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ब्रिक्स 2026

Lokesh Pal January 16, 2026 04:20 37 0

संदर्भ

हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में औपचारिक रूप से ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता का लोगो, थीम और आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया।

संबंधित तथ्य

  • भारत ने 1 जनवरी, 2026 को ब्राजील से औपचारिक रूप से ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की, जो इस भूमिका में उसका चौथा कार्यकाल है। इससे पूर्व भारत वर्ष 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है।

पिछली पाँच अध्यक्षताएँ और उनकी थीम

  • वर्ष 2025 – ब्राजील की अध्यक्षता: “अधिक समावेशी और सतत् शासन के लिए वैश्विक दक्षिण सहयोग को सुदृढ़ बनाना।”
  • वर्ष 2024 – रूस की अध्यक्षता: “न्यायसंगत वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को सुदृढ़ बनाना।”
  • वर्ष 2023 – दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता: “ब्रिक्स और अफ्रीका: पारस्परिक रूप से तीव्र विकास, सतत् विकास और समावेशी बहुपक्षवाद के लिए साझेदारी।”
  • वर्ष 2022 – चीन की अध्यक्षता: “उच्च-गुणवत्ता वाली ब्रिक्स साझेदारी को प्रोत्साहित करना, वैश्विक विकास के नए युग की शुरुआत।”
  • वर्ष 2021 – भारत की अध्यक्षता: “ब्रिक्स @ 15: निरंतरता, समेकन और सहमति के लिए अंतः-ब्रिक्स सहयोग।”

ब्रिक्स 2026 के लिए भारत की प्रमुख प्राथमिकताएँ

  • लचीलापन: भारत कृषि, स्वास्थ्य, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, ऊर्जा और आपूर्ति शृंखलाओं जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने की योजना बना रहा है।
  • नवाचार: भारत विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान में स्टार्ट-अप्स, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों और उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • सहयोग और सततता: भारत जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और सतत् विकास पर बल देगा, साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि ये प्रयास न्यायसंगत हों और राष्ट्रीय परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील रहें।

ब्रिक्स भारत 2026 का लोगो, थीम और वेबसाइट

  • लोगो
    • ब्रिक्स 2026 का लोगो भारत के राष्ट्रीय प्रतीक कमल के पुष्प से प्रेरित है, जिसके केंद्रीय भाग में ‘नमस्ते’ मुद्रा को दर्शाया गया है, जो सम्मान और एकता का प्रतीक है।
    • लोगो ब्रिक्स सदस्य देशों की एकता को प्रतिबिंबित करता है, जिसमें पंखुड़ियाँ पाँच संस्थापक सदस्यों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का प्रतीक हैं।

  • थीम: भारत की अध्यक्षता की थीम ब्रिक्स देशों में क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण, नवाचार को प्रोत्साहन और सतत् विकास सुनिश्चित करने पर बल देती है।
    • भारत की अध्यक्षता की आधिकारिक थीम है: “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी।”
  • डिजिटल मंच:  नई प्रारंभ की गई ब्रिक्स भारत 2026 वेबसाइट एक साझा डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगी, जो पारदर्शिता प्रदान करेगी तथा भारत की अध्यक्षता के दौरान बैठकों, पहलों और परिणामों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराकर हितधारकों को संलग्न करेगी।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का महत्त्व

