक्षकों को राष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा सकता है, जबकि विद्यालयों को स्मार्ट लैब और इंटरनेट सुविधा से सुसज्जित किया जाए।
  • नैतिक, व्यावहारिक और संदर्भानुकूल अधिगम पर बल: पाठ्यक्रम में हैंड्स-ऑन अधिगम, नैतिक जागरूकता और वास्तविक जीवन आधारित अनुप्रयोगों का समावेश होना चाहिए, जो भारतीय समाज के संदर्भ में प्रासंगिक हों।
    • उदाहरण: छात्र फसल पूर्वानुमान या अपशिष्ट प्रबंधन जैसी स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु AI विकसित करें, साथ ही डेटा गोपनीयता और पक्षपात पर चर्चा भी करें।
  • नैतिक, व्यावहारिक और संदर्भानुकूल अधिगम पर बल: पाठ्यक्रम में हैंड्स-ऑन अधिगम, नैतिक जागरूकता और वास्तविक जीवन आधारित अनुप्रयोगों का समावेश होना चाहिए, जो भारतीय समाज के संदर्भ में प्रासंगिक हों।
    • उदाहरण: छात्र फसल पूर्वानुमान या अपशिष्ट प्रबंधन जैसी स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु AI विकसित करें, साथ ही डेटा गोपनीयता और पक्षपात पर चर्चा भी करें।

 कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI का महत्त्व

  • भविष्य के लिए तैयारी: CT और AI का परिचय छात्रों को भविष्य के लिए तैयार डिजिटल नागरिक के रूप में स्थापित करने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • AI के लिए आधार: कंप्यूटेशनल थिंकिंग वह बौद्धिक आधार और संज्ञानात्मक रूपरेखा प्रदान करता है, जो AI-आधारित समाधानों को समझने और विकसित करने के लिए आवश्यक है।
  • संज्ञानात्मक विकास: यह तार्किक सोच, व्यवस्थित समस्या-समाधान और पैटर्न पहचान जैसी आवश्यक मानवीय क्षमताओं को विकसित करता है।
  • भविष्य की तैयारी: प्रारंभिक स्तर पर इसका परिचय व्यक्तियों को डेटा का प्रभावी उपयोग और प्रौद्योगिकी का नैतिक उपयोग करने की क्षमता प्रदान करता है, जो आधुनिक कार्यक्षेत्र के लिए आवश्यक है।
  • समग्र विकास: यह अंतःविषय अधिगम को बढ़ावा देता है, जिससे छात्र गणित, विज्ञान और मानविकी के बीच संबंध स्थापित कर यह समझते हैं कि ज्ञान खंडों में विभाजित नहीं है।

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