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बायोफार्मा शक्ति

Lokesh Pal February 03, 2026 04:51 11 0

संदर्भ

केंद्रीय बजट 2026 में, केंद्रीय वित्त मंत्री ने भारत को जैव-औषधियों (Biopharmaceuticals) के लिए एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने हेतु बायोफार्मा शक्ति (Biopharma SHAKTI) योजना की घोषणा की।

बायोफार्मा शक्ति के बारे में

  • पूर्ण रूप: बायोफार्मा शक्ति का तात्पर्य ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य उन्नयन की रणनीति से है।
  • वित्तीय परिव्यय: योजना के लिए पाँच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
  • मुख्य उद्देश्य: उन्नत जैव-औषधीय उत्पादों के घरेलू उत्पादन हेतु एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिस्पर्द्धात्मकता में वृद्धि हो।
  • नोडल मंत्रालय : रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत औष     धि विभाग। 
  • रोग फोकस: गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे कैंसर, मधुमेह और ऑटोइम्यून विकारों को प्राथमिकता, जैविक औषधियों और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन।
  • शामिल औषधियाँ:
    • जैविक औषधियाँ: जीवों या उनके घटकों जैसे प्रोटीन और जीन से प्राप्त जटिल औषधियों के घरेलू विनिर्माण पर केंद्रित।
    • बायोसिमिलर्स: स्वीकृत जैविक औषधियों के अत्यधिक समान संस्करणों के उत्पादन का विस्तार, जो लागत-प्रभावी उपचार विकल्प प्रदान करते हैं।
  • विनिर्माण संबंधी जटिलता: शुद्धिकरण, प्रसंस्करण और गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित परिष्कृत प्रक्रियाएँ, जो इन्हें रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण बनाती हैं।

अवसंरचना और संस्थागत समर्थन

  • औषधि शिक्षा और अनुसंधान: योजना के अंतर्गत तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव है।
  • मौजूदा संस्थानों का उन्नयन: सात मौजूदा राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों को जैव-औषधि-केंद्रित संस्थागत नेटवर्क के रूप में उन्नत किया जाएगा।
  • नैदानिक पारिस्थितिकी तंत्र: अनुसंधान, परीक्षण और विनियामक स्वीकृतियों के समर्थन हेतु 1,000 से अधिक मान्यता-प्राप्त नैदानिक परीक्षण स्थलों का राष्ट्रीय नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
  • विनियामक सुदृढ़ीकरण: वैश्विक विनियामक मानकों और स्वीकृति समय सीमा को पूरा करने हेतु केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को एक समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा संवर्ग और विशेषज्ञ कार्यबल के माध्यम से सुदृढ़ किया जाएगा।

योजना के पीछे का तर्क

  • महामारी-विज्ञान संबंधी संक्रमण: भारत में रोग-भार अब तेजी से मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग और स्व-प्रतिरक्षित विकारों जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रभुत्व में है।
  • मृत्यु संबंधी आँकड़े: भारत में कुल मौतों का 63 प्रतिशत गैर-संचारी रोगों के कारण होता है, जिनमें हृदय रोग प्रमुख कारण हैं।
  • वैश्विक व्यापार अनिश्चितता: संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ब्रांडेड औषधीय आयात पर उच्च शुल्क प्रस्तावों के संदर्भ में यह योजना महत्त्वपूर्ण हो जाती है, जिससे निर्यात-उन्मुख औषधि बाजारों में जोखिम उत्पन्न होते हैं।
  • रणनीतिक विविधीकरण: जैव-औषधियों और बायो-सिमिलर औषधियों की ओर परिवर्तन केवल जेनेरिक औषधियों पर निर्भरता को कम करता है और औषधि-विशिष्ट व्यापार बाधाओं से भारत की सुरक्षा करता है।

भारत के औषधि क्षेत्र की स्थिति

  • वैश्विक स्थान: भारत वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा औषधि उत्पादक है।
  • निर्यात क्षमता: भारत वैश्विक जेनेरिक औषधियों की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति करता है और 190 से अधिक देशों को निर्यात करता है।
  • बाज़ार संरचना: भारत के औषधि निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत जेनेरिक औषधियों का है, जिनमें से लगभग आधा संयुक्त राज्य अमेरिका को जाता है।
  • टीका नेतृत्व: भारत डिप्थीरिया, काली खाँसी, टेटनस, बैसिलस कैल्मेट-ग्यूरिन और खसरा टीकों के उत्पादन में वैश्विक रूप से अग्रणी है।
  • आर्थिक योगदान: वित्त वर्ष 2025 में औषधि क्षेत्र का कारोबार ₹4.72 लाख करोड़ रहा, जबकि पिछले दशक में निर्यात की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत रही।
  • चिकित्सा उपकरण वृद्धि: भारत का चिकित्सा उपकरण क्षेत्र 187 देशों को निर्यात करता है, जिनमें एमआरआई स्कैनर, हृदय स्टेंट और वेंटिलेटर जैसे उन्नत उपकरण शामिल हैं।

बायोफार्मा शक्ति का रणनीतिक महत्त्व

  • स्वास्थ्य सुरक्षा: यह योजना दीर्घकालिक और जीवन के लिए घातक रोगों हेतु उन्नत औषधियों के उत्पादन की भारत की क्षमता को सुदृढ़ करती है।
  • औद्योगिक उन्नयन: यह भारत को केवल जेनेरिक औषधि आपूर्तिकर्ता से जटिल और उच्च-मूल्य जैव-औषधियों के उत्पादक में रूपांतरित करने में सहायक है।
  • निर्यात लचीलापन: जैव-औषधियों और जैव-समान औषधियों में विविधीकरण, वैश्विक व्यापार प्रतिबंधों के प्रभाव से भारत के औषधि क्षेत्र को सुरक्षा प्रदान करता है।
  • नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र: अनुसंधान, नैदानिक परीक्षण और विनियामक क्षमता में निवेश दीर्घकालिक औषधीय नवाचार को सुदृढ़ करता है।
  • किफायती स्वास्थ्य सेवा: घरेलू जैव-समान औषधि उत्पादन से उच्च-लागत उपचारों तक किफायती पहुँच सुनिश्चित होती है।

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