  • सुधार एजेंडे के साथ निरंतरता: भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन, जलवायु वित्त, स्वास्थ्य सहयोग और सतत् विकास जैसे प्रमुख मुद्दों को प्राथमिकता देकर अपने सुधार एजेंडे को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
  •  ‘ग्लोबल साउथ’  की अभिव्यक्ति: भारत का नेतृत्व ब्रिक्स को एक ऐसे मंच के रूप में सुदृढ़ करता है, जो समावेशी विकास, न्यायसंगत वैश्विक शासन और विकास-केंद्रित बहुपक्षवाद का समर्थन करता है।
    • यह भारत को ‘ग्लोबल साउथ’ की एक सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में स्थापित करता है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की चिंताओं और प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर संबोधित किया जा सके।
  • रणनीतिक संतुलनकारी भूमिका: भारत ब्रिक्स के भीतर एक रणनीतिक संतुलनकारी भूमिका निभाने की विशिष्ट स्थिति में है, जो इसके सदस्यों के विविध और प्रायः परस्पर विरोधी हितों के बीच सेतु का कार्य कर सकता है।
    • यह भूमिका वैश्विक भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण के समय विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, जहाँ भारत भिन्न राजनीतिक और आर्थिक हितों के बावजूद मध्यस्थता और सहयोग को प्रोत्साहित कर सकता है।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का प्रोत्साहन: भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए एक मापनीय विकास मॉडल के रूप में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (जैसे- एकीकृत भुगतान इंटरफेस) को बढ़ावा देने की योजना बना रहा है।
    • यह पहल उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विकास को प्रोत्साहित करने हेतु प्रौद्योगिकी के उपयोग पर केंद्रित है।

ब्रिक्स के बारे में

  • उत्पत्ति: ब्रिक शब्द का प्रयोग वर्ष 2001 में ब्रिटिश अर्थशास्त्री जिम ओ’नील द्वारा ब्राजील, रूस, भारत और चीन की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधित्व हेतु किया गया था।
  • विकासक्रम
    • वर्ष 2006: ब्रिक्स की पहली बैठक विदेश मंत्रियों के स्तर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर न्यूयॉर्क में आयोजित हुई।
    • वर्ष 2009: राष्ट्राध्यक्षों का पहला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित हुआ।
    • वर्ष 2010: दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से समूह का विस्तार हुआ और ब्रिक से ब्रिक्स बना।
    • वर्ष 2023: जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन के परिणामस्वरूप ब्रिक्स का दूसरा विस्तार हुआ, जिसमें छह नए सदस्यों को सम्मिलित किया गया।
  • उद्देश्य: ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य वैश्विक शासन में सुधार करना तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसी पश्चिम-प्रधान संस्थाओं के विकल्प प्रस्तुत करना है।
  • ब्रिक्स एक अनौपचारिक समन्वय तंत्र बना हुआ है, जिसकी अध्यक्षता उसके सदस्यों के बीच वार्षिक रूप से चक्रीय आधार पर होती है।
  • सहयोग के स्तंभ: संदर्भ शर्तों के अनुसार, ब्रिक्स साझेदारी तीन सहयोग स्तंभों पर आधारित है:
    • राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग
    • आर्थिक और वित्तीय सहयोग
    •  ‘जन-से-जन’ या नागरिक समाज सहयोग।
  • सदस्य
    • प्रारंभिक सदस्य (ब्रिक्स): ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका।
    • नए सदस्य (ब्रिक्स प्लस): मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात।
    • ब्रिक्स साझेदार देश
      • वर्ष 2024 में कजान शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स ने “ब्रिक्स साझेदार देश” नामक एक नई श्रेणी की शुरुआत की।
      • बेलारूस, बोलीविया, कजाख़स्तान, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, क्यूबा, वियतनाम, युगांडा और उज्बेकिस्तान
    • ब्रिक्स की सदस्यता और साझेदारी में रुचि: वर्ष 2024 के दौरान, 30 से अधिक देशों ने सदस्य या साझेदार के रूप में ब्रिक्स से जुड़ने में रुचि व्यक्त की।
  • अन्य सहभागिता माध्यम
    • ब्रिक्स “आउटरीच”: वर्ष 2013 में दक्षिण अफ्रीका द्वारा प्रारंभ किया गया, जिसके अंतर्गत वर्तमान अध्यक्षता रखने वाले देश के भौगोलिक क्षेत्र के देशों के साथ ब्रिक्स सदस्यों की बैठकें आयोजित होती हैं।
    • ब्रिक्स “प्लस”: वर्ष 2017 में चीन द्वारा प्रारंभ, जिसके अंतर्गत ब्रिक्स सदस्यों और आमंत्रित गैर-क्षेत्रीय देशों के प्रतिनिधियों के मध्य बैठकें आयोजित होती हैं।

ब्रिक्स से संबंधित आँकड़े

  • वैश्विक आर्थिक हिस्सेदारी: वर्ष 2024 में छह नए सदस्यों के सम्मिलन के बाद, वर्ष 2023 में क्रय शक्ति समता के आधार पर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में ब्रिक्स की हिस्सेदारी लगभग 39 प्रतिशत हो गई है।
  • आर्थिक वृद्धि अनुमान: वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने सभी ब्रिक्स देशों के लिए सकारात्मक आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाया, जिसकी दरें 1.1 प्रतिशत से 6.1 प्रतिशत के बीच रहीं।
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार: ब्रिक्स देश वैश्विक व्यापार का 24 प्रतिशत भाग वहन करते हैं।
  • जनसांख्यिकी: ब्रिक्स विश्व की 48.5 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है।
  • भौगोलिक विस्तार: विश्व के कुल स्थलीय क्षेत्र का लगभग 36 प्रतिशत।
  • संसाधन नियंत्रण
    • दुर्लभ मृदा खनिजों के वैश्विक भंडार का 72 प्रतिशत।
    • वैश्विक तेल उत्पादन का 43.6 प्रतिशत।
    • विश्व के प्राकृतिक गैस उत्पादन का 36 प्रतिशत।
    • वैश्विक खनिज कोयला उत्पादन का 78.2 प्रतिशत।

ब्रिक्स की प्रमुख पहलें

  • न्यू डवलपमेंट बैंक (NDB): ‘न्यू डवलपमेंट बैंक’ की स्थापना वर्ष 2014 में ब्राजील के फोर्टालेजा में आयोजित छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में की गई।
    • इसका मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों में अवसंरचना और सतत् विकास परियोजनाओं के लिए संसाधनों का वित्तपोषण करना है।
  • पूँजी और वित्तपोषण: न्यू डवलपमेंट बैंक की अधिकृत पूँजी 100 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिसमें से 52.7 अरब अमेरिकी डॉलर चुकता पूँजी के रूप में है।
  • न्यू डवलपमेंट बैंक का शासन
    • इसका मुख्यालय शंघाई में है तथा साओ पाउलो और भारत के गुजरात में इसके कार्यालय हैं।
    • इसका संचालन बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा किया जाता है, जिसमें प्रत्येक सदस्य देश के वित्त मंत्रालय शामिल होते हैं।
  • चक्रीय अध्यक्षता
    • न्यू डवलपमेंट बैंक में चक्रीय अध्यक्षता की व्यवस्था है, जिसमें कोई एक देश ब्रिक्स का प्रतिनिधित्व करता है।
    • प्रत्येक देश चार उपाध्यक्षों को नामित करने के लिए भी उत्तरदायी होता है।
  • न्यू डवलपमेंट बैंक की सदस्यता
    • प्रारंभ में बैंक की स्थापना ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका द्वारा की गई थी।
    • वर्ष 2021 से 2023 के बीच बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र को सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
    • उरुग्वे और अल्जीरिया वर्तमान में न्यू डवलपमेंट बैंक में शामिल होने की प्रक्रिया में हैं।
    • ब्रिक्स में शामिल होना स्वचालित रूप से न्यू डवलपमेंट बैंक की सदस्यता की गारंटी नहीं देता।
  • आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था: इसकी स्थापना भी वर्ष 2014 में फोर्टालेजा में आयोजित छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में की गई।
    • यह 100 अरब अमेरिकी डॉलर का आपातकालीन आरक्षित कोष है, जिसका उद्देश्य भुगतान संतुलन संकट का सामना कर रहे ब्रिक्स सदस्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
    • यह व्यवस्था पूर्णतः क्रियाशील है और किसी भी सदस्य की पहल पर किसी भी समय उपलब्ध है।
  • ब्रिक्स पे: यह एक प्रस्तावित प्रणाली है, जिसका उद्देश्य स्थानीय मुद्राओं के माध्यम से ब्रिक्स देशों के बीच भुगतान को सुगम बनाना है, जिससे पारंपरिक वैश्विक भुगतान प्रणालियों पर निर्भरता को समाप्त किया जा सके।

